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17 Jun 2010
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कैसे पत्रकार थे, दर्द नहीं देह देख रहे थे!

गजाला यहां के मीडिया के लिए ‘अहम किरदार’ हैं। जब भी भोपाल गैस त्रासदी का जिक्र आता है, हर मीडिया हाउस उनके पास पहुंच जाता है। ऊपर उनका छोटा सा परिचय देना इसीलिए जरूरी था। विधवा कॉलोनी यहां की ऐसी कॉलोनी है, जिसमें अधिकतर महिलाओं के शौहर
 
अविनाश
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बहसतलब की दूसरी कड़ी का आयोजन कल, सवाल पूछें

डेस्‍क ♦ बहसतलब की दूसरी कड़ी का आयोजन कल, शुक्रवार, 18 जून को इंडिया हैबिटैट सेंटर के कैजुरिना हॉल में हो रहा है। विषय है, अभिव्‍यक्ति माध्‍यमों में आम आदमी। हमारे तमाम अभिव्‍यक्ति माध्‍यम आज शहरी बाजार की कठपुतलियों जैसा बर्ताव कर रहे हैं। इसी बाजार के
 
अविनाश
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कब तक केवल मुसलमान पकड़े जाते रहेंगे?

जिन्‍हें माओवाद का मतलब समझ में नहीं आता… [16 June 2010 | Read Comments | ] आनंद स्‍वरूप वर्मा ♦ काठमांडो से प्रकाशित अंग्रेजी साप्ताहिक ‘दि टेलीग्राफ’ ने नेपाल के कुछ बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों से जानना चाहा था
 
अविनाश
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क्‍या है दलित पत्रकारिता की दशा और दिशा?

संजय कुमार ♦ देश में सवर्ण पत्रकारिता या यों कहें कि हिंदू पत्रकारिता की दिशा व दशा दोनों तो दिखती है, लेकिन दलित पत्रकारिता की नहीं? दलित पत्रकारिता की दशा और दिशा को लेकर सवाल उठते रहते हैं। इन दिनों दलित पत्रकारिता को लेकर काफी विमर्श सुनने को मिलता
 
अविनाश
Jun 17 2010 05:22 AM
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Mohalla Live

 
अविनाश
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Jun 17 2010 04:56 AM
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क्या मणिपुर भारत का हिस्सा नहीं है?

उमेश चतुर्वेदी ♦ मणिपुर के मुख्यमंत्री रहे राधाविनोद कोईजाम कहा करते हैं कि हिंदुस्तानी लोग उन्हें बेवकूफ मानते हैं। मुक्केबाजी की भारतीय चैंपियन मणिपुर की एमसी मैरीकॉम की भी शिकायत रही है कि पूर्वोत्तर का होने की वजह से उन्हें वह तरजीह नहीं मिलती, जिसकी
 
अविनाश
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जिन्‍हें माओवाद का मतलब समझ में नहीं आता…

आनंद स्‍वरूप वर्मा ♦ ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की पत्रकार अनोहिता मजुमदार ने एक दिसंबर 2001 को नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के अध्यक्ष प्रचंड (पुष्प कमल दहाल) से बातचीत की, जिसका विवरण इस अखबार के दो दिसंबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ। बातचीत के
 
अविनाश
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पुरस्‍कार प्रकरण: गगन गिल के पक्ष में तेजी ग्रोवर का पत्र

साजिद रशीद और चिदंबरम की जबान एक क्‍यों है? [15 June 2010 | Read Comments | ] विश्‍वदीपक ♦ रशीद ने माओवादियों के प्रतिरोध को ‘सामूहिक दमन’ की कार्रवाई बताया है। लगता है वो ‘वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति’ में भरोसा रखते हैं। वरना कोई कारण नहीं कि वो
 
अविनाश
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Mohalla Live

 
अविनाश
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Jun 16 2010 12:30 AM
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साहित्य में लोकतंत्र के बहाने वर्चस्व बनाये रखने की साजिश

अनीता भारती ♦ हमारे देश की "गौरवशाली" हिंदू भारतीय संस्कृति ने एक को श्रेष्ठ साबित करने के लिए दूसरे को हमेशा पददलित किया है। अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ तीरंदाज घोषित करने के लिए एकलव्‍य का अगूंठा काटा जाना जरूरी है। ज्ञान सिर्फ एक वर्ग और जात की बपौती बनी
 
अविनाश
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अविनाश
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साजिद रशीद और चिदंबरम की जबान एक क्‍यों है?

विश्‍वदीपक ♦ साजिद रशीद की विवेकहीनता का आलम ये है कि वो ‘आंतकवाद’ और ‘माओवाद’ को एक ही तराजू पर तौल रहे हैं। उन्‍हें आतंकवाद और माओवाद में फर्क भी समझ में नहीं आ रहा? क्या रशीद की बातों में, अमेरिका और कांग्रेस की दलीलों में कोई फर्क नजर आ रहा है? रशीद
 
अविनाश
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साहित्‍यकार मीडिया में गुमनाम क्‍यों हैं?

रूमान से भरी अरुंधती मूर्खों जैसे सपने देख रही है [14 June 2010 | Read Comments | ] साजिद रशीद ♦ अरुंधती ने ‘आउटलुक’ के अपने लेख में नक्सलवादियों की हिंसा को दुरुस्त ठहराने के लिए जो रोशनाई खर्च की थी, उसमें अब ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के उन डेढ़
 
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“अहा जिंदगी” की कमान आलोक श्रीवास्‍तव के हाथों में

रूमान से भरी अरुंधती मूर्खों जैसे सपने देख रही है [14 June 2010 | Read Comments | ] साजिद रशीद ♦ अरुंधती ने ‘आउटलुक’ के अपने लेख में नक्सलवादियों की हिंसा को दुरुस्त ठहराने के लिए जो रोशनाई खर्च की थी, उसमें अब ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के उन डेढ़
 
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अविनाश
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Jun 14 2010 12:30 AM
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रूमान से भरी अरुंधती मूर्खों जैसे सपने देख रही है

साजिद रशीद ♦ नक्सलवादियों के पक्ष में इस समय सबसे निडर और बुलंद आवाज अरुंधती राय की है। अगरचे वे अपने उपन्यास ‘द गॉड ऑफ स्माल थिंग्स’ में कॉमरेड नंबूदरीपाद जैसे मार्क्सवादी नेता की आलोचना करके कम्युनिस्टों में ‘शापित’ हो चुकी हैं। अरुंधती ने साप्ताहिक
 
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अब “अहा जिंदगी” की कमान आलोक श्रीवास्‍तव के हाथों में

भोपाल मर रहा था, अर्जुन सिंह जहाज में उड़ रहे थे [11 June 2010 | Read Comments | ] आनंद स्‍वरूप वर्मा ♦ स्पष्ट चेतावनी के बावजूद अर्जुन सिंह को हिरासत में क्यों नहीं लिया गया? इतना ही नहीं, 6 दिसंबर को जिस समय समूचा भोपाल मौत की दहशत में डूबा
 
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अब “अहा जिंदगी” की कमान आलोक श्रीवास्‍तव के हाथों में

भोपाल मर रहा था, अर्जुन सिंह जहाज में उड़ रहे थे [11 June 2010 | Read Comments | ] आनंद स्‍वरूप वर्मा ♦ स्पष्ट चेतावनी के बावजूद अर्जुन सिंह को हिरासत में क्यों नहीं लिया गया? इतना ही नहीं, 6 दिसंबर को जिस समय समूचा भोपाल मौत की दहशत में डूबा
 
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Mohalla Live

Dear Friends Presenting to you, The Absent State, my book based on front-line reporting from India's Naxal heartland and other conflict zones, co-authored with my friend Neelesh Misra. The book has been dubbed as the non-fiction book of the year by
 
अविनाश
Jun 12 2010 07:21 PM
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राजकिशोर भी सनसनी फैलाने का कोई मौका नहीं छोड़ते

भोपाल मर रहा था, अर्जुन सिंह जहाज में उड़ रहे थे [11 June 2010 | Read Comments | ] आनंद स्‍वरूप वर्मा ♦ स्पष्ट चेतावनी के बावजूद अर्जुन सिंह को हिरासत में क्यों नहीं लिया गया? इतना ही नहीं, 6 दिसंबर को जिस समय समूचा भोपाल मौत की दहशत में डूबा
 
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भोपाल मर रहा था, अर्जुन सिंह जहाज में उड़ रहे थे

आनंद स्वरूप वर्मा ♦ तीसरी दुनिया के देशों को अपनी चारागाह बनाने वाले मौत के सौदागर अमरीकी साम्राज्यवादियों की मुनाफाखोरी को बढ़ाने के लिए इनके अनुग्रह पर पलने वाले मंत्रियों और अफसरों की सुविधालोलुपता ने हजारों बेगुनाहों को मौत के घाट उतार दिया। इस
 
अविनाश
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दैनिक भास्‍कर ने सर्वेक्षण में चालाकी से सवाल पूछे थे

तीस लाख का ठेका [10 June 2010 | Read Comments | ] डेस्‍क ♦ अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विवि के कुलपति वीएन राय ने सीएसडीएस के सीनियर फेलो, पत्रकार अभय कु दुबे को तीस लाख रुपये का एक ठेका दिया है। Read the full story »न्‍याय का बूचड़खाना [10 June 2010
 
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अभय कु दुबे को वीएन राय ने दिया 30 लाख का ठेका

डेस्‍क ♦ महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति वीएनराय पत्रकार ने सीएसडीएस के सीनियर फेलो और पत्रकार अभय कुमार दूबे को तीस लाख रुपये का एक ठेका दिया है। उन्हें समाज विज्ञान के विश्व कोश के निर्माण का कार्य सौंपा गया है (ये सारे शब्द
 
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वे पहले रेलवे में स्‍टेनों थीं, बाद में चीफ जस्टिस बनीं

उमेश चतुर्वेदी ♦ विक्रम सेठ की मां लीला सेठ की "घर और अदालत" नाम से आयी यह आत्मकथा छह साल पहले अंग्रेजी में ऑन बैलेंस के नाम से प्रकाशित हो चुकी है। तब इसे अंग्रेजी में हाथोंहाथ लिया गया था। लेकिन अदालती नियुक्तियों की राजनीति से हिंदी पाठकों का
 
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पहले दैनिक भास्‍कर बताये कि उसकी जाति क्‍या है?

मिटाने-जोड़ने का खेल [9 June 2010 | Read Comments | ] सुदीप्ति ♦ साहित्‍य, राजनीति, विज्ञान, कला आदि के इतिहास में छूट गये लोगों को क्‍या दर्ज कर लिये गये लोगों की कीमत पर ही जगह मिलेगी? Read the full story »जाति गिनना जरूरी [9 June 2010 |
 
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भोपाल के बूचड़खाने में सब नंगे हैं

राजेन तोडरिया ♦ न्‍यायपालिका आखिरी किला था जो भारतीय लोकतंत्र की वर्गीय पक्षधरता को संतुलित करता था। इसकी वर्गीय पक्षधरता भी उजागर होने के बाद किस मुंह से भारतीय राज्य खुद के लोकतंत्र होने का दावा कर सकेगा? भोपाल गैस कांड यह सवाल भी देश के लोकतंत्र से
 
अविनाश
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जिला अदालत, भोपाल 2010, 12 बजकर 5 मिनट!

मिटाने-जोड़ने का खेल [8 June 2010 | Read Comments | ] सुदीप्ति ♦ साहित्‍य, राजनीति, विज्ञान, कला आदि के इतिहास में छूट गये लोगों को क्‍या दर्ज कर लिये गये लोगों की कीमत पर ही जगह मिलेगी? Read the full story »जाति गिनना जरूरी [8 June 2010 |
 
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जनगणना में जाति-आधारित गिनती का विरोध किसलिए?

उर्मिलेश ♦ देश में आर्थिक सुधार के मौजूदा दौर में नये ढंग के शैक्षिक सुधारों का दौर चल रहा है। इसे क्रांतिकारी बताया जा रहा है। मध्य और उच्च वर्ग का तबका इससे बहुत खुश है। वह नये तरह के शैक्षिक सुधारों से अपने आपको ग्लोबल-विलेज का हिस्सा बनता देख रहा है।
 
अविनाश
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क्‍या एक को मिटा कर ही दूसरे को जगह मिलेगी?

सुदीप्ति सिंह ♦ सवाल ये है कि जब दोनों ऐतिहासिक चरित्रों में विरोध नहीं, सहयोग था, तब हम ऐसी शर्त क्‍यों रखें कि एक को सामने आना चाहिए, दूसरे को अंधेरे में चले जाना चाहिए? साथ ही सवाल यह भी है कि क्‍या साहित्‍य, राजनीति, विज्ञान, कला आदि के इतिहास में
 
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…उससे ज्यादा जहर है सरकार की आस्तीन में!

राजेंद्र राजन ♦ मुनाफा उनका है श्मशान अपना है जहर उनका है जहरीला आसमान अपना है अंधे यमदूत उनके हैं यमदूतों को नेत्रदान अपना है हमारी आंखों में जिस विकास का अंधेरा है उनकी आंखों में उसी विकास का सपना है
 
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न्‍याय की इस चोली के पीछे दरअसल कॉरपोरेट है

अनिल सदगोपाल ♦ यूनियन कार्बाइड के साथ सांठगांठ करके और उसको नष्ट होने से बचाने के कदम उठाकर भारत सरकार ने वैश्विक पूंजी को यह संदेश दिया कि उनके पूंजी निवेश और उसके जरिए की जानेवाली मुनाफाखोरी, लूट और शोषण के लिए भारत की अर्थव्यवस्था सुरक्षित है।
 
अविनाश
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Jun 08 2010 12:30 AM
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भोपाल गैस कांड में न्‍याय किसी त्रासदी से कम नहीं

डेस्‍क ♦ भोपाल गैस त्रासदी मामले में अदालत ने आठ लोगों को दोषी करार दिया है। लेकिन अभी सजा नहीं सुनायी गयी है। इसमें केशव महिंद्रा, विजय गोखले, किशोर कामदार, एसपी चौधरी, आरबी रॉय चौधरी, केवी शेट्टी, जे मुकुंद और शकील कुरैशी शामिल हैं। इस मामले में वारेन
 
अविनाश
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नजर पर पर्दा या जिस्‍म पर पर्दा… देखिए स्‍पेशल रिपोर्ट!

वीसी का तुगलकी फैसला [5 June 2010 | Read Comments | ] पूर्व छात्र ♦ माखनलाल विश्‍व-विद्यालय में पत्रकार बनने के इच्छुक अभ्यर्थी अब अपनी भाषा, सरोकार और समझ की जगह अपने अंक-पत्र के आधार पर प्रवेश पाएंगे। Read the full story »न्‍याय के हत्‍यारे
 
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अविनाश
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Jun 07 2010 09:31 AM
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हिंदी आलोचना में निंदा पुराण के लिए कोई जगह नहीं

रविभूषण ♦ गिरीश मिश्र ने लिखा है, 'मैंने हिंदी भाषा और साहित्य का ज्ञान नहीं प्राप्त किया और न ही मैं डॉ नामवर सिंह के योगदान का मूल्यांकन करने में सक्षम हूं।' आलोचना उनके लिए 'हमला' है। नामवर सिंह की आलोचना करनेवाले हिंदी के लेखक उनके अनुसार 'हीन-भावना
 
अविनाश
Jun 07 2010 09:31 AM