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18 Jun 2010
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मौज-दर-मौज

मौज-दर-मौज इस वक्त की तल्खीयों का बोझ सबके शानों पर हैऐसे लम्हात में इम्तहाँ से  रोज रू-ब-रू होना पडता हैदरीचे दिल के जो, खोलोगे तो पाओगेछोटे-छोटे रोज़न नहीं इसमें बड़े-बड़े दर हैं यहाँ से तो दर्दों के काफ़िले गुज़र सकते हैं  इस मंज़र की
 
SURINDER RATTI
टैग: नज़्म
Jun 18 2010 02:54 PM
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रूसवाई

रूसवाईबड़े बेरहम होते हैं रूसवाई के रास्ते,वो खोज रहा है अपनी रिहाई के रास्तेएक जोश  था अजीब जुनूँ था उसे परवाज़ का,न जुर्रत कर सका देखे तमाशाई के रास्तेएक मज़बूत क़फ़स में सिमट गया है जिस्म उसका,जौफ में ढून्ढता है वो तवानाई
 
SURINDER RATTI
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जोगी

जोगी राम की अमृत-वाणी रसीली,कर लो पान इसका जोगी रे वो घट-घट वासी सर्वत्र बसे,करो ध्यान उसका जोगी रे बन-बन घूमने से ना मिलेगासबके दिल में बसता जोगी रेजगत के सारे काम हैं झूठे,उसमें क्यों फसता जोगी रे माया के लोभ कारन से ही,रब से विमुखता जोगी रे राम नाम
 
SURINDER RATTI
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बादल

बादल एक निगाह झरोखे को चीरतीनिहारती बड़े  अदब सेदिल ही दिल में पुकारतीतिश्नगी  लबों पे लियेहलक सहलाते-सहलातेफलक़ की तरफ देखा उसनेआफताब अपनी पूरी ताक़त  के साथ तमाज़त बरसा रहा थाज़मीं तो तवे जैसी तप रही थी पांव रखते ही
 
SURINDER RATTI
टैग: नज़्म
Apr 21 2010 10:56 AM
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उतावले शब्द

उतावले शब्द सजल नयनों की भाषा में थी अजीब निराशा निराशा में छुपा था नवीन सपनाअनदेखा दृश्य कुछ कहानियाँ, बातें और मस्तक की सिलवटों के पीछे नेत्र जिनमें  बसा था एक शहर सुनसान उन अधरों पर थे अनगिनत उतावले शब्द जो पड़े रहे, अटके रहे कई
 
SURINDER RATTI
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बदगुमानी

"बदगुमानी"वो शिकार हो गया है बदगुमानी का, वक़्त आया जैसे किसी की क़ुर्बानी का कुछ लोगों की   होती अजीब हरकतें,उम्दा सुबूत   पेश  करते   नादानी का खुद गुमराह हुए हैं या किये गए हैं,एक अनोखा सबब पाया परेशनी का
 
SURINDER RATTI
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साये

साये पहले   साये  चलते थे  अब बोलने  लगे,मेरी  हंसी दुनियाँ में ज़हर घोलने लगेजब रात गहरायी आंखें बंद होने लगी,तो सपनों में डरावने  मंज़र दौड़ने लगेजैसे  कोई तहक़ीकात कर रहा हो मेरी,सारे  गुनाहों 
 
SURINDER RATTI
Mar 07 2010 08:13 PM
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बुरा न मानो होली है

बुरा न मानो होली है ये होली भी क्या होली है चेहरे सब लाचार  से रोनक तो गुम  हो गयी लोग लगें बीमार से  ज़हरीले रंगों से भैयाअंगों को बहुत ख़तरा बेचनेवाले मुनाफा चाहें  न मौत खरीदें बाज़ार से इस होली में
 
SURINDER RATTI
टैग: कविता
Mar 01 2010 12:12 PM
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खता

खता हम गल्तियाँ अक्सर रोज़ ही किया करते हैं,ये भी सच है  के  दोष दूजे को  दिया  करते  हैं ये   फितरत   है,   शरारत  है  या  नादानी  कोई,सबक लेने   की न सोच
 
SURINDER RATTI
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दहर

दहर राह-ए-दहर में   बातों के,  फसानें थे बहोत काली  रातों  में दिल में, अफ़साने  थे  बहोत    मेरी   मौजूदगी  में जो,  कतराते   रहते थे,जाने  के 
 
SURINDER RATTI
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अहवाले बशर

अहवाले बशर ये   नुक्स-ए-आबो-हवा  देखी  ज़माने में,सदियां लग जाती लोगों को समझाने में ये दौर-ए-गर्दिश है, इम्तहां लेता सबका,  हर शख्स   मसरूफ नसीबा चमकाने में  यहां जुर्म को बेरोकटोक रक्स करते देखा,इंसाफ 
 
SURINDER RATTI
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माहताब

माहताब आज  चले  हैं वो फिर,  गुलशन को   मेहकानें,     बहारों का इस्तक़बाल करो, और छेड़ो तरानेहम  उनकी अदाओं   को   देख,  दंग रह गये, क्या नज़ारा  था,
 
SURINDER RATTI
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Jan 20 2010 04:19 PM
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परायाधन

परायाधन - यह एक शब्द अपना अर्थ खुद बता रहा है,लड़कियाँ परायाधन हैं, तो हम शुरू से ही मान कर चलते है,जो चीज़ हमारी है ही नहीं, उस पर समय क्यों बर्बाद करें, आदमी की ये हिंसक प्रवृति, बाहर नहीं मन के भीतर रहती है, और समय-समय पर वह कटोतियाँ करता है, चंद काग़ज़
 
SURINDER RATTI
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Nov 23 2009 10:18 PM
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मेहरबां

मेहरबांअगर मुट्ठी में  है वो   आसमां,कोई न   कहेगा  तुमको  नातवाँ शहंशाह  के  जैसी  होगी  जिंदगी, हर   लम्हा  मस्ती  से  भरा  जवांहर शख्स की जुबां पे
 
SURINDER RATTI
टैग: नज़्म
Nov 14 2009 02:47 PM
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रूठना

रूठना ज़िन्दगी तूने तो फक़त रूठना ही सीखा,मेरे चैन को पल-पल लूटना ही सीखा दिल तो नाज़ुक है शीशे  की तरह से, तल्ख़ ज़ुबां का असर टूटना ही सीखामेरी गुस्ताखीयों को तौले वो तराज़ू में,सवाब के  पलड़े ने न झूकना ही सीखाकाली रात ने डराया नींद
 
SURINDER RATTI
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Oct 03 2009 12:27 PM
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रावण

रावण आज अख़बार में एक ख़बर पढ़ी रावण का कद छोटा हो गया है ।मैं पढ़ कर थोड़ा हैरान हुआमहंगाई ने भले ही रावण का कद छोटा कर दिया हो लेकिन रावणों के ग़लत मंसूबों परपानी फेरना अत्यंत कठिन काम है ।रावण आज भी हमारे हृदय में बसता है ।राम को दिल में रखने की जगह नहीं
 
SURINDER RATTI
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Sep 28 2009 03:18 PM
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बेरंग

बेरंगइस रंगीन दुनियाँ में,ज़िन्दगी बेरंग है,ये कैसा अजूबा है मौला,हर शख्स तंग हैमायुसी है के बस,सर उठाने नहीं देती,क़दम-क़दम पे लड़ाई,हर काम में जंग हैहुस्न और दौलतवालों को,दावत के पैग़ाम मिले,सिमटा दायरा प्यार का,अपनी-अपनी पसंद हैफौलाद की बेड़ियाँ टूट
 
SURINDER RATTI
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Sep 07 2009 05:06 PM
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अच्छा नहीं

अच्छा नहीं मुझे बेवफा न समझो, ये अच्छा नहीं सच तो आयेगा सामने, छुप सकता नहीं मुझे बेवफा न समझो .....माना के हमसे कोई, ख़ता हुई होगी,ज़रा सी चोट से कोई, मर सकता नहीं मुझे बेवफा न समझो .....तुम मेरे हमसफर हो, मेरा भी तो हक़ है,तुमको मैं छेड़ दूँ, तो कुछ घटता
 
SURINDER RATTI
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Sep 07 2009 05:01 PM
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हयात

हयात थोड़ा-थोड़ा जीता हूँ ज़रा-ज़रा मरता हूँ,ग़मों की आग में सुलगता हूँ जलता हूँ ख़ुश्क अरमां हैं दम-खम भी नहीं बचा,बेसाख्ता मिज़ाज न बिगड़े संभलता हूँहयात में तंदखू-ओ-बरहम भी मिले,उलझ न जाऊँ किसी से मैं डरता हूँ ख़ुद-परस्ती का शोर-गुल कानों में पड़ा,कशमकश में
 
SURINDER RATTI
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Sep 06 2009 11:38 PM
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नेक दिल

नेक दिलवो शमां जली के न जली,पर रात ढलीअन्धेरों में सिमटी,यादों की गलीमैंने लाख मनाया उसे,मेरी एक न चलीज़ुबां तल्ख़ तो कभी,मिसरी की डलीजैसी भी है "रत्ती"वो नेकदिल भली
 
SURINDER RATTI
टैग: नज़्म
Aug 19 2009 12:00 PM
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दूरियाँ

दूरियाँ अपनी हथेली पर मेरा नाम लिखा,फिर मिटा दिया बोल मेरे साथी तूने ऐसा,क्यों किया है नफ़रत की दीवार दिल में,गिरा दे उसे सरे ज़माने को बता दे,प्यार के सच्चे किस्सेभले दुनियाँ की दौलत दे दी,प्यार न दिया तो क्या दिया बोल मेरे साथी तूने ऐसा,क्यों किया अपनी
 
SURINDER RATTI
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Jul 27 2009 05:40 PM
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एक सच

एक सच क्षण में जनम हो रहाऔर विलय भी हो रहाआस-निरास पर टिकाये जीवन भी रो रहाआम के बदले तू धरा मेंक्यों बबूल बो रहापीड़ा से भरे मन कोआंसुओं से धो रहाकुंभकरण की भांति मनुष्य है आज भी सो रहाबहुमूल्य सभ्यता,प्रथा,संस्कृति भी खो रहा .....
 
SURINDER RATTI
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Jul 19 2009 08:04 PM
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कब तलक

कब तलक यादों के सहारे बैठे रहेंगे कब तलक,आंखें थक गयी खुले न मेरी पलक मेहरबां तुम्हें याद नहीं अपने वादे,सपनों में ही सही दिखा दो एक झलकएक चान्द को दिल में बसाया था मैंने,वो चान्द जा बैठा बहोत दूर फलकजो जाम आंखों से पिलाये वो थे रसीले,"रत्ती" आज पीला दो
 
SURINDER RATTI
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Jul 19 2009 05:09 PM
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हिंसा

हिंसा वफ़ा-जफ़ा की बातें दोहरायी गयी,नज़रें लाल सुर्ख फिर लड़ायी गयीक़यामत को बुलाने का इरादा है उनका,जिस्मों पे ज़ोर से तलवार लहरायी गयी वो क्या जानें लहू बेशकीमती है,बहा दी नदियाँ साँसें रूकवायी गयी लाशों की सेज पे चले हंस्ते हुए,गली-गली खुशीयाँ मनायी गयी
 
SURINDER RATTI
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Jul 18 2009 06:28 PM
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दिनचर्या

दिनचर्या चिड़ियों की चूँ-चूँ ने आभास कराया, भोर हो गयी है। भास्कर आँगन में आ गया है, अरे आज फिर देर हो गयी जैसे-तैसे स्नान करके तैयार हो जलपान ग्रहण किया और सड़क पर सरपट दौड़ लगायी, बस पकड़नें की। हाँफते-हाँफते जान गले में अटक गयी किसी तरह दफ्तर पहुंचा ।
 
SURINDER RATTI
Jun 04 2009 12:38 PM
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भोला बचपन

भोला बचपन आज़ादी के बाद भी, इन्कलाब न हो सका,हमारे बच्चों के वास्ते, एहतसाब न हो सका मासूम भला क्या जानें, हयात की दुशवारियाँ,कलम, दवात, किताब का, हिसाब न हो सका एक मासूमियत ही, झलकती चेहरे पे,किसी हरे-भरे चमन का, गुलाब न हो सका ज़िन्दगी तीरगी में, क्या
 
SURINDER RATTI
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Jun 04 2009 11:30 AM
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इंतज़ार है

इंतज़ार है चान्दनी ख़ुबसूरत, गले मोतियों का हार हैसज-धज के निकली, नयी-नयी बहार हैचमके माथे की बिंदिया, झूमें कानों के झुमके, चेहरा भी खिला-खिला, सुन्दर सिंगार हैमहक रहा है तन-बदन, नाज़ का निशाँ नहीं,रोम-रोम से बरस रहा, प्यार ही प्यार हैदिल चीज़ है ऐसी,
 
SURINDER RATTI
May 06 2009 02:51 PM
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अधमरा

अधमरामैं वो गुल हूँजो खिला भी और नहीं भी ज़िन्दा भी और नहीं भीजो भी आयानोचनेंवाला, मरोड़नेवाला, दिन-रात ज़हर घोलनेवाला,दरियादिल, नेकदिल इंसान मिला भी और नहीं भीउसनें क़सम खायी सितम ढाने की, मुझे डुबाने की बहुत कोशिशें की, जिंदा लाश बनाने कीख़ुदा का शुक्र है,
 
SURINDER RATTI
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May 05 2009 12:18 PM
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चुनाव

चुनाव भारत के लोकतंत्र का, क्या करूँ बखान,भोली जनता क्या करे, पल्ले पडे़ बेईमान,तुम हो महान नेताजी, तुम हो महान .....मुँह उठाये फिर चले आये,छुटभैये, चमचों से पर्चे बटवाये,रंग-बिरंगे झण्डे फहराये,इक्के-दुक्के काम गिनवाये,मांग रहे हमसे मतदान, भोली जनता
 
SURINDER RATTI
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May 04 2009 03:58 PM
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चराग़

चराग़वो जलते चराग़ बुझाता है,दिन में उजाले को डराता हैअपनी ज़िन्दगी की परवाह नहीं,मेरी सांसें रोज़ चुराता हैगै़रों को दोस्ती के पैग़ाम दिये, क्यूँ मुझ से दूरियाँ बनाता हैशीशा-ए-दिल को खिलौना समझा,हल्की सी चोट से टूट जाता हैकिस मिट्टी का बना है संगदिल,ख़ुद
 
SURINDER RATTI
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Apr 27 2009 11:20 AM
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होली

होलीअब तो मोहन तुम बिन, कुछ नहीं सुहाता,होली ही नहीं कोई, उत्सव नहीं भाता,आतंकी ख़ून की होली, रोज़ ही खेलें,बेगुनाह लोगों की, जां ही ले लें,सरकार मूक होकर, तमाशा देखती है, हत्याओं पर लगाम लगे, ये न सोचती है,बिगड़ा रईस अबला के साथ, होली मनाता है,गंगा मैली
 
SURINDER RATTI
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Mar 11 2009 01:14 PM
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परिचित

परिचित एक ढून्ढो हज़ार मिलते हैं,दिल तोड़नें वाले सब यार मिलते हैं,जानें क्या सुकून मिलता है उनको,बड़े नसीब से वफादार मिलते हैं,हमारा बोलना, हंसना, कुछ भी गवारा नहीं,जानें किस मकसद से, मेरे पीछे चलते हैं,बैर ही बसता है बस उनके दिलों मेंमोहबत के अफसानें
 
SURINDER RATTI
Feb 25 2009 01:55 PM
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आओ न

आओ नआना है तो आओ न,यूँ दिल को जलाओ न छोटी किसी बात पर,यूँ दिल को तड़पाओ न हसरतों के तुफाँ में,अकेला ये मुसाफिर तन्हाई की आग़ोश में,गुम हुआ आज फिर क्या है दिल में साथी,हमें कुछ बताओ न छोटी किसी बात पर,यूँ दिल को तड़पाओ नतेरी ख़ामोशियां जैसे,रूठी हो बहार भी लब
 
SURINDER RATTI
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Jan 28 2009 03:40 PM
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शहीद

शहीद शहीदों आपको कोटि-कोटि प्रणाम, देश पे न्योछावर किए अपने प्राण यूँ कोई किसी को फूटी कोडी न दे,सब कुछ लुटा दिया तुम हो महान सारे क़र्ज़ चुका देंगे हम किसी तरह,आपके क़र्ज़ तले रहेगा हिदोस्तान दुनिया की कोई दौलत या दवा भी,जिंदा न कर पायेगी जो गुज़रा
 
SURINDER RATTI
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