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कुछ तो है... जो कि,

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08 Jun 2010
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ये कहानी है दिये की और तूफ़ान की

ॐ नमः भगवते श्री अभयदाताय नमः दासोऽहं कोसलेन्द्रस्य रामस्याक्लिष्टकर्मणः हनुमानञ्शत्रुसैन्यानां निहन्ता मारुतात्मजः अर्दयित्वा पुरीं लँकामभिवाद्य च मैथिलीम॒ समृद्धर्थो प्रतिष्ठामि समपतां सर्वरक्षताम‍॒ बहुत दिनों बाद एक पोस्ट देने की
 
डा. अमर कुमार
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ये कहानी है दिये की और तूफ़ान की

ॐ नमः भगवते श्री अभयदाताय नमः दासोऽहं कोसलेन्द्रस्य रामस्याक्लिष्टकर्मणः हनुमानञ्शत्रुसैन्यानां निहन्ता मारुतात्मजः अर्दयित्वा पुरीं लँकामभिवाद्य च मैथिलीम॒ समृद्धर्थो... -९९९- पूरा आलेख मूल ब्लॉगपृष्ठ पर पढ़ने हेतु शीर्षक पर क्लिक करें ।
 
डा. अमर कुमार
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पर्यावरण-वर्यावरण.. बहाने डा. अनुराग

डा. अनुराग की कई बार फ़रमाईश आयी कि जब तक आप नियमित लिखने का मन नहीं बना लेते, तब तक कुछ पुरानी पोस्ट का रीठेल देते रहिये । बैठा तो मैं आज इसी मँशा से था, किन्तु  लाइव-राइटर  के  नये  सँस्करण  पर हाथ आजमाते न आजमाते एक पोस्ट बन ही
 
डा. अमर कुमार
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पर्यावरण-वर्यावरण.. बहाने डा. अनुराग

डा. अनुराग की कई बार फ़रमाईश आयी कि जब तक आप नियमित लिखने का मन नहीं बना लेते, तब तक कुछ पुरानी पोस्ट का रीठेल देते रहिये । बैठा तो मैं आज इसी मँशा से था, किन्तु  लाइव-राइटर  के ... -९९९- पूरा आलेख मूल ब्लॉगपृष्ठ पर पढ़ने हेतु शीर्षक पर
 
डा. अमर कुमार
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अर्श से फ़र्श तक

आज शनिवार है, या समझिये कि था, मेरे साप्ताहिक अवकाश का दिन ! शनिवार या सनीचर को छुट्टी रखने की मेरी अपनी जो भी व्यक्तिगत वज़हें हों.. पर क्या सूर्यपुत्र शनियों से भारतदेश कभी उबर भी पायेगा ? सूर्यपुत्र यानि कि  शिखर पर बैठे देपीप्यमान नीतिनियँता.. जो
 
डा. अमर कुमार
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अर्श से फ़र्श तक

आज शनिवार है, या समझिये कि था, मेरे साप्ताहिक अवकाश का दिन ! शनिवार या सनीचर को छुट्टी रखने की मेरी अपनी जो भी व्यक्तिगत वज़हें हों.. पर क्या सूर्यपुत्र शनियों से भारतदेश कभी उबर भी पायेगा ?... -९९९- पूरा आलेख मूल ब्लॉगपृष्ठ पर पढ़ने हेतु शीर्षक पर क्लिक
 
डा. अमर कुमार
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अर्श से फ़र्श तक

आज शनिवार है, या समझिये कि था, मेरे साप्ताहिक अवकाश का दिन ! शनिवार या सनीचर को छुट्टी रखने की मेरी अपनी जो भी व्यक्तिगत वज़हें हों.. पर क्या सूर्यपुत्र शनियों से भारतदेश कभी उबर भी पायेगा ?... -९९९- पूरा आलेख मूल ब्लॉगपृष्ठ पर पढ़ने हेतु शीर्षक पर क्लिक
 
डा. अमर कुमार
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उस अनाम रेलवई वाले को धन्यवाद !

आखिर यह क्या बात हुई ? जिन सज्जनों को यहाँ खेमेबंदी की बू आरही हो, वह कृपया यहाँ से हट जायें आज तिरंगे को देख बैठे-बिठाये एक तरंग उठी, आखिरकार इस भारतदेश को आज़ादी कैसे मिली ? बड़ी अज़ीब तरह की बात... -९९९- पूरा आलेख मूल ब्लॉगपृष्ठ पर पढ़ने हेतु शीर्षक पर
 
डा. अमर कुमार
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उस अनाम रेलवई वाले को धन्यवाद !

आखिर यह क्या बात हुई ? जिन सज्जनों को यहाँ खेमेबंदी की बू आरही हो, वह कृपया यहाँ से हट जायें आज तिरंगे को देख बैठे-बिठाये एक तरंग उठी, आखिरकार इस भारतदेश को आज़ादी कैसे मिली ? बड़ी अज़ीब तरह की बात है, अरे कौन नहीं जानता उस गाँधी महा-हुतात्मा को ? शेष
 
डा. अमर कुमार
Apr 22 2010 09:01 PM
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यह कोई पोस्ट नहीं है ।

यह कोई पोस्ट नहीं है । आज की ( असली और प्राचीन ) चिट्ठाचर्चा पर रतलामी भाई से असहमत होते हुये, यह टिप्पणी की तो है । पर आजकल मूँछों पर ताव देकर टिप्पणियों के डिलीट किये जाने का ख़तरा हमेशा बना रहता है ( हालाँकि बिना मूँछ वाले इसमें आगे हैं ), सो यह पूरा
 
डा. अमर कुमार
टैग: ravi ratlami
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ll Posted via email from अमर-हिन्दी ब्लॉग्स -९९९- पूरा आलेख मूल ब्लॉगपृष्ठ पर पढ़ने हेतु शीर्षक पर क्लिक करें ।
 
डा. अमर कुमार
Mar 05 2010 09:30 AM
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यह कोई पोस्ट नहीं है ।

यह कोई पोस्ट नहीं है । आज की ( असली और प्राचीन ) चिट्ठाचर्चा पर रतलामी भाई से असहमत होते हुये, यह टिप्पणी की तो है । पर आजकल मूँछों पर ताव देकर टिप्पणियों के डिलीट किये जाने का ख़तरा हमेशा बना रहता है... कुछ तो है..
 
डा. अमर कुमार
टैग: ravi ratlami
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यह कोई पोस्ट नहीं है ।

यह कोई पोस्ट नहीं है । आज की ( असली और प्राचीन ) चिट्ठाचर्चा पर रतलामी भाई से असहमत होते हुये, यह टिप्पणी की तो है । पर आजकल मूँछों पर ताव देकर टिप्पणियों के डिलीट किये जाने का ख़तरा हमेशा बना रहता है ( हालाँकि बिना मूँछ वाले इसमें आगे हैं ), सो यह More
 
डा. अमर कुमार
Feb 07 2010 12:45 PM
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साक्ष्य एक अनर्गल प्रलाप का

डा0 अमर कुमार के शब्द हैं: ”यह ठीक है, कि आप बाहर आज़ाद घूम रहे हैं, लेकिन मियाँ जी जूती भी पहना करते हैं । जब तक आप अपने बीमार मन का इलाज़ नहीं करवा लेते, यह जूती यदा कदा प्रयोग कर सकते हैं ! सिर की अदला बदली होती रहेगी, पर उसकी नौबत न [...]
 
डा. अमर कुमार
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साक्ष्य एक अनर्गल प्रलाप का

डा0 अमर कुमार के शब्द हैं: ”यह ठीक है, कि आप बाहर आज़ाद घूम रहे हैं, लेकिन मियाँ जी जूती भी पहना करते हैं । जब तक आप अपने बीमार मन का इलाज़ नहीं करवा लेते, यह जूती यदा कदा प्रयोग कर सकते हैं ! सिर की अदला बदली होती रहेगी, पर उसकी नौबत न [...]
 
डा. अमर कुमार
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साक्ष्य एक अनर्गल प्रलाप का

दोस्त हिन्दी ब्लोग की गरिमा को बनाये रखिए । विवाद मे कुछ नही मिलेगा । किसी के भी पास समय नही है इन बातों कि तह मे जाने का । हो सके तो आप विवाद का अंत करे अपनी तरफ से बढ़ावा ना दे । बिना वजह आपकी सकारात्मक ऊर्जा बर्बाद हो रही है । Originally [...]
 
डा. अमर कुमार
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साक्ष्य एक अनर्गल प्रलाप का

दोस्त हिन्दी ब्लोग की गरिमा को बनाये रखिए । विवाद मे कुछ नही मिलेगा । किसी के भी पास समय नही है इन बातों कि तह मे जाने का । हो सके तो आप विवाद का अंत करे अपनी तरफ से बढ़ावा ना दे । बिना वजह आपकी सकारात्मक ऊर्जा बर्बाद हो रही है । Originally [...]
 
डा. अमर कुमार
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साक्ष्य एक अनर्गल प्रलाप का

दोस्त हिन्दी ब्लोग की गरिमा को बनाये रखिए । विवाद मे कुछ नही मिलेगा । किसी के भी पास समय नही है इन बातों कि तह मे जाने का । हो सके तो आप विवाद का अंत करे अपनी तरफ से बढ़ावा ना दे । बिना वजह आपकी सकारात्मक ऊर्जा बर्बाद हो रही है । Originally [...]
 
डा. अमर कुमार
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साक्ष्य एक अनर्गल प्रलाप का

दोस्त हिन्दी ब्लोग की गरिमा को बनाये रखिए । विवाद मे कुछ नही मिलेगा । किसी के भी पास समय नही है इन बातों कि तह मे जाने का । हो सके तो आप विवाद का अंत करे अपनी तरफ से बढ़ावा ना दे । बिना वजह आपकी सकारात्मक ऊर्जा बर्बाद हो रही है । Originally [...]
 
डा. अमर कुमार
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ऎसी आज़ादी और कहाँ, आज़ाद ख़्याल विवेचन

विवेक भाई आग लगा कर अगले हफ़्ते के लिये बाई कर गये । गोया, चर्चाकार न हुये ज़मालो हो गये । यह तीसरी बार है, जब मैं इन चिट्ठाचर्चा वालों के उकसावे में पोस्ट लिखने को मज़बूर हो रहा हूँ । भुस्स मे आग लगा कर बी ज़मालो दूर खड़ी । मेरी पिछली कई पोस्ट [...]
 
डा. अमर कुमार
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ग़ैरज़रूरी बहसों में अटके हुये

ऐसे क्या कारण हैं कि हिन्दी कि फॅमिली बेकग्राउंड होते हुआ भी हिन्दी विषय मे कोई डिग्री नहीं हैं बहुतो से ब्लॉगर के पास ??  क्यूँ ?? क्षमा चाहूँगा, रचना… मेरा  जैसे  आपसे मतभेद योग चल रहा है । आपका यह प्रश्न ब्लागर के सँदर्भ में तो क्या,
 
डा. अमर कुमार
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अपनी उनके संग सुरक्षित ड्राइविंग … …

मोबाइल के उपयोग एवं ड्राइविंग के समय टेप से छेड़छाड़ ( डा. अनुराग ) के बाद आपकी उनकी चटर चटर ही एक्सीडेन्ट का एक और मुख्य कारण है ! अपुन के उल्हासनगर के कारग़ुज़ारों ने अनोखा सीट-बेल्ट इज़ाद किया है, जी हाँ.. ख़ालिस Made in USA ! बगल में बैठी ख़ूबसूरत दुर्घटना
 
डा. अमर कुमार
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अथ क़ाफ़िर कथा

शिवभाई की पोस्ट पर कल देखने को मिला कि, हड़ताली ब्लागरों में मैं भी शहीद हो गया हूँ ! नहीं भाई, मेरा हड़ताल उड़ताल नहीं चल रहा है..तेल वाले हड़ताल पर थे.. या हड़ताल वाले गये तेल लेने ! आप तो दिन तक गिन ले गये…  कि, 16 दिन से गायब हूँ । ‘ काना [...]
 
डा. अमर कुमार
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ऎसी आज़ादी और कहाँ, आज़ाद ख़्याल विवेचन

विवेक भाई आग लगा कर अगले हफ़्ते के लिये बाई कर गये । गोया, चर्चाकार न हुये ज़मालो हो गये । यह तीसरी बार है, जब मैं इन चिट्ठाचर्चा वालों के उकसावे में पोस्ट लिखने को मज़बूर हो रहा हूँ । भुस्स मे आग लगा कर बी ज़मालो दूर खड़ी । मेरी पिछली कई पोस्ट [...]
 
डा. अमर कुमार
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क्षमा करें डा. मान्धाता

ब्लाग में आख़िर क्या लिखा जाना चाहिये..  पढ़ कर मेरी प्रतिक्रिया रोके ना रूक सकी । बड़ा अनुकूल विषय है,सो टिप्पणी के रूप में यह पोस्ट यहीं चेंप देता हूँ । डा. मान्धाता जी, आपने मेरा मनोनुकूल विषय उठाया है, अतएव.. सहमत हूँ, कि हिन्दी ब्लागिंग स्तरहीनता
 
डा. अमर कुमार
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क्षमा करें डा. मान्धाता

ब्लाग में आख़िर क्या लिखा जाना चाहिये..  पढ़ कर मेरी प्रतिक्रिया रोके ना रूक सकी । बड़ा अनुकूल विषय है,सो टिप्पणी के रूप में यह पोस्ट यहीं चेंप देता हूँ । डा. मान्धाता जी, आपने मेरा मनोनुकूल विषय उठाया है, अतएव.. सहमत हूँ, कि हिन्दी ब्लागिंग स्तरहीनता
 
डा. अमर कुमार
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इतना विशाल देश.. क्या अकेले मेरे बस में ?

हरतरफ़ चर्चा है, कि देश मुसीबत में हैं, आतंकी इसे रौंद रहे हैं, घोटाले इसे लील रहे हैं ! सत्यम भी आख़िरकार असत्यम साबित हो रहा है ।  अब, भला आप ही बताइये, मैं अकेला क्या कर सकता हूँ ?  कल जोड़ने बैठा तो .. देश की आबादी निकली : 100 करोड़ [...]
 
डा. अमर कुमार
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बिन बुलायी, एक अपूर्ण कविता

आज व्याधिग्रस्त माया श्रीवास्तव धुर 5 बजे अवतरित हुईं, टालने का प्रश्न नहीं.. पर थोड़ी व्यग्रता थी क्योंकि यह आज के परामर्श समय की अंतिम बेला थी, हिस्ट्री लेने के दौरान मेरे मुँह से ‘ परिवेश ‘ शब्द का उल्लेख  हुआ । बस, उनके पतिदेव महोदय
 
डा. अमर कुमार
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बिन बुलायी, एक अपूर्ण कविता

आज व्याधिग्रस्त माया श्रीवास्तव धुर 5 बजे अवतरित हुईं, टालने का प्रश्न नहीं.. पर थोड़ी व्यग्रता थी क्योंकि यह आज के परामर्श समय की अंतिम बेला थी, हिस्ट्री लेने के दौरान मेरे मुँह से ‘ परिवेश ‘ शब्द का उल्लेख  हुआ । बस, उनके पतिदेव महोदय
 
डा. अमर कुमार
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कभी कभी मेरे दिल में..

….  यह ख़्याल आता है कि, ब्लागिंग में मुआ ब्लागर आख़िर करता क्या है …  क्या केवल यही तो नहीं,   कि   " रमैया तोर दुल्हिन लूटै बजार " ? शायद ऎसा नहीं ही होगा.. काहे कि सदियन पाछै कबीरौ पलटि के ठोकिं गये रहें,
 
डा. अमर कुमार
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कभी कभी मेरे दिल में..

….  यह ख़्याल आता है कि, ब्लागिंग में मुआ ब्लागर आख़िर करता क्या है …  क्या केवल यही तो नहीं,   कि   " रमैया तोर दुल्हिन लूटै बजार " ? शायद ऎसा नहीं ही होगा.. काहे कि सदियन पाछै कबीरौ पलटि के ठोकिं गये रहें,
 
डा. अमर कुमार
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तुम पार नेट परमेश्वर तुम ही नेट पिता

  ॐ जय गूगल हरे, स्वामी जय गूगल हरे फ़्रस्ट (एटेड ) जनों के संकट, त्रस्त जनों के संकट एक क्लिक में दूर करे ॐ जय गूगल हरे… जो ध्यावै सो पावै [...]
 
डा. अमर कुमार
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तुम पार नेट परमेश्वर तुम ही नेट पिता

  ॐ जय गूगल हरे, स्वामी जय गूगल हरे फ़्रस्ट (एटेड ) जनों के संकट, त्रस्त जनों के संकट एक क्लिक में दूर करे ॐ जय गूगल हरे… जो ध्यावै सो पावै [...]
 
डा. अमर कुमार
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अप्रासँगिक स्वगत कथन

सुबह सुबह अख़बार पढ़ दिन ख़राब करने से बेहतर लत है, चिट्ठाचर्चा ! आदत के मुताबिक आज भी पलटाया तो ..  " उपस्थित श्रीमान /  मैडम  साथ एक बेहतरीन लिंक लेकर अनूप जी को पाता हूँ, ” जो कि स्वयँ में चर्चाकार का ही टैगलाइन है, और बहुत अच्छा
 
डा. अमर कुमार
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अप्रासँगिक स्वगत कथन

सुबह सुबह अख़बार पढ़ दिन ख़राब करने से बेहतर लत है, चिट्ठाचर्चा ! आदत के मुताबिक आज भी पलटाया तो ..  " उपस्थित श्रीमान /  मैडम  साथ एक बेहतरीन लिंक लेकर अनूप जी को पाता हूँ, ” जो कि स्वयँ में चर्चाकार का ही टैगलाइन है, और बहुत अच्छा
 
डा. अमर कुमार
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जीवनदास को कड़ी से कड़ी सजा दी जाये

बड़े दिनों से यह “ चलता रहे.. चलता रहे.. “ देख व सुन रहा हूँ । यूँ तो मैं ’ निट्ठल्ला इफ़ेक्ट ’ से इतना पका हुआ हूँ कि, टेलीविज़न बहुत ही कम देखता हूँ । एक म्यान में दो तलवारें वैसे भी कहाँ रह पाती हैं ? अरे, निगोड़ी ब्लागिंग को शामिल न भी [...]
 
डा. अमर कुमार
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जीवनदास को कड़ी से कड़ी सजा दी जाये

बड़े दिनों से यह “ चलता रहे.. चलता रहे.. “ देख व सुन रहा हूँ । यूँ तो मैं ’ निट्ठल्ला इफ़ेक्ट ’ से इतना पका हुआ हूँ कि, टेलीविज़न बहुत ही कम देखता हूँ । एक म्यान में दो तलवारें वैसे भी कहाँ रह पाती हैं ? अरे, निगोड़ी ब्लागिंग को शामिल न भी [...]
 
डा. अमर कुमार
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नँगे सच में नहायी बहना

देख भाया, मेरी गलती नहीं हैं । आजकल हाल है कि, ’ जाते थे जापान .. पहुँच गये चीन समझ लेना ’ तो पढ़ा ही होगा । अपनी प्रतिष्ठा के प्रतिकूल एक मिन्नी सी,  सौम्य.. लजायी हुई पोस्ट देकर अपने जीवित होने की गवाही देनी पड़ी । बताइये भला.. मेरी एक चिरसँचित
 
डा. अमर कुमार
Jan 02 2010 08:28 PM
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नँगे सच में नहायी बहना

देख भाया, मेरी गलती नहीं हैं । आजकल हाल है कि, ’ जाते थे जापान .. पहुँच गये चीन समझ लेना ’ तो पढ़ा ही होगा । अपनी प्रतिष्ठा के प्रतिकूल एक मिन्नी सी,  सौम्य.. लजायी हुई पोस्ट देकर अपने जीवित होने की गवाही देनी पड़ी । बताइये भला.. मेरी एक चिरसँचित
 
डा. अमर कुमार
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जिन्दगी की रेल कोई पास कोई फेल

आज अभी चँद मिनटों पहले एक पोस्ट पढ़ी.. निठल्ले , सठेल्ले और …………ठल्ले उब दिनों एक गाना सुना करता था, उसे अपने हिसाब से तोड़ मरोड़ भी लिया ( अभी  ईस्वामी  की टिप्पणी के बाद यह अँश जोड़ा है.. धन्यवाद स्वामी ! ) तो एक गाना सुना
 
डा. अमर कुमार