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04 May 2010
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पेशावर कांड के नायक थे चन्द्र सिंह गढ़वाली

चन्द्र सिंह गढ़वाली का जन्म 25 दिसम्बर 1891 में हुआ था। चन्द्रसिंह के पूर्वज चौहान वंश के थे जो मुरादाबाद में रहते थे पर काफी समय पहले ही वह गढ़वाल की राजधानी चांदपुरगढ़ में आकर बस गये थे और यहाँ के थोकदारों की सेवा करने लगे थे। चन्द्र सिंह के पिता का नाम
 
विनीता यशस्वी
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उत्तराखंड का राज्यपुष्प ब्रह्मकमल

हालांकि इसका नाम ब्रह्मकमल है पर यह तालों या पानी के पास नहीं बल्कि ज़मीन में होता है। ब्रह्मकमल 3000-5000 मीटर की ऊँचाई में पाया जाता है। ब्रह्मकमल उत्तराखंड का राज्य पुष्प है। और इसकी भारत में लगभग 61 प्रजातियां पायी जाती हैं जिनमें से लगभग 58 तो अकेले
 
विनीता यशस्वी
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उत्तराखंड में मनाये जाने वाला प्रमुख त्यौहार है हरेला

उत्तराखंड में मनाये जाने वाले त्यौहारों में से एक प्रमुख त्यौहार हरेला भी है। इस त्यौहार को मुख्यतया कृषि के साथ जोड़ा जाता है। हरेले को प्रतिवर्ष श्रावण मास के प्रथम दिन मनाया जाता है। इसे मनाने का विधि विधान बहुत दिलचस्प होता है। जिस दिन यह पर्व मनाया
 
विनीता यशस्वी
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ऐसा होता है पत्थर मारने वाला मेला

कुमाउं के देवीधुरा स्थान में रक्षा बंधन के दिन पत्थर मारने वाला एक मेला मनाया जाता है जिसे बग्वाल कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि देवीधुरा के लोग बावन हजार चौसठ योगनियों के आतंक से बहुत दु%खी रहते थे। उन्होंने मिल कर माँ वाराही से प्रार्थना की कि वह उनको
 
विनीता यशस्वी
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क्या यही है हिन्दी प्रेम ???

वैसे तो ब्लॉग जगत में फालतू और बकवास पोस्टों पर टिप्पणियों के ढेर लग जाना और उन्हें एक बहुत बड़ा बहस का मुद्दा बना देना होता रहता है, पर अफसोस तब होता है जब कि सच में एक बहुत बड़ा विषय जो हमारे देश, हमारी भाषा, हमारे सम्मान से जुड़ा हो उसके बारे में बात की
 
विनीता यशस्वी
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औली के बारे में कुछ

औली उत्तराखण्ड का एक भाग है। यह 5-7 किमी. में फैला छोटा-सा स्की रिसोर्ट है। इस रिसोर्ट को 9,500-10,500 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है। यहां बर्फ से ढकी चोटियां बहुत ही सुन्दर दिखाई देती हैं। इनकी ऊंचाई लगभग 23,000 फीट है। यहां पर देवदार के वृक्ष बहुतायत
 
विनीता यशस्वी
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मेरी बिनसर अभ्यारण्य की यात्रा - 3

अगले दिन साल की अंतिम सुबह थी और हम हिमालय के सामने थे। सूर्योदय के समय हिमालय देखने के लिये हम ने शाम से ही पूरे इंतज़ाम कर लिये थे। रैस्ट हाउस वालों से सूर्योदय का समय और जगह भी पूछ ली थी। उसी के अनुसार अलार्म लगा लिये। सुबह अलार्म बजते ही बगैर आलस किये
 
विनीता यशस्वी
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22 अक्टूबर 2019 में हो जायेंगे 100 साल पूरे

यह मेरे ब्लॉग की भी 100 वीं पोस्ट है।भारत में मद्रा के स्वरूप में हमेशा ही बदलाव होता रहा है। पहले जो मुद्रा प्रचलन में थी वो इस समय के प्रचलित मुद्रा से बिल्कुल अलग थी। ऐसी ही एक मुद्रा मुझे देखने को मिली तो मेरे लिये किसी अजूबे से कम नहीं थी। यह दस
 
विनीता यशस्वी
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मेरे गांव की कुछ तस्वीरें - 2

मैंने पिछली एक पोस्ट में अपने गांव की कुछ तस्वीरें लगायी थी। इस पोस्ट में एक बार फिर अपने गांव की कुछ और तस्वीरें लगा रही हूं।मेरे गांव का पुल मेरा गांव सुबह के समय मेरे गांव का मन्दिरयह मन्दिर स्थानीय भगवान एैडी जी का है।  मेरे गांव के खेत मेरे
 
विनीता यशस्वी
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रानीबाग की कुछ तस्वीरें इस पोस्ट में

पिछली पोस्ट में मैंने रानीबाग में लगने वाले उत्तरायणी मेले के बारे में लिखा था पर कुछ समस्याओं के कारण तस्वीरें नहीं लगा पाई थी। इस पोस्ट में रानीबाग की कुछ तस्वीरें लगा रही हूं।रानीबाग का मुख्य मन्दिर जिया रानी की गुफा को जाने वाला रास्ताजिया रानी
 
विनीता यशस्वी
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रानीबाग का उत्तरायणी मेला

इस बार 14 जनवरी मकर संक्रान्ति या उत्तरायणी वाले दिन रानीबाग जाने का अवसर मिला जो मेरे लिये इस दुनिया का सबसे पवित्र स्थान है। रानीबाग नैनीताल से 28 किमी. की दूरी पर है। रानीबाग में ही एच.एम.टी. घड़ी की फैक्ट्री भी है जिसने पहाड़ वालों को बहुत लम्बे समय तक
 
विनीता यशस्वी
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रोचक है नैनीताल की चप्पू वाली नावों का इतिहास

 नैनीताल की चप्पू वाली नावें नैनीताल की पहचान मानी जाती रही हैं। इन नावों का इतिहास जितना रोचक है उतनी ही रोचक हैं इन नावों को बनाने की विधि। नावों को बनाने के लिये तुन की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है। तुन की लकड़ी का प्रयोग इसलिये किया जाता है
 
विनीता यशस्वी