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शिवना प्रकाशन

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07 Jun 2010
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शिवना प्रकाशन के मुशायरे तथा पुस्‍तक विमोचन समारोह के वीडियो तथा फोटोग्राफ्स आज एक माह पूरा होने पर प्रस्‍तुत हैं । सुनिये अपने मनपसंद शायरों को ।

शिवना प्रकाशन के पुस्‍तक विमोचन समारोह और मुशायरे को पूरा एक महीना हो गया है । ठीक आठ मई को ये कार्यक्रम हुआ था । सो आज प्रस्‍तुत है उस कार्यक्रम के सारे वीडियो और सारे फोटोग्राफ्स । फोटोग्राफ्स के लिये पिकासा पर जाकर वेब एल्‍बम को देखें जहां पर मुशायरे
 
पंकज सुबीर
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''धूप से रूठी चाँदनी'' वास्तव में नैसर्गिक भाषा में नैसर्गिक चिंतन का उद्गार है - डॉ. आज़म (पुस्तक समीक्षा ''धूप से रूठी चाँदनी'' - डॉ. सुधा ओम

    मेरा मानना है कि कविताओं की पुस्तकें तीन तरह के घर की तरह होती हैं,  एक जिनमें प्रवेश द्वार होता है जो निष्कासन द्वार भी सबित हो जाता है, अर्थात जाइए इधर उधर देखिए वहीं खडे ख़ड़े, फिर निकल आइए । दूसरी तरह की पुस्तक में प्रवेश 
 
पंकज सुबीर
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शिवना प्रकाशन की पांच नयी पुस्‍तकों के बारे में जानिये जिनके लेखक हैं डॉ. सुधा ओम ढींगरा, मोनिका हठीला, मेजर संजय चतुर्वेदी, दीपक चौरसिया मशाल और

ये हैं शिवना प्रकाशन की पांच नयी पुस्‍तकें धूप से रूठी चाँदनी ISBN: 978-81-909734-3-4 डॉ. सुधा ओम ढींगरा 101, गाईमन कोर्ट, मोरोस्विल नार्थ कैरोलाईना-27560, यू.एस. ए. फोन: (919)678-9056, (919)801-0672 मूल्य  : 300 रुपये (20$) प्रथम संस्करण : 2010
 
पंकज सुबीर
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शिवना प्रकाशन तथा मप्र उर्दू अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में सुकवि मोहन राय स्मृति अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन, नई पुस्तकों का विमोचन संपन्‍न ।

अग्रणी साहित्य प्रकाशन संस्था शिवना प्रकाशन तथा मप्र उर्दू अकादमी के संयुक्त तत्वावधान  में सुकवि मोहन राय की स्मृति में अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन किया गया । कार्यक्रम  में शिवना प्रकाशन की नई पुस्तकों मोनिका हठीला की एक खुशबू टहलती रही,
 
पंकज सुबीर
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सेना की नौकरी करते हुए भी ग़ज़ल की नाजुक विधा को साधते हैं मेजर संजय चतुर्वेदी (पीपुलस समाचार पत्र से साभार)

दिनाँक आठ मई को शिवना प्रकाशन तथा उर्दू अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय कुइया गार्डन में होने वाले अखिल भारतीय मुशायरे में जिन पुस्तकों का विमोचन होना है उनमें एक पुस्तक भारतीय सेना में मेजर के रूप में पदस्थ ग़ज़लकार संजय चतुर्वेदी की है । पहली
 
पंकज सुबीर
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सुकवि स्व. मोहन राय स्मृति पुरस्कार डॉ. आज़म को प्रदान किया जायेगा

अग्रणी साहित्यिक प्रकाशन संस्था शिवना प्रकाशन द्वारा स्व. मोहन राय की स्मृति में  दिया जाने वाला सुकवि स्व. मोहन राय स्मृति पुरस्कार सीहोर के सुप्रसिध्द शायर तथा कवि डॉ.  आज़म को दिया जायेगा । यह पुरस्कार शिवना प्रकाशन तथा मध्यप्रदेश उर्दू
 
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सुकवि मोहन राय की स्मृति में शिवना प्रकाशन मप्र उर्दू अकादमी के सहयोग से आयोजित करेगा अखिल भारतीय मुशायरा (पद्मश्री डा. बशीर बद्र, पद्मश्री बेकल

सीहोर के सुप्रसिध्द कवि स्व. मोहन राय की स्मृति में जिले की अग्रणी साहित्यिक प्रकाशन संस्था शिवना प्रकाशन तथा मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में एक अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन आगामी आठ मई को किया जा रहा है । इस आयोजन में देश भर के दिग्गज
 
पंकज सुबीर
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आज शिवना प्रकाशन के वरिष्‍ठ संरक्षक आदरणीय दादा भाई महावीर शर्मा जी का जन्‍मदिन है उनको प्रकाशन की पूरी टीम की तरफ से शुभकामनाएं ।

आदरणीय दादा भाई महावीर शर्मा जी का आज जन्‍मदिवस है । दादा भाई से जब से जुड़ा हूं तबसे ही लगता है कि उनसे तो बरसों पुरानी पहचान है । शिवना प्रकाशन को वे अपना ही मान कर चलते हैं । उनके ब्‍लाग पर शिवना की सारी जानकारियां उन्‍होंने सहेज कर लगाई हुई हैं ।
 
पंकज सुबीर
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वैदेही की तड़प, उर्मिला की पीर, और मांडवी की छटपटाहट : विरह के रंग (काव्य संग्रह) कवयित्री सुश्री सीमा गुप्ता, समीक्षा श्री रमेश हठीला

विरह के रंग (काव्य संग्रह) ISBN: 978-81-909734-1-0 सीमा गुप्ता मूल्य : 250 रुपये प्रथम संस्करण : 2010 प्रकाशक : शिवना प्रकाशन पी.सी. लैब, सम्राट कॉम्प्लैक्स बेसमेंट बस स्टैंड, सीहोर -466001(म.प्र.) दूरभाष 09977855399 पुस्‍तक समीक्षा द्वारा श्री रमेश
 
पंकज सुबीर
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दीपक चौरसिया की अनुभूतियां की कविताएँ मनन माँग रही हैं - डॉ. मोहम्‍मद आज़म

       -डॉ. मोहम्मद आज़म                 दीपक चौरसिया मशाल इससे पहले कि मैं दीपक चौरसिया मशाल की शाइरी पर अपना खयाल पेश करूँ मैं आज़ाद नम या छंद
 
पंकज सुबीर
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शिवना प्रकाशन के होली परिशिष्ट का विमोचन

साहित्यिक संस्था शिवना प्रकाशन द्वारा होली के अवसर पर प्रकाशित होली परिशिष्ट होली का हंगामा का विमाचन जिला जनसम्पर्क अधिकारी श्री एल आर सिसौदिया ने किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता गल्ला व्यापारी संघ के अध्यक्ष श्री कैलाश अग्रवाल ने की विशिष्ट अतिथि के रूप
 
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शिवना के सरस्वती पूजन में शामिल हुए बुध्दिजीवी, शिवना के नये काव्य संग्रह अनुभूतियां का विमोचन

अग्रणी साहित्यिक संस्था शिवना ने वसंत पंचमी के अवसर पर ज्ञान की देवी माँ सरस्वती का पूजन समारोह आयोजित किया । आयोजन में शहर के साहित्यकार, पत्रकार, शिक्षाविद तथा बुध्दिजीवी शामिल हुए । स्थानीय पीसी लैब पर आयोजित सरस्वती पूजन तथा गोष्ठी के कार्यक्रम में
 
पंकज सुबीर
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शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित दीपक चौरसिया मशाल के काव्‍य संग्रह 'अनुभूतियां' का विमोचन

दीपक चौरसिया मशाल का काव्‍य संग्रह अनुभूतियां : मूल्‍य 250 रुपये, 104 पृष्‍ठ, हार्ड बाइन्डिंग, आइएसबीएन978-81-909734-0-3, प्रथम संस्‍करण 2010, प्रकाशक शिवना प्रकाशन बुन्देलखण्ड टुडे से डॉ. कुमारेंद्र सिंह सेंगर की रपट साभार  ।
 
पंकज सुबीर
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"वक्त की पाठशाला में एक साधक"-श्री समीर लाल ’समीर’ बिखरे मोती की समीक्षा आदरणीय देवी नागरानी जी द्वारा ।

कलम आम इन्सान की ख़ामोशियों की ज़ुबान बन गई है. कविता लिखना एक स्वभाविक क्रिया है, शायद इसलिये कि हर इन्सान में कहीं न कहीं एक कवि, एक कलाकार, एक चित्रकार और शिल्पकार छुपा हुआ होता है. ऐसे ही रचनात्मक संभावनाओं में जब एक कवि की निशब्द सोच शब्दों का पैरहन
 
पंकज सुबीर
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महुआ घटवारिन कहानी (आधारशिला ) पर हंस में श्री भारत भारद्वाज जी का लेख और अब नया ज्ञानोदय में उसका पुर्नप्रकाशन किया गया है ।

हंस में कहानी महुआ घटवारिन पर आलोचक श्री भारत भारद्वाज जी द्वारा विस्‍तार से चर्चा की गई है । महुआ घटवारिन को आधारशिला में यहां http://adharshilapatrika.blogspot.com/2009/10/blog-post_4043.html जाकर पढ़ा जा सकता है । हंस पर जो आलेख श्री भारत भारद्वाज जी
 
पंकज सुबीर
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बिखरे मोती का विमोचन एवं समीर लाल सम्मानित

( श्री समीर लाल जी के ब्‍लाग उड़नतश्‍तरी से साभार प्राप्‍त सामग्री ) शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित श्री समीर लाल के काव्‍य संग्रह ’बिखरे मोती’ का दीर्घ प्रतिक्षित विमोचन विगत ४ अक्टूबर, २००९ को गुरुदेव श्री राकेश खण्डेलवाल, वाशिंगटन, यू. एस.ए. के कर
 
पंकज सुबीर
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समीर लाल जी का काव्‍य संग्रह बिखरे मोती प्राप्‍त करने हेतु ...................

कई सारे लोगों के मेल मुझे भी प्राप्‍त हुए हैं और समीर जी को भी प्राप्‍त हो रहे हैं । दरअसल में समीर लाल जी की लोकप्रियता जिस प्रकार ब्‍लाग जगत में है उसको देखते हुए ये तो होना ही था । पूर्व में श्री समीर लाल जी ने इसका विमोचन वहीं कनाडा
 
पंकज सुबीर
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समीर लाल जी का काव्‍य संग्रह बिखरे मोती, उड़नतश्‍तरी का दूसरा रूप जो गहन और गम्‍भीर है । बिखरे मोती प्रकाशित अब विमोचन की प्रतीक्षा कीजिये ।

समीर जी की पुस्‍तक पे काम करना मुश्किल इसलिये था कि वे भी बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं । वे व्‍यंग्‍य भी लिखते हैं और हास्‍य भी, गीत भी लिखते हैं और ग़ज़ल भी, मुक्‍तक भी लिखते हैं और सोनेट भी ।  तिस पर ये भी कि कोई भी
 
पंकज सुबीर