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दीपक भारतदीप की हिंदी सरिता

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06 Jun 2010
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बौनेपन का अहसास-हिन्दी शायरी

हम जो भी दृश्य देखते उस पर सोचने लगते हैं, अपने अंतर्मन में पहले से ही स्थित तयशुदा विश्लेषणों के अनुसार उस पर निकालते हैं निष्कर्ष। हम कुछ सुनते हैं उस पर वैसे ही सोचते हैं जैसे कि पहले सुना हो। हम स्पर्श करते हैं फूल या लोहा बेपरवाह होकर जैसे कि उनको
Jun 06 2010 05:39 PM
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वफदारी के दलाल-हिन्दी शायरी

हुक्मरानों ने तय कर दी सरहदें आम इंसानों का रास्ता रोकने के लिये, उनकी तन्ख्वाहों पर पलने वाले पहरेदार खड़े हैं आजादी से चलने वालों को टोकने के लिये। सिंहासन पर बैठने वाले चलते हैं उड़न खटोले में सांस लेते हैं मातहतों के टोले में, बेईमानों और दहशतगर्दों का
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महानता के शिखर-हिन्दी शायरी

चाहने से सभी महान नहीं बन जाते हैं, आकाश छूने की कोशिश में कई लोग जमीन पर आकर गिर जाते हैं। जिन्होंने जमीन पर चलते हुए पत्थरों की आवाज को भी सुना है, कांटो के साथ भी दोस्ती को चुना है, चलते चलते पड़े छाले जिनके पांव में, लालच की खातिर पकड़ा नहीं रास्ता बड़े
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हिन्दू धर्म संदेश-अज्ञानी करते हैं स्वर्ग की कल्पना

भर्तृहरि महाराज के अनुसार  ————————- स्वपरप्रतारकोऽसौ निन्दति योऽलीपण्डितो युवतीः। यस्मात्तपसोऽपि फलं स्वर्गस्तस्यापि फलं तथाप्सरसः।। हिन्दी में भावार्थ-शास्त्रों का अध्ययन करने वाले कुछ अल्पज्ञानी
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हिन्दू धर्म संदेश-योग साधना से मन मजबूत होता है

प्रच्छर्दनविधारणाभ्यां वा प्राणस्य। हिन्दी में भावार्थ-प्राणवायु को बाहर निकालने और अंदर रोकने के निरंतर अभ्यास चित्त निर्मल होता है। विषयवती वा प्रवृत्तिरुपन्न मनसः स्थितिनिबन्धनी।। हिन्दी में भावार्थ-विषयवाली प्रवृत्ति उत्पन्न होने पर भी मन पर नियंत्रण
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काली कारतूत पर साधुता की संज्ञा लिखाते-हिन्दी व्यंग्य कविता

शौहरत के शिखर पर वह बैठे हैं नीचे आने से उनको डर लगता है, उनके ऊंचे इंसान होने का वहम बना हुआ है लोगों में नीचे आने पर अपने बौने चरित्र की पहचान होने से उनका दिल घबड़ाने लगता है। ———- साधु ही हमेशा मौन की राह नहीं अपनाते, कसूरवार भी उसकी
Apr 24 2010 06:52 PM
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वक्त पड़े तो वह दिल भी बदल लेते हैं-हिन्दी शायरी

किसी के एक चेहरे की एक अदा पर यकीन न किया करो बाज़ार के सौदागरों के इशारों पर अदाकार कभी मुखौटे तो कभी अदायें बदल लेते हैं। तुम अपने जज़्बातों पर काबू रखो जुबां से भले ही तारीफ करो पर दिल मत लगाओ उनकी अदाओं में वक्त पड़े तो वह दिल भी बदल लेते
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जुबां का रिश्ता-हिन्दी शायरी

आखों से अब अश्क नहीं बहते क्योंकि दर्द का दरिया सूख गया है, जहां दिल लगाया दिल्लगी समझ जमाने ने मुंह फेरा अब बयां नहीं करते किसी से अपने हाल अपनी ही हकीकतों से हमारी जुबां का रिश्ता टूट गया है। ———- उनकी प्यार भरी निगाहें देखकर हमने
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नीलामी में इनाम-हास्य कविता

आशिक जूझ रहा था क्रिकेट खिलाड़ी बनने के लिये तो माशुका भी खड़ी थी फिल्म अभिनेत्री बनने की पंक्ति में कई उसने साक्षात्कार भी दिये। बढ़ते जा रहे थे दोनों के कदम इश्क के साथ अपने लक्ष्य की तरफ भी सफलता के लिये। पर आशिक की चिंतायें बढ़ रही थी रौशन करना चाहता था
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भूत की सवारी-हिन्दी व्यंग्य

एक विशेषज्ञ का मानना है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी हमले में बिन लादेन बहुत पहले ही मारा जा चुका है पर अमेरिका के रणनीतिकार युद्ध जारी रखने के लिये उसका भूत बनाये रखना चाहते हैं ताकि वहां की खनिज, कृषि और तेल संपदा पर कब्जा बना रहे। ऐसा लगता है कि अमेरिकन
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जुबान में ढूंढते हैं प्यार भरे शब्द-हिंदी शायरी

कहां जाकर दिल बहलायें सभी जगह दर्द का दरिया बहता पायें ढूंढते हैं कुछ हंसते हुए चेहरे और खुश दिल पर कोई जानता ही नहीं कैसे जिंदगी को जिया जाता है सभी को अपने दर्द सहता पायें जुबानों में ढूंढते हैं अपने लिये प्यार भरे शब्द पर लोग अपनी दौलत और शौहरत के ढेर
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ऐसे लोग कम हैं-हिन्दी व्यंग्य कविता

सभी को बताये रास्ते पर खुद चलें, ऐसे लोग कम हैं। दूसरे को सिखायें दांवपैंच, जो अजमाने में खुद बेदम हैं।। हवा के झौंके से कांपने लगता है पूरा उनका बदन, जमाने को डरपोक बतायें, अपनी बहादुरी के उनको वहम हैं।। दूसरों की रौशनी में चले हैं पूरी जिंदगी का
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इश्क में सच-हास्य कविता (ishq aur sach-hasya kavita)

आशिक शिष्य ने अपने इश्क गुरु से कहा ‘‘आदरणीय फिर एक माशुका मेरी जिंदगी में आई पर उसने मेरा इश्क का मामला मंजूर करने से पहले सच बोलने वाली मशीन के सामने साक्षात्कार की शर्त लगाई। आपसे सलाह लेकर अपने इश्क के मसले सुलझाने में पहले भी मदद नहीं मिली इसलिये इस
Feb 14 2010 01:06 PM
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किसके चिल्लाने की बारी है-हिन्दी व्यंग्य कविता

भ्रष्टाचार, अत्याचार और व्याभिचार को भी जाति, भाषा और धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश जारी है, अक्लमंद दिखाते हैं बहादुरी अपने अपने हिस्से की शिकायतें उठाने में शब्द खर्च करते दूसरे की कमियां गिनाने में हर हादसे पर देखते हैं बस यही कि किसके चिल्लाने की
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विज्ञापन तय करते हैं कहानी-आलेख

आखिर यह कोई सुनियोजित एजेंडा है या अनजाने में बन गयी सोच कि भारतीय संस्कृति, संस्कारों और धर्मों पर टीवी धारावाहिकों और फिल्मों में ऐसी कहानियां दिखाईं जातीं है जिससे उसका नकारात्मक पक्ष अधिक प्रकट होता है। फिल्मों और धारावाहिकों में अनेक बार लंबे समय तक
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एकता की कोशिश-हिन्दी शायरी

भीड़ में एकता की कोशिश पर हंसी आ ही जाती है। जहां पहले ही चीख रहे हैं लोग अपनी करनी का बखान करते हुए बंद किये हैं कान, आंखों  से ढूंढ रहे अपने लिये सम्मान, वहां शांति के नारे की आवाज शोर करती नजर आती है। ——- वफादारी  खामोश जज़्बात के
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स्वर्ग एक ख्याल है-हिन्दी शायरी

स्वर्ग की परियां किसने देखी स्वयं जाकर बस एक पुराना ख्याल है। धरती पर जो मिल सकते हैं, तमाम तरह के सामान ऊपर और चमकदार होंगे यह भी एक पुराना ख्याल है। मिल भी जायें तो क्या सुगंध का मजा लेने के लिये नाक भी होगी, मधुर स्वर सुनने के लिये क्या यह कान भी
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ज्योतिष, नववर्ष और सितारे- नये वर्ष पर विशेष लेख (hindi satire on new year 2010)

धरती के सितारों को अपने सितारों की फिक्र नहीं जितनी कि उनके चेहरे, अदायें और मुद्रायें बेचने वालों को है। धरती के बाकी हिस्से का नहीं पता पर भारतीय धरती के सितारे तो दो ही बस्तियों में बसते हैं-एक है क्रिकेट और दूसरी है फिल्म। यही कारण है कि टीवी चैनल
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इशारे-हिन्दी व्यंग्य कविता (ishare-hindi satire poem)

तैश में आकर तांडव नृत्य मत करना चक्षु होते हुए भी दृष्टिहीन जीभ होते हुए भी गूंगे कान होते हुए भी बहरे यह लोग इशारे से तुम्हें उकसा रहे रहे हैं। जब तुम खो बैठोगे अपने होश, तब यह वातानुकूलित कमरों में बैठकर तमाशाबीन बन जायेंगे तुम्हें एक पुतले की तरह अपने
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हिन्दू धर्म संदेश-बड़ा वही है जो गरीब पर कृपा करे (garib par kripa karen-hindu dharm sandesh)

जे गरीब पर हित करै, ते रहीम बड़लोग कहाँ सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग कविवर रहीम कहते हैं जो छोटी और गरीब लोगों का कल्याण करें वही बडे लोग कहलाते हैं। कहाँ सुदामा गरीब थे पर भगवान् कृष्ण ने उनका कल्याण किया। आज के संदर्भ में व्याख्या- आपने देखा होगा कि
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शरीर और मन से विकार निकालने का सबसे अच्छा उपाय है योग साधना (yogsadhna-hindi lekh)

अक्सर लोग योग साधना को केवल योगासन तक ही सीमित मानकर उसका विचार करते हैं। जबकि इसके आठ अंग हैं। योगांगानुष्ठानादशुद्धिये ज्ञानदीप्तिराविवेकख्यातेः।। हिंदी में भावार्थ-योग के आठ अंग-यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। इसका आशय यही
Nov 29 2009 10:50 AM
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भूख और बन्दूक-हिंदी लेख (Hunger and gun – Hindi article)

भूखे पेट भजन नहीं होते-यह सच है पर साथ ही यह भी एक तथ्य है कि भूखे पेट गोलियां या तलवार नहीं चलती। देश में कुछ स्थानों-खासतौर से पूर्व क्षेत्र-में व्याप्त हिंसा में अपनी वैचारिक जमीन तलाश रहे कुछ विकासवादी देश के बुद्धिजीवियों को ललकार रहे हैं कि ‘तुम उस
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फरिश्ते होने का अहसास जताते-व्यंग्य कविता

किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी हंसना कभी उसमें बहना कोई फरिश्ते आकर नहीं बताते। ओ किताब हाथ में थमाकर लोगों को बहलाने वालों! शब्द दुनियां को सजाते हैं पर खुद कुछ नहीं बनाते कभी खुशी और
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सामूहिक ठगी का मतलब-व्यंग्य चिंत्तन (samuhik thagi ka matlab-vyangya lekh)

एक के बाद एक सामूहिक ठगी की तीन वारदातें टीवी चैनलों और समाचार पत्रों की सुर्खियां बन गयी हैं। आप यह कहेंगे कि ठगी की हजारों वारदातें इस देश में ं होती हैं इसमें खास क्या है? याद रखिये यह सामूहिक ठगी की वारदातें हैं और कोई एक व्यक्ति को ठग कर भागने [...]
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सौदागरों के बुत-व्यंग्य शायरी

अख़बारों में छपे बड़े बड़े शख्सों के बयान अब आखों से आगे बढ़कर दिल की गहराई में नहीं जाते. ढेर सारा कागज़ का भंडार है चारों तरफ उसे खाने के लिए अक्षर पक्षी चाहिए स्याही की बह रही हैं धारा, मिलना जरूरी है उसको भी किनारा, बाज़ार के सौदागर केवल शय ही नहीं
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बुढ़ापे में कुछ नहीं सीख सकते-हिन्दू अध्यात्मिक संदेश (In old age can not learn anything – Hindu spiritual message)

भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— यावत्स्वस्थमिदं शरीरमरुजं यावच्च दूरे जरा यावच्चेंिद्रयशक्तिरप्रतिहता यावत्क्षयो नायुषः। आत्मश्रेयसि तावदेव विदुषा कार्यः प्रयत्नो महान् संदीप्ते भवने तु कुपखननं प्रत्युद्यम