Travel With Parthiv's Image
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28 Mar 2010
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दिल्ली की दहलीजः भानगढ़

भुतहे खंडहरों का सच पार्थिव कुमारअरावली की गोद में बिखरे भानगढ़ के खंडहरों को भले ही भूतों का डेरा मान लिया गया हो मगर सोलहवीं सदी के इस किले की घुमावदार गलियों में कभी जिंदगी मचला करती थी। किले के अंदर करीने से बनाए गए बाजार, खूबसूरत मंदिरों, भव्य महल और
 
पार्थिव कुमार
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दिल्ली की दहलीजः फारुखनगर

मुगलों का महल बना बच्चों की क्रिकेट पिचपार्थिव कुमारफारुखनगर के रिटायर्ड टीचर राज कंवर गुप्ता तकरीबन 300 साल पुराने इस कस्बे के हर बाशिंदे को इसके शानदार माजी के बारे में बता देना चाहते हैं। उन्हें उम्मीद है कि ऐसा करके वह बादशाह फर्रुखसियर के नाम पर बसे
 
पार्थिव कुमार
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दीदारे दिल्ली 1: महरौली पुरातत्व उद्यान

इतिहास की किताब जैसा एक पार्कपार्थिव कुमारमहरौली का पुरातत्व उद्यान शहर के शोरशराबे से थकी दिल्ली को अतीत के आंगन में सुकून के कुछ पल गुजारने की दावत देता है। इतिहास की किसी दिलचस्प किताब जैसा है यह पार्क। इसमें करीने से सजाई गई फूलों की क्यारियों, कीकर
 
पार्थिव कुमार
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दीदारे दिल्ली 2: कोरोनेशन पार्क

एक शहंशाह की उजड़ी यादेंपार्थिव कुमारदिल्ली के हाशिए पर खड़ी जार्ज पंचम की 60 फुट की कद्दावर मूर्ति उदासी और बेबसी की जीती - जागती तस्वीर है। तकरीबन 97 साल पहले इसी जगह ब्रिटेन के इस शहंशाह को हिंदुस्तान का ताज पहनाया गया था। उस दिन इस मैदान में एक लाख लोग
 
पार्थिव कुमार
May 31 2009 12:56 PM
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एक पुरानी कहानी

निवल देई से मेरी मुलाकात एक दिन अचानक ही हो गई। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक छोटा सा कस्बा है परीक्षितगढ़। कहते हैं कि यह अर्जुन के पोते परीक्षित की राजधानी हुआ करता था। इस कस्बे में कई ऐसी जगहें हैं जिनका संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है। ऐसी ही एक
 
पार्थिव कुमार
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तीन लड़ाइयों की बरबादी दामन में समेटे है

पानीपतपार्थिव कुमारअबू अली शाह कलंदर के इस फक्कड़ मिजाज शहर ने जिंदगी की भागमभाग में अपने जख्मों को भुला दिया है। लड़ाई दिल्ली के तख्त और ताज की मगर हर बार सीना कुचला गया पानीपत का। तकरीबन 235 साल के दरमियान हुई तीन लड़ाइयों ने इसकी तबाही में कोई कसर नहीं
 
पार्थिव कुमार
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बेगम समरू की खूबसूरत यादगार है

सरधना का गिरजाघरपार्थिव कुमारसरधना उत्तर प्रदेश में मेरठ के नजदीक एक छोटा सा कस्बा है जिसकी सांसों में बेनजीर खूबसूरती की मलिका बेगम समरू की रूह बसती है। बेगम समरू, यानी फरजाना, यानी जेबुन्निसा जो दिल्ली के चावड़ी बाजार के एक कोठे से निकल कर दौलत, ताकत और
 
पार्थिव कुमार