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बौनेपन का अहसास-हिन्दी शायरी
हम जो भी दृश्य देखते उस पर सोचने लगते हैं, अपने अंतर्मन में पहले से ही स्थित तयशुदा विश्लेषणों के अनुसार उस पर निकालते हैं निष्कर्ष। हम कुछ सुनते हैं उस पर वैसे ही सोचते हैं जैसे कि पहले सुना हो। हम स्पर्श करते हैं फूल या लोहा बेपरवाह होकर जैसे कि उनको
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Jun 06 2010 05:39 PM


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