एक नई शुरुआत's Image

एक नई शुरुआत

http://eknaisuruaat.blogspot.com
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
10 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
23
पाठक भेजे
216
पसंद
0
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
09.39
पसंद करें
0
नापसंद करें

विकास

विकासअब भी बचे हैं दिए जगमगाते हैं झोंपड़ीनुमा घरों मेंपरों को मोड़कर सीने से लगाए सो रहे बच्चे अक्सर जाग जाते हैं पास से गुजरती रेलगाड़ी की आवाज़ सुनकरदिन भर भी घर्र  घर्रर धरर धरर ....झूँ ..झप... की आवाज़पास के हाईवे
टैग: कविता
Jun 10 2010 09:47 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

gazal

आज हमारे बीच ये हालात कैसे हैंसमझना ही ना चाहो सवालात कैसे हैंआईने  में तुम ही हो तुम में आईना भी है बहार निकल आने के खयालात कैसे हैंहो गयी है जिंदगी चीजों के ऊंचे दाम सी बचे हुए अब अपने दिन रात कैसे हैंचहरे की झुलसी खाल में धंसी हुई
टैग: ग़ज़ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

ग़ज़ल अपनी अपनी

चल चल के पड़े हैं आन्टन फांसो ने पैर फोड़ा है घिसी हुई है चप्पल पर कब चलना छोड़ा हैहो गया है तन भी भट्ठे की नीली इंट सा रखे हाथ पेट पर कब लू में जलना छोड़ा है अब भी बगल में रेडियो बजता है पांथ में सर पर चढ़ते सूरज ने कब ढलना छोड़ा
टैग: ग़ज़ल
पसंद करें
3
नापसंद करें

दरी

गुड्डी हर रोज काम से निबट बिछा लेती है अड्डा बुनती है दरी ठोंकती है पंजे से कतरनों को ताने में पिरोती हुईउसे लगता है उसे भी बनाया है ठोंककर दरी की तरह ही पूरी होने पर अड्डा तो छुट जाता है पर ताना
टैग: कविता
पसंद करें
3
नापसंद करें

कुतिया का भोंकना

कुतिया का भोंकना - 1आज फिर से एक बस्ती जला दी गयीसैंकड़ों  खदेड़ दिए गए अपने घरों से सब कुछमौजूदगी में हुआ सेवा सुरक्षा सहयोग का दावा करने वालों के वे कहते हैंबात मामूली सी थी कुतिया भोंकी  थीसब उसी को
टैग: कविता
पसंद करें
0
नापसंद करें

मनोज बबली को समर्पित

आदम ओ होव्वा की औलाद हैं जबवंस ए पैदाईश के पैमाने क्या हैं बहते दरिया में मिली जोशे जुनू की लाश नाम ए इज्जत हालाक के मायने क्या हैं दोजख हुआ नसीब जो काफिरे इश्क को देखें हुजूम ए कौम के तराने क्या हैंबस बे ख्याले इश्क ही लेते नहीं
टैग: ग़ज़ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

ग़ज़ल

कैसे कहूं की कशमकश में परेशां है आदमी महफ़िल ए दौरां की अब वजह बची कँहा उठ रही है बास  हर तरफ ज़र्द शिगुफों की सोचे जहन में ताजगी की मीठी सुगंध कँहा हो रहे हैं तार तार रिश्ते हर घड़ी  इंसानी रिश्तों सी अब आबो हवा
टैग: ग़ज़ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

पंचाती

हाम सीधे मूंह थारे तै नी कह सकदे के आपनी ज़मीन बेच खोच कै भाजोइसपे  हाम  कब्ज़ा करना चाहवां  सां अक हामानै  फलाने रोलै की रडक क्युकरे काढणी सैअक थाम हामनै फूटी आँख नि सुहान्दे पाछे सी जिस छोरे की बरात मेंहामनै ले गे थे उस
टैग: कविता
पसंद करें
1
नापसंद करें

इतने दिन में कँहा था

इन दिनों ब्लॉग पर कुछ लिख नहीं पाया लेकिन पढ़ा जरुर है उसी की चर्चा आप से कर लेता हूँ अभी दो नाटक और एक उपन्यास एक काव्य संग्रह पढ़ा है सभी की मिलीजुली बात करना चाहता हूँ उपन्यास पढ़ा गोर्की का मेरे विश्विद्यालय जिसमे मुझे ख़ास बात यह लगी जो की गोर्की के
पसंद करें
0
नापसंद करें

हरियाणवी सांग और नाटक

हरियाणवी सांग और नाटक सुनने में थोडा  अजीब लग सकता है लेकिन यह भी सही है की दोनों  ही रंगमंच की विधा हैं एक लोक नाट्य शैल्ली है एक सीधे तोर पर मंचीय और नुक्कड़ रंगमंच से जुडी है लेकिन यदि सांग और नाटक की के अन्दर की कुछ बातों का जिक्र हम करें तो
Feb 13 2010 11:22 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

हरियाणवी संगीत की बात

हरियाणा और हरियाणा की संस्कृति उसमे भी हरियाणवीसंगीत की बात की जाये तो आज जन्हा भी देखो उसकी तूती बोल रही है वर्तमान फिल्मों में हरियाणवी पात्र हरयाणवी संवाद यंहा तक हरियाणवी धुनें भी खासी पर्योग में लायी जा रही हैं फिल्म ओये लक्की ओये  में तू राजा
Feb 12 2010 10:28 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

जुल्मतों के दौर में

कमजोरियांतुम्हारी कोई नहीं थीमेरी थी एकमैं करता था प्यार .बर्तोत्ल्ट ब्रेख्त  की यह कविता मानवता को पसंद करने वालों को प्यार करने वालो को बहुत पसंद होगी एक तरफ जन्हा प्यार पर हर फिल्म हित सुपरहिट हो रही है प्यार करने वालो पर किस्से लोकनाट्य के रूप
Feb 06 2010 06:43 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस के अवसर पर बहार निकलने का मौका मलिया सब कुछ सूना सूना सा नज़र आ रहा था सडकें सुनी गलियां सुनी हर तरफ पुलिस की रेकॉर्डेड चेतावनियाँ sunaaei  दे रही थी मेरे उठाने से पहले ही राष्ट्रपति  का भाषण एवं परेड सब कुछ ख़त्म हो चुका था
पसंद करें
0
नापसंद करें

मुश्किलें

मुश्किलें हर तरफ हैं मुश्किलें पहाड़ सी छाती पे रखा है पत्थर बहुत भारी उजाला नहीं आता नज़र मेरे भीतर की खोह में झाँक नहीं पाया मैं  वह अँधेरी रहस्यमयी गुफा सी लगती हैआदि और अंत भी होता है गुफा की तरह
Jan 26 2010 01:57 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

एक नई शुरुआत

कभी कभी कुछ चित्र एसे बने बानाए  होते हैं जिन पर जो भी कल्पना हम करें वही सार्थक सी लगती जिन्हें हम गौर से देखने लगते हैं चलते चलते अचानक जब मैं रुका तो देखा कुछ है इस समय जब मैं रात को इस भव्य श्री क्रिशन और अर्जुन के रथ पर रौशनी को पड़ते देखता हूँ
Dec 18 2009 08:29 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

दुर्गा पूजा और वे

दुर्गा पूजा का एक दृश्य में यमुना के किनारे ली गई एक तस्वीर
Dec 15 2009 09:54 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

आदमी आदमी से मिलता है

आदमी आदमी से मिलता है , जाने कौन क्या निकलता है .माथे की सिलवट पढ़ भी ले नयनों की भाषा समझ भी ले जो बात हों चहरे वालीउसका भला कोई क्या करले जो गिरगिट से रंग बदलता हैभाव की कीमत जाने कौन अपना पराया माने कौनकहते हैं दिल तो पागल
Dec 15 2009 08:57 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

HARYANVI POEM KHAAP KA KHOP

Normal 0 false false false EN-US X-NONE X-NONE MicrosoftInternetExplorer4 /* Style Definitions */ table.MsoNormalTable {mso-style-name:"Table Normal"; mso-tstyle-rowband-size:0; mso-tstyle-colband-size:0; mso-style-noshow:yes; mso-style-priority:99;
Dec 14 2009 04:26 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

rajniti me na ho khot , ho apna neta apna vote

jktuhfr esa u gks [kksV viuk usrk viuk oksV pqukoh ekgkSy ds dkj.k okrkoj.k dqN xeZ gksrk tk jgk gS A ftUgksus fiNys pkj lky ls “kDy ugha fn[kkbZ os vkt xyh xyh Hkksaiw fy, ?kwe jgs gSaA gj ckj dh rjg yksxks dks csodwQ cukus ds fy, A usrk yksxksa ds chp
Apr 12 2009 04:08 AM