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15 Mar 2010
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क्‍या आप अपने बेडरूम में झांकने देंगे?

फराह खान ‘तीस मार खां’ नाम की एक‍ फिल्‍म बना रही हैं। अभी वह बन रही है। हम यहां दूसरे तीस मार खां की बात कर रहे हैं। वे फिल्‍म नहीं,व्‍यक्ति हैं। फिल्‍म निर्देशक हैं। अपने दिबाकर बनर्जी। उनकी ‘खोसला का घोंसला’ और ‘ओय लकी लकी ओय’ तो आप ने देखी होगी। दोनों
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नज़ीर अकबराबादी की नज़र होली पर

दोस्‍तों होली के मौके पर नज़ीर अकबराबादी की दो रचनाएं पेश हैं। नज़ीर के मुरीद उनके बारे में जानते हैं। नज़ीर ने उर्दू शायरी में आम जीवन के रंग बिखेरे और ऐसे विषयों पर लिखा,जिन्‍हें आज भी साहित्‍य का विषय नहीं माना जाता। उन्‍होंने
Feb 28 2010 09:35 AM
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कभी गौर किया है गोरैया पर?

पिछले दिनों फिल्‍मों की शूटिंग कवरेज के लिए मुंबई से बाहर राजस्‍थान के जोधपुर और तमिलनाडु के कराईकुडी जाने का अवसर मिला। मुंबई से बाहर निकलने का कोई निमंत्रण मैं नहीं ठुकराता। ऐसा लगता है कि जितने दिन मुंबई से बाहर रहो, उतने दिन मेरी जिंदगी में जुड़ जाते
Feb 25 2010 12:16 PM
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मुंबई के प्रदूषण में ‘निर्मल’ प्रतिभाओं का क्षरण

देश के सभी शहरों से महत्‍वाकांक्षा की उड़ान भर कर हजारों अभ्‍यर्थी रोजाना मुंबई पहुंचते हैं। इन में से कुछ दिल्‍ली से आते हैं। दिल्‍ली से अपने सपनों के साथ मुंबई पहुंचे लोगों में एनएसडी के स्‍नातक भी शामिल होते हैं। मुंबई की मायानगरी उन्‍हें काम,नाम,
Feb 20 2010 11:21 AM
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आमिर बनाम शाहरुख

हिंदी फिल्‍मों की लोकप्रियता और बिजनेश का सही आकलन सोमवार के बाद ही होता है। सप्‍ताहांत के तीन दिन तो फिल्‍म आक्रामक प्रचार और दर्शकों को सिनेमाघरों में ठेलने की जोर-जबरदस्‍ती से चलती हैं। पिछले कुछ समय से निर्माता और वितरक पहले दिन और सप्‍ताहांत के
Feb 15 2010 01:09 PM
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शाहरुख खान के समर्थन में हैं दर्शक और यह एक प्रकार का विरोध है

‘माय नेम इज खान’ का मसला फिल्‍म के नफा-नुकसान से बड़ा है। फिल्‍म के मुख्‍य किरदार रिजवान खान को उसकी बीवी मंदिरा ने भावावेश में कह दिया है कि किस-किस को समझाते रहोगे कि मुसलमान होने के बावजूद तुम टेररिस्‍ट नहीं हो। जाओ, अमेरिका के राष्‍ट्रपति
Feb 12 2010 10:01 PM
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शाहरूख बनाम शिव सेना : आप किधर हैं ?

शाहरूख खान अभी अमेरिका और इंग्‍लैंड की यात्रा पर हैं। वे अपनी फिल्‍म माय नेम इज खान के प्रचार के लिए वहां गए है। उनके एक बयान पर शिवसैनिक भड़के हुए हैं। उन्‍होंने चेतावनी दे रखी है कि वे सिनेमाघरों में माय नेम इज खान नहीं चलने देंगे। उनकी इस धमकी से सभी
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जोधपुर की मावा कचौरी

पिछले दिनों हेमा मालिनी की प्रोडक्शन कंपनी की फिल्‍म ‘टेल मी ओ खुदा’ की शूटिंग कवरेज और फिल्म के कलाकारों से बातचीत के सिलसिले में जोधपुर जाने का मौका मिला। राजस्थान ने अपने राजसी अतीत का पर्यटन उद्योग में सुंदर निवेश किया है। राजाओं ने
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सिर्फ मनोरंजन ही नहीं,सूचना और जानकारी भी देती हैं फिल्‍में

हाल ही हमलोगों ने सिनेमा का अद्भुत चमत्‍कार ‘अवतार’ के रूप में देखा। ले‍खक-निर्देशक की कल्‍पना को तकनीक का सहारा मिल जाए तो उसकी उड़ान असीम हो सकती है। नावी ग्रह के नागरिकों को देखते हुए हम उनके दुख-दर्द से जुड़ जाते हैं और अपने ग्रह के
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हिंदी समाज की उपलब्धि बनीं प्रियंका और कंगना ???

माफ करें। फेसबुक पर कल यह राय रखी थी। दोस्‍तों ने इस पर टिप्‍पणियां दीं और अपनी साच जाहिर की। मुझे लगता है कि प्रियंका खेपड़ा और कंगना रानाऊत को मिले राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार को हिंदी समाज की उपलब्धि के तौर पर देखा जाना चाहिए। लिखने और बताने की जरूरत नहीं कि
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पाजीटिव एनर्जी से भरपूर शाहरूख खान और उनका दफ्तर

फिल्‍म पत्रकारिता में ऐसे दिन कम मिलते हैं। पिछले बुधवार 20 जनवरी को संयोग ऐसा बना कि पहले अमिताभ बच्‍चन और फिर शाहरुख खान के इंटरव्‍यू का सुयोग बना। हिंदी फिल्‍मों के लोकप्रिय स्‍टारों से मिलना हमेशा सुखद रहता है। हम पत्रकारों को यह सुविधा मिलती रहती है
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मरे नहीं हैं मंटो

सआदत हसन मंटो के बारे में कुछ भी लिखना कम होगा। पिछली बार लाहौर यात्रा में उनके निवास लक्ष्‍मी मैंशन की खोज अधूरी रही थी। हां,उनके चौराहे के अनारकली ज्‍यूस सेंटर से हो आए थे। ऐसा नहीं लगा कि पाकिस्‍तान उनके नाम पर गर्व करता है। वैसे अपने यहां भी कौन
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सलमान का सच-2

उस रात खाने के लिए गए और जागरण जंक्‍शन पर लौटना नहीं हो सका। अपनी गाड़ी चलती रही। मथुरा और आगरा हो आए। जागरण जंक्‍शन के कई मशहूर हो रहे ब्‍लागरों से मुलाकात हुई। तबियत तो हुई कि वहीं कुछ पोस्‍ट करूं,लेकिन ठंड में मन अलसा गया। हां तो,मैं बात कर रहा था
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सलमान का सच

सलमान खान को आप सभी जानते हैं। उन्‍हें हम भी जानते हैं। कई दफा मिलना हुआ है। मैं दावे के साथ नहीं कह सकता कि वे मुझे जानते हैं कि नहीं?वेसे मिलने पर हमेशा उनका भाव ऐसा रहता है कि वे सालों से जानते हैं।ऐसा भ्रम फिल्‍म बिरादरी के सारे सदस्‍य देते हैं। उनकी
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तदैव वस्तु गोविंदम

बात,मुलाकात और जज्बात का अटूट सिलसिला जारी है। कुछ लेखों, इंटरव्यू और अन्य रूपों में विभिन्न माध्यमों से आप तक पहुंचता रहा है। कोशिश रहती है कि ईमानदारी से अपनी बातें रखी जाएं, लेकिन अनेक दबावों के कारण ईमानदारी को ग्रहण लगता रहता है। सोचा है कि वाया