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इतनी धुंध कभी न थी कि डूब जाएँ उसमे मकान सारे
इतनी धुंध कभी न थी कि डूब जाएँ उसमे पेड़ कि डूब जाएँ उसमे मकान सारे कि डूब जाएँ पहाड़ और नदियाँ कि रास्ता बिलकुल दिखाई न दे कि भटक जाएँ शहर के लोग इधर उधर कि भटकते हुए पहुंचेएक सदी दुसरे सदी तक इतनी धुंध कभी न थी कि अगर आप लिखे किसी को ख़त तो वह पढ़ा न
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Mar 21 2010 04:23 PM


Shuffle








