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28 Jan 2010
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ब्लॉग के बारे में -

इस ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य यह है कि श्रीमाली समाज की प्रतिभाओं को एक ऐसा मंच प्रदान करना जिस पर वह अपने कौशल(प्रतिभा) के द्वारा अन्य लोगो के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सके। इस ब्लॉग को नियमित अपडेट किया जाएगा जिसके कारण वर्तमान के वैश्विक युग में जहां कहीं
 
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श्रीमाली ब्राह्मणों का उद्भव-

श्रीमाली ब्राह्मणों के इतिहास की जानकारी का सर्वोत्तम उपलब्ध प्रमाण श्रीमालपुराण है जिसे श्रीमाल माहात्म्य भी कहते हैं, इसके लेखक के अनुसार यह स्कन्ध पुराण का ही एक भाग है। श्रीमाल पुराण विक्रम की तेरहवीं सदी के पूर्वाद्ध की रचना प्रतीत होती है। यह
 
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श्रीमाली ब्राह्मणों के गोत्र-

श्रीमालियों के 14 गोत्र व 4 आमनम तथा 84 अंवटक है। आमनाय पहले तो दो ही थी - एक मारवाड़ी व दूसरी मेवाड़ी परन्तु बाद में दो आमनाय और जुड़ गई। इनमें एक रिख तथा दूसरी लटकन थी। श्रीमाली जाति में चौदह गोत्र पाये जाते हैं जिनमें सात को यजुर्वेदी तथा बाकी के सात को
 
Shrimali Samaj
Jan 22 2010 12:10 PM
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उपनयन संस्कार -

श्रीमाली ब्राह्मणों का उपनयन संस्कार (जनेऊ डालना) एक महत्वपूर्ण संस्कार है। इसलिए जब लड़का 8 वर्ष का हो जाता है उपनयन धारण करवाया जाता है। उपनयन संस्कार हेतु शुभ मुहुर्त निकाला जाता है तथा मुहुर्त के दिन लड़के को दुल्हा बनाकर स्नान करवाकर होम करते हैं।
 
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Jan 22 2010 12:09 PM