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साहित्य सर्जक
मित्रों यह गजल नही है जैसा मैंने पहली पोस्ट में कहा है यह "नव गीतिका "है पावस ऋतू प्रारम्भ हो रही है इस लिए बदल बूँदें बरसात व फुहार से ही इस का साधारणीकरण होता है ये तत्व ही सहृदयी को पावस का अहसास कराते हैं इसी पर यह नव गीतिका है ध्यान से निकला करो
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Jun 13 2010 09:06 AM


Shuffle








