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काव्य तरंग

http://kavyamanjusha.blogspot.com/
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19 Apr 2010
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कभी देखी है ऐसी मनुहार ??..........दो कविताएँ {रानीविशाल}

कहते है कि सावन के अंधे को सब हरा ही हरा दिखाई देता है .....बस कविता प्रेमीयों के साथ भी कुछ ऐसा ही है । जिन्हें कविताएँ कहने और पड़ने का रोग लग जाए, फिर क्या उनका तो सारा क्रिया-कलाप यहाँ तक की वार्तालाप भी काव्यमय ही होकर रह जाता है । जीवन की बहुत ही
 
रानीविशाल
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कसक दिल की

सजदे कितने कियेचोखट पर तेरीपर दर्द दिल काहुआ न कमखुशियों की सहरनहीं शायदकिस्मत में अपनीग़म की अँधेरी रात में हीनिकलेगा ये दम******************जिनकी आरज़ू मेंमिटाया थाखुद को जहां सेन जलाइक दिया भीउनसे सजदे मेंयार केये मतलब कीदुनियाघड़ी भर मेंबदलती हैनासमझ
 
रानीविशाल
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वो पल.....अब भी मेरे पास है

कांपते हाथों से मेरेहाथों को लेकर हाथ मेंजो चाहते थे कहना तुमशब्द वो भी बह रहे थेसमय की तरहआँसूओं के साथ....!!भीगते जज्बातों कावो पल.....जब छुपाई थीअपनी आँखों की नमीएक दूजे से हमने, जबकिदोनों उससे अनजान न थे....!!कप कपाते होंठो सेकहना चाहते थे वो सब
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यह कैसी प्रतीक्षा..

पल पल अविरलनिर्बाध सदा भावो मेंबहता रहता हैपग पग पर हर दममखमल साराहों में साथ वो रहता हैकण कण में पृथ्वी केजिसका अस्तित्वसमाहित हैत्रण त्रण के मूल मेंछुपा हुआउसका सन्देशकुछ कहता हैकस्तूरी से मृग का जूऐसा अपना भीनाता हैगिर गिर कर फिरउठजाने काजो हमको पाठ
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तब्दीलियां तो वक़्त का पहला उसूल है..

मौसम के साथ चलिये कि लड़ना फ़िज़ूल हैतब्दीलियां तो वक़्त का पहला उसूल है..इंसां नहीं कोई भी मुकम्मल जहान मेंलेकिन नज़र में और की खामी है भूल है तारीख में मिलेंगे न उनके निशान तक....जिनको न साथ वक्त के चलना कबूल है.....कश्ती का नाखुदा भी हुआ कितना बदगुमानखुद
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हमें तुम भूल भी जाओ ....

हमें तुम भूल भी जाओतुम्हे हम प्यार करेंगेगवारा जो न हो तुमकोनहीं इज़हार करेंगेजो ख़्वाबों में चले आएतो नज़रे तुम चुरा लेनाजो तनहाई में तड़पाएतो यादों से मिटा देनाबना दो गैर ही हमकोनहीं तकरार करेंगेहमें तुम भूल भी जाओतुम्हे हम प्यार करेंगेवफ़ा न तुम करो
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छोटू पंडित का मंत्र पाठ ......{ गायत्री मंत्र }

पोस्ट का शीर्षक पढ़ कर आप सोचते होंगे अभी २-४ दिन पहले ही तो मेने एक पोस्ट लिखी थी, पोंगा पंडितो के ख़िलाफ और आज मैं ही किसी पंडित का मंत्र पाठ आपके लिए लेकर आई हूँ । लेकिन यकीन मानिये ये छोटू पंडित बहुत ही निश्छल और निर्मल है । इनका मंत्र पाठ सुन कर
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फिर भी आओ एक दूजे को विश करे हेप्पी वुमनस डे सभी

ओ शीतल मंद पवन तू ही तप्त ह्रदय को शीतल करनारी ह्रदय दहक उठा भीषण क्रोध की ज्वाला में जल कर उथल पुथल होती है मन में, कोई संचार नहीं रहा बदन मेंआँसू ख़त्म हो चुके है अब तो, लहू उतर आया नयनन मेंकहते बड़े फक्र से आगए इक्कीसवीं सदी में हमसंकीर्णता मन में
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आज भी बचपन भूखा नंगा .....चाय की प्यालियाँ धोता है !!

नन्हे हाथ मजदूरी करतेशिक्षा को मोहताज फिरेकूड़े में चुनते रोज़ी अपनीनुक्कड़ पर भिक्षा माँग रहे...दो जून के दाने मिलते नहीं, हड्डियों का चुरा भी करने पर तन ढाकने को कपड़े नहीं, सर छुपाने को नहीं है घर !!आज भी बचपन भूखा नंगाचाय की प्यालियाँ धोता है !!स्टेशन पर
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Mar 08 2010 08:27 AM
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तुम प्रेम का आधार हो

प्रिय तुम प्रेम प्रतीक होतुम प्रेम का आधार होतुम ही तो हो पथ प्रेम कातुम ही प्रेम का द्वार होसर्द सुलगती रातों मेंशीतल मृदु अहसास तुममधुर स्वप्न हो नयनों केजटिल जीवन की आस तुमजलती बुझती चाहों मेंतुम एक अमर अभिलाषा होघोर निराशा के रुक्ष्ण क्षणों मेंतृप्त
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Mar 08 2010 06:08 AM
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विकास नहीं गुलामी की सिड़ी है GMO......प्रकृति के साथ छेड़ छाड़ विनाश की द्योतक {Bt brinjal}

ज़रा सोचिये आज से कई साल पहले जब पारम्परिक खेती की जाती थी तब कभी आपने सुना था किसी को कहते की हमें टमाटर से एलर्जी है या सोयाबीन या फिर मूंगफली से एलर्जी है ?? शायद नहीं । हाँ, लेकिन आज कल सभी को यह कहते जरुर सुनते है कि अब फल, सब्जियों और अनाज में पहले
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क्या मुक्ति का मार्ग बताएगा....भक्ति का जो व्यापार करे ??

पोंगा पंडित बीन बजाते अंधों की टोली नाच रहीअधर्मी धर्म का पाठ पढ़ातेवाहजी.. ये भी क्या बात रहीभोग विलास न खुद ने छोड़ाऔर त्याग का राग आलाप रहाकामनाओं के वश में भान नहींक्या पुण्य हुआ क्या पाप रहामाया के जाल में फंसा हुआ खुदक्या मोह तुम्हे
Mar 06 2010 04:41 AM
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तेरे चहरे में उस खुदा की इबारत नज़र आती है

मेरी नन्ही परी अनुष्कालोग कहते हैं कि गुज़रा ज़माना कभी लौट कर आता नहींलेकिन तेरी हर शरारत में अपना बचपन मैं जिया करती हूँयूँ तो कर देते हैं बैचेन छुपे हुए कुछ गम जो यादों में मेरीपर तेरी नटखट सी हँसी इस जीवन में सुकून भर देती हैंना देखा हैं कभी भी कही उस
Mar 02 2010 05:14 AM
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होली की शुभकामनाए

रोली, अबीर, गुलाल,चन्दन से तो मनाते होली सभी हम तो सबको प्रेम रंग लगाए जोकि ना छुटे कभीआप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाए इस आशा के साथ की ये होली सभी के जीवन में ख़ुशियों के ढेर सरे रंग भर दे ....!!
Feb 28 2010 04:31 AM
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आया अलबेला त्यौहार रंगीला होली का [होली गीत]

आया अलबेला त्यौहार रंगीला होली कागोरी खेल रही है खेल, आँख मिचोली कालपट झपट कर निकली घर सेमुख घूँघट पट में छुपाएलाख जतन कर प्रियतम खोजेप्रिया को ढूंढ़ ना पाएअल्हड़ नाद उठे मस्तो की टोली कागोरी खेल रही है खेल, आँख मिचोली काआज तो मन का मेल मिटासब लोग गले
Feb 27 2010 04:53 AM
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हम भी होली मना लेते है

रंग गुलाल सब बाज़ारों में ख़ुशबू से महकती गलियां चौपाटी की चहल पहल खिल उठी वसंत में कलियाँ नुक्कड़ पर यारों का जमघटछेड़ छाड़ मस्ती का दौरहर्षित मन हर जगह खेले पिचकारी बच्चे सब ओरसतरंगी सजी वसुंधरा पक्षियों का मृदु ऋतु गानमहुए की मदमाती सुगंध फ़ाग गीतों की
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Feb 25 2010 05:37 AM
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कल रात फिर ख़्वाबो में

कल रात फिर ख़्वाबो मेंयू हो गयाउनसे सामनाबेकरार हो मचल उठेमुश्किल थादिल को थामनाकोमल लबों परठहरे हुए सेकुछ भीगे शब्दअब भी थे वही....आँखों में आँखें डाल करअरमानो को उढ़ेलानाभावनाओं का आवेगफिर से अहसासबुदबुदाने लगा..पलकों की आड़ से हुएनज़रो के मीठे
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Feb 24 2010 04:40 AM
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हृदय में ही ईश्वर रहता है

सरल हृदय सदभाव लिए, सदैव सरिता सा बहता है ।अभिमान सदा पैरो को पसारे, उसकी राहों में रहता है ।।अभिमान ने ज्ञान को नष्ट किया, ना ज्ञानी कभी अभिमानी हुए ।दे रोशनी दीया भी अन्धकार हरे, ना चूल्हे की लो का किनारा बना ।।स्नेह से अपना ले गैरो को भी, सच्चे अर्थ
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Feb 22 2010 01:03 AM
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ना आए विरह की रैन

दो नयना मिल दो से चार हुए, ना सूझे कोई औरजो तुम सुध आकर लो मेरी, मैं यह दुनिया दू छोड़ धरती मचले प्यास से, बादल का ना कोई निशानचंचल मन हुआ बावरा, तुम बिन देह हुई निष्प्राण कोयल कूहके बाग में, पपीहे ने मचाया शोरऋतु पर भी यौवन चड़ा, पर ना नाचे मन का मोर
Feb 20 2010 06:29 AM
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अपना खून (कहानी)

शाम ढलने को है... मीनाक्षी का दिल बैठा जारहा है । शोभना .....भाभी आप फीक्र ना करो रिपोर्ट ठीक ही आएगी । मीनाक्षी .....जैसे तुम कह रही हो वही होगा, ना जाने क्या कहा होगा मूए डाक्टर ने । इतने में ही सुधीर आ पहुचता है मुरझाया चहरा कापते हाथो से रिपोर्ट
Feb 18 2010 02:02 AM
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अमेरिका का स्नो फ़ॉल हमारे अंदाज़ से (न्यू यार्क से सचित्र)

अजी ये तो अभी शुरुआत हुई है ...........आगे आगे देखते जाइए !! अब नज़ारा कुछ और है ....रेल की पटरी बनाती हुई बिटिया अनुष्का ..!!ठंडा तो बहुत है मौसम, पर अपनी गुड़ियाँ को घुमाना है ....ना !!(अनुष्का ) अब देखिये पहला द्रश्य इस तरह बदल गया है ...!! घर के पीछे
Feb 18 2010 12:37 AM
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आलम-ए-इश्क (ग़ज़ल)

तुमसे मिली है नज़रे जब से, मैं तो दिवानी हो गईबस इक तुम हो अब अपनों में,सारी दुनिया बेगानी हो गईइश्क में जो आहें भरते है, हम अक्सर उन पर हसते थेतेरे इश्क में अपनी भी, उनके ही जैसी कहानी हो गईबिन तेरे हर इक मंज़र मुझको, सूना सूना लगता हैतनहाई और बेचैनी ही,
Feb 16 2010 03:54 AM
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सार्वजनीक सूचना

ब्लॉग जगत में पदार्पण का मेरा सिर्फ एक ही उद्देश्य है, वो ये की मैं अपना साहित्य आप सभी पाठक गण तकपंहुचा सकू । चूकी मैं बचपन से ही आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी के साहित्य से अत्यधिक प्रभावित हूँ इसीलिए मैंने अपने ब्लॉग का नाम उनकी ही एक अत्यधिक
Feb 13 2010 12:32 AM
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बम बम लहरी बम भोलेनाथ

डम डम डम डम डमरू बाजेनंदीगन खड़े है जोड़े हाथभंग का रंग जमाए शंकरविष्णु करे नृत्य देवन साथबम बम लहरी बम भोलेनाथबम बम लहरी बम भोले नाथगोरी का भी रूप खिल गयातारो से सजी है रातधरती पर भी धूम मचीशिव शक्ति का मिलन है आजबम बम लहरी बम भोलेनाथबम बम लहरी बम भोले
Feb 12 2010 06:29 AM
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आयो फागनियो (फाग गीत )

रंग रंगीले फूल खिलेपुरवैया ठंडी आएकी आयो फागनियोकी आयो जी फागनियों..लाल हरी चुनर न ओढूबस पिली ओढ़नी भाएरंगादो मोहे फागनियोंकी आयो जी फागनियों...देवरजी जो करे ठिठोरीसैयाजी की याद सताएकी आयो फागनियोंकी आयोजी फागनियो...संग ननद के फाग मैं खैलूसासुजी भौवें
Feb 11 2010 05:16 AM
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बन बैठा इंसान दरिंदा (सामाजिक संकट )

बन बैठा इंसान दरिंदा, तौबा इसकी बुरी नज़र ।कहाँ कहाँ बच पाएगीं लड़कियां, हर जगह इन्हें लुटेरों का डर ।।नर्क बना रहे जीवन इनका, इज्जत को इनकी छीन कर ।ये भी माँ, बहन, किसी कि बेटी है, खुद अपने घर में डाल नज़र ।।ना भरोसा आस पड़ोस का, ना बचा यकीन किसी रिश्तेदार
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याद तुम्हारी आई (गीत)

फिर सज गई शाम सिंदूरीमैसम ने ली अंगड़ाईमुझे याद तुम्हारी आई ......फूलों पर गुन गुनाए भ्रमरहर कली कली शरमाईमुझे याद तुम्हारी आई ......हंस हंसिनी चले रे घर कोचातक का कटा कलेशचंदा ने भी अम्बर सेकैसी प्रेम सुधा बरसाईमुझे याद तुम्हारी आई ....राह तकत तट थकी
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निश्छल बचपन

कोमल यादें मीठे सपने , दादा दादी सारे आपने गुड़ियाँ खिलोने गोटे की चुनर , सखी सहेली पनघट की डगर गाँव की खबरे बस्ती का झमेल , आँख मिचोली का वो खैलचाट पकोड़े की चटकार , मास्टरजी का डंडा माँ की फटकारदादाजी दिलाते उन जलेबियों की मिठास , नानी के तोहफे खासम
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बेटी का जन्म

क्या कहूँ की जो शुरुआत हुई जैसे तपते दिन में रात हुईसूरज ने ली सब किरणें समेट मातम ने घर को लिया चपेट सबकी शक्लें मुरझाई हैं हाय ! लड़की घर में आई है न थाली बजी, न पेड़े बटें न मिली दुआ , न उतरी बलाछाई आफत की परछाई हैं पर माँ तो "माँ "है क्या करती कैसे देख
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हम आंसू पीकर जीते है

हम आंसू पीकर जीते हैबस आंसू पीकर जीते हैफूल हटा कर कांटे दे दे ये इस दुनिया की रीते हैहम आंसू पीकर जीते हैकहने को तुम कुछ भी कह लोसारे काम हम करते हैरोज़ सुबह को जीते है और रोज़ शाम को मरते हैहम आंसू पीकर जीते हैपल पल दिन का याद करेजब सर तकिये पर धरते है
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भ्रष्टाचार

भारतीय संस्कृति का बन गया ......आचारस्वाद नया है , भ्रष्टाचार !!राजनीति क्या ? राज्य समिती क्या ?क्या नवयुवको के उच्य विचारछेड़ खानी करे लड़कियों सेमाता पिता से करे है, दुराचारभारतीय संस्कृति का बन गया .......आचारस्वाद नया है ,भ्रष्टाचार !!नेता हो या
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आँखें

हर पल हर घड़ी रहे , तांकती आँखें ।आँखों से ही दिलो में , झांकती आँखें ।।अनगिनत रंग-रंगीले, इनमे सपने बसे है ।बिन बोले बाते हो जाने की , ये ही वजह है ।।सागर से भी ज्यादा है, गहराई इनमे ।ना जाने कितनी छुपी हुई, तनहाई इनमे ।।दुःख गहरा हो मन में, तो भर आती
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ननिहाल की यादें (बाल गीत)

हेलो हेलो ज़रा फ़ोन लगानाहेलो हेलो ज़रा फ़ोन लगाना याद मुझे आते है नाना नानी, मामा और है भैया छोटे से गावं ठौड़ की छैया हेलो हेलो ज़रा फ़ोन लगाना याद मुझे आते है नाना ...मेले में जो झूले आए मामाजी ने खुब झूलाए खैल खिलोने , गली महल्ला पकड़म पाटी, हल्ला
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जीने दो मुझे (कन्या भ्रूण-हत्या )

जीने दो मुझे, मैं भी जिंदा हूँक्या दोष मेरा ? हूँ मैं अंश तेराऐसे समाज पर, मैं बहुत शर्मिंदा हूँ !!कहलाती पराई सदा ही रही जन्म मिला तो, मृत्यु सी पीर सही हैवानो मुझ पर दया करो ना कुक्ष में कुचलो हया करो !!अमानवीयता से, सदा मैं हार रही सुन बिलख-बिलख कर,
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जिंदगी से अब मिले

बनते रहे हमदर्द और मनमीत हो गए दूर तुम इतने हुए की , नजदीक हो गए ना वजूद कुछ मेरा बचा , ना हस्ती रही तेरी कुछ इस तरह से प्यार की, बस्ती में खो गएगुलाबों सी नर्मिया, महसूस होती है कदमो तलेकि दो हाथ उठाते है, दुआ में मेरे लिए ख्वाइश है युही शामिल, रह जाए
Jan 27 2010 07:04 AM
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जिंदगी से अब मिले

बनाते रहे हमदर्द और मनमीत हो गए दूर तुम इतने हुए की , नजदीक हो गए ना वजूद कुछ मेरा बचा , ना हस्ती रही तेरी कुछ इस तरह से प्यार की, बस्ती में खो गएगुलाबों सी नर्मिया, महसूस होती है कदमो तलेकि दो हाथ उठाते है, दुआ में मेरे लिए ख्वाइश है युही शामिल, रह जाए
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गणतंत्र दिवस की शुभकामनाए

मेरे सभी हिन्दुस्तानी साथियों को भारतवर्ष के इस पावन एवं महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व की हार्दिक शुभकामनाए ॥जय हिंद
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गणतंत्र दिवस की शुभकामनाए

मेरे सभी हिन्दुस्तानी साथियों को भारतवर्ष के इस पावन एवं महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व की हार्दिक शुभकामनाए ॥जय हिंद
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सब सपनों को साकार करे (गणतंत्र दिवस)

नई भौर में,नए छोर से,साध कर नए लक्ष्य कई नवल यतन कर,नवयौवन संग,पलको में,नव स्वप्न लिए सभी विधा में, सभी क्षेत्र मेंटाके नई उपलब्धियां छोड़े छोटी सोच पुरानीसभ्यता को समृद्ध करे शिक्षा का हो, अधिकार सभी को नवप्रतिभा को, मिले पहचान राजनीति रहे गंगा सी घर घर
Jan 26 2010 12:24 AM
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सब सपनों को साकार करे (गणतंत्र दिवस)

नई भौर में,नए छोर से,साध कर नए लक्ष्य कई नवल यतन कर,नवयौवन संग,पलको में,नव स्वप्न लिए सभी विधा में, सभी क्षेत्र मेंटाके नई उप्लाभियाँ छोड़े छोटी सोच पुरानीसभ्यता को सम्रध करे शिक्षा का हो, अधिकार सभी को नवप्रतिभा को, मिले पहचान राजनीति रहे गंगा सी घर घर