काव्य कलश's Image

काव्य कलश

http://kavyakalash.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
17 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
93
पाठक भेजे
853
पसंद
0
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
09.17
पसंद करें
1
नापसंद करें

बुद्धि मुझे दो शारदा

बुद्धि मुझे दो शारदा, सदन शीघ्र बन जाय ।कर पूरण स्वर-साधना, देऊ तुझे बिठाय ।।देऊ तुझे बिठाय, विराजो मेरे घर में ।ऐसे गीत लिखाय , हो अंतस में प्रकाश ।।कह `वाणी` कविराज, चित्त में शुध्दी मुझे दो |रचूं कुंडली शतक , मात सदबुद्धि मुझे दो || शब्दार्थ :
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
पसंद करें
1
नापसंद करें

आज का आदमी

आज का आदमीअपनी गरीबी के कारणबहुत कमऔरपडोसियों की तरक्की से बहुत ज्यादा दुखी हैअमृत 'वाणी'
 
amritwani.com
पसंद करें
0
नापसंद करें

झटपट बरसादो पाणी

कवि:- अमृत'वाणी'
 
amritwani.com
Jun 03 2010 08:31 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

हुआ है श्रीगणेश

काम बड़ा ही काम का , हो गया श्रीगणेश ।सावधानी यह रखना , नाम रहे ना शेष ।।नाम रहे ना शेष , नहीं गिनावे दुबारा ।पहले उनसे पूछ , कब तक रहेगा प्यारा ।’वाणी ’ मिलते दाम , डंका बाजे नाम काअक्षर लिखना सुंदर  , अक्षर-अक्षर काम का ।।भावार्थः-सारे देश में
 
amritwani.com
Apr 17 2010 03:14 PM
पसंद करें
1
नापसंद करें

सुन्दर प्रगणक

सारी जनता जानती ,क्या जनगणना होय ।सुन्दर प्रगणक देखके , मदद करे सब कोय ।।मदद करे सब कोय ,पूछो काम की बातें ।बता तेरा पड़ोस, मिंया बीबी की बातें ।।'वाणी'पूरा ध्यान ,बोले कोई कुंवारी ।निकले अर्थ अनेक ,पछतायगा तू भारी ।। भावार्थः-सम्पूर्ण देश में जनगणना के
 
amritwani.com
Apr 14 2010 12:16 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मायड़ भाषा

मायड़ भाषा लाड़ली, जन-जन कण्ठा हार ।लाखां-लाखां मोल हे, गाओ मंगलाचार ।।वो दन बेगो आवसी ,देय मानता राज ।पल-पल गास्यां गीतड़ा,दूणा होसी काज ।।अमृत 'वाणी'
 
amritwani.com
Mar 30 2010 09:15 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मायड़ भाषा

मायड़ भाषा लाड़ली, जन-जन कण्ठा हार ।लाखां-लाखां मोल हे, गाओ मंगलाचार ।।वो दन बेगो आवसी ,देय मानता राज ।पल-पल गास्यां गीतड़ा,दूणा होसी काज ।।अमृत 'वाणी'
 
amritwani.com
पसंद करें
0
नापसंद करें

एक्स्ट्रा क्लास

बस्ता उठा टिंकू चला , चार चोराहे पार |थक कर जब स्कूल पहुंचा , पता लगा रविवार ||पता लगा रविवार , नहीं बजेगा घंटा घंटी |पड़ेगी घर पर मार  , नहीं कल की गारंटी ||फिर चलाया दिमाग , मम्मी करनी कक्षा  पास |जाना   हर रविवार , चलेगी अब 
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
पसंद करें
0
नापसंद करें

आज का आदमी

आज का आदमीअपनी गरीबी के कारणबहुत कमऔरपडोसियों की तरक्की से बहुत ज्यादा दुखी हैअमृत 'वाणी'
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
Mar 26 2010 08:36 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

navi ram chalisa लेखकीय

संसार का दाता प्रत्येक जीवात्मा को उसके प्रारब्धानुसार कुछ ना कुछ ऐसा अवश्य देता है जो अन्य की तुलना में निसंदेह कुछ हद तक अतिविशिश्ट होता है। न जाने यह मेरे किस जन्म की भक्ति का प्रारब्ध है कि मां वीणा-पाणि ने अपने छलकते हुुए काव्य-कलश की एक नन्ही सी
 
amritwani.com
पसंद करें
0
नापसंद करें

कोशल्या का लाड़ला ,केवावे जगदीश ।

राम चालीसा कोशल्या का लाड़ला ,केवावे जगदीश ।किरपा कराजोए मोकळी ,रोज नमावां सीसहुणजो माता जानकी ,दया करे रघुवीर ।चार पुरसारथ मले, ओर मले मा’वीर ।।शब्दार्थ -लाड़ला-परम प्रिय, केवावे-कहलाते है ,जग- संसार,मोकळी-अपार,रोज-प्रतिदिन,नमावां-नमन करते,
 
amritwani.com
Mar 24 2010 09:07 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

तोते

तोतेएक सुबह के भूखे तोतेशाम के सूर्यास्त को देख करमेरी सो साल कीभाविस्य्वानी न करोसामने के चोराहे को देख करबस इतना सा बताओकी घर लोतुन्गाया हास्पिटलया सीधा मगघटवहांएक तोता और हेमेरे मोहल्ले में वहा बता देगामुझे कल का भविष्य |
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
पसंद करें
0
नापसंद करें

बहरे कई प्रकार के

बहरे      कई   प्रकार   के,    भांत -     भांत   के लाभ |जब तक काम पड़े  नहीं, तब तक लाभ ही लाभ ||तब तक लाभ ही लाभ ,  चिल्ला कर वक्ता  कहे |मन मन
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
पसंद करें
0
नापसंद करें

चवन्नी और अठन्नी

आज कलजहाँ देखो वहाँकई मितव्ययी दांतपराई अठन्नी को भीइतनी जोर से दबाते हैंकिबेचारी अठन्नीदबती - दबती चवन्नी बन जातीजब भीवह खोटी चवन्नी निकलतीइतनी तेज गति से निकलतीकि उन कंजूस सेठों का जबड़ा हीबाहर निकल जाताऔरइस एक ही झटके में शरीर कीनस नस की बरसों
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
Mar 21 2010 08:57 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

गुनाह

गुनाहों की दुनिया मेंह्महर गुनाह से बचते रहेइसीलिए  कि हमारेनन्हें  मासूम बच्चे हैंमगरबेगुनाह होना हीकितना  बड़ा गुनाह  हो  गयाकिआज कल गुनहगारों की बस्ती मेंबेगुनाहों  के  घरसरे आम तबाह हो रहें  |
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
Mar 21 2010 08:16 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

सांप हमें क्या काटेंगे !!

सांप हमें क्या काटेंगेहमारे जहर सेवे बेमौत  मरे जायेंगेअगर हमको काटेंगे ?कान खोल कर सुनलोविषैले   सांपोवंश समूल नष्ट  हो जायेगाजिस दिन हम तुमको काटेंगेक्योंक्योंकिहम आस्तीन के सांप हे |अमृत 'वाणी'
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
पसंद करें
1
नापसंद करें

अब हमको देना वोट

महंगाई की मार पड़ी , दिया कमर को तोड़ |हो गए हम विकलांग सभी , खड़े हैं  सब हाथ जोड़ ||खड़े हें सब हाथ जोड़ , कौन  पूंछे हाल हमारे |साथी सब गये छोड़ , दूर बहुत हैं किनारे ||मंत्री जी समझाए , दिया उनको तुमने वोट |नहीं रहे कमर एसी अब  हमको देना
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
पसंद करें
0
नापसंद करें

हर इंसा की जिंदगी में

हर इंसा की जिंदगी में                           कम से कम एक बार
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
पसंद करें
0
नापसंद करें

भोजन की मात्रा

भोजन की उतनी ही मात्रा अमृत के समान  है, जिसे ग्रहण करने के बाद आप को,किसी भी कार्य में बाधा उत्पन्न  नहीं होय |
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
पसंद करें
0
नापसंद करें

जमी जमाई दूकान

एक नेताजी की जमी जमाई दूकान असी खतम होगी ,किईं चुनाव में तो वांकी जमानत ही जप्त होगी ।बाजार में मारा पग पकड़ बोल्या मर्यो कविराज ,ईं चुनाव में मारी ईं भारी हार को थोड़ो बताओ राज । में धोती उठाके सबने वो निषान दिखायो ,झटे नेताजी के छ महीना पेली एक पागल
 
amritwani.com
पसंद करें
0
नापसंद करें

धोळा में धूळो

धोळा,कुदरती हाथां उं दियो थको वो सर्टिफिकेट हे जिने ईं दुनियां को कोई भी मनक राजी मन उं कदै लेबो न छावे ,पण जीमणा में खास ब्याईजी-ब्याणजी की खास मनवार के न्यान सबने न-न करर्ता इंने हंसतो-हंसतो लेणाईज पड़े। भारतीय समाज की कतरी पीढ़ियां निकळगी होचबा को तरीको
 
amritwani.com
पसंद करें
1
नापसंद करें

सबसे बड़ा दुःख

आता है अचानक दौड़ता हुआ सबसे बड़ा दुःख जो कुछ ही समय में एक ही सवाल से सबका इम्तिहान लेकर चला जाता है आहिस्ता-आहिस्ता जिन्दगी की छोटी सी किताब में अपने ही हाथों से वो एक नया पाठ लिख कर जाता है जिसमें बिना किसी पक्षपात के साफ-साफ कई नाम लिखे होते हैं जैसे
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
पसंद करें
1
नापसंद करें

आतंकी घाटियां

आतंकी घाटियॉंऔर रेगिस्तानइन दोनों मेंकेवलदो ही अंतर खास है ।पहला अंतररेगिस्तान मेंपानीखून की तरहां बहता हैऔर आतंकी घाटियों मेंखूनपानी की तरहां बहता है ।।दूसरा अंतररेगिस्तान मेंआदमी की मौत के लिएयह बहुत जरूरीकिवह दिखने में गुनहगार होकिन्तुआतंकी घाटियों
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
पसंद करें
0
नापसंद करें

वें हजारों बार जीए

शहरों में कई लोगइसलिए मर रहेंकिउन्हें जीना नहीं आयाऔर कई लोगमहजइसीलिए जी रहें किउन्हें मौत नहीं आ रही ।बचे हुए लोगरो रहेकुछ उनके वास्तेजो बेमौत मर गएकुछ उनके वास्तेजोन जाने कब मरेंगे ।चंद भले लोगचंद भले लोगों के लिएरोजदुआएं कर रहे हैंहे प्रभु !वें हजारों
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
Mar 11 2010 05:04 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

धोती-जब्बा पगड़ी

धोती-जब्बा-पगड़ीमाथे पर तिलक और चोटीगले में मालाराम-नाम का दुषालागायों को चराने के लिएलूटेरों को डराने के लिएहाथ में लठयह सब कुछ देखविगत कुछ वर्शों सेषहरों के कई लोगमुझे इस तरहां देखतेजैसेमैं उनकी टी टेबल पर पड़ा हूँ कल का उपेक्षित अखबारवे हॅसते हुए देख
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
पसंद करें
0
नापसंद करें

मृत्यु

मृत्यु केकुछ रूप देखे हैंमैंनेएक वोजिसमेकुछ लोगजीते जी मर जाते हैं ।एक वोजिसमेंकुछमर कर भी जीते हैं ।एक वो भी हैजिसमें कुछ ऐसे भी हैंजोमर कर ही जीते हैंऐ पुरूषार्थी रथ !समय-समय परसभी कोबताते रहनाकैसी-कैसी मृत्युकरेगी उनका आलिंगन ।।
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
Mar 09 2010 05:29 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

भूख मर्यो

बालपणा रो नाम भीखा मारू हो पण आखा गॉंव का साथीड़ा वांके नाम को सरलीकरण करता -करता वींको उपनाम भूखमर्यो राक्यो । वसान अक्कल का माइक्रोस्कोप उं देखां तो भूखमर्या में भी मंग्तापणा का कतराई त्र्या का वाइरस फूल गोबी में लट्टा के न्यान साफ-साफ दिख जाता हा ।
 
amritwani.com
Mar 08 2010 05:52 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

नई का बेटा (कवि अमृत 'वाणी')

रचनाकार कवि अमृत'वाणी (अमृत लाल चंगेरिया कुमावत )रिकॉर्ड :- 19/2/2010
 
amritwani.com
Mar 08 2010 05:23 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

ओटेमेटिक घड़ी

ऐ मेरीओटेमेटिक घड़ीकाश मैंने तुझसेइतना ही सीख लिया होताबस मुझे चलना हैतेरी तरहसर्दी-गर्मी-बरसातआंधी-तूफांदिन हो या रातराह मेंफूल हो या कांटेहर हाल में चलना हैहर दिनदिन-रात चलना हैअगरइतना ही सीख लिया होतातो आजमेरी घड़ीइतनी नाजुक नहीं
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
Mar 07 2010 05:02 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

भोळाबा

गाँव का अनपढ़ भोळाबा की रई जसी मुसीबत वीं दान एकदम परवत जसी विकराल बणगी, जणी बगत मोटा शहर में हात-आठ जणा का हण्डाउं कजाणा कसान ई वे अचानक बिछुड़ग्या । हाल तो एक घण्टोई न व्यो वेई अन छीज-छीज अन भोळाबा को कोई बाटकी खान खून कम पड़ग्यो । थोड़ी देर तो वाने खूब
 
अमृत 'वाणी'
Mar 06 2010 02:52 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

शिक्षा

केवल मुद्रा-बल सेविभिन्न प्रकार कीमुद्राएं बना-बना करपीछले कई वर्शों सेकहीं दिन कोकहीं रात कोकहीं सुबह कोकहीं शाम कोभांत-भांत केहजारों विद्यालयों मेंलाखों अधूरेकर रहेंकरोड़ों को पूरेकर रहेकरोड़ो पूरे ।इसीलिएअब तकना तो उन्हें बना सके पूरेनास्वयं ही बन सके
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
Mar 05 2010 05:09 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

प्राईवेट मोटर

प्राईवेट मोटर मेंम्हारा सासरा कादो रूप्याई लागे ।पणसरकारी गाड़ी को कण्डक्टरआठ रूप्या मांगे ।।मूं बोल्योथू पैसा पूरा लेवेअनटिकट आदोई न देवे ।वो बोल्योअरे भोळा जीवइनै तो रोड़वेज की नौकरी केवे ।।मूं बोल्योसरकारी गाड़्या मेंअतरो भाव बढ़ग्यो ।ओरम्हारा ढाई रूप्या
 
amritwani.com
Mar 04 2010 05:12 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बहुत कुछ

आज तकआज नहीं तो कलसबको मिलता रहाउसकीजरूरत मुताबिककुछ ना कुछ ।आप ही बताइये जनाबजहान में आज तककिसको नसीब हुआसब कुछ ।।फिर भीलाखों लोगलाखों बारन जाने क्योंबेवजहरोते-रोते चले गएकुछ तोआज भी रो रहेकुछबेशककल तक रोने ही वालेदेखोदेखोतीनों किस्मों केचाहो जितने
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
Mar 03 2010 05:00 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

प्रेम रंग

चाय अन कप के न्यान होळी रो त्योहार अन रंग एक दूजा का असा लाड़ला साथी र्या थका के एक के बना दूजा ने एकल्लो रेबो आज तक कदी हुंवायोई कोनी । ज्यूं-ज्यूं होळी को तेवार लगतो-लगतो आवे ख्ूणा-खचारा में पड़्यो थको रंग, करंगेट्या के न्यान पड़्यो-पड़्योई रंग बदले । शेयर
 
amritwani.com
Mar 03 2010 04:53 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

परसाद्यो भगत (राजस्थानी कहानी)

आकाई गाँव में दो नाम मनकां की जिबान पे छड्या थका हा। एक भगवान शंकर को नाम अन एक वांको लाड़लो परसाद्यो भगत । यो गाँव बस्यो जदकाई ये दोई नाम गाँव के साथे-साथे रिया । गांव वाळा को कसोई काम रूक्यो कोने दन-दन सब प्रकार का आनंद बढ़ताई ग्या ।शंकर भगवान की मूरत
 
amritwani.com
Mar 03 2010 04:34 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बिकाउ साईकिल

साथियोंसच एकअतिसुंदर साईकिलबिकाउ है साहब ।भगवान ही जानेकेरियर कहां परपेडल और पीछे का पहिया गायब ।।सुंदरसी सीट हैगजब की घण्टी हैकितनेग्यारह घण्टों की गारण्टी है ।अतितीव्र गति से चलतीवायु में उड़तीविषेशताएक्सीडेण्टबहुत जल्दि करती है ।।टूटा हुआ हेण्डल
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
Mar 03 2010 10:46 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

आज भी जिंदा है

शहीदों की अंतिम श्वांसो पर हर इतिहासआज भी जिंदा हैचंद बंदों की खिदमतों परआसमां का खुदाआज भी जिंदा हैंसुर-ताल सेकलमकारोंआग और पानीबरसाओं तो जानेवेदीपक और मल्हार रागें तोआज भी जिंदा हैं ।
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
Feb 27 2010 05:02 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

जिन्दगी

अगर वेमहजश्वांस लेने को हीजिन्दगी समझते हैंतो जाओउन्हें कहदोकिबेशकहम जी रहे हैं
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
Feb 26 2010 05:02 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

पनघट के प्रहरी

सुर्खइतना कह देतें प्यास कितनी गहरी हैपनिहारिनों की चलेंबता देती हैंगागर कितनी भरी हैयुगो-युगो से होती आईप्यास परछलकती गागर कुर्बानमगरफिर भी क्योंघट-घट परपनघट के प्रहरी हैं ।
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
Feb 25 2010 05:02 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

डबल बेड

उठ डबल बेड से बंद कर रेड़ियो, पंखा, टी. वी., टेप ,कुलर और निकल देहलीज से बाहर लेकर दोपहर का टिफिन करके खून का पानी बहादे पसीना खरीद मेहनत के बाजारों से उन हीरों के बदले रोटीजल्दि लौट आना घर मुस्कुराती हुई संध्या के साथ जहां उसी देहलीज पर सुबह से खड़े
 
amritwani.com
टैग: हिंदी
Feb 24 2010 10:02 PM