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16 Jun 2010
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स्पष्टवादिता

बालगंगाधर तिलक बचपन से ही सत्यवादी एवं निर्भीक स्वभाव के थे । बचपन में उनकी कक्षा के कुछ विद्यार्थियों ने मूंगफली खाकर छिलके फर्श पर इधर-उधर फैक दिए । अध्यापक ने आ कर देखा कि फर्श पर छात्रों ने कूड़ा फैलाया हुआ है । उन्होंने छात्रों को डांटते हुए कहा,
 
दिनेश शर्मा
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अहिंसा का पुजारी

गांधी जी हमेशा अपने साथ लाठी रखा करते थे । एक बार जवाहर लाल नेहरू अपने पिता मोतीलाल नेहरू के साथ गांधी जी से मिलने गए । शाम हो चुकी थी । गांधी जी के कमरे में एक दीया जल रहा था । जैसे ही वे दोनों कमरे में घुसे, दीया बुझ गया । नेहरू दरवाजे के पास पड़ी लाठी
 
दिनेश शर्मा
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लगन

टामस एलवा एडीसन एक महान् वैज्ञानिक थे । उन दिनों वह स्टोरेज बैटरी बनाने में लगे हुए थे । पच्चीस बार उन्होंने प्रयत्न किया, पर वह अपने उद्देश्य में सफल न हो सके । जब उन्होंने छब्बीसवीं बार प्रयत्न करना प्रारम्भ कर दिया तो एक आदमी ने उनसे पूछा, ''आप इसे
 
दिनेश शर्मा
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न्याय

यहूदी धर्म गुरु वूल्पफ बहुत ही शांतिप्रिय एवं न्यायी थे । एक बार उनके घर से एक चांदी का बरतन चोरी हो गया । वूल्पफ ' को नौकरानी पर संदेह था। पर नौकरानी अपने को निर्दोष बता रही थी । अतः वूल्पफ की पत्नी धर्म न्यायालय से न्याय पाने के लिए घर से निकल पड़ी ।
 
दिनेश शर्मा
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Jun 04 2010 10:40 AM
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आत्मविश्वास

नील नदी के युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना के सेनाध्यक्ष नेलसन थे । जंगी बेड़े के अनेक अधिकारियों की आंखों में निराशा व भय था । पर नेलसन अद्भुत आत्म विश्वास से भरे थे । सहसा बेड़े के कप्तान ने कहा, ''अगर हमारी जीत हो जाए तो दुनिया दंग रह जाएगी ।'' नेलसन ने
 
दिनेश शर्मा
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मूल्यवान

इंग्लैण्ड की महारानी विक्टोरिया ने एक बार विएना के प्रसिद्ध पियानोवादक को अपने महल में बुलाया । उसका मधुर संगीत सुनकर महारानी खुश हो गई । आखिर में उन्होंने आस्ट्रिया का राष्ट्रगीत सुनने की इच्छा जाहिर की । राष्ट्रगीत पूरा होने तक महारानी खड़ी रही ।
 
दिनेश शर्मा
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समय की कीमत

प्रसिद्ध चिकित्सक अमरनाथ झा समय के बड़े पाबंद माने जाते थे। एक बार वह पटना गए हुए थे। वहां साहित्यकारों की एक गोष्ठी आयोजित की गई थी । जिस में डॉक्टर झा को मुख्य अतिथि बनाया गया था । उन्होंने निमंत्रण स्वीकार कर लिया और आयोजकों से कहा कि वे निर्धारित समय
 
दिनेश शर्मा
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भोजन का मूल्य

स्वतन्त्रता से पहले सौराष्ट्र में ढसा राज्य के राजा थे गोपालदास देसाई । वह जवानी के दिनों में बड़े ठाट-बाट से रहते थे । एक बार वह कहीं गए । स्टेशन पर उन्हें कोई कुली नजर नहीं आया । इतने में एक किसान सा लगने वाला आदमी उनके पास और सामान ले जाकर गाड़ी पर रख
 
दिनेश शर्मा
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कर्णधार

एक बार पंडित नेहरू से मिलने के लिए एक देश का राजदूत, एक सैनिक और एक नवयुवक आया । उन्होंने सचिव से कहा कि वह पहले नवयुवक, फिर सैनिक और सब से आखिर में राजदूत को भेजें। जब वे तीनों मिलकर चले गए । तब सचिव ने पंडित नेहरू से पूछा, ''आपने राजदूत और सैनिक से
 
दिनेश शर्मा
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ब्लॉग संचार

हिन्दी ब्लॉग जगत के प्रचार और प्रसार के लिए हम सभी के द्वारा प्रयासों की आवश्यकता है। क्योंकि विश्व स्तर पर तथा ब्लॉग जगत में हिन्दी का स्थान अभी अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। एतदर्थ हिन्दी ब्लॉग टिप्स के सुझाव के अनुसार एक ब्लॉग एग्रीगेटर बनाया है ‘‘ब्लॉग
 
दिनेश शर्मा
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सिफारिश

इंग्लैण्ड के एक मंत्री के निवास पर एक सिपाही रात को गश्त लगा रहा था । मंत्री की पत्नी को उसके जूतों की आवाज के कारण नींद नहीं आ रही थी । आखिर, उन्होंने अपने पति से इसकी शिकायत की । मंत्री ने सिपाही को बुला कर कहा, ''कोठी के सामने गश्त मत लगाओ, नींद में
 
दिनेश शर्मा
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अभिमान

जब सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया था तो उसी दौरान उसकी मुलाकात एक साधु से हुई थी । जब सिकंदर उसके पास पहुंचा तो वह धूप का आनंद ले रहा था । साधु की बातचीत से प्रभावित हो कर सिकंदर ने पूछा,''महाराज, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूं?'' उसने कहा,''तुरंत यहां से
 
दिनेश शर्मा
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शब्दों का असर

बगदाद के खलीफा का एक गुलाम था हाशम । वह बहुत बदसूरत था । सब गुलाम उसका मजाक उड़ाया करते थे । एक बार खलीफा अपने बहुत सारे गुलामों के साथ बग्घी में जा रहे थे । एक जगह कीचड़ में उनका घोड़ा फिसल गया । खलीफा के हाथ में पकड़े हीरे-मोतियों की पेटी गिर कर खुल गई।
 
दिनेश शर्मा
May 03 2010 07:43 PM
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उपहार

एक बार राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद की पुत्री उनसे मिलने राष्ट्रपति भवन आई । साथ में उसका पुत्र भी था । कुछ देर राष्ट्रपति भवन में अपने माता-पिता के साथ ठहरने के पश्चात् जब वह विदा होने लगी तो बाबू राजेन्द्र प्रसाद ने अपनी नाती को एक रूपया दिया ।
 
दिनेश शर्मा
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गहरी नींद

गहरी नींद में सोते हुए नेपोलियन को उस के सेनापति ने मध्य रात्रि में जगाया और दक्षिणी मोरचे पर शत्रु द्वारा अचानक हमला किए जाने की खबर दी, नेपोलियन आंखें मलते हुए उठा और दीवार पर टंगे 34 नंबर के नकशे को उतारते हुए बोला, इस में बताए हुए तरीके के अनुसार काम
 
दिनेश शर्मा
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उदारता

एक बार इंग्लैण्ड के प्रधानमंत्री लायड जार्ज सभा में अपने मंत्रिमंडल के कार्यों की तारीफ कर रहे थे । तभी एक विरोधी ने खड़े होकर जार्ज से कहा, ''आप तो शायद वहीं हैं, जिस के पिता गधे की गाड़ी चलाया करते थे ।''यह सुनकर सब हंसने लगे। तब जार्ज ने शांत स्वर में
 
दिनेश शर्मा
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अक्लमंद

सम्राट जहांगीर अपने इन्साफ के लिए बहुत मशहूर थे । एक बार उनका नौकर उनके निकट खड़ा होकर गिलास में शराब डाल रहा था कि पता नहीं कैसे एक बूंद जहांगीर पर गिर गई । जहांगीर को बहुत गुस्सा आया । उसी आवेश में उसने नौकर का सिर काटने का आदेश दे दिया ।नौकर ने यह आदेश
 
दिनेश शर्मा
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देश प्रेम

एक बार सरदार किशन सिंह ने अपने खेत में आम के कुछ पौधे लगाए थे। एक दिन वह अपने 3-4 साल के लड़के को साथ लेकर पौधों का मुआयना कर रहे थे । लड़का वहीं खेलने लगा । खेलते-खेलते उसने मिट्टी में कुछ गाड़ा और 2-4 पौधे खड़े कर दिए । यह देख कर पिता ने पूछा, ''यह क्या कर
 
दिनेश शर्मा
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पक्षपात

उस समय लाल बहादुर शास्त्री गृह मंत्री थे । एक बार उन्होंने इलाहाबाद स्थित अपना निवास स्थान इसलिए खाली कर दिया क्योंकि मकान मालिक को उसकी आवश्यकता थी । उन्होंने किराए पर दूसरा मकान लेने के लिए आवेदन पत्र भरा। काफी समय हो गया लेकिन लाल बहादुर शास्त्री को
 
दिनेश शर्मा
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उत्तम

देश के सुप्रसिद्ध कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर को बनावटीपन बिल्कुल पंसद नहीं था। जो चीज सीधी और सरल होती थी, उन्हें अच्छी लगती थी । एक बार उनकी पुत्री की शादी हुई । विदाई के समय उसे बिना साज श्रृंगार के ले जाने लगे । उनके संबंधी उनकी निन्दा करने लगे । इस पर
 
दिनेश शर्मा
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इंसानियत

यह घटना उन दिनों की है, जब लालबहादुर शास्त्री हमारे प्रधानमन्त्री थे । एक दिन वह अपनी पत्नी ललिता शास्त्री के साथ एक साड़ी के कारखाने का दौरा करने गए । उनकी पत्नी को कुछ साड़ियां पंसद आईं । शास्त्री जी ने उन्हें बांधने को कहा और पैसे देने लगे । लेकिन मालिक
 
दिनेश शर्मा
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विद्वता

एक बार स्वामी विवेकानंद काशी में थे । वहां उनकी विद्वता की चर्चा बहुत फैल गई थी । अनेक लोगों ने उनसे अनेक कठिन प्रश्न किए थे । जिन का जवाब उन्होंने ऐसा दिया कि सब ने उनकी विद्वता का लोहा मान लिया था। एक दिन एक व्यक्ति ने उनसे पूछा, ''संत कबीर दास जी ने
 
दिनेश शर्मा
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संत

स्वामी दयानंद का एक शिष्य नाई था । एक बार वह स्वामी दयानंद के लिए अपने घर से भोजन लाया । स्वामी दयानंद ने उसे बड़े चाव से खा लिया। उनका दूसरा शिष्य उस घटना को देख रहा था । उसने स्वामी दयानंद से कहा,'' स्वामी जी, आप ने यह क्या किया ? आपने आज नाई की रोटी खा
 
दिनेश शर्मा
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