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दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका

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06 Jun 2010
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अपनी जिंदगी-हिन्दी शायरी (apni zindagi-hindi shayari)

यकीन करो दूसरों के अधिकार और उद्धार की लड़ाई लड़ने की बात जो करते हैं वह संजीदा नहीं है, क्योंकि उधार के ख्याल पर गुजारी है उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी। सारी उम्र लगा दी लोगों का भला करते हुए पर एक बंदा भी वह खुश नहीं दिखा सकते, ज़माने के कमजोर मोहरे ही सोच
Jun 06 2010 06:07 PM
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‘कामरेड’ का टूट गया तिलिस्म-हिन्दी लेख

आखिर कामरेड शब्द का तिलिस्म टूट गया। कहना कठिन है कि चीन में साम्यवादी व्यवस्था एकदम खत्म हो जायेगी पर इतना तय कि कामरेड शब्द से पीछा छुड़ाना इसकी एक शुरुआत का संकेत हो सकती है। मार्क्सवाद पर आधारित विचारधाराओं का आधार केवल नारे और वाद हैं और कामरेड
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हिन्दू धर्म संदेश-पैसा कमाने से कभी फुर्सत नहीं मिल सकती

किं तया क्रियते लक्ष्म्या या वधूरिव केवला। या तु वेश्येव सा मान्या पथिकैरपि भुज्यते।। हिन्दी में भावार्थ-उस संपत्ति से क्या लाभ जो केवल घर की अपने ही उपयोग में आती हो। जिसका पथिक तथा अन्य लोग उपयोग करें वही संपत्ति श्रेष्ठ है। धनेषु जीवतिव्येषु स्त्रीषु
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चेहरे चमकदार, नीयत है काली-हिन्दी व्यंग्य कविता

दीनों के दीनानाथ हैं इंसान क्या मदद करेंगे। नाम लेकर भलाई का सारी रसद अपने घर भरेंगे। लूट लिया ज़माने का पैसा, हर लुटेरा लगने लगा अमीर जैसा, बना रहे हैं भीड़ को चलाने का कायदा, सुरक्षित रख रहे अपनी आने वाली पीढ़ी का फायदा, फैल गये गरीबों के हितैषी चारों
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कामयाबी और खौफ-हिन्दी शायरी

अपनी कामयाबी भी उनको तब तक हज़म नहीं हो पाती है, जब तक दूसरे की नाकामी की खबर उनके पास न आती है। दुनियां का यही दस्तूर है मूर्खों का भी क्या कसूर है सभी लोगों दूसरे की छोटी लकीर से बड़ी लकीर खींचना नहीं आती है। ——— हर रोज वह कामयाबी के
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फरिश्तों की दरबार-हिन्दी शायरी

फरिश्तों की दरबार में क्यों हाजिरी लगाने जाते हो, हो सकता है वहां रोज सुबह फर्श धोया जाता हो रंगीन रात के जश्न की धूल धोने के लिये तुम सफेद चेहरों की काली नीयत क्यों नहीं समझ पाते हो। पत्थर के बुतों की तरह खड़े हैं फरिश्ते वहां सांसें लेने के लिये नहीं
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सर्वशक्तिमान और शैतान-हिन्दी हास्य व्यंग्य कथा

सर्वशक्तिमान को यह अहसास होने लगा था कि संसार में उनका नाम स्मरण कम होता जा रहा था। दरअसल अदृश्य सर्वशक्तिमान सारे संसार पर अनूभूति से ही नियंत्रण करते रहे थे और लोगों की आवाज तभी उन तक पहुंचती थी जब उनके हृदय से निकली हो। अपनी अनुभूति के परीक्षण के लिये
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मुंह खुले पर कान बंद रहे-हिन्दी हास्य कविताएँ

विषयों के भूल जाना उनके सोचने का तरीका है। अपनी कहते रहते हैं सुनने का नहीं उनको सलीका है। ———– वादों का व्यापार दिल बहलाने के लिये किया जाता है, मतलब निकल जाये तो फिर निभाने कौन आता है। ———– बहसों को दौर
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नर्तकों के देवता होने का वहम-हिन्दी क्षणिकाऐं

विदुषकों के विद्वान और नर्तकों के देवता होने का वहम पूरे ज़माने को हो गया है, झूठ के सहारे खड़ा है दौलत का महल, इज्जत पाने के लिये, होने लगी सौदे की पहल, ईमान सभी का सो गया है। ———– सर्वशक्तिमान ने दाने दाने पर लिखा है खाने वाले का
Feb 21 2010 10:16 AM
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धर्म और अवतार-हिंदी हास्य कविता

फंदेबाज मिला रास्ते में और बोला ‘चलो दीपक बापू तुम्हें एक सम्मेलन में ले जायें। वहां सर्वशक्तिमान के एक नये अवतार से मिलायें। हमारे दोस्त का आयोजन है इसलिये मिलेगा हमें भक्तों में खास दर्जा, दर्शन कर लो, उतारें सर्वशक्तिमान का इस जीवन को देने का
Feb 14 2010 12:59 PM
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शब्दों की प्रेरणा-हिन्दी व्यंग्य कवितायें

दिन भर वह दोनों ज्ञानी अपने शब्दों की प्रेरणा से लोगों को लड़ाने के लिये झुंडों में बांट रहे थे, रात को लूट में मिले सामान में अपना अपना हिस्सा ईमानदारी से छांट रहे थे। ——- शब्द रट लेते हैं किताबों से, सुनाते हैं उनको हादसों के हिसाबों से, पर
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बुरे आदमी से संगत सांप पालने से अधिक दुःखदायी-हिन्दी संदेश

संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior http://rajlekh.blogspot.com ____________________________ नीति विशारद चाणक्य महाराज का कहना है कि क्षान्तिश्चत्कवचेन किं किमनिरभिः क्रोधीऽस्ति चेद्दिहिनां ज्ञातिश्चयेदनलेन किं यदि सहृदद्दिव्यौषधं किं फलम्। किं
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झगड़ा भी एक शय की तरह बिकता-हिन्दी व्यंग्य कविता

झगड़ा भी एक शय है जो बड़ा पाव की तरह बाजार में बिकती। अमन के आदी लोगों में चैन कहां कहीं शोर देखने की चाहत उनमें दिखती। इसलिये लिख वह चीज जो बाजार में बड़े दाम पर बिकती। अठखेलियां करती कवितायें मन भाती कहानियां और अमन के गीत लिखना है तो अपने दिल के सुकूल के
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जज़्बात एक शय है-.हिन्दी शायरी

इंसान के जज्ब़ात शर्त से और समाज के सट्टे के भाव से समझे जाते हैं। नये जमाने में जज़्बात एक शय है जो खेल में होता बाल व्यापार में तौल का माल नासमझी बन गयी है जज़्बात का सबूत जो नहीं फंसते जाल में वह समझदार शैतान समझे जाते
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हैती का भूंकप, ज्योतिष,पूंजीवाद और साम्यवाद-हिन्दी लेख

हैती में भूकंप, ज्योतिष, पूंजीवाद और समाजवाद जैसे विषयों में क्या साम्यता है। अगर चारों को किसी एक ही पाठ में लिखना चाहेंगे तो सब गड्डमड्ड हो जायेगा। इसका कारण यह है कि भूकंप का ज्योतिष से संबंध जुड़ सकता है तो पूंजीवाद और समाजवाद को भी एक साथ रखकर लिखा
Jan 16 2010 06:55 PM
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आंसुओं का व्यापार-हिन्दी शायरी

हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। शायद लोग दिमाग से सोचते हैं इसलिये हमदर्दी के शब्द जल्दी ढूंढ लेते दिल तक नहीं पहुंचता दूसरे का दर्द कर लेते हैं दिखावे में कमाई। नहीं करना सीखा
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पेशेवर बौद्धिक विलासी- हिन्दी आलेख (peshevar buddhi vilasi)

हिटलर तानाशाह पर उसने जर्मनी पर राज्य किया। कहते हैं कि वह बहुत अत्याचारी था पर इसका मतलब यह नहीं है कि उसने हर जर्मनी नागरिक का मार दिया। उसके समय में कुछ सामान्य नागरिक असंतुष्ट होंगे तो तो कुछ संतुष्ट भी रहेंगे। कहने का मतलब यह कि वह एक तानाशाह पर
Dec 30 2009 06:19 PM
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तयशुदा लड़ाई-हिन्दी लघुकथा (fix religion war-hindi short story)

वह डंडा लेकर उस मैदान में लड़ने पहुंचे। यह मैदान ‘धर्मकुश्ती’ के लिये विख्यात था। मैदान के मध्य में उन दोनों ने अपने अपने धर्म का नाम लेकर लड़ाई शुरु की। पहले एक दूसरे पर डंडे से प्रहार करते-साथ में अपने धर्म की जय भी बोलते जाते। डंडे से डंडे टकराते। वह
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हमदर्दी जताने में कमाई-हिन्दी क्षणिका

हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। शायद लोग दिमाग से सोचते हैं इसलिये हमदर्दी के शब्द जल्दी ढूंढ लेते दिल तक नहीं पहुंचता दूसरे का दर्द कर लेते हैं दिखावे में कमाई। नहीं करना सीखा
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हिंसक तत्वों के साथ मानवाधिकारों का प्रश्न-हिंदी लेख (With violent elements of human rights questions – Hindi article)

वर्तमान भौतिकवादी युग में यह मानना ही बेवकूफी है कि कोई बिना मतलब के जनसेवा करता है। अगर लाभ न हो तो आदमी अपने रिश्तेदार को पानी के लिये भी नहीं पूछता। वैसे यह मानवीय प्रवृत्ति पुराने समय से है कि बिना मतलब के कोई किसी का काम नहीं करता पर आजकल के समय में
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अपनी रचनाएँ भुनाओ-हास्य कविता (apni rachna-hindi hasya kavita)

श्रृंगार रस का कवि पहुंचा हास्य कवि के पास लगाये अच्छी सलाह की आस और बोला ‘यार, अब यह कैसा जमाना आया समलैंगिकता ने अपना जाल बिछाया। अभी तक तो लिखी जाती थी स्त्री पुरुष पर प्रेम से परिपूर्ण कवितायें अब तो समलिंग में भी प्रेम का अलख जगायें वरना जमाने से
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दीपावली का पर्व निकल गया-आलेख

होश संभालने के बाद शायद जिंदगी में यह पहली दिवाली थी जिसमें मिठाई नहीं खाई। कभी इसलिये मिठाई नहीं खाते थे कि बस अब दिवाली आयेगी तो जमकर खायेंगेे। हमें मिठाई खाने का शौक शुरु से रहा है और कुछ लोग मानते हैं कि मिठाई के शौकीन झगड़ा कम करते हैं क्योंकि उनकी
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इसरो द्वारा चंद्रमा पर पानी की खोज तथा ओशियनसैट-2 सहित सात उपग्रहों का प्रक्षेपण-आलेख (ocianset-2 setelite-hindi article)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र ‘इसरो- ने एक ही दिन में वह भी केवल बीस मिनट में सात उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित किये जिसमें प्रमुख रूप से ओशियनसैट-2 भी शामिल है। ओशियनसैट-2 मौसम की जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। चंद्रयान-1 की सफलता के बाद
Sep 25 2009 10:11 AM
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इसलिये सोचना ही बंद-आलेख (mor thinking is not good-hindi lekh)

अखबार में खबर छपी है कि ‘ब्रिटेन ने माना है कि तेल के व्यापार की वजह से बम विस्फोट के एक आरोपी को छोड़ना पड़ा-यह आरोपी रिहा होकर मध्य एशियाई देश में पहुंच गया जहां उसका भव्य स्वागत हुआ। इधर टीवी पर एक खबर देखी कि पड़ौसी देश हमारे देश में भीड़ में आधुनिक
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पुरुष को बैल बनाने का पैगाम-हास्य कविता (admi aur bail-hindi hasya kavita

लोगों में सोच जगाने के लिये चला रहे सभी अभियान। किताबों के गुलाम मिटाने निकले हैं गुलामी के निशान।। नारी स्वतंत्रता का नारा लगाते हुए वह मुस्कराते हैं गृहस्थी में पुरुष को बैल बनाने में ही देखते नारी की शान।। पूरी जिंदगी दिखाया समाज को उन्होंने नया
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मंगलवार का दिन भारी-व्यंग्य आलेख (bhartiya jyotish ki jay ho-hasya vyangya-in hindi)

सप्ताह में सात दिन और दिन में 24 धंटे पर मंगलवार का सुबह 11.45 मिनट का समय सभी लोगों के लिये भारी होता है-जी नहीं! यह खबर किसी भारतीय ज्योतिषवेता की नहीं बल्कि पश्चिम के शोधकर्ताओं की है। इसे शिरोधार्य करना चाहिये क्योंकि वह तमाम तरह के प्रयोग करते हैं
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बजट सत्य-हास्य व्यंग्य (hindi vyangya on budget)

उन्होंने जैसे ही दोपहर में बजट देखने के लिये टीवी खोला वैसे ही पत्नी बोली-‘सुनते हो जी! कल तुमने दो हजार रुपये दिये थे सभी खर्च हो गये। अब कुछ पैसे और दो क्योंकि अभी डिस्क कनेक्शन वाला आने वाला होगा। कुछ देर पहले आया तो मैंने कहा कि बाद में
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विवाद करने वाले श्री राम का चरित्र नहीं पढ़ते-आलेख

श्रीराम द्वारा रावण वध के बाद श्रीलंका से वापस आने पर श्रीसीता जी की अग्नि परीक्षा लेने का प्रसंग बहुत चर्चित है। अक्सर भारतीय धर्म की आलोचना करने वाले इस प्रसंग को उठाकर नारी के प्रति हमारे समाज के खराब दृष्टिकोण का प्रचार करते हैं। दरअसल समस्या वही है