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साहित्य सर्जक

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12 Jun 2010
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साहित्य सर्जक

मित्रों यह गजल नही है जैसा मैंने पहली पोस्ट में कहा है यह "नव गीतिका "है पावस ऋतू प्रारम्भ हो रही है इस लिए बदल बूँदें बरसात व फुहार से ही इस का साधारणीकरण होता है ये तत्व ही सहृदयी को पावस का अहसास कराते हैं इसी पर यह नव गीतिका है ध्यान से निकला करो
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साहित्य सर्जक

क्या अब भी नही सोचोगे देश की वर्तमान व्यवस्था का सब से काला अध्याय देश के सामने उजागर हो चुका है किइकस तरह देश को राज नेता द्वारा बंधक बनाया जा सकता है कानून को किस तरह हाथ में लिया जा सकता है देश को चलाने वाले आई ए एस अधिकारी किस तरह मंत्रियों के आधीन
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साहित्य सर्जक

मित्रों ! जिसे हिंदी गजल कहा जा रहा है वास्तव में तो वह हिंदी की गीति परम्परा से आई गीतिका है इस का यह नाम भी कुछ दिन चला पर बिना उर्दू की बहर के ज्ञान के गजल लिखने वाले इसे गजल ही कहते रहे उन से प्रश्न है किजैसेहिंदी में दोहा लिखने के लिए १३-११कि यति
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साहित्य सर्जक

हम बज क्यों नही आते आज पर्यावरण दिवस मना रहे हैं :-पर अपनी एक भी आदत में सुधर को तैयार नही है जैसे १ क्या हम अपना ए.सी. कितना समय बंद रखेंगे २क्या हम बाजार अपना थैला या बैग ले कर जाते है ३क्या हम पौलिथिन के लिए दुकानदार को मना करते है 4क्या हम किसी वृक्ष
Jun 05 2010 06:40 PM
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वामपंथियों की वास्तविकता वामपंथियों ने देहली में मुसलमानों के लिए इसराइल के विरुद्ध मोर्चा निकला है यही है इन की वास्विकता छद्म धर्मनिरपेक्षता क्योकि वेद्शों में हो रहे बरसात की तो इन्हें चिंता है वहाँ दो बूँद क्या गिरे इन के छाते खुलने में देर नही लगते
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पत्रकारिता दिवस पर मेरे प्रश्न मैं अपने पत्रकार बन्धुओं को आज पत्रकारिता दिवस पर हार्दिक बधाई देता हूँ इस अवसर पर मैं यह भी पूछना चाहत हूँ कि क्या पत्रकारिता आज राष्ट्रिय मुद्दों पर इमंदारना ढंग से पुन लेत सकती है जो बन्धु मानवाधिकारों के नाम पर
May 30 2010 09:58 AM
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साहित्य सर्जक

दिल्ली ब्लोगर मीत के निहितार्थ भाई अवनाश जी सहृदयता न शेष सभी बन्धुओं का प्यार एक अद्भुत अनुभव रहा भाई एम् वर्मा जी व सुलभ जायसवाल पहलीबार मिलने पर भी लगा किवर्षों कि प्रगाढ़ता से हम मिल रहे हैं सब से बड़ी बात तो यह रही कि कहीं कोई मत भेद मत भेद के लिए
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prdhan mntri ji ki press comfrens

माननीय प्रधान मंत्री जी कीप्रेस कम्फ्रेंस में महमारे जागरूक प्त्र्कोरों ने देश के व्यवस्था के विषय में बहुत से प्रश्न किये पनतु बड़े खेद का विषय है इन सब प्रश्नों के उपर भरी रहा एक ही प्रश्न की kya राहुल गाँधी प्रधान मंत्री बनेगेइस एक ही प्रश्न ने सारी
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ग्रीष्म ऋतू की त्रिपदी

त्रि-पदी हिंदी के लिए नया छंद है मैंने नेट पर पहले सर्दी कि त्रिप्दियाँ प्रकाशित कि थीं जिन का मित्रों ने भरपूर स्वागत किया था व आशीर्वाद दिया था इसी कड़ी में ग्रीष्म ऋतू पर कुछ त्रिपदी प्रस्तुत है ग्रीष्म ऋतू की त्रिपदी क्यों इतना जलते हो थोडा तो जरा
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साहित्यिक रपोर्ट

साहित्यिक व सांकृतिक संस्था "हम कलम "कि मासिक गोष्ठी गुडगाव में आयोजित हुई गोष्ठी की अध्यक्षता की जाने माने साहित्यकार शेरजंग गर्ग ने गोष्ठी के प्रथम स्तर में कहानी के विकास पर सार गर्भित चर्चा हुई तथा एक कहानी पढ़ी गई तथा कपूरथला से पधारीं आभा
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देश की वर्तमान दुखद स्थिति पर दो मुक्तक नैतिकता अब कहाँ खो गई देश का कैसा हाल हुआ देश को गिरवी रख कर के भी उन को नही मलाल हुआ आखिर लाज सुरक्षित कैसे भारत की रह पाएगी जिम्मेदार कौन इस का है देश का जो ये हाल हुआ बाहर गला फाड़ चिल्लाते संसद में शरणागत हैं
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जन का तन्त्र पित रहा नित दिन आई पी एल की विकटों पर अरबों खरबों का किस्सा है आई पी एल की विकटों पर राजनीति का खेल नया ये भैया खूब निराला है खूब लुटी जनता बेचारी आई पी एल कि विकटों पर
Apr 19 2010 07:47 PM
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दांते वाडामें शहीद हुए जवानो के प्रति इस के बाद बचा ही क्या है और अधिक कुछ कहने को बंधुआ हैं जवान बेचारे गोली कहा कर मरने को क्यों कि तो लौह भवन में चैन की वंशी बजा रहे क्योंसंकल्प नही करते हो माओ वाद से लड़ने को सत्ता सोच रही है कितनी और बलि चाहिए उस को
Apr 10 2010 07:54 PM
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'ज़िंदा ज़ख्म' की नायिका का मूर्त रूप हैं- फ़िरदौस ख़ान

'ज़िंदा ज़ख्म' की नायिका का मूर्त रूप हैं- फ़िरदौस ख़ान सच वास्तव में यदि सच हो तो वह इस मायावी जगत में जितना सुनना कड़वा होता है उतना उसे कहना या व्यक्त करना होता है. सच को कहने के लिए पहाड़ जैसा साहस चाहिए, समुद्र जैसी गंभीरता व गहनता चाहिए, नदियों
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'ज़िंदा ज़ख्म' की नायिका का मूर्त रूप हैं- फ़िरदौस ख़ान सच वास्तव में यदि सच हो तो वह इस मायावी जगत में जितना सुनना कड़वा होता है उतना उसे कहना या व्यक्त करना होता है. सच को कहने के लिए पहाड़ जैसा साहस चाहिए, समुद्र जैसी गंभीरता व गहनता चाहिए, नदियों
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फ़ोन विहीन नेता जी नेता जी चिंतन कर रहे थे देश कीसमस्याओं में उलझ रहे थे उन में गहराईसे डूब रहे थे इसी गहराई में चिन्तन करते करते देश का बहुत उद्धार कर दिया दुनिया भर का निर्माण कर दिया ऊँची २ इमारतें बना दी बड़े २ बांध बना दिए नदियों पर पुल बना दिए ऐसा
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आओ सरकार-सरकार खेलें

एक दिन घोषणायानि मुनादी हो गई कि सभी लोगों को सूचित किया जाता है कि सरकार सरकार खेलने की प्रतियोगिता आयोजित की जायेगी सभी लोग ध्यान से सुन लो क्यों कि जो भी इस में हिस्सा वे हे खेल के बाद फल और फलियों के सिन्नियों व रेवड़ियों को प्राप्त करने के हकदार
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आज श्री राम नवमी के पावन अवसर पर भगवान श्री राम के प्रति श्रधा पूर्वक नमन

भगवान श्री सीता राम जी किस ने देखा राम हृदय की घनीभूत पीड़ा को कह भी जो न सके किसी से उस गहरी पीड़ा को क्या ये सब सेवाके बदले मिला राम के मन को आदर्शों पर चल कर ही तो पाया इस जीवन को राम तुम्हारा हृदय लेह धातु से अधिक कठिन है पिघल सका न किसी अग्नि से ऐसी
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सैनिकों के प्रति

इस से ज्यादा शर्म की और क्या बात होगी जो देश के सैनिकों को अपने मेडल वापिस करने पड़ रहे हैं देश के उन हजारों सैनिको के प्रति सम्मान पूर्वक मेरे कुछ मुक्तक निवेदन है सैनिकों के प्रति सीमाओं पर रात रात भर जो जवान अड़ जाते हैं अपना सब कुछ छोड़ देश के लिए
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विक्रमी नव सम्वत पर भव्य आयोजन

जनसहयोग वैल्फयर असोशियेशन दो के ब्लोकफरीदाबाद के भव्य भवन में भारतीय विक्रमी नव सम्वत २०६७के शुभारम्भ पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया इस में विभिन संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही कार्यक्रम की अध्यक्षता की वयोवृद्ध शिक्षाविद व संस्था के
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विक्रमी नव सम्वत २०६७ की बहुत २ शुभकामनायें

विक्रमी नव सम्वत २०६७ की बहुत २ शुभकामनायें भारत के महान इतिहास के स्वर्णिम इतिहास कीव विश्व की महानतम घटना विद्वान् पराक्रमी व प्रजा पालक सम्राट विक्मादित्य द्वारा नव सम्वत प्रारम्भ करने की पवित्र यादमें व सम्वत २०६७ के शुभारम्भ पर सभी मित्रों को मेरी
Mar 14 2010 08:31 PM
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डच चित्रकार के चित्र ब्लॉग वाणी ने क्यों बंद कर रखे हैं ?

पूरे विश्व पर आतंक का कितना भयंकर खतरा है यह इस बात से पता चलता है की ब्लॉग वाणी भी डॉ के मरे डच चित्रकार की ब्रुश के बनाये चित्र नही दिखा पा रही है जब की म फ हुसेन को अब भी लोग रोये जा रहे है यह आज के उग में भी कैसा दोहरा पनहै भारत माता के नग्न चित्र तो
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इस्लाम में औरत

अबतो इस्लाम की असलियत सब के सामने आ गई है महिलाओं के साथ वहाँ कितना भेद भाव है इस्लामी धर्म गुरुओं के अनुसार वे केवल बच्चे पैदा करें राजनीति करने का एक मात्र अधिकार तो बस मर्दों का है क्या यही आज की सोच है इस के बावजूद अब कोई महिला अधिकारवादी या तथा कथित
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भीड़ का चेहरा

भीड़ का चेहरा बदली नही है भीड़ वर्षों वर्ष चलते हुए भी वही लोग हैं उस में वही चल है उन की और उन्ही नारों की तख्तियांउठाये हुए हैं वे हाथों में किसी ने भी नही की है कोशिश इसे रोकने की कुछ पूछने की या आगे जो बहुत बड़ी खाई है उसे बताने की बिलकुल कोशिश नही
Mar 09 2010 07:05 PM
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हाकी की हार

हाकी में हम हार गये बात हरने की या जितने की नही है खेल में हार जीत तो होगी ही परन्तु इस हार में अन्य कारणों के साथ २ राज नीति एक कारण तो है ही जिस का कोई जबाब इस व्यवस्था में लगता है नही है क्यों की हम न तो जबाब मांगने के हक दारहैं और न ही जबाब देने के
Mar 05 2010 09:21 PM
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नही मिली गैर हिन्दुओं से शुभकामनायें

होली बीत गई दूसरे धर्म के कितने लोगों ने नेट पर हिन्दुओं को होली कि शुभकामनायें दी हैं जो लोग नेट पर काम करते हैं उन्होंने देख लिया होगा कि दूसरे लोगो में हिन्दुओं कि प्रति कितना सद्भाव है जब कि दूसरे मतों के त्यौहार आते ही हिन्दू शुभकामनाओ के ढेर लगा
Mar 03 2010 07:37 PM
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हाकी मैच जितने पर बधाई

देश वासियों को भारत द्वारा हाकी मैच जितने पर हार्दिक बधाई खिलाडियों देश का नाम ऊँचा कर दिया. हमे उन पर गर्व है सभी को बहुत-२ बधाई. डॉ. वेद व्यथित
Feb 28 2010 08:53 PM
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होली की हार्दिक शुभकामनाये

मैं सभी मित्रों को होली की हार्दिक शुभकामनायें प्रदान करता हूँ इस होली में इश्वर करे आप की मन चाही हो जाये जिस से आप वर्षों से मिलने की आश लगाये बैठे हैं वे अचानक आपके घर स्वयम चल कर आ जाएँ आप के मन की कली खिल जाये आप उन्हें खूब मन चाह रंग लगायें उन से
Feb 27 2010 07:57 PM
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कबीर का कबीर होना

कबीर को कबीर हो जाने दो कबीर यदि कबीर नही हुआ तो क्या होगा महज एक निरक्षर भट्टाचार्य .परन्तु निरक्षर होने पर भिब तो वह निरक्षर नही है कबीर तो अक्षर ब्रह्म का साधक है .यह अक्षर ही तो ब्रह्म है ,यह ब्रह्म ही तो कबीर का राम है जो उस का पिऊ है .उसीपरम पुरुष
Feb 25 2010 04:57 PM
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स्त्री

स्त्री पुरुष यानि व्यक्ति जो सो सकता है पैर फैला कर सारी चिंताएं हवाले कर पत्नी यानि स्त्री के और वह यानि स्त्री जो रहती है निरंतर जागरूक और देखती रहती है आगम की कठोर नजदीक आती परछाईं को और सुनती रहती है उस की कर्कश पदचापों की आह्ट क्योंकि सोती नही है
Feb 24 2010 05:43 PM
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भारत पाक वार्ता पर मुक्तक

कहाँ गये वो बोल तुम्हारे जो लाशों पर बोले थे सबक सिखायेंगे दुश्मन को बार बार यों बोले थे जब तक आतंकी हरकत है बात नही होगी उन से पर इस प्रेम वार्ता के हित मंत्री जी क्यों बोले थे शायद यद् नही रहता है मंत्री ने क्या बोला है जब जब आतंकी हमले ने भारत का दिल
Feb 23 2010 08:56 PM
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Holi

ननुआ ने तो भंग चढाई धोती फाड़ी ललुआ ने कर रुमाल धुतिया के भैया ताल लगे कलुआ ने दिल्ली गूंजी सब जग गूंजा खूब सुने अगुआ ने बड़ी में के गिर चरणों में धोक लगाईं मनुआ ने चीनी मिल रही पांच रुपया कडुआ तेल मुफ्त में है डाल मिल रही दो दो रुपया रोटी संग मुफ्त में
Feb 21 2010 07:27 PM
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Muktak

जो जनता को नाच नचाते उन को गुंडे नचा रहे ताल एक हो जाये सब की तालीवे सब बजा रहे सब की मिली भगत होती है नेता अफसर गुंडों की नये साल में नाच नाच कर ऐसा ही वे बता रहे नाच नचाना और नाचना ये शासन का सूत्र यहाँ मंहगाई बस बढती जायेबस ये शासन का सूत्र यहाँ चीनी
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" मोमिजि के रंग "

' " मोमिजि के रंग "'मोमिजिके रंग ' मेंसुपर्ण मोमिजि के रंग तो हैं ही साथ ही इस अद्भुत रचना में सप्त वर्णीय इन्द्रधनुषी छटा की दिव्यता का अद्भुत पुष्पाभरण है जिसेबहुभाषा विदुषी व प्रख्यात लेखिका डॉ. राज बुधिराजा एवं हिन्दी भाषा के प्रति श्रद्धान्वित व
Feb 05 2010 06:10 PM
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बीमा की महिमा

बड़ी मधुर २ आवाज में कुछ आने लगे मुझ जैसे नाचीज को भी सर कह कर बुलाने लगे फिर बीमा करवाने के बिना पूछे ही फायदे बताने लगे बहुतेरा मना किया मैं झुंझलाया झल्लाया पर उनपर इस का कोई फर्क नही पाया वह मेरे घर में आतंवादी सा घुस आया मैं घबरा गया उस ने मुझे नही
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फ़ोन विहीन नेता जी

नेता जी चिंतन कर रहे थे देश कीसमस्याओं में उलझ रहे थे उन में गहराईसे डूब रहे थे इसी गहराई में चिन्तन करते करते देश का बहुत उद्धार कर दिया दुनिया भर का निर्माण कर दिया ऊँची २ इमारतें बना दी बड़े २ बांध बना दिए नदियों पर पुल बना दिए ऐसा ही पता नही क्या २
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मुक्तक

मुक्तक जितनी सर्द हवाएं होंगी उतनी आग जलेगी मन के हर कोने कोई चिंगारी सुलगेगी यदि शांत हो जाएगी यह आग लगी जो दिल में फिर तो सर्द हवाएं दिल को अपना सा कर देंगी सर्द हवाओं को भी मैंने मन से कब कोसा है यही समय तो मन -अलाव को सुलगना होता है यदि यह सुलगेगा न
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अविनाश वाचस्पति: हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग और कोहरे में जाम देखन मैं चल्‍या ... (अविनाश वाचस्‍पति)

अविनाश वाचस्पति: हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग और कोहरे में जाम देखन kohra nhi koh ram hai is me to ho gya jina hram hai dr.ved vyathitमैं चल्‍या ... (अविनाश वाचस्‍पति)
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मुक्तक

सभी ओर चर्चे हैं धरती गर्म बहुत हो जाएगी बर्फ पिघल जाएगी सारी बस पानी हो जाएगी उस के बाद बहुत सा पानी धरती पर भर जायेगा पर सोचो ये ऐसीनोबत किस के कारण आएगी कोन सुन रहा है धरती की गर्म आह निकली कितनी सर्पों की जिह्वा की जैसी ज्वालायें निकली कितनी फिर भी
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शीत ऋतू की त्रिप्दि

अब धूप नही आतीसूरज को उलहना हैउस को वः सताती हैक्या वो अनजानी हैये हो ही नही सकतासर्दी तो रानी हैजब हाथ ठिठुरते हैंटीबी मन के अलावों मेंदिल भी तो जलते हैंये आग तो धीमी हैदिल और जलाओ तोये धूप ही सीलीहैवो महल अटारी सेक्यों निचे नही आतीसूरज की थाली सेकुछ भी