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स्वस्तिक शुभम

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14 Jun 2010
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शिशु का लालन-पालन

शिशु ही अपने देश तथा समाज के भविष्य होते हैं. इसलिए भविष्य के विश्व का स्वरुप इस पर निर्भर करता है कि आज हम वयस्क अपने बच्चों का लालन-पालन किस प्रकार करते हैं. शैशवावस्था में बच्चे के मनोविज्ञान की नींव बनती है. इस विषयक कुछ सूक्ष्म तत्वों का अध्ययन यहाँ
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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मानव शरीर की जलापूर्ति

जल का मानव जीवन में क्या महत्व है और इसके अभाव से हमारे शरीर को क्या शातियाँ हो सकती हैं - इनके बारे में इस संलेख के कुछ पूर्व आलेख समर्पित हैं. इसी सन्दर्भ में यह भी अपेक्षित है कि हम जानें कि शरीर की जलापूर्ति हेतु हमें क्या-क्या करना चाहिए. पेय जल की
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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शरीर में जलाभाव के दुष्प्रभाव

प्रायः कहा जाता है, 'जल ही जीवन है'. यह कोई अतिशयोक्ति न होकर जीवन का यथार्थ है क्योंकि जीवन सञ्चालन के प्रत्येक चरण में जल का महत्व है. शरीर में इसके अल्पाभाव से अनेक जैविक क्रियाएँ मंद पड़ जाती हैं. आइये देखें कि जल का शरीर की किन क्रियाओं में योगदान
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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नदी स्नान के खतरे

भारत में प्रत्येक पूर्णिमा पर नदी-स्नान की प्राचीन परम्परा है. इसके अतिरिक्त भी वर्ष में लगभग एक दर्ज़न पर्वों और अनेक अन्य पारिवारिक रिवाजों में नदी-स्नान शुभ माना जाता है. ये परिपाटियाँ इतनी सशक्त हैं कि ऐसे अवसरों पर सभी मार्ग नदी तटों की ओर अग्रसरित
 
देवसूफी राम कु० बंसल
May 30 2010 03:31 PM
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जल की स्वास्थ में भूमिका

जल ही जीवन है, ऐसा बहुधा कहा-सुना जाता है, क्योंकि बिना भोजन के हम कई दिन तक स्वस्थ बने रह सकते हैं किन्तु बिना जल एक दिन भी नहीं व्यतीत किया जा सकता और इसके बिना तीन दिन रहना प्राण-घातक हो सकता है. जल के अभाव में रक्त गाढ़ा होने लगता है जिससे शरीर की
 
देवसूफी राम कु० बंसल
May 21 2010 03:09 PM
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मानसिक परिपक्वता

प्रायः ६० वर्ष की आयु निवृत्ति की आयु मानी जाती है, जबकि वैज्ञानिक शोधों से पाया गया है कि मनुष्य में मानसिक परिपक्वता ४० वर्ष की आयु से आरम्भ होती है और लगभग ७० वर्ष की आयु तक विकसित होती रहती है. हाँ, इतना अवश्य है कि ६० वर्ष की आयु के बाद शारीरिक क्षय
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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काफी में गुण बहुत हैं ...

काफी एक अच्छा पेय है किन्तु कोई भी वस्तु सभी परिस्थितियों में अच्छी सिद्ध नहीं हो पाती. समुद्री तट के नम क्षेत्रों का उत्पाद होने के कारण यह शरीर में शुष्कता उत्पन्न करती है. इसलिए मैदानी क्षेत्रों के शुष्क मौसम में काफी का उपयोग सावधानी से किया जाना
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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मानसिक स्वास्थ - आस्था और बौद्धिकता

हम तीन प्रकार के सन्दर्भ अपनी स्मृति में संग्रहीत रखते हैं - सूचना, ज्ञान और बोध. अपने शरीर में स्थित पांच बोध संग्राहकों - आँख, कान, नासिका, जिह्वा एवं त्वचा, से हम क्रमशः दृश्य, ध्वनि, गंध, स्वाद एवं स्पर्श की सूचनाएं ग्रहण करते हैं जो अपने मौलिक रूप
 
देवसूफी राम कु० बंसल
May 09 2010 03:31 PM
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विपश्यना - प्राकृत स्वास्थ का प्राचीन उपाय

विपश्यना अर्थात अपने अन्दर झांकना प्रसिद्ध देव ऋषि गौतम द्वारा प्रतिपादित एक साधना है जिसमें शारीरिक स्वास्थ के लिए शरीर में ही उपस्थित सर्वोत्कृष्ट साधन 'मस्तिष्क' का उपयोग किया जाता है. इसकी पृष्ठभूमि में यह दर्शन है कि शरीर में स्वयं को स्वस्थ रखने की
 
देवसूफी राम कु० बंसल
May 08 2010 01:33 AM
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शक्कर की कड़वाहट

हम सभी विविध रूपों में शक्कर का भोग करते हैं, भारत में इसके भोग का प्रचलन कुछ अधिक हे है. इसी कारण से यहाँ शक्कर की खेती भी बुत की जाती है और बाज़ारों में हलवाइयों के दुकानें तरह-तरह की मिठाइयों और ग्राहकों से भरी रहती हैं. लोग शक्कर उत्पाद शौक के लिए,
 
देवसूफी राम कु० बंसल
May 02 2010 04:48 AM
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हास्य-व्यंग - निःशुल्क पोषण

स्वास्थ के लिए व्यक्ति की संतुष्टि परमावश्यक होती है, जिसका सीधा प्रभाव मानसिक स्वास्थ पर पड़ता है जिससे उद्भूत होता है शारीरिक स्वास्थ. संतुष्टि के लिए यह अनिवार्य है कि व्यक्ति अपने जीवन में सफलता प्राप्ति का अनुभव करता रहे. यहाँ यह स्पष्ट कर दूं कि
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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आदत से लाचार : अवसाद-विवश व्यवहार

अवसाद-विवश व्यवहार को अंग्रेज़ी में Obsessive Compulsive Disorder (OCD) कहा जाता है जिससे विश्व की बहुत बड़ी जनसँख्या दुष्प्रभावित है, विशेषकर भारत जैसे संस्कृत रूप से अविकसित देश. भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकाँश लोग धूम्रपान करते हैं जो उनका
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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मानसिक संतुलन क्या है

मानसिक संतुलन के बारे में अध्ययन से पूर्व इस से समन्धित स्थितियों पर विचार करना यहाँ प्रासंगिक है - आवेश किसी अप्रत्याशित घटना के प्रति व्यक्ति की स्थिति को उसका आवेश कहा जाता है. इस स्थिति में व्यक्ति का प्रतिक्रिया करना आवश्यक नहीं होता तथापि वह मानसिक
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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अंकुरित खाद्य

अंकुर वनस्पति जगत के सुकोमल शिशु होते हैं जो बीज के गर्भ में स्थित जीवांश के ऊपर सूर्य की ओर अग्रसरित होने से विकसित होते हैं. इन्हें पौधे का आरंभिक तना कहा जा सकता है. अंकुरण प्रायः दलहनों जैसे मसूर, मूंग, चना, मटर आदि का किया जाता है जो हमें घास वर्ग
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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रेशायुक्त भोजन

भोजन के पाचन से लेकर इस द्वारा शरीर के पोषण में हमारी आंतें और यकृत सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं. रेशायुक्त भोजन हमारे इन दोनों महत्वपूर्ण अवयवों को अपना कार्य सकुशल करने में सहायता करता है. इनके कौशल से ही शरीर में रक्त प्रवाह सही रहता है जिससे
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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व्यायाम रहस्य

योगाभ्यास आसनों और साधनाओं के बारे में मेरे विचार स्पष्ट हैं जो मैंने ८ वर्षों के निजी अनुभवों के आधार पर बनाये हैं. आधुनिक वैज्ञानिक शोधों से भी इनको बल मिला है. इस प्रकार के शोधों से पाया गया है कि हमारा शरीर कार्य करते समय खडी अथवा बैठी अवस्था में
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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जई - एक संतुलित खाद्यान्न

भारत के जनमानस को किस विस्तार तक भ्रमित किया जाता रहा है, इसका अनुमान जई के उपयोग के प्रचलन से लगाया जा सकता है जो यहाँ अभी भी केवल पशुओं के चारे के रूप में प्रचलित है जबकि यूरोपे और विश्व के अन्य विकसित देशों में जई का दलिया प्राचीन काल से अति लोकप्रिय
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Mar 08 2010 03:32 AM
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भोजन पकाने के लाभ और क्षति

फलों और कुछ सब्जियों, जिन्हें सलाद के रूप में उपयोग किया जाता है, के अतिरिक्त प्रायः सभी खाद्य पका कर खाए जाते हैं. भोजन पकाने की विधियाँ क्षेत्रीय एवं समुदाय के आधार पर भिन्न होती हैं किन्तु उबालना, भूनना, तलना, बेक करना, तथा वाष्प में पकाना कुछ सामान्य
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Feb 26 2010 06:32 AM
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मासिक खाद्य वर्जनाएं

एक प्राचीन लोक-कवि घाघ द्वारा रचित एक लोकोक्ति है - चैते गुड बैसाखे तेल, जेठे बाट असाढ़े केल ! सावन सागे भादों मही, क्वार करेला कातिक दही !! अगहन जीरा पूसे धना, महा मिश्री फागुन चना !!! अर्थात - चैत्र (अप्रैल-मई) माह में गुड (कच्ची शक्कर), बैशाख (मई-जून)
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Feb 25 2010 06:53 PM
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खाद्य पदार्थ और उनसे प्राप्तियां

मनुष्य सहित प्रत्येक जीव को शरीर की वृद्धि और इसे स्वस्थ बनाए रखने के लिए खाद्य पदार्थों की आवश्यकता होती है. अध्ययन की सुविधा के लिए खाद्यों को उनके स्रोतों के अनुसार मनुष्यों के खाद्य पदार्थों को छः समूहों में विभाजित किया गया है - १. खाद्यान्न - इस
 
देवसूफी राम कु० बंसल
Feb 16 2010 09:00 AM
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त्वचा का सौन्दर्य

त्वचा का सौन्दर्य बनाये रखने के लिए एक योग 'पतंजलि योगसूत्र' के प्रथम सूत्र द्वारा दिया गया है, जिसका सही अर्थ अभी तक ज्ञात सन्दर्भों में उपलब्ध नहीं है. इसका सर्वप्रथम उद्घाटन यहाँ किया जा रहा है. इस योगसूत्र का पूरा स्वरुप इस प्रकार है -
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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सामाजिक मानसिकता और मानसिक स्वास्थ

समाज व्यक्तियों का समूह होता है और व्यक्तियों की मानसिकता का समन्वय होता है सामाजिक मानसिकता में. व्यक्ति की मानसिकता बहुलांश में उसकी परिस्थितियों से निर्धारित होती है अर्थात उसकी परिस्थितियां जो उसे बालपन से सिखाती हैं व्यक्ति की मानसिकता वैसी ही बनती
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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विश्राम और आराम का महत्व

सबसे पहले हम जानें कि विश्राम और आराम में क्या अंतर है. विश्राम शब्द श्रम से उद्भूत हुआ है इसलिए विश्राम का अर्थ श्रम के प्रभाव - थकान, से मुक्ति का साधन है. इस क्रिया में व्यक्ति श्रम और मानसिक तनावों से मुक्त होकर अपने शरीर को सामान्य स्थिति में लाता
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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वाजीकरण का भ्रम और सच

भावप्रकाश में एक शब्द है वाजीकरण जिसका हिंदी में अर्थ लिया गया है 'स्त्री-रमण'. प्राचीन ग्रंथों के हिंदीकारन में इससे बड़ी मूर्खता मुझे दूसरी नहीं मिली. आइये इस शब्द का वस्तुपरक अन्वेषण करते हैं. भारी समाज में लोक मनोरंजन के साधन कहे जाते थे 'बाजीगर' जो
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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एकला चलो रे

नोबेल सम्मानित गुरुदेव रवीन्द्र नाथ ठाकुर की छोटी सी सारगर्भित कविता है 'एकला चलो रे' जिसका मेरा हिंदी अनुवाद इस प्रकार है - जब वे तुम्हारी पुकार ना सुनें, एकला चलो रे! एकला चलो रे! एकला चलो रे! एकला चलो रे! जब कोई तुमसे कुछ ना कहे, अरे अभागे, जब सब
 
देवसूफ़ी राम बंसल
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स्त्रीत्व की परिभाषा एवं भूमिका

संभवतः स्त्री स्वातंत्र्य के पक्षधर मेरे इस मत से सहमत न होंगे कि स्त्री का स्थान घर के अन्दर होता है. मेरे इस सुविचारित मत के अनेक कारण हैं - स्त्री की सुरक्षा, बच्चों का लालन-पालन, परिवार का स्वास्थ, आदि आदि. भारत की परम्परा के अनुसार स्त्रियों के लिए
 
देवसूफ़ी राम बंसल
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किन्वित खाद्य खाइए, स्वस्थ रहिये

भारत के घरों में भोजन के साथ अचार खाने का प्रचलन बहुत पुराना है. अचार बनने की क्रिया को किण्वन अथवा फेर्मेंटेशन कहते हैं. तकनीकी रूप में खाद्यों में उपस्थित अथवा उन से उत्पन्न शक्कर के इथेनोल में परिवर्तित होने की क्रिया को किण्वन कहते हैं. इस क्रिया के
 
देवसूफ़ी राम बंसल
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भोजन पाचन एवं सदुपयोग

मौलिक रूप में मेटाबोलिज्म मेटाबोलिक दर के समानार्थक है जो शारीरिक क्रियाओं तथा बाहरी गतिविधियों में ऊष्मा के मात्रक कैलोरियों की संख्या के खपत की दर होती है. किन्तु व्यवहार में मेटाबोलिज्म शब्द का उपयोग भोजन के शरीर द्वारा उपयोग की प्रक्रियाओं के लिए
 
देवसूफ़ी राम बंसल
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स्वास्थ सर्वोपरि

पुराने समय में कहा जाता था 'जान है तो जहान है' क्योंकि महामारियां लोगों को मृत्यु का ग्रास बनती रहती थीं और लोगों को जीवित बने रहने कि चिंता सताती रहती थी. किन्तु अब वैज्ञानिक प्रगति ने लोगों को असमय मृत्यु से बचाने की और कदम बढ़ाए हैं. असमय मृत्यु के भय
 
देवसूफ़ी राम बंसल