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भारत दुर्दशा

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01 May 2010
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आरक्षण का विष

भारत के स्वतंत्रता संग्राम की यह एक गंभीर त्रुटि रही कि स्वतंत्रता की मांग करने वालों ने कभी यह विचार नहीं किया कि वे स्वतन्त्रता के बाद इस विशाल और समस्याग्रस्त देश को कैसे चलाएंगे. इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि स्वतन्त्रता प्राप्ति पर देश का नेतृत्व
 
देवसूफी राम कु० बंसल
May 01 2010 10:48 AM
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जमींदारी प्रथा की वापिसी और प्रतिकार उपाय

विश्व भर में औद्योगिक क्रांति और वैज्ञानिक विकास कार्यों के होते हुए भी भारत की अर्थ-व्यवस्था की मेरु आज भी कृषि ही है, साथ ही इसी से यहाँ की लगातार बढ़ती जनसँख्या जीवित बनी हुई है. कृषि भूमि के स्वामियों को दो वर्गों में रखा जा सकता है - कृषक और
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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नक्सल हिंसा का मूल

अभी कुछ दिन पूर्व छत्तीसगढ़ राज्य में नाक्साल्वादियों ने ७६ सुरक्षाकर्मियों को मौत के घात उतार दिया. देश में और विशेषकर सत्ताधारी राजनेताओं में इस पर भारी चिंता दर्शाई है और मृतकों के परिवारों को सार्वजनिक कोष से मालामाल किया गया है. गृह मंत्री और प्रधान
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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अपराध और चिकित्सा सेवा

मेरे गाँव की एक हरिजन कन्या का विवाह लगभग दो वर्ष पूर्व पास के ही गाँव में हुआ था. लड़का भांग आदि का नशा करता है और अनेक बार लडकी के साथ मारपीट करता रहा है. इस कारण से लडकी अधिकाँश समय गाँव में अपने माता-पिता के पास ही रही है. उसकी इच्छा नहीं कि उसे
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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राजनीति में शैक्षिक योग्यता का विरोध

उत्तर प्रदेश की वर्तमान मुख्य मंत्री महोदया ने अभी कुछ दिन पूर्व एक घोषणा की थी कि प्रदेश के आगामी ग्राम प्रधान चुनावों में कक्षा १० उत्तीर्ण व्यक्ति ही प्रधान पड के प्रत्याशी बन सकेंगे. साथ ही ग्राम पंचायत सदस्यता के प्रत्याशियों के लिए कक्षा ८ उत्तीर्ण
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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महिला आरक्षण का षड्यंत्र

 महिलाओं के लिए विधायिकाओं में एक तिहाई स्थान प्रदान करने वाला आरक्षण बिल राज्यसभा में पारित हो गया, जो प्रत्यक्ष अनुभवों से कुछ भी न सीखने का सटीक उदाहरण है. पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण पहले से ही लागू है और इसके परिणाम घोर निराशाजनक सिद्ध
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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शक्कर की कड़वाहट

विगत २ वर्षों में केंद्र सरकार में पदासीन राजनेताओं के निहित स्वार्थों और कुप्रबंधन के कारण शक्कर के उपभोक्ता मूल्य में सतत वृद्धि होती रही है और लगभग २० रुपये से ४० रुपये प्रति किलोग्राम हो गयी है. यह शक्कर उस गन्ने से बनी थी जिसका किसानों को दिया गया
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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भारत में व्यावसायिक शिक्षा - राष्ट्रद्रोह

भारत में व्यावसायिक शिक्षा का वाणिज्यीकरण कर दिया गया है - धन्य हैं अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह जो प्रत्येक कार्य को एक व्यवसाय मानते हैं और उसके दूरगामी अर्थशास्त्रीय पक्ष की अवहेलना करने में सिद्ध-हस्त हैं. इन्गीनिअरिंग, चिकित्सा, प्रबंधन, आदि क्षेत्रों
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Mar 08 2010 12:47 AM
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कंगाल उत्तर प्रदेश - जन-प्रतिनिधियों पर धन वर्षा

उत्तर प्रदेश भारत का एक ऐसा प्रदेश है जहां की उर्वरा भूमि किसी को भूखे पेट सोने को विवश नहीं करती. गंगा की गोद इस भूमि पर अति प्राचीन काल से घनी जनसँख्या बसती रही है केवल इसलिए कि यहाँ की धरा की गोद सदैव हरी-भारी रहती है. इस सब के होते हुए भी विगत २०
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Feb 18 2010 11:13 AM
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परम्पराओं का बोझ ढोते हम

स्वतंत्र समाजों में परम्पराएं अनुभवों से उद्भूत होती हैं किन्तु लम्बे समय तक गुलाम रहे देशों में परम्पराएं कृत्रिम रूप से भी थोपी जा सकती हैं. भारत में ऐसा बहुत अधिक हुआ है. परम्पराएं कुछ सीमा तक बुद्धि उपयोग को अवरोधित करती हैं, और प्रायः हम उन्ही बातों
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Feb 17 2010 03:36 AM
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योग का रोग अथवा रोग का योग

भारत के धर्मावलम्बियों तथा अध्यात्मवादियों ने जिन वैदिक शब्दों का सर्वाधिक दुरूपयोग किया है, योग भी उनमें से एक है. योग शब्द का मूल अर्थ रोगों की चिकित्सा के लिए रसायनों का संयोग कर औषधियां तैयार करना है जो चिकित्सा क्षेत्र में आज भी प्रचलित है. किन्तु
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Feb 13 2010 07:24 AM
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भारतीय समाज - विषमताओं का दंगल

आज का भारतीय समाज अनेक विषमताओं में निमग्न है किन्तु उनसे जूझने का दम उसमें कहीं दिखाई नहीं दे रहा है. व्यक्ति को सबसे पहले रोटी चाहिए बिना संघर्ष के, तभी वह आगे की सोच सकता है. जिस वर्ग को रोटी उपलब्ध नहीं है वह इसे पाने के प्रयासों में तल्लीन हैं और यह
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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विद्युत् ऊर्जा की कमी तथापि दुरूपयोग

आधुनिक मानव जीवन के लिए विद्युत् ऊर्जा वस्त्रों और भवनों की तरह ही महत्वपूर्ण हो गयी है. इस पर भी भारत की लगभग आधी जनसँख्या को विद्युत् उपलब्ध नहीं है. जिन ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत् उपलब्ध भी है वहां भी अनेक क्षेत्रों में केवल नाम मात्र के लिए
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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धर्म और भक्ति का नशा

भारतवासियों को सर्वाधिक दुष्प्रभावित किया है भक्तिभाव ने और दुष्टों ने इसका सतत लाभ उठाया है उनकी कमाई पर वैभव-भोग के लिए. ईश्वर और उसकी भक्ति से लोग इतने अधिक आतंकित रहे हैं कि दुष्टों ने अपने सिरों पर ईश्वरीय और अन्य दिव्य ताज रख-रख कर उनकी बुद्धि को
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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भारत में जनतंत्र का एक नमूना

अभी-अभी उत्तर प्रदेश में विधान परिषद् के सदस्यों के चुनाव संपन्न हुए हैं जिनमें बहुजन समाज पार्टी ने लगभग सभी स्थानों पर विजय प्राप्त की है. जन संचार माध्यम का कहना है कि उत्तर प्रदेश इन चुनावों में बहुजन समाज पार्टी की अप्रत्याशित विजय उसकी जनप्रियता का
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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दुर्दशा हिंदी की

हिंदी हमारे देश भारत की घोषित राष्ट्र-भाषा है. किन्तु देश में जो सम्मान अभी भी अंग्रेज़ी को प्राप्त है, हिंदी उससे बहुत दूर है. इसके लिए भाषा या उपयोक्ता जिम्मेदार न होकर वे सब जिम्मेदार हैं जो हिंदी को अपना व्यवसाय बनाए बैठे हैं और इसे विकसित नहीं होने
 
देवसूफी राम कु० बंसल