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खामोशी..बहुत कुछ कहती है

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27 May 2010
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जहर

शरीर का नाश करने वाले जहर के बारे में तो आपने खूब सुना होगा, पर अब बाजार में मन का नाश करने वाला जहर भी खुले आम बिक रहा है। महिलाओं को मनचाहे कार्टून कैरक्टर में ढालो। खूब धन कूटो। भाभी जैसे पवित्र नाम को भी बेच डालो। यही सब तो इन दिनों हो रहा है।सविता
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भीगती नदी

मैं देख रहा हूँ पता नही कबसे देखता रहूंगा पता नही कबतक इस शाम के अंधेरे में कितना प्रकाश है इस खामोशी में कितना संगीत है सामने निरंतर बहती नदी बारिश में खुलकर नहा रही है वह पत्थर भी भींग रहा है जिसपर बैठा हूँ मैं वो शहर भी भींग रहा होगा जो मेरी पीठ के
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
May 22 2010 08:51 PM
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खामोशी..बहुत कुछ कहती है

*** पहली बार ***जब छूकर गुजरती है ये ठंडी हवाएंगुजरा जमाना याद आता है, याद आता हैतेरा और मेरा मिलना पहली बार...*** खामोशियाँ ***तेरी खामोशियों में एक अदा है,तेरी बातों में एक नशा है,तू लाख मेरे इजहार का इनकार करतेरे इन्तेजार में भी जिन्दगी का अलग ही एक
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
May 17 2010 09:54 AM
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खामोशी..बहुत कुछ कहती है

*** याद ***भुलाना चाहोगी मुझे जितना, तुझे उतना याद आऊंगातू तडपेगी मेरे लिए, मेरी मौत के बाद...*** रौशनी ***तेरे नाम की चमक से अँधा हुआ जाता हूँ मैंबस इतनी रौशनी बची रहे कि तुझे देखता रह सकूं...*** समय ***जानता हूँ तेरे पास समय नही है मेरे लिएपर
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
May 15 2010 02:24 PM
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दुश्मनी...

कल शाम तेरे जुल्फों कोलहराते हुए देखाऔरपलभर मेंहवाओं से दुश्मनी हो गयीखिड़की से अन्दर आतीसूरज की किरणेंतेरे चेहरे पे पड़ रही थीऔर मैं सूरज कोअपने दिल की जलन मेंजला रहा थाउसी वक़्त...
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
May 14 2010 07:01 PM
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और तभी मैं आप सबकी शिकायतों को दूर कर पाऊंगा

कई लोगों की शिकायतें आ रही है मेरे पास... लोग कह रहे है कि मैं हमेशा दुःख और गम वाले पोस्ट ही क्यों लिखता हूँ... सही भी है... मैं भी सोंच रहा था कि मैं हमेशा दुखी-दुखी पोस्ट क्यों लिखता हूँ... जबकि मैं अच्छी और प्रसन्न पोस्ट भी लिख सकता हूँ... दुनिया में
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
May 12 2010 04:54 PM
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मौत को दावत!

नक्सल प्रभावित जिलों के वाशिदें खौफ में जी रहे हैं तो बगैर संसाधनों के जवान वैसे इलाकों में बेमौत मरने को मजबूर हैं। नक्सली कभी भी कहीं भी कायराना हरकत को अंजाम देते हैं और हमारे खुफिया तंत्र को नेताओं के इशारों पर उनके प्रतिद्वंदियों की बखिया उधेड़ने से
May 08 2010 11:24 PM
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वो चली गयी...

वो चली गयी... हमेशा के लिए चली गयी... इस दुनिया को छोड़ कर एक नयी दुनिया में... एक ऐसी दुनिया में जहाँ से कोई वापस नहीं आता... वो चली गयी... अपने पिता को अकेला छोड़ कर चली गयी... रोता बिलखता छोड़ गयी वो अपने पिता को... उसका जाना तय नहीं था, फिर भी वो चली
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
May 08 2010 02:44 PM
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Why... Why... Why...???

Why it is happening with me? Why I have to leave everything always? Why people leave me alone, whom I love most? Why... Why... Why...??? She is going to leave me forever... She is going in that world... From where nobody come back ever... She is
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
टैग: english
May 06 2010 12:39 PM
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सवाल...

मैं कौन हूँ??? मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सवाल... आखिर मैं कौन हूँ? मेरा क्या अस्तित्व है? इस दुनिया के लिए आखिर मेरी क्या जरूरत है? मैंने इस धरती पर जन्म क्यों लिया है? मैं यहाँ क्या कर रहा हूँ?ये कुछ ऐसे सवाल है जिनके जवाब ढूंढने की मैं बहुत कोशिश करता
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
May 04 2010 06:32 PM
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मेरा जीवन...

६ दिसम्बर २००५: जब मैं २१ साल का था तब में अपनी जिंदगी को ७-७ साल के तीन भागों में बाँट कर तीन कवितायेँ लिखी थी. मैं सोंचा करता था आखिर मैंने क्या किया है आज तक... मैंने क्या सीखा है आज तक... मेरी आदत थी मैं रोज रात लगभग आधे घंटे छत पर अकेले बैठा करता था
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
May 01 2010 01:44 PM
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जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई...

प्रिय कं....जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई....पहली बार तुम्हे तुम्हारे जन्मदिन की बधाई फ़ोन के बजाय अपने ब्लॉग पर दे रहा हूँ. क्या करूँ, तुमने ही तो मना किया है मुझे फ़ोन करने से... मुझसे बात करने से... एक छोटी सी गलती... सॉरी शायद बहुत बड़ी गलती कर बैठा था
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
May 01 2010 01:44 PM
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That was a day...

           That was a day when I saw you every where, And today I search you in every face... That was a day when I felt your presence every where, And today perhaps I have lost you forever... That
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
टैग: english
May 01 2010 01:43 PM
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I want to write something

I want to write something, perhaps everything but I never want to remember you I want to live in my dream, perhaps always but I never want to see you I also want to cry loudly, perhaps very loudly but I never want to smile with you I want to write
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
टैग: english
May 01 2010 01:43 PM
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रोयीं आँखें मगर..५(अंतिम)

sansmaran Tuesday, March 10, 2009रोई आँखें मगर.....५ मेरे ब्याह्के कई वर्षों बाद एक बार मैं अपने मायके आई थी कुछ दिनोके लिए। शयनकक्ष से बाहर निकली तो देखा बैठक मे दादाजी के साथ एक सज्जन बैठे हुए थे। दादा ने झट से कहा,"बेटा, इन्हे प्रणाम करो!'मैंने किया
Apr 10 2010 06:22 PM
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रोई आँखे मगर.....4

दादीअम्मा जब ब्याह करके अपनी ससुराल आई,तो ज्यादा अंग्रेज़ी पढी-लिखी नही थी, लेकिन दादाके साथ रहते,रहते बेहद अच्छे-से ये भाषा सीख गयीं। इतनाही नही, पूरे विश्वका इतिहास-भूगोलभी उन्होंने पढ़ डाला। हमे इतने अच्छे से इतिहास के किस्से सुनाती मानो सब कुछ उनकी
टैग: बचपन.
Apr 07 2010 10:18 AM
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खामोश हो गई सांसे

एक हजार नक्सली... पुरानी रणनीति... और 76 जवान बने शिकार। हमले की निंदा हुई... बैठक हुई... बयानबाजी हुई.. बयान आया चूक हो गई। इन सबके बीच सबने कुछ न कुछ जरूर कहा... लेकिन बयानों से क्या हमारे वीर वापस लौट आएंगे। केंद्र और राज्य सरकार क्या जबाव देगी उन
Apr 07 2010 02:09 AM
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रोई आँखे मगर....3

मुझे गर्मियोंकी छुट्टी की वो लम्बी-लम्बी दोपहारियाँ याद है, जब हम बच्चे ठंडक ढूँढ नेके लिए पलंगके नीचे गीला कपड़ा फेरकर लेटते थे। कभी कोई कहानीकी किताब लेकर तो कभी ऐसेही शून्यमे तकते हुए। चार साढे चार बजनेका इंतज़ार करते हुए जब हमे बाहर निकलनेकी इजाज़त
Apr 04 2010 07:40 PM
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Nature And Science

कल अपने भाई के साथ मिलकर एक नए ब्लॉग का निर्माण किया है मैंने. ब्लॉग का नाम है "Nature And Science". ये ब्लॉग नाम के ही अनुसार विज्ञान से जुडा ब्लॉग है. मूल रूप से ये मेरे छोटे भाई "पीयूष प्रसाद" का ब्लॉग है (क्योंकि मेरा तो दूर-दूर
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Apr 02 2010 06:57 PM
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'बेगाने' की शादी में अबदुल्ला दीवाना

सानिया मिर्जा और पाकिस्तान के क्रिकेटर शोएब मलिक के निकाह बात तो आप जानते ही होंगे। जानेंग कैसे नहीं... आखिर अखबारों के पन्ने और न्यूज चैनल्स सानिया को सनसनी जो बनाए हुए हैं। देशभर में कई अहम ख़बरें हैं मसलन जनगणना-2011 की शुरुआत और पढ़ाई का हक कानून का
Apr 02 2010 12:31 AM
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रोई आँखे मगर....2

दादा मेरे साथ खूब खेला करते थे। वो मेरे पीछे दौड़ते और हम दोनों आँखमिचौली खेलते। मैं पेडोंपे चढ़ जाया करती और वो हार मान लेते। सायकल चलाना उन्ह्नोनेही मुझे सिखाया और बादमे कारभी.....और सिखाई वक्त की पाबंदी, बडोंकी इज्ज़त करना और हमेशा सच बोलना, निडरता से
Apr 01 2010 03:30 PM
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खामोशी..बहुत कुछ कहती है

आज घर पर ही हूँ... कोई काम नहीं था तो बैठ गया अपने कंप्यूटर के साथ इन्टरनेट पर नयी और ताजा खबर तलाशने... कुछ नए ब्लॉग भी पढ़ रहा था तभी एक ब्लॉग पर एक साथ दो खबरें मुझे मिली... खबर मिलते ही सोंच में पड़ गया कि क्या ऐसा भी हो सकता है... आखिर दुनिया को हो
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Apr 01 2010 02:36 PM
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रोई आँखें मगर......1.

रोई आँखें मगर.......मई महीनेकी गरमी भरी दोपहर थी। घर से कही बाहर निकलने का तो सवालही नही उठता था। सोचा कुछ दराजें साफ कर लू। कुछ कागजात ठीकसे फाइलोमे रखे जाएं तो मिलनेमे सुविधा होगी। मैं फर्शपे बैठ गई औरअपने टेबल की सबसे निचली दराज़ खोली। एक फाइलपे लेबल
टैग: बाबुल
Apr 01 2010 12:01 AM
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mind, culture and slavery

from the very begining i have been thinking about mind, culture and slavery. in this article i will try to give all of you the account of relationship between these three thing. first, mind by nature is too complex to study. by nature it is vunerable and
Mar 31 2010 12:06 PM
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पाँच चौराहा....

चौराहा हमेशा से मुझे सम्मोहित करता रहा है... शाम ढलते ही मैं घर के पास वाले चौराहे पर पहुँच जाता हूँ... ढेर सारे नजारे जो मिलते है... चौराहे को महसूस करते हुए अब तक मैंने ५ कवितायें लिखी है... 1चौराहे पर खड़ी गाँधी की मूर्तिनिर्विकारएकटक देखतीअपनी बनाई,
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Mar 23 2010 03:29 PM
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सफलता और असफलता...

जीवन का दूसरा नाम है संघर्ष. उपलब्धियां वही हासिल करता है जो निरंतर संघर्ष के लिए तैयार रहता है. प्रतिभा हर शख्स में होती है, लेकिन सभी उपलब्धियां हासिल नहीं कर पाते. इन्हें हासिल वही करते हैं जो विपरीत स्थितियों से
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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दुसरे खुद-ब-खुद आपसे प्रेम करने लगेंगे....

खुद से प्रेम करना और दूसरों से प्रेम करना-ये दोनों बातें एक-दूसरे पर निर्भर करती हैं. दूसरों के लिए जीना नहीं सीखते तो खुद से भी प्यार नहीं कर सकते और खुद से प्यार नहीं कर सकते तो दूसरों के लिए भला कैसे जीना सीखेंगे. जब हम स्वयं खुश और संतुष्ट होते
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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दौड़ में जीना है और पछताते हुए मरना है

मेरे पास गाडी है, बंगला है, बैंक बैलेंस है... तुम्हारे पास क्या है?बहुत ही मशहूर फिल्मी डायलोग है ये, पर आज के युवाओं का बहुत बड़ा सत्य भी है. आज के युवाओं के पास ये सब कुछ है, गाडी भी है... बंगला भी और बैंक बैलेंस भी... पर अगर नहीं है तो आत्म-संतुष्टि.
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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बहुत अच्छा लगेगा मुस्कुरा कर...

"खुश रहना स्वस्थ रहने के बराबर है। इसके लिए प्रयास आपको खुद करना होगा। यह दावा आस्ट्रेलियाई पत्रकार और लेखक सोफी स्काट ने अपनी किताब 'रोडटेस्टिंग हैप्पीनेस : हाउ टू बी हैप्पीयर [नो मैटर ह्वाट] में किया है। स्काट ने इसके लिए कोई फार्मूला नहीं बताया है।
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Mar 09 2010 10:34 AM
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एक पत्र रेल मंत्री साहिबा को....

आदरणीय रेल मंत्री साहिबा,आशा करता हूँ आप और आपका रेल अच्छा होगा (जोकि अच्छा बिलकुल नहीं है). कुछ बातें है जो आपसे कहना चाहता हूँ. अभी २ तारीख को मैं सीमांचल एक्सप्रेस (२४८७) से पूर्णिया से दिल्ली आया हूँ. कोच नंबर S2 बर्थ नंबर 35. जहाँ तक मुझे पता है एक
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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Mar 08 2010 01:05 PM
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जब कभी अपनों की आँखों में आंसू देखता हूँ

जब कभी अपनों की आँखों में आंसू देखता हूँ, मेरा दिल भी रोने लगता है. तड़प हो उठता है मेरा मन. जी करता है मैं भी जार-जार रोऊँ...आज भी मैंने एक अपने बहुत अजीज को रोते हुए देखा. हुआ कुछ यों की दिल को उनके बहुत ठेष लगी, आँखों में दो बूँद उतर आये उनकी. मेरे उस
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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Mar 08 2010 01:05 PM
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मैं जिन्दा रहते हुए भी मुर्दों जैसा जी रहा हूँ

लोग कहते है मैं बहुत भावुक इंसान हूँ. मुझे भी ऐसा ही लगता था पर कुछ दिनों पहले तक ही. लोगों को पीड़ा में देखकर मेरा ह्रदय भी पीड़ित हो जाया करता था. किसी के भी दुःख में मैं भी दुखी हो जाया करता था, लोगों की ख़ुशी में मैं भी हँस लिया करता था. बातें मेरे दिल
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Mar 08 2010 01:05 PM
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आत्मा-परमात्मा, ज्योतिष नाम की चीज होती है....

देखते देखते मेरे ब्लॉग पर पोस्टों की संख्या १०० पार गयी और खुद मुझे पता नहीं चला. पता चलता भी तो कैसे? बीते महीने मैंने अपने ब्लॉग पर समय भी तो बहुत कम दिया था. अवकाश पर था, घर पर छुट्टियों का मजा ले रहा था. माँ के हाथ की बनी रोटी और चाय की चुस्कियों से
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Mar 08 2010 01:05 PM
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मैं असलियत से वाकिफ हो चूका हूँ

हेल्लो क......, कल ही तुम्हे एक पत्र लिखा और आज फिर मजबूर हो गया हूँ और संभवतः ये मेरा आखिरी पत्र है तुम्हे. क्योंकि मैं और भ्रम में नहीं जीना चाहता. मेरा भ्रम अब टूट चूका है. मैं असलियत से वाकिफ हो चूका हूँ. किसी के होने या न होने से जिंदगी नहीं रूकती
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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Mar 08 2010 01:05 PM
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बस तुम फिर से मेरी दोस्त बन जाओ...

प्रिय क.....,तुम्हारे लाख मना करने के बावजूद हरबार मैं तुम्हे पत्र लिखने के लिए मजबूर हो जाता हूँ. क्या करूँ तुम्हे भूलने की बहुत कोशिश करता हूँ पर हर कोशिश व्यर्थ साबित होती है. तुमसे अलग मैं अपनी जिंदगी सोंच ही नहीं पाता. करूँ भी तो क्या तुमने ही तो
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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Mar 08 2010 01:05 PM
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क्योंकि अभी मैं कोई जवाब नहीं दे सकता

प्रिय ......., मेरा ये पहला पत्र है तुम्हे. कहाँ स शुरू करू, क्या लिखूं कुछ भी समझ नहीं आ रहा. बस लिखने बैठ गया हूँ. आज से एक महीने पहले तुमने मुझसे पूछा था कि क्या मैं तुमसे शादी करूँगा... तुम्हे क्या जवाब देता समझ में नहीं आ रहा था. तुम्हे मेरे बारे
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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Mar 08 2010 01:05 PM
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आग लगा आया हूँ जिंदगी में अपनी...

आज अपनी जिंदगी में आग लगा आया हूँ. अभी कुछ ही दिनों पहले मैंने आप लोगों से अपने नोवल "God makes everything right" के लिए आशीर्वाद माँगा था. आप कुछ लोग है जिन्हें मेरे जूनून ख़त्म होने से तकलीफ होती है. जिन्हें मेरा लिखना अच्छा लगता है. जिन्हें मेरी लिखी
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Mar 08 2010 01:05 PM
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आखिर क्या करूँ मैं...

शाम ढल चुकीरात गहरा रही हैचारों तरफ अँधेरा ही अँधेरा हैराह नजर नहीं आ रही हैइन्तजार करूं रात ढलने कानयी सुबह आने काया फिर चलता रहूँअँधेरे में हीपर कहीं इस अँधेरे मेंठोकर खा कर गिर पड़ा तोकहीं अँधेरे में गलत राह पर निकल पड़ा तोफिर मंजिल और दूर हो
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Mar 08 2010 01:05 PM
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ज़रा सोंचिये... आपका आँगन भी सुना है?

अक्सर मुझे अपने बचपन के दिन याद आते है। हर रात अपनी तन्हाईयों में अपने पुरे परिवार को याद करता हूँ। वो बचपन के दिन कितने हसीं थे जब मैं अपने पा, माँ, दी, और भाई के साथ रहता था। मेरा घर बिहार के एक छोटे से शहर पूर्णिया में है। छोटा सा सही पर हर कुछ मौजूद
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Mar 08 2010 01:05 PM
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क्या तुम फिर बनोगी मेरी प्रेरणा... (a letter to my love)

हेल्लो क.....,कैसी हो? बस ऐसे ही पूछ रहा हूँ क्योंकि जानता हूँ तुम बहुत अच्छी होगी. कल वैलेंटाइन डे था, वैलेंटाइन डे मतलब प्यार का दिन... पर मेरी जिंदगी में प्यार कहाँ है? ओह्ह सॉरी, मेरी जिंदगी में प्यार तो है हाँ तुम नहीं हो...आज भी याद है मुझे
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
टैग: letters
Mar 08 2010 01:05 PM