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29 Mar 2010
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जाझ फिरंगी सदैव के लिये इतिहास के नेपथ्य में चला गया।

कुछ दिन बाद जाझ फिरंगी ने अपनी स्थिति को ठीक करके उसने बीकानेर को दण्डित करने का निर्णय लिया क्योंकि बीकानेर के कारण ही वह जीती हुई लड़ाई हार गया था। जॉर्ज ने इस बार दो काम किये। एक तो उसने अपने तोपखाने को मजबूत बनाया तथा दूसरे उसने पानी का प्रबंध किया।
 
Dr. Mohanlal Gupta
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जाझ फिरंगी ने राजपूतों से एक–एक कुंआँ छीन लिया

जॉर्ज टॉमस जयपुर राज्य की सेना के पीछे भागता हुआ इसी प्रयास में था कि किसी तरह एक कुंआँ हाथ लग जाये। दोनों सेनाओं में काफी अंतर था इसलिये जयपुर की सेना कुंओं को पाटने में सफल हो रही थी और जॉर्ज किसी कुएँ पर अधिकार नहीं कर पा रहा था।जॉर्ज टॉमस राजपूताने
 
Dr. Mohanlal Gupta
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Feb 16 2010 09:05 AM
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मारवाड़ की स्त्रियां दो–दो पैसे में और जयपुर की स्त्रियां एक–एक पैसे में बिकीं

इधर जोधपुर को जयुपर तथा बीकानेर की सेनाओं ने घेर रखा था और उधर अमीर खां अपने 60 हजार पिण्डारियों को लेकर जयपुर राज्य में घुसकर लूट मार करने लगा। इस पर विवश होकर जयपुर नरेश को अपनी सेना जोधपुर से हटा लेनी पड़ी।जोधपुर और जयपुर राज्यों के मध्य हुए इस युद्ध
 
Dr. Mohanlal Gupta
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पिण्डारियों ने राजकुमारी कृष्णाकुमारी को जहर पीने पर विवश कर दिया

उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभ में मराठों और पिण्डारियों के निरंतर आक्रमणों ने राजपूताना की राजनैतिक शक्ति को तोड़कर रख दिया था जिससे त्रस्त होकर राजपूताने की रियासतों ने सिंधियों तथा पठानों को अपनी सेनाओं में जगह दी। ये नितांत अनुशासनहीन सिपाही थे जो किसी
 
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पिण्डारियों ने पोकरण ठाकुर का सिर काटकर राजा को भिजवाया

ई. 1803 में राजा मानसिंह जोधपुर की गद्दी पर बैठा। उस समय उसके पूर्ववर्ती राजा भीमसिंह की विधवा रानी गर्भवती थी जिसने कुछ दिन बाद धोकलसिंह नामक पुत्र को जन्म दिया। पोकरण के ठाकुर सवाईसिंह ने पाली, बगड़ी, हरसोलाव, खींवसर, मारोठ, सेनणी, पूनलू आदि के
 
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पिण्डारियों ने प्रजा तथा राजाओं को जी भर कर लूटा

गवर्नर जनरल लार्ड कार्नवालिस (ई.1805) द्वारा देशी राज्यों में हस्तक्षेप न करने की नीति अपनाई गयी जिसके कारण न केवल मध्य भारत और राजपूताना की रियासतें पिंडारियों और दूसरे लुटेरों की क्रीड़ा स्थली बनीं बल्कि मराठों की शक्ति घटते जाने से पिंडारी बहुत
 
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महारावल ने घबराकर अंग्रेज बहादुर से दोस्ती गांठने का मन बनाया

जैसलमेर को अंतर्कलह में फंसा हुआ जानकर ई. 1783 में बीकानेर के राजा ने पूगल पर अधिकार कर लिया और उसे अपने राज्य में मिला लिया। उन दिनों जोधपुर राज्य में भी शासनाधिकार को लेकर कलह मचा हुआ था। राजा विजयसिंह अपने पौत्र मानसिंह को अपना उत्तराधिकारी बनाना
 
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मेहता सालिमसिंह ने जैसलमेर के तीन राजकुमारों को मार डाला

जिस समय जोधपुर, जयपुर, मेवाड़ और बीकानेर आपस में संघर्षरत थे तथा मराठों और पिण्डारियों का शिकार बन रहे थे उस समय जैसलमेर का भाटी राज्य भयानक आंतरिक कलह में उलझा हुआ था। मरूस्थलीय एवं अनुपजाऊ क्षेत्र में स्थित होने के कारण मराठों और पिण्डारियों को इस
 
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जाट महाराजा ने अंग्रेजों को भरतपुर से बाहर निकाल दिया

अहमदशाह अब्दाली ने 1757 से 1761 के बीच महाराजा सूरजमल से कई बार रुपयों की मांग की। अपने राज्य की रक्षा के लिये महाराजा ने अब्दाली को कभी दो करोड़़, कभी 65 लाख, कभी 6 लाख तथा अन्य बड़ी–बड़ी राशि देने के वचन दिये किंतु उसे कभी फूटी कौड़ी नहीं दी। 1761 में
 
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भरतपुर की महारानी ने कहा, मराठा सैनिक मेरे बच्चे हैं

एक तरफ तो बंगाल से अंगे्रज शक्ति उत्तरी भारत को दबाती हुई चली आ रही थी तथा दूसरी ओर पिण्डारी और मराठे उत्तरी भारत को रौंदने में लगे हुए थे। यह भारतीय इतिहास के मध्यकाल का अवसान काल था किंतु अफगानिस्तान की ओर से विगत कई शताब्दियों से आ रही इस्लामिक
 
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कोई तो बताये मेरी गुलाब को किसने मारा?

ई। 1761 में मेवाड़ी सरदार सिसी फ्रांसिसी सेनापति समरू को मेवाड़ पर चढ़ा लाये। तब से महाराणा और उसके सरदारों में आपसी संघर्ष का जो सिलसिला चला वह रजवाड़ों के मिट जाने के बाद ही समाप्त हो सका।जिस समय अंग्रेज शक्ति देशी राज्यों की घेराबंदी करने की योजना बना
 
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खोखर बड़ो खुराकी, खा गयो अप्पा जैसो डाकी

ये मदमत्त मरहठे अपना स्वरूप भूलकर राजपूताने के क्षत्रियों को दु:ख न देते तो राजपूताने की एकाएकी वर्तमान दशा इतनी खराब न हुई होती। – भारतेन्दु बाबू हरिश्चन्द्र ई.1882 मुगल सत्ता के कमजोर हो जाने के बाद केंद्रीय स्तर पर राजनीतिक शक्ति की अनुपस्थिति की
 
Mohanlal Gupta
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जहांगीर के सामने मामूली सूबेदारनी दिखती थी इंगलैण्ड की महारानी

मैं आपको (इंगलैण्ड के राजा को) विश्वास दिलाता हूँ कि इन लोगों (भारतीयों) के साथ सबसे अच्छा व्यवहार तभी किया जा सकता है जब एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में संवादवाहक की छड़ी हो। - सर टॉमस रो, ई। 1619 भारत में ईस्ट इण्डिया कम्पनी का आगमन ई. 1600 में हुआ जब
 
Mohanlal Gupta
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गोरा हट जा

गोरा हट जा Told and untold stories of rajput princesजब तक इंगलैण्ड के मुकुट में भारत रूपी हीरा जड़ा हुआ है तब तक इंगलैण्ड को कोई पछाड़ नहीं सकता। किंतु इसकी कीमत हम तब तक नहीं समझेंगे जब तक कि हम इसे खो न देंगे। – लॉर्ड कर्जनसिकंदर के भारत में आने से भी
 
Mohanlal Gupta
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