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जय हिन्दी जय हिन्द !

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12 Jun 2010
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दाम्पत्य की स्वर्ण जयन्ती पर माता पिता के पूजन अर्चन का अद्भुत नज़ारा दिखा रानीवाड़ा के कीरी परिवार में

कॉम बड़े ही हर्ष और गर्व से भरा प्रसंग है कि हमारे श्री मारवाड़ी ब्रह्मक्षत्रियसमाज के वरिष्ठ एवं सम्मानित महानुभाव रानीवाड़ा निवासी श्रीमानचुन्नीलाल जी कीरी एवं उनकी धर्म पत्नी सौभाग्यवती श्रीमती अमृतीदेवी के सफलतम दाम्पत्य जीवन की स्वर्ण जयन्ती का
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डहेली की कुमारी भूमिका काकू ने ९३% अंक प्राप्त करके परिवार व समाज का गौरव बढ़ाया

शाबास भूमिका काकू ! माँ हिंगलाज की कृपा से ब्रह्मक्षत्रिय समाज कीएक कन्यासुश्री भूमिका हेमंत कुमार काकू नेकक्षा 7 में 93% अंकप्राप्त कर कक्षा में दूसरे स्थान पर रह कर परिवार एवं समाजका नाम रौशन किया है ।श्री मारवाड़ी ब्रह्मक्षत्रिय समाज डहेली विभाग की
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ब्रह्मक्षत्रिय समाज, डहेली द्वारा बुज़ुर्गों का सम्मान समारोह

एक तरफ जहां आज-कल बुज़ुर्गों की उपेक्षा करने व उनकी समुचितसेवा -सुश्रुषा न करने के समाचार आये दिन देखते हैं, वहीँ अनेकस्थानों पर उनके सम्मान और अभिनन्दन के महोत्सव मन कोराहत भी देते हैं ।कल यानी 27 मई 2010 को श्री मारवाड़ी ब्रह्मक्षत्रिय समाज,डहेली अपने
May 26 2010 01:19 PM
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यह शक्ति नष्ट हुई कि अपनी सारी ज़िन्दगी कौड़ी कीमत की हो जाती है

महज किताबें पढ़ने का चटखारा लगाकि ख़ुद की सार-असार विचार-शक्ति कमज़ोर पड़ जाने का डर है;और एक बार यह शक्ति नष्ट हुईकि अपनी सारी ज़िन्दगी कौड़ी कीमत की हो जाती है- स्वामी विवेकानन्द
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आभार पाबला जी ! आभार अवधिया जी !

कल जब मैं एक आलेख टाइप कर रहा था तो अचानक ब्लोगर नेपहले तो लिप्यान्तर करना बन्द कर दिया फिर ख़ुद ही पता नहीं कहाँखो गया .इस प्रकार वो पोस्ट नहीं हो सकी। सोचा, थोड़ी देर में ठीक होजाएगा, लेकिन मैं हतप्रभ रह गया जब कोई भी ब्लॉग मेरे यहाँ नहींखुल रहा था.
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सब मनुष्य देवता -तुल्य

कवि, दार्शनिकऔर तपस्वी के लिए सब वस्तुएं पवित्र हैं,सब घटनाएँ लाभदायक हैं,सब दिन पवित्र हैं और सब मनुष्य देवता -तुल्य-एमर्सन
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माता-पिता से बढ़ कर न कोई अल्लाह न भगवान है

मन्दिर में हो रही आरती , मस्जिद में अज़ान हैगुरुद्वारों में शबद गूंजते , चर्च में प्रे परवान हैजिनालयों में णमोकार, अगियारी ज्योतिमान हैबौद्ध मठों में मंगलगान है ........................यही हमारा हिन्दुस्तान है ........................काम अगर बच्चे करते
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और मैं साधना सरगम का कृतज्ञ हो गया ...........

बात तब की हैजब हम करगिल युद्ध जीते थे और मैं हमारे सूरमा शहीदों के सम्मान में ऑडियो अल्बम"तेरी जय हो वीर जवान "का निर्माण कर रहा था ।मैंने सात गीत लिखे थे जिन्हें अलग-अलग गायकोंके स्वर में पिरो कर अल्बम बनाना था। चूंकि इसका सारा खर्च मैं ख़ुद कर रहा था
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उन्हें नि:संशय सुख की प्राप्ति होती है

जो केवल दया से प्रेरित हो कर सेवा करते हैंउन्हेंनि:संशय सुख की प्राप्ति होती है- वेद व्यास
Feb 23 2010 06:29 PM
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साजन शराबी हो तो बोतल के बदले में ....

भाई जो शराबी हो तोबोतल के बदले मेंगैरों बीच घर की कहानी बिक जाती हैसाजन शराबी हो तोबोतल के बदले मेंसजनी के गले की निशानी बिक जाती हैबाप जो पीया करे है मदिरा तो उस घरफूल जैसी बेटी की जवानी बिक जाती हैमदिरा के नशे मेंईमान बिके देखे बन्धुबिना किसी दाम
Feb 17 2010 08:12 AM
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जान पे खेल गए जो मॉं के दूध का कर्ज़ चुकाने में.....

धन्य-धन्य ये धरती जिस पर ऐसे वीर जवान हुएमातृ-भूमि की ख़ातिर जो हॅंसते हॅंसते क़ुरबान हुएजिनकी कोख के बलिदानों पर गर्व करे मॉं भारतीआओ हम सब करें आज उन माताओं की आरतीआओ गाएं हम..वन्दे मातरम् ...वन्दे मातरम् ...वन्दे मातरम् ...ऑंचल के कुलदीप को जिसने देश का
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देश किसी कोठे पे बदन हुआ जाता है

देखना तो एक ओरसोचता भी कौन है किदेश के जवानों का पतन हुआ जाता हैऐसे बिकता है इननेताओं के राज में किदेश किसी कोठे पे बदन हुआ जाता हैगिद्धों और चीलों कोमिलते हैं सिंहासनआदमी ज़मीन में दफ़न हुआ जाता हैआदमी की लाश है तोनंगी ही जलादो क्योंकिआदमी से महंगा कफ़न
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मौत भी न व्यर्थ जाने दी उसी उस्ताद ने ........

जीते जी भीजिन्होंने अपना सर्वस्व लगा दिया था दाव परसाम्यवादी सादगी और सामाजिक समभाव परमौत भी न व्यर्थ जाने दी उसी उस्ताद नेधरती माँ का क़र्ज़ चुकता कर दिया औलाद नेदेह अपनी कर गये जो दानउन्हें मेरीहार्दिक आदरांजलिदिवंगतज्योति बाबू बसु कोविनम्र श्रद्धांजलि
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चार टोटके ले कर खड़े हैं ...........

मूर्ख हैं वे जो लम्बी-लम्बी रचनाओं के सृजन में पड़े हैंहिट तो वे हैं जो मंच पर केवल चार टोटके ले कर खड़े हैं -बाबा सत्यनारायण मौर्य
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आओ बचाएं हिन्दी कवि सम्मेलनों की स्वस्थ परम्परा .....

हास्य कवि सम्मेलनों के मंच पर एक हंगामेदार पैरोडीकार के रूप में पिछले25 वर्षों के दौरान मैंने देश के लगभग सभी नामी ग़िरामी कवियों-कवयित्रियों के साथ कविता पढऩे का आनन्द और गौरव प्राप्त किया है. साथही साथ यह कटु अनुभव भी प्राप्त किया है कि बड़े और महंगे
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वह कैसा हिन्दुस्तानी है..........

ले आँख मीच अन्याय देख, वह खून नहीं है, पानी हैहिन्दी से जिसको प्यार नहीं, वह कैसा हिन्दुस्तानी है - डॉ सारस्वत मोहन 'मनीषी'