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ठिकाना

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23 Apr 2010
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शनिचर हरता!

प्रत्येक शनिवारहमारा शनिचर उतारने के लिएमिल जायेगे, हर चौराहे औररेड लाइट परअबोध, बुझे से, गंदे -फटे कपड़े मेंबहुत से बचपन।एक लोटे मेंएक लोहे की मूर्ति ,और थोड़े से कडुवे तेल के साथघूमते यह नन्हेंशनिचर हरता !दीदी, भैया, आंटी कह करप्रगट हो जाते है एक देवता
 
Pratibha
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बस आज 'एक दिन'

बस आज 'एक दिन' अलार्म बजने परक्या नहीं उठूंगी सबसे पहले कोई दे जायेगा सुबह की चाय क्या मेरे बिस्तर पर नही बेलनी पड़ेगी आज रोटियां । दफ्तर जाते समय आज, नहीं घूरेगा मेरा पडोसी नुक्कड़ पर बैठे लडके नहीं गायेगे वह गाना 'एक बार ...आ जा आ जा 'बस की भीड़ में आज
 
Pratibha
Mar 08 2010 04:50 PM
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ओ! मेरे संत बैलेंटाइन

ओ! मेरे संत बैलेंटाइनआप ने ये कैसा प्रेम फैलायाप्रेम के नाम पर कैसा प्रेम "भार" डालाआप पहले बताएंप्यार करते हुए आप ने कभीबोला था अपने प्रिय पात्र सेकि .....आई लव यू...दिया था शानदार तोहफाया कोई ग्रीटिंग कार्डपर अब हमेंआप के इस "प्रेम दिवस" परदेना पड़ता
 
Pratibha
Feb 14 2010 08:43 PM
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स्मृतियों का ढेर

दोछत्ति पर पड़ा कबाड़है स्मृतियों का ढेरया फिर विस्म्रतियों का................................तीन टांग की कुर्सीएक रंगहीन गुलदानछोटू का आधी सूड वाला हाथीघर का पहला श्वेत- श्याम टी वीऔर टीन का बहुत पुराना कनस्तरऔर भी बहुत कुछटूटा - फूटा ....जो नहीं टूटी
 
Pratibha
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कौन सा विकल्प?

आज डर का कुछ खास रंग देख पा रही हूँ ,जो कोहरे की तरह सफेद है ...याधुंए की तरह एकदम कालाडर के ये दोनों रंग या कहे दोनों पक्ष चुनने का विकल्प कौन सा होगा मेरा ?एक रंग में सब कुछ देखने की सुविधा हैतो दूसरे में खुद को खोने की। (चित्र : clarkvision.com)
 
Pratibha
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नव वर्ष आया

नव वर्ष आया भानुकारों ने बिखेरा प्रकाश प्रकाशमय हो गया कण-कण रिक्त हुआ अँधेरा कण-कण से भर दिया उल्लास, नई स्फूर्ति जन जन में दूर हुई आलस्य की काली छाया संचार हुई नव पवन संजीवनी उठ खड़ा हुआ नव प्रभात अंतर्मन में सृजित हुआ नव जीवन नव वर्ष आया, नव वर्ष आया।
 
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प्रचार या दुष्प्रचार

धन की देवी अब बर्गर का प्रचार करेगी। देवी लक्ष्मी को यह मौका दिया है बर्गर किंग ने। यह गाय के मांस से बनी अत्यन्त स्वादिष्ट है। अगर देवी की कृपा रही तो मामला हिट जाएगा।
 
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भूख की स्मारक

विकास और जनसेवा की स्मारके आप ने बहुत देखी होगी लेकिन भूख की स्मारक देखना हो तो सोनभद्र जिले के राबर्टगंज लोकसभा सीट के घसिया गाँव में आइये । छः दशक के लोकतंत्र का असली चेहरा नजर आ जाएगा। यह स्टोरी बीबीसी कि साईट पर है जहाँ लिखा है कि " गाँव में घुसते ही
 
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ठिकाना

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Pratibha
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