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दर्द - एक पिता का
मेरी ज़िन्दगी के बीते हुए उन पलो को शायद तुम भूल गये,तुम्हारी ज़िन्दगी का गुजरा हुआ हर लम्हा लेकिन, याद है मुझे ॥मेरे निगाहों का दर्द महसूस करना आज, शायद तुम भूल गये,तुम्हारे होठों को छूकर जाने वाली हर मुस्कान, याद है मुझे ॥आज मेरा हाथ पकड़कर सहारा देना,
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May 29 2010 11:08 AM


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