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पुरुषनिर्मित सौन्दर्यकसौटी पर ही खुद को तोलती है औरतें
विचित्र तो यह है कि स्त्री की मुक्ति का अहसास होने के बावजूद आज भी स्त्री पुरुषनिधार्रित सौन्दर्यमानकों के खांचों में खुद को फिट करने की होड. में शामिल है। आज भी उनका सौंदर्यबोध उनका सपना पुरुष की नज़रों में सुन्दर लगना ही है। उनकी
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Jun 18 2010 01:11 PM


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