देवराज"सनालैबाक" (स्वर्ण-भूमि) के नाम से विश्व भर में विख्यात मणिपुर भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित राज्य है । बाईस हज़ार तीन सौ छप्पन वर्ग कि०मी० क्षेत्रफ़ल वाला यह राज्य संस्कृति , समाज और प्रकृति-वैभव की दृष्टि से अपने प्राचीन
देवराजसना लैबाक (स्वर्ण भूमि) के नाम से विख्यात मणिपुर भारत की पूर्वोत्तरी सीमा पर स्थित स्वर्गोपम प्रकृति-सौन्दर्य से भरापूरा राज्य है। बाईस हजार तीन सौ छप्पन वर्ग किमी0 क्षेत्रफल वाले इस प्रदेश का नब्बे प्रतिशत भाग पर्वतीय है। इसकी सीमाएँ
देवराज:18वीं शताब्दी में वैष्णव- पदावली (ब्रजबुलि- पदों के नाम से) मणिपुर के मंदिरों में गाई जाने लगी थी. इसे चैतन्य महाप्रभु के शिष्य वैष्णव धर्म के सन्देश के साथ लेकर मणिपुर पहुंचे थे. इन भक्तों की चार विशेषताएं थीं. एक- राधा-कृष्ण की सरस व मोहक लीलाओं
ज्योति बसु के लिए - २ एक पेड़ का बयानफूल से होते हुए फल के पेट में पहुंचापकता रहा वहीँमुद्दत तकएक दो- पहरपेड़ का बयानटपक करधूल में जा गिराआँखों में एक समझदार चमक लिएबड़ी - बड़ी सफ़ेद और पीली कीलों की नोकों
''प्रकाश की तरंगेंछोड़तीं पदचिह्नसमय के खेत तकपहुँचा सकते हैं वे हमेंलेकिनचलना तो हमें ही होगाकिसान की तरहसधे कदमों सेअपने खेत की मिट्टी कीपुकार सुनते हीक्या तैयार हैं हम ?''