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युग क्रांति

http://yugkranti.blogspot.com/
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03 Jun 2010
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भिखारीपन मुआ......ब्लॉग्गिंग की दुनियाँ में

उस दिन में यूँ ही.. एक कवी सम्मलेन सुनने चला गया,सुनने को तो वहाँ कुछ ख़ास था नहीं,पर वहाँ का नज़ारा देख बस मजा आ गयाकुछ मत पूछिए !बस यूँ जानिये की मजा आ गया......!कवी सम्मलेन तो वो कम था..एक-दुसरे की पीठ खुजलाने का कार्यक्रम
 
Yashwant Mehta "Yash"
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सफ़र

पीछे लौट जानापिछड़ेपन की निशानी लगता हैपर ऐसा है नहीं..आगे बढ़ते जानातरक्की की कहानी लगता हैपर ऐसा है नहीं..रुक जाना या ठहर जानादौड़ते रहना या आगे बढ़ जाना एक सा लगता हैपर ऐसा है नहीं..जो रुक गए उन्हें आगे बढ़ना होगाजो दौड़ रहे हैं उन्हें ज़रा ठहरना
May 31 2010 09:15 PM
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हिंदी ब्लोगिंग वो गली हैं जहाँ कस्तूरी, हीरे-मोती मिलते हैं और गली में पड़ा गोबर सड़ांध मारता हैं

हिंदी ब्लॉगिंग की दुनिया किसी अखाड़े से कम नहीं लग रही! रोटी पर चिपुड़ने के लिए रखा हुआ घी चूल्हे की आग में गिर जाता हैं और आग भड़क उठती हैं! कुछ लोगो की राय में विवादों का उठाना हिंदी ब्लॉगिंग के लिए नुकसानदेह हैं अथवा इसके भविष्य के लिए हानिकारक हैं! इस
 
Yashwant Mehta "Yash"
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वाह क्या फतवा हैं......शुभानाल्लाह

आज सुबह अख़बार आया! मैंने नींद भरी आँखों से खबरों पर नजर डालनी शुरू करी! मुख्य पृष्ट पर ही एक खबर छपी हैं ---- एक फतवा लडकियों की शिक्षा के नाम!! "फतवा" शब्द बहुत चर्चा में रहता हैं! नए नए फतवे निकलते रहते हैं! फतवों का विरोध भी होता हैं! मीडिया में तो
 
Yashwant Mehta "Yash"
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शीशा और लोहा ------ चार मुक्तक ----- यशवन्त मेहता "यश"

मुक्तक  १शीशे के सपने मत सजाओपल भर में चूर हो जायेंगेलोहे के सपने सजाओतूफानों में भी टूट न पाएंगेमुक्तक २मुकाम हासिल उन्हें ही होते हैंलोहे के सपने जो सजोते  हैंवो अपनी किस्मत पर रोते हैंशीशे के सपने जो सजोते हैंमुक्तक ३शीशे के घर में नहीं
 
यशवन्त मेहता "यश"
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"फकीरा" खत्म हो गया??

कवि, शायर लेखक अपने नाम के साथ तक्खलुस जोड़ते हैं!!! तक्खलुस क्यों जोड़ा जाता हैं ये ज्ञान मेरे ज्ञान तालाब में नहीं हैं!! समय के साथ किसी के कहने पर कवि अपने तक्खलुस बदल भी डालते हैं!!! खैर न तो मैं कोई कवि हूँ, न शायर और न ही लेखक!!! टुटा फुट लिख लेता
 
यशवन्त मेहता "यश"
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सन्नी ओ सन्नी........अरे कलुआ फिर चादर गन्दी कर गया!!!

पीछे साल हमारे घर के आसपास घूमने वाली एक बिल्ली ने एक शावक को जन्म दिया. एक दम काला. काला रंग तो उसके बदन को इतना सुन्दर बना देता था कि अगर कोई हसीना भी सामने अपने काले घने बालो की चादर फैला दे तो भी कवि उस शावक की सुन्दरता का बखान करती कविता लिखेगा.
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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शाम को अच्छे भले बैठे थे चाय पीकर, खटिया पर लुडक गये,

बुड्ढ़े को जवानी छाईरोम रोम ने  ली अंगड़ाईदिमाग की बत्ती जलाईचौक से हेयर डाई मंगवाईसुबह हुई रंगाई पुताईदोपहरी में हुई सुखाईशाम को गली में खटिया लगाईछम्मकछल्लो को आवाज लगाई  बहुत दिन हुए हरजाईआशिक की गली तू न आईछम्मक छल्लो इतराती चली आईओंठ दबाये
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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युग क्रांति ----- YUG KRANTI: कुछ बन जाने की चाह...

युग क्रांति ----- YUG KRANTI: कुछ बन जाने की चाह...
Apr 24 2010 06:25 PM
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कुछ बन जाने की चाह...

कुछ बन जाने की चाह...कैसे - कैसे करतब दिखलाती है..!!दो रोते - बिलखते बच्चों की माँ...स्कूल जा चालीस की मास्टरनी कहलाती है..!!तुर्रा ऊसपर  ये के समझा जाए उसको शिक्षक महान...समाज-सेवा के खातिर अपने बच्चों को कुर्बान
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चुप्पी या मौन

तेरी ये चुप्पी गर तेरी मौज है मेरी जानतो मेरी शब्दों मैं भी छुपी एक खोज है मेरी जानमाना  के तेरे मौन के आगे मेरा ज्ञान है फीकाउठाता हूँ जोखम के ज़िस्त बस चंद रोज़ है मेरी
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गार्ड और पानी, भैंसे और कारे, मजदुर और नीम का पेड़ ---- दिल्ली की गर्मी

सुबह परीक्षा ने तारे दिखा दिया, भला हो पानी पिलाने वाली आंटी का, तीन घंटे में ८-९ बार चक्कर लगाये और इतनी आत्मीयता से बच्चो को पानी पिला रही थी जैसे अपने बच्चे हो!! मुन्नाभाई ने सिखाया था --- सबको थैंक्यू बोलने का, दिल से!! मुन्नाभाई की बात मानकर
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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बोले तो आज अपुन का हैप्पी बर्थडे हैं ----- यशवन्त मेहता

बोले तो आज अपुन का हैप्पी बर्थडे हैं. हालाँकि अभी अपुन ब्लॉग जगत से ब्रेक पर हैं पर आज अपना मन किया सबसे ख़ुशी बाँटने का, इसके वास्ते अपुन इधर चला आया अभी सब लोग न अपुन को खूब सारा आशीर्वाद देने का, अपुन को  ५०० टन आशीर्वाद का जरुरत हैं एक दम,
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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तार्रुफ़

क्या करें हम के दर्द ये सारे काफूर हो जाएँ..??कैसे हों करम के लम्हे ये नासूर ना बन पायें..??वो ही है हाकिम और बीमार भी वो ही,पर्दा जो हटे तो तार्रुफ़ उसके हो जाए..!!परदे ये नज़रों
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बाय बाय हिंदी ब्लॉगिंग .....

अपने जाने का समय आ गया हैंहिंदी ब्लॉग जगत को बाय बायआशा करता हूँ हिंदी  ब्लॉगिंग  का  सर्वोतम  रूप  आएगा   और वो  मुझे  लौटने  के  लिए  विवश  करेगातब तक के लिए हिंदी ब्लॉगिंग से छुट्टी
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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महफूज़ भाई की कविता का अनुवाद --- इस कोशिश करी हैं

सबसे पहले तो सबके दिलो के सरदार आर्य ललित शर्मा जी से बालहठ ---- आप लौट के आईये, कोई बहाना नहीं चलेगा!!!! ये हमारा बालहठ हैं, हमें वापसी चाहिए. नुक्कड़ पर पोस्ट आई हैं कि महफूज़ भाई की कविता का अनुवाद करे. मैंने महफूज़ भाई से एक बार कहा था कि उनकी
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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ताजमहल

वाह साहब वाह !! बहुत मेहनत की है किसीने..एक हैरतंगेज करिश्मे को धार्मिक रंग देने की..भाई ! हम तो अपनी नादानी में अब तक ये ही समझते थे की..इमारतें नहीं इंसान धार्मिक होता है..और संप्रदाय..वो तो बस खेल हैं सियासी लोगों के..लीजिये पेश-ए-नज़र है ख़ास आपके लिए
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शायरी नहीं आती..

ये ठीक है की हमें शायरी कर नहीं आती,बातें हो जाती हैं पे बात कर नहीं आती..!!यूँ ही निकल पड़ते हैं कुछ लफ्ज़ बेसाख्ता,मौज है उनकी और मौज कर नहीं आती..!!मक्ता वजनी नहीं और काफ़िया है तंग,तंगदिली की पतंग कर नहीं आती..!!अश्यार हैं बुझे-बुझे और ग़ज़ल है
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सोने को चटाई नहीं और तम्बू की फरमाइश

यह कहावत घूमते-फिरते सुनी. बहुत ही मजेदार और गहरा अर्थ को अपने अन्दर समेटे हुए हैं ये कहावत..........सोने को चटाई नहीं और तम्बू की
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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कृपया रास्ता सुझाये ---- शिवकुमार बटालवी, पंजाबी शायरी के शिखर पुरुष

रब्बी गिल के द्वारा गया हुआ गाना सुना था ---- इक कुड़ी जेदा नाम मोहब्बत........बार बार सुना.......इतना सुना कि मेरी कसेट ही ख़राब हो गयी. ये गीत लिखा किसने लिखा था --- शिवकुमार बटालवी, पंजाबी शायरी के शिखर पुरुष......पहले आप इस गीत का आनंद ले  मेरी
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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मम्मी जी की दादागिरी , ब्लॉग्गिंग और बीयर

मेरे ब्लॉग की एक नियमित पाठक हैं. वो रोज ब्लॉग पढ़ती हैं और मुझे उनकी रोज टिप्पणी भी मिलती हैं. लिखित नहीं जबानी टिप्पणी. उन्हें  काफी समय से शिकायत हैं कि ब्लॉग बीमारी का शिकार हो गया हूँ अब थोडा ब्लॉग से दूर रहू. इतना भी बोल दिया " बड़ा ब्लोग्गर
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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तेरी याद में...."मनीष"

क्यूँ है ये चाहत की याद करे तुम्हें कोई..??अपने-आप में मस्त हो जीना इन गुलाबों से सीखे कोई,घिरा रहता है हर वक़्त हज़ार काँटों से,मजाल मगर के आ जाए लब पर शिकवा कभी कोई..!!ये काफी है की तेरा एक तस्सवुर सा बना रहे मुझमें,ज़ख़्मी हुआ ये
टैग: manish
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इन सपने वाले प्यार के लुटेरो से दरख्वास्त हैं --- यार सपने में तो प्यार कर लेने दो!!!!

सपनो की दुनिया की सैर करना किसे अच्छा नहीं लगता, बस सपने सुन्दर होने चाहिए. पर जरुरी तो नहीं कि सभी सपने सुन्दर ही हो. कभी कभी ऐसे सपने आते हैं कि लोगो की नींद उड़ जाती हैं और दिल भी तेजी से धड़कने लगता हैं. बुरे सपने से बाहर आकर व्यक्ति जब इस दुनिया का
 
यशवन्त मेहता
टैग: delhi
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अबे जब चोर मिनिस्टर का बेटा होगा........तो कोतवाल तो क्या.........कमिश्नर को भी डांटेगा

पप्पू बहुत ही होसियार बालक हैं..........मास्टर जी ने उसको कुछ मुहावरे दिए थे.......जिनका प्रयोग उसने कुछ इस तरह किया ऊँठ के मुहँ में जीरा अगर आप ऊँठ के मुहँ में जीरा डाल देंगे तो आपको जीरा नजर नहीं आएगा क्यूंकि ऊँठ अपनी गर्दन ऊपर उठा लेगा  काला
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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ब्लॉग + कबड्डी = ब्लोगड्डी

ब्लॉग + कबड्डी = ब्लोगड्डीब्लॉग + मलेरिया =  ब्लोगेरिया ब्लॉग + नौकरी  = ब्लोकरी ब्लॉग + विवाद = ब्लोगिवाद  ब्लॉग + लड़ाई  =  ब्लॉगड़ाईब्लॉग + शायरी = ब्लोशयारी ब्लॉग + बहस = ब्लोहस ब्लॉग + पहलवान = ब्लॉहलवान
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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भगत सिंह की जेल नोटबुक से...........

    शहीदी दिवस पर भारत माता के वीर पुत्रों के चरणों में कोटि-कोटि नमन  पृष्ट २७ पर लिखे हुए शेरदिल दे तू इस मिजाज का परवरदिगार देजो ग़म की घड़ी को भी ख़ुशी से गुजार दे  ________________________________सजा कर मय्यत-ए-उम्मीद 
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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स्वच्छ दिल्ली ----- सुन्दर दिल्ली ---- मेरी दिल्ली --- LET'S DO IT!!! DELHI

दिल्ली मेरी शान!!! भारत की राजधानी दिल्ली, देश का दिल दिल्ली!!!२३ जनवरी २०१०स्थान -- रोज गार्डन दिल्ली५५ जागरूक नागरिक, २० डीडीए और १० कॉरपोरेट कर्मचारियों ने मिलकर दिल्ली के रोज गार्डन की सफाई करी. जानते हैं कितना कूड़ा-करकट निकला ---- १३०० किलो और ७५
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
टैग: delhi
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....तेरे प्यार की महिमा हैं.....अब पता चला किस काबिल हूँ मैं....

... सब यूँ देखते हैं जैसे कि कोई कातिल हूँ मैं .........तेरे प्यार की महिमा हैं....अब पता चला किस काबिल हूँ मैं.........तेरे गम के दो जाम लू तो कहते हैं शराबी हूँ मैं........तेरे प्यार की महिमा हैं....अब पता चला किस काबिल हूँ मैं........तेरी तस्वीर को
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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पूरी रात कुत्ता मेरा मुहँ चाटता रहा, आलस्य की भी हद हैं

एक ऊट सवार एक गाँव से गुजर रहा था. तभी उसे किसी ने आवाज लगाई. उसने देखा एक पेड़ के नीचे दो आदमी लेते हुए हैं. जब वो पास पंहुचा तो उनमे से एक आदमी बोला ---- ऐ भाई सुनो तो जरा!!!!!  ऊँठ सवार बोला ---- बताओ क्या बात हैं??? तो लेटा हुआ
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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.......यादें स्कूल की जो आज भी ताजा हैं .......( यशवंत मेहता "फ़कीरा")

हर विद्यार्थी को अपने विद्यालय से लगाव होता हैं और जब वो अपनी शिक्षा पूरी कर विद्यालय छोड़ता हैं तो यह लगाव प्रेम में बदल जाता हैं. वो शिक्षको की डांट-फटकार जिसके कारण विद्यार्थी जीवन में आसूं निकल आते थें वही डांट-फटकार मीठी लगने लगती हैं. दोस्तों के
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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गाँव में बिजली आने वाली हैं ----- कुत्ता भी उनके साथ झुमने लगा( यशवंत मेहता "फ़कीरा")

एक महाशय एक मशहूर पब में गया. उसने देखा एक आदमी बहुत ज्यादा पीकर पब से निकलता और "धर्रर -ढर्र" करता हुआ कार चलने का नाटक करता हुआ सड़क पर निकल जाता और आधे घंटे बाद फिर से पब में वापस आ जाता था.महाशय ने बारटेंडर से पुछा ---- यह आदमी कौन हैं और ऐसा क्यूँ
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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बोतल में घुसने वालो को फ़लक छोटा ही नजर आता हैं

अब क्या कहें उनको वो पी कर बहक जाते हैं मय की खुमारी में बोतल में घुस जाते हैं  ख़ुदी से भरे हुए ख़ुदाई  सिखाते  हैं  जब बोतल से निकल नहीं पातें चिल्ला चिल्ला के सबको बोतल में बुलाते हैं जो बोतल में आ जाये  तो उसे सबका यार बताते
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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अजनबी

अनजानी डगर पर मिला था "अजनबी"दिल तोड़ गया आज शाम को शिकयत करें भी अगर हम उसकी जुबान पर लायें किस नाम कोशर्म कहाँ बची हैं "दिल्ली वाले" मेंचांदनी चौक में बेच कर आ गया मुर्ख प्राणी भटकता भावुकता लिए अन्धकार में"अजनबी" सीने पर गरम लोहा चिपका गया हाय हाय करता
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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महिला दिवस पर.....माँ तुझे सलाम

आज महिला दिवस हैं. लोकसभा और विधान सभा में  महिलाओ को ३३ प्रतिशत आरक्षण मिल जायेगा. माँ इस अवसर पर मैंने सोचा क्यों न तुम्हे सलाम कह लू. आखिर तुम जननी जो हो मेरी. ९ १/२ महीने अपने गर्भ में मुझको पनाह दी और फिर सिजेरियन ऑपरेशन का दर्द झेला. तेरे
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
Mar 08 2010 01:39 AM
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सुना हैं खाने से खून बनता हैं, काट डाल और खून चख कर देख ले मैं कौन हूँ???

भूख से बेहाल वो पंहुचा एक गलीजोर से उसने आवाज लगाईकोई दो रोटी दे दो भाईफिर क्या था......दौड़े भागे सब चले आये  हिन्दू  ने रोटी पकवाई  मुसलमान ने सब्जी बनवाई सिक्ख ने रोटी को मक्खन से चुपड़ दियाईसाई ने पानी का गिलास सामने रख दियाऔर फिर बोले
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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दोषी कौन ---- खुद ही पता लगा ले (यशवंत मेहता )

बहस, वाद-विवाद करना कोई बड़ी बात नहीं हैं. मुद्दा होना चाहिए बस, महफ़िल जम जाती हैं. अक्सर दिल्ली की बसों में लोग बहस करते मिल जातें हैं. बहस सुनो तो ऐसा लगता हैं मानो सभी के विचार एक हैं. विचार तो एक हैं पर आचरण अलग-अलग हैं. आचरण एक हो तो ही समाज को दिशा
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
Mar 06 2010 03:14 PM
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सब ख्याल हैं बस.. इश्क और मौत से पहले के..-------- शायर मनीष

क्या तेरा क्या मेरा..क्या पाना क्या खोना..,सब ख्याल हैं बस.. इश्क और मौत से पहले के..!!उन्हें "अपना" बनाने की जिद ही उन्हें "पराया" कर गयी शायद...," इश्क " का जज्बा तो बेहतरीन था,ये " दावेदारी " ही नाकाम कर गयी शायद..!!करते रहे हम इंतज़ार बा-वक्ते दफ़न
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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पढ़िए रूहानी शायर "मनीष" को , रूह को न छु जाये तो कहियेगा.....

......मनीष साहब जो लिखते हैं रूह से लिखते हैं ...... रूह से पढ़िए.......रूह तक पहुचेगी आवाज......  चंद अशियार, शायद बेकार.. पर क्या करूँ यार..., कह-सुन लेता हूँ खुद से ही की शायद..
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
Mar 03 2010 02:19 AM
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होली का अवसर ----- ब्लॉगवुड के कंवारो का स्वयंवर (part 2)

अब जब इतना बड़ा आयोजन हो रहा हैं तो विवाद भी होने चाहिए. आखिर विवाद नहीं होंगे तो मीडिया को मसाला कहाँ से मिलेगा. अजय झा ने अपने मजबूत कंधो पर स्वयंवर के आयोजन की जिम्मेदारी ले ली. ऍम वर्मा जी जज्बाती होकर सबसे बोले जा रहे थे ---- अरे पोस्टर गलत छपवा
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
टैग: swayavar
Mar 02 2010 01:21 AM