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स्वच्छ सन्देश: विज्ञान की आवाज़

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14 Jun 2010
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Reality of cold /soft drinks.लोकप्रिय 'शीतल पेय' ब्रांडों में रखी सामग्री के बारे में सच की खोज !

पिछली दिनों एक पोस्ट में ज़ाकिर भाई ने भीषण गर्मी के बारे में लिखा था, मैं जब वह पोस्ट पढ़ रहा था तो पढ़ते पढ़ते ही इतनी गर्मी लगने लगी कि कोल्ड ड्रिंक्स की शिद्दत से हाजत महसूस होने लगी और मैंने फ़ौरी तौर पे
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कच्ची उम्र में जिसने यह आदत से दूरी बना ली ज़्यादातर आगे कम ही चांसेज़ होते हैं कि बुरी आदत अख्तियार कर ले: Saleem Khan

ज़रूरी यह नहीं कि आप किस तरह से लोगों को सिगरेट पीने अथवा स्मोकिंग से होने वाले नुक्सान से अवगत करा रहें है, ज़रूरी यह है कि आप अपनी तरफ़ से उन सभी स्मोकर्स को यह मैसेज ज़रूर पहुंचाएं, जितना हो सके! और मेरी तरफ़ से यह पूरी कोशिश रहती है कि
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शराबखोरी की सबसे बड़ी वजह है इसका वंशानुगत होना: Saleem Khan

शराब जिसका नाम सुनते ही उन लोगों के मन में आनन्द का संचार हो उठता है जो इसका प्रयोग करते हैं और वहीँ उन लोगों के मन में घृणा का संचार होता है जो इसका प्रयोग नहीं करते हैं. सवाल ये उठता है कि ऐसी कौन सी वजह है जो इंसान को शराब पीने का आदि बना देती है? ऐसे
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जब 'गौरैया' ने हमारे घर में घोंसला बनाया था, ऐसा लगा मानो घर में कोई मेहमान आया था: Saleem Khan

सर्वप्रथम मैं जनाब केके मिश्रा और जनाब डीपी मिश्रा को धन्यवाद कहना चाहता हूँ जो dudhwalive.com व अपने ब्लॉग के माध्यम से निरन्तर प्रकृति के प्रति जागरूकता फैला रहें हैं. जनाब डी पी मिश्रा जी से मेरा परिचय लगभग
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आपने कभी सोचा है कि औरतों को दाढ़ी क्यूँ नहीं उगती?

आपने कभी सोचा है कि औरतों को दाढ़ी क्यूँ नहीं उगती? इसके पीछे की असली वजह क्या है? आखिर ईश्वर ने ऐसा क्या कर दिया कि मर्दों को दाढ़ी मूंछ दी लेकिन औरतों को नहीं... तो आईये जानते हैं इसका कारण- जब बच्चा जन्म लेता है तो उसके शरीर पर केवल रोयें जैसे बाल ही
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ग़ैब से चलने लगी जब एक ज़हरीली हवा और रोज़ उसे 20,000 लीटर पीते चले गए!

ग़ैब से चलने लगी जब एक ज़हरीली हवा और रोज़ उसे 20,000 लीटर पीते चले गए! जी हाँ, एक औसत व्यक्ति हर रोज़ लगभग 20,000 लीटर हवा ग्रहण करता है. हर उस पल जब हम सांस लेते हैं, ज़हरीले और ख़तरनाक रसायनों के साँस के दौरान शरीर के अन्दर जाने का ख़तरा
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सन 2070 में लिखा गया एक पत्र, मानवता के नाम!

यह सन 2070 है!मैं पचास वर्ष का हो चुका हूँ, लेकिन मुझे देख कर जैसे लगता है कि मैं 85 का हूँ! मुझे किडनी की बिमारी है क्यूंकि मझे पीने के लिए पर्याप्य पानी नहीं मिलता है. मुझे भय है कि मैं अब ज़्यादा समय तक ज़िन्दा नहीं रह पाउँगा. मैं अपने
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सन 2030 तक पीने के शुद्ध पानी की मात्रा कितनी रह जाएगी!

मानव द्वारा की जा रही अप्राकृतिक गतिविधियों के कारण बढ़ते जल प्रदुषण से जल निकायों (नदियों, झीलों, समुद्रों और भूगर्भीय जल) पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और अगर इंसान इसी तरह अपने नितांत निजी फ़ायदों और सिर्फ़ वर्तमान लाभों की पूर्ति हेतु अपना यह दुष्कृत्य
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वो आसमान से मौत बनके बरसेगी: 'अम्ल वर्षा'

लोककथाओं में ही नहीं अनेक किवदंतियों में भी आसमान से ईश्वर का क़हर बरसने के किस्से प्राचीन काल से चले आ रहे हैं। हालाँकि इन कथाओं को हमेशा शक की निगाह से देखा जाता रहा है, लेकिन आज के घोर वैज्ञानिक युग में भी कुछ ऐसे हालात बन रहे हैं, कि लोक कथाओं के वह