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29 Apr 2010
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सांप्रदायिकता फासीवाद का स्त्री प्रत्युत्तर -1-

       आधुनिककाल के औपनिवेशिक भारत में सबसे ज्यादा राजनीतिक तौर पर संवेदनशील मुद्दा फासीवाद और सांप्रदायिकता ही रहा है। आज भी इसका राजनीतिक तौर पर विकृत रूप अलग-अलग शक्लों में दिखाई दे रहा है। फासीवादी ताकतों ने सारे विश्व में
 
sudha singh
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भारत के बाल रंगमंच की महान रंगकर्मी रेखा जैन नहीं रहीं

(प्रसिद्ध रंगकर्मी स्व.रेखा जैनः 18सितम्बर 1923-22 अप्रैल 2010)            हिन्दी रंगमंच की प्रसिद्ध हस्ती रेखा जैन का कल निधन हो गया। वे 84 साल की थीं। रेखा जैन के निधन से भारत के बाल रंगमंच के एक युग का अंत हो
 
sudha singh
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भाषा में वर्चस्व निर्माण की प्रक्रिया

अमूमन भाषा का वर्ग या भाषा का स्त्रीबोध या स्त्री-भाषा जैसे पद-बंध सुनते ही ऐसा मालूम पड़ता है कि भाषा के प्रचलित विमर्श के स्थिर जल में कंकड़ फेंक दिया हो। भाषा में वर्ग और स्त्री बोध या स्त्री-भाषा जैसे विभाजन क्यों। भाषा तो बहता नीर है ,अनंत है,
 
sudha singh
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भाषा में वर्गहीनता और लिंगविहीनता का छद्म

भाषा का प्रयोग और भाषिक संकल्पनाएं वर्गाधारित रही हैं। भाषा को लेकर जितनी भी धारणाएं है उन सबमें एक आम राय है कि भाषा निरपेक्ष नहीं होती। बोलना कभी भी निरपेक्ष नहीं रहा है। भाषिक व्यवहार उदासीनता का व्यवहार नहीं हुआ करता न ही भाषा केवल सम्प्रेषण का
 
sudha singh
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खिलाड़ी,बहू और मीडिया

                सानिया स्टार टेनिस खिलाड़ी हैं। अपनी रैंकिंग में उतार-चढ़ाव के बावजूद सानिया मीडिया का पसंदीदा चेहरा रही हैं। सफल और स्टार खिलाड़ी के पीछे लगकर मीडिया उनकी छवि को अपने हक़ में भुनाता है।
 
sudha singh
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मुहब्बतवाली शादी

सानिया मिर्जा शोएब अख्त़र से शादी करेंगी। यह खबर है पर इसने एक साथ ही  कई मसलों को जन्म दे दिया है। पड़ोसी देश के साथ अंतर्राष्ट्रीय संबंध के मुद्दे के साथ-साथ सानिया और शोएब के पिछली जिंदगी को खंगालने का काम शुरू हो चुका है। सानिया को सलाह और
 
sudha singh
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शिक्षा का उद्देश्य सफल होना है या मनुष्य बनना

  विद्या विनय देती है। यह संस्कृत साहित्य की पुरानी उक्ति है। विनयी होने का क्या अर्थ है ? गुरूदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की स्वप्नसंस्था 'विश्वभारती' में 'डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन' के लिए नाम दिया गया 'विनय भवन'। यहाँ स्नातक स्तर के बाद सभी अनुशासनों
 
sudha singh
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माध्यम और सामाजिक सरोकार - पीटर गोल्डिंग

      तकनीकी क्षेत्र में तेजी से आ रहे परिवर्तनों ने परंपरित जीवनशैली पर इनके प्रभावों को लेकर काफी आलोचना और आशंका पैदा की। कोई आश्चर्य नहीं कि सर्वाधिक नए माध्यम को भी उसी भर्त्सनामूलक आलोचना के नजरिए से देखा गया। टेलीविजन के एक
 
sudha singh
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पत्रकारिता में पेशेवर रवैया पत्रकारिता के लिए आवश्यक है।

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sudha singh
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स्त्री का स्व और आत्मकथा के मानक

               'स्व' या 'सेल्फ' पुंसवादी समीक्षा में आत्मकथा लेखन का बुनियादी आधार है वह कहीं होता नहीं है बनाया जाता है। अर्जित किया जाता है। यह स्वाभाविक नहीं है। स्वाभाविक 'स्व' वह है जो अंतर्भुक्त है।
 
sudha singh
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जायज मांग है महिला आरक्षण में आरक्षण

        स्त्री आरक्षण का मुद्दा समाज में स्त्री की अलग पहचान का मुद्दा है। स्त्री के साथ समाज का विषम संबंध ,उसका शोषण और दमन ,राजनीतिक सामाजिक पिछड़ापन आदि तर्कों के पीछे सर्वोपरि तर्क है स्त्री की भिन्नता का तर्क। स्त्री
 
sudha singh
Mar 08 2010 07:21 AM
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बाल ठाकरे के वर्चस्व की विदाई का शोकगीत

                            आखिरकार शाहरूख की फिल्म 'माई नेम इज़ खान' रिलीज हो ही गई। देश के अन्य हिस्सों की तरह मुंबई में भी यह हाउसफुल गई। हर तरफ फिल्म का स्वागत किया गया।
 
sudha singh
Feb 13 2010 07:34 PM
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शाहरूख एक्टिविस्ट नहीं हैं राजदीप सरदेसाई

         हिन्दी फिल्मों के बादशाह शाहरूख खान की नई फिल्म 'माई नेम इज़ खान' 12 फरवरी को प्रदर्शित होने जा रही है। शाहरूख का कसूर है कि उन्होंने अपने पड़ोसी देश के साथ सौहार्द्रपूर्ण संबंध की बात कही है। उन पर आरोप है कि वे
 
sudha singh
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मैं अब अपने लिए

  बहिनीबाई चौधरी (1880-1905) महाराष्ट्र के जलगाँव जिले की कपास की खेती करनेवाली किसान स्त्री थी। बहिनीबाई की कविताएँ मूलतः किसानी के श्रम के दौरान लिखी गई कविताएँ हैं। भारत के अन्य हिस्सों में स्त्रियों की रचनात्मकता उनके जीवन के कार्यव्यापार
 
sudha singh
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फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह का आज आखिरी दिन- मध्यपूर्व के बारे में मीडिया में इस्राइली मिथ- जगदीश्वर चतुर्वेदी

(इस्राइल हमले के प्रतिवाद में बनायी फिलीस्तीनी चित्रकार की पेंटिंग)                                                  
 
sudha singh
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छब्बीस जनवरी

                            बीस साल
 
sudha singh
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फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह- वैस्ट बैंक और गाजापट्टी में इस्राइली बर्बरता

     इस्राइल ने गाजापट्टी और वेस्टबैंक के बीच स्वघोषित सीमा निर्धारण और अवैध कब्जा कर रखा है। यह अंतर्राष्ट्रीय सीमारेखा नहीं है पर इसे पार करने के लिए बाकायदा पासपोर्ट और वीजा की जाँच इस्राइली ऑफिसरों द्वारा की जाती है। अक्टूबर
 
sudha singh
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फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह- फिलीस्तीनियों की अतुलनीय कुर्बानी और मानवता - जगदीश्वर चतुर्वेदी

(गाजा में हैती की आपदाग्रस्त जनता के लिए सहायता सामग्री एकत्रित करते फिलीस्तीनी लोग
 
sudha singh
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फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह - गाजापट्टी की नाकेबंदी और जनता की तबाही- जगदीश्वर चतुर्वेदी

  गाजा की इस्राइल द्वारा नाकेबंदी जारी है। हजारों लोग खुले आकाश के नीचे कड़कड़ाती ठंड में ठिठुर रहे हैं , इन लोंगों के पास न तो कम्बल हैं, न टैंट हैं, न खाना है, न पीने का साफ पानी है। यह बातें संयुक्तराष्ट्र संघ मानवीय सहायता दल के संयोजक
 
sudha singh
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फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह- युद्धपंथी हैं अमेरिका और इस्राइल - जगदीश्वर चतुर्वेदी

  अमरीकी साम्राज्यवाद के लिए शांति बेकार की चीज है। शांति बोगस है। खोखली है। शांति का जाप करना बेकार है। शांति वार्ताएं व्यर्थ हैं। कब्जा सच्चा शांति झूठी। इस्राइल-अमरीकी विदेशनीति सारी दुनिया को एक ही संदेश संप्रेषित कर रही है शांति बेकार है।
 
sudha singh
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जिंदगी के विस्तार का लेखन है स्त्री आत्मकथा

   लेखन का एक बड़ा सरोकार है कि वह जिंदगियों को बचाता है। जीवन के प्रति आशा का संचार करता है। स्त्री लेखन की खूबी है कि यह न केवल आशा का संचार करता है बल्कि जीवन का अनुसरण करते हुए जीवन का विस्तार भी करता है। विशेष तौर पर स्त्री आत्मकथा की खूबी
 
sudha singh
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स्त्री आत्मकथा में इतना पुरूष क्यों ?

पुरुष आत्मकथा के शीर्षक को लें। शीर्षक से ही इतिहास में अपनी अवस्थिति, परंपरा से जुड़ाव, ऐसे अतीत के निर्माण में हिस्सेदारी जिसका वर्तमान के संदर्भ में आकलन किया जा सके, के निर्माण का दंभ छिपा होता है। उदाहरण के लिए 'अपनी धरती अपने लोग', 'सत्य के साथ
 
sudha singh
Jan 03 2010 10:42 AM
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ज्ञानविमुख हिन्दी का बुद्धिजीवी

                   मार्शल मैकलुहान ने लिखा है कि आधुनिक युग में पुस्तकें यश और अमरत्व प्राप्त करने का जरिया हैं। ऐसा उन्होंने पुस्तक की ताक़त को देखते हुए लिखा था। लेकिन आधुनिक पल्लवग्राही बुद्धीजीवी
 
sudha singh
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राससुन्दरी दासी के बहाने स्त्री आत्मकथा पर चर्चा

राससुन्दरी दासी की आत्मकथा 'आमार जीबोन' नाम से सन् 1876 में पहली बार छपकर आई। जब वे उनसठ बरस की थीं तो इसका पहला भाग लिखा था। 88 वर्ष की उम्र में राससुन्दरी देवी ने इसका दूसरा भाग लिखा। जिस समय राससुन्दरी देवी यह कथा लिख रही थीं, वह समय 88 वर्ष की बूढ़ी
 
sudha singh
Dec 28 2009 02:06 PM
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हिन्दी के भाषाविद् स्त्रीभाषा कब पढाएँगे ?

                    हिन्दी के भाषाविद् स्त्रीभाषा कब पढाएँगे ?   आज सारे भारत में उच्च शिक्षा के स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली लागू करने की कवायद चल
 
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मुसलमान विरोधी ग्लोबल मीडिया -1-

फिलिस्तीन के साथ भूमंडलीय माध्यमों का रिश्ता बेहद जटिल एवं शत्रुतापूर्ण रहा है।कुछ महत्वपूर्ण तथ्य हैं जिन पर ध्यान देने से शायद बात ज्यादा सफ़ाई से समझ में आ सकती है।ये तथ्य इजरायली माध्यम शोर्धकत्ताओं ने नबम्वर 2000 में प्रकाशित किए थे। शोर्धकत्ताओं ने
 
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भाषा में स्त्री के अनुभव

                   एन्द्रीने रीच ने लिखा है ''स्त्री संघर्ष का समस्त इतिहास सदियों से चुप्पी में डूबा हुआ है। किसी भी स्त्रीवादी लेखिका के लिए सबसे बड़ी सांकृतिक बाधा यह आती है कि प्रत्येक
 
sudha singh
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सीरियल में मातहत भाव

सीरियल, अखबार, विज्ञापन आदि संस्कार विकसित करते हैं। देखना चाहिए कि इनके द्वारा किन चीजों को वैधता प्रदान की जा रही है ? स्त्री की कुटिलता, दुष्टता या चालाकी महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण है उसका मातहत भाव। उसका समर्पणकारी भाव। इन दो चीजों के अंतर्गत
 
sudha singh
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यक्षिणी प्रश्न

      आज स्त्री विमर्श सबसे ज्वलंत मुद्दा है। यह एक तरह से समाज में अब तक परिभाषित स्त्री की भूमिका को बदलने वाला विमर्श भी है।दी गई परिस्थितियों से नकार है। अब तक होता यह आया था कि स्त्री को 'नकार' 'के रूप में चित्रित
 
sudha singh
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लोकप्रिय हिन्दी सीरियल कितने परिवर्तनकामी ?

टेलीविजन पर दिखाए जानेवाले कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा समाचार देखा जाता है या फिर टेलीविजन धारावाहिक। ये दोनों टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय विधारूप हैं। सबसे ज्यादा दर्शक संख्या को खींचने की ताकत इनमें है। धारावाहिक में एक कहानी चलती है जो अनंतरूपा होती है।
 
sudha singh
Dec 04 2009 08:07 PM
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कैथरीन विलियम्स की एक कविता

जितना मुझे याद है उससे ज्यादा भूल चुकी हूँएक बिखरे अतीत कीअनजान कहानियों में खुद को खोजती हुई।विस्थापन,ताकत के दुरुपयोग और सरोकारविहीनता केधुंधलके में खोई जिंदगी के बीचपैंतालीस वर्ष बाद,फिर मैं जीवित हुई-अंधकार से निकल रोशनी के लिए(प्रस्तुति -सुधा सिंह)
 
sudha singh
Nov 29 2009 04:39 PM
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मजदूरबोध का महान कवि‍ मुक्‍ति‍बोध - वि‍श्‍वनाथ त्रि‍पाठी

           सबसे पहली बात यह कि‍ मुक्‍ति‍बोध अखण्‍ड भाकपा के सदस्‍य थे। शमशेरबहादुर सिंह ने 'चॉंद मुँह टेढ़ा है' की जो भूमि‍का लि‍खी है उसमें मजदूरों लि‍ख है की मजदूरों के जुलूसों में भाग लेते थे, जुलूस पर जो पुलि‍स के
 
sudha singh
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सभ्यता समीक्षा के बड़े आलोचक हैं मुक्‍ति‍बोध- सुधीश पचौरी

सभ्यता समीक्षा के बड़े आलोचक हैं मुक्‍ति‍बोध सुधीश पचौरी मुक्‍ति‍बोध की चि‍न्‍ता के केन्‍द्रीय वि‍षय हैं प्रेम और सौंदर्य। बुनि‍यादी प्रश्‍न मुक्‍ति‍बोध की कवि‍ता में ही आ गया है 'समस्‍या एक - मेरे सभ्‍य नगरों और ग्रामों में सभी मानव सुखी सुंदर व
 
sudha singh