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प्रियंकाभिलाषी..

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17 Jun 2010
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'उठो..उठो..ए-भारतवासी..!!!'

..."आँगन में अलसायी..खनखनाती कनक..भेदती समय-चक्र..हौसले की खनक..ह्रदय-ताल में गहराई..इंसानियत की जनक..कब तक जलाएगी..यह राजनीति की भनक..संगठित संपदा करती कमाल..यहाँ-वहाँ फैली चनक..उठो..उठो..ए-भारतवासी..सुनो..भारत माँ की पुकार..मिटा मन के विषण..खोलो राह एक
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'अंतर्मन की चादर..'

..."सावन की पहली बारिश..और वो तेरा मुस्कुराना..मिट्टी की सौंधी सुगंध..और वो तेरा चहचहाना..आँगन में नाव बहाना..और वो तेरा लहकाना..अरसे से सहज रखी है..वो भीगी मासूमियत..और..अल्हड़ शोखी..अंतर्मन की चादर पर..!!"...
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'तेरी महक.. माँ..'

..."संदूक में लिपटी रखी है..मासूमियत में डूबी..बचपन की सुनहरी..यादों की झड़ी..साथ ले आती हैं..अनगिनत क्षण..वो अपनापन..मीठे आँसू..मीलों फैली मुस्कुराहट..सतरंगी आत्मीयता..ताज़ी है..अब तक..तेरी महक..माँ..!!"...
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'हम ना होंगे..'

..."हसरतों में दबे..मंजिल के निशां..चाहतों के मेले..कम ना होंगे..अफ़सोस..हम ना होंगे..!!"...
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'बिखरा वजूद..'

..."उनको है शिकायत..लिखते नहीं नज़्म..बिखरा हो जब वजूद..हो कैसे आबाद बज़्म..!!"...
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'इनायत-ए-माज़ी..'

..."कलम खुद-ब-खुद..तस्वीर लहकाती रही..१साँसे खुद-ब-खुद..आँगन महकाती रही..२मदहोशी खुद-ब-खुद..कसक दहकाती रही..३मियाद खुद-ब-खुद..नूर चहकाती रही..४इश्क-ए-दीदार..इनायत-ए-माज़ी..!"...
Jun 12 2010 05:43 PM
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'खरीद-फरोत..'

..."दाम लगा ना पाया माज़ी..मेरी मोहब्बत का..खरीद-फरोत..बंद है रूह की अब..!!"...
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'सनम..'

..."तेरे हर नक़ाब से..हकीकत चुरा लूँगा..जो ना मिले तुम सनम..अक्स मिटा दूँगा..!!!"...
Jun 11 2010 09:00 PM
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'लिबास..'

..."निकलेंगे जब कभी..छूकर तेरी खुशबू..महकेंगे राज़ कई..अंजुमन के फलक पे..मेरा लिबास..बादामी-बादामी..!!"...
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'दोज़ख..'

..."माज़ी के पन्नों में..निकले हैं..गुल बेहिसाब..दफनाये थे..रिवायतों के खौफ से..सुलगते जज़्बात..दर्द से सरोबार..कुछ सख्त लिबास..कुछ रंगीं मिजाज़..क्यूँ..नूर आजमाता है..दोज़ख..!!"...
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'आशियाना-ए-कब्र..'

..."दिल की वादियों में..ठहरा अक्स..रूह में महफूज़..फलक की तहज़ीब..कातिल लगाये बैठा..बेहिसाब नक़ाब..ज़ार-ज़ार मिसाल देता..अज़ीज़ रकीब..दस्तूर हैं..निराले कुछ..शिकवे सजते..आशियाना-ए-कब्र..!!"...
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'वजूद-ए-हयात..'

..."बिखरे जज़्बात..सुलगी रूह..खूनी खंज़र..आलम सारा..कातिल मेरा..माँगता फिर रहा..वजूद-ए-हयात..कैसे करूँ इकरार..है मोहब्बत..फ़क़त तुझसे ही..ए-दिलदार..!!"...
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'सिलवट..'

..."यादों के दिये..जले-बुझे..रात भर..हर करवट..हर सिलवट..क़ैद रही..रूह में..हर नफ्ज़..!"...
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'मौसम-ए-सुकूत..'

..."अक्स माँगता है निशां.. रूह साँसों का समां.. मौसम-ए-सुकूत..रंगीन..!"...
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'शुक्रिया..'

..."कैसे कर पाऊँगा जुदा..रूह से..दिया है जिसने..शौहरत-ए-वफ़ा..और..निगाओं की धार पर..आवारा-से..दो पल..शुक्रिया..माज़ी..!"...
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'खज़ाना-ए-दिल..'

..."दफ़ना आया हूँ..वजूद..रोज़-रोज़ की दलीलों ने..ऐवें ही..खज़ाना-ए-दिल..बेज़ार किया..!!"...
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'माज़ी..'

..."समझ सके जो..रूह का शामियाना..ऐसी..मशाल चाहता हूँ..तेरी इबादत में..बिक जाऊँ..ऐसा..जुनूँ चाहता हूँ..लम्हों के बादल..फलक की मेहँदी..ऐसा..तौहफा चाहता हूँ..आफ़ताब-सा लोहा..महताब-सी सुराही..ऐसा..दरिया चाहता हूँ..ए-माज़ी..तुझमें..सिमटना चाहता हूँ..!!"...
May 25 2010 01:50 PM
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'वफ़ा के प्याले..'

..."थाम कर..रूह से..नज़रों की खलिश..चुरा लाया हूँ..दो पल..वफ़ा के प्याले..!"...
May 24 2010 03:26 PM
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''शब..'

..."लिपट कर..रोई बहुत..गर्द से ढकी..जुस्तजू से महकी..दास्तान-ए-मोहब्बत..गलीचा-ए-गुल..नम हुआ..गम-ए-शहनाई..बाँह फैलाती..तेरी और मेरी..तस्सवुर की..बहती हुई..अरमानों की..रूह में पनपती..जिस्म में सुलगती..तूफानी मंज़र..आवारा..मदमस्त..मयकशी..'शब'..!!"...
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'सेज़..'

..."रंजिश से लबरेज़..हाथों की लकीरें..कब छीन सका है..हिज्र-ए-सेज़-ए-गुल..!"...
May 23 2010 12:30 AM
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'वादियाँ..'

..."ढूँढता हूँ..जब कभी..अपने निशां..पाता हूँ..तेरा अक्स..वादियों में घुला..!!"...
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'बिसात..'

..."डूबा हूँ..सैलाब-ए-दुनियादारी में.. दफ्न हुआ हूँ..जश्न-ए-रिवायत में..मेरी बिसात क्या..तेरी अदालत..!!"...
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'मेरा लड्डू..'

For a 'Net' Friend..who I met by chance..and got to know..a genuine healer..a simple and sensitive heart..a beautiful person..full of zest..enthusiasm..life..!! A truly inspiring..and helpful human being..!!Dedicated to u..!! Taking this liberty of
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'कबूल है..'

..."ता-उम्र ढूँढा है...साया तेरा..ना कह सका..मस्जिद हो..तस्वीर हो..आईना हो..चाँद हो..वजूद हो..सबब हो..कबूल है..तहज़ीब हो..रवानगी हो..जिंदगानी हो..मेरी कहानी हो..!!रूह की निशानी हो..!!!"...
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'मतला..'

..."टूटा है..आशियाँ फिर..नम हुईं..आँखें फिर..जला है..गुलिस्तान फिर..बहा है..दरिया फिर..कब तक..मतला लिखूँ..गुफ्तगू का..!!"...
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'बेवफ़ा..'

..."कुछ पल जुदाई के..उधार लाया था..माज़ी के कूचे से..सोचा था..इक आशियाँ बना..रूह में छुपा रखूँगा..आज फिर..उलझा हूँ..ख्यालातों से..क्यूँ वफ़ा निभाई..काश..बेवफ़ा होता..मैं भी..!!"...
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'गुमान..'

..."तेरा इक गुमान हूँ.. तुझ में शुमार हूँ.. रूह में रमता.. फ़क़त.. तेरा ही ख्याल हूँ..!"...
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'नन्ही-सी प्यारी कोयल..'

..."गुनगुनाती..मूरत चमकाती..मुस्कुराती..रंग सजाती..इठलाती..सपने दिखलाती..आई है..मेरे आँगन..बरसों बाद..वो नन्ही-सी..प्यारी कोयल..1व्याकुल है..आपाधापी से..आई है..मेरे आँगन..बरसों बाद..वो नन्ही-सी..प्यारी कोयल..2गुम हुआ..शेह्तूत से..घरौंदा उसका..आई है..मेरे
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'बाज़ार-ए-ईमान..'

..."जुस्तजू में भिगो दामन..लाया हूँ शबनम..थोड़ी नज़रों पर रख लेना..थोड़ी फलक पर झटक देना..सुना है..अश्कों की कीमत..लगती है..बाज़ार-ए-ईमान में..!!"...
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'बरनी..'

..."बरनी में रखा था..एहसासों का ठेला..मोहब्बत का रेला..धडकनों का ठेला..नज़रों का मेला..आँसू निचोड़ देना..लज्ज़त कम हो..मासूम 'यादों' की..जब..!"...
May 11 2010 05:41 PM
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'तस्सवुर..'

..."साँसों की डोर से बांधे..रिश्ते कई..एहसास कई..निकले अरमान..तस्सवुर से जब..ना बची ख्वाईश कोई..!"...
May 11 2010 04:11 PM
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'माँ...'

..."महफूज़ रहा उम्र भर..तेरे साये से..शफ्कत बरसता रहा..तेरे पाये से..रोशन हुआ..फलक मेरा..दुआ तेरी..उरूज मेरा..मसरूर हुआ..वजूद मेरा..महफिल तेरी..चरचा मेरा..माँ...तुझको अर्पण..कुछ कलियाँ ताजी-सी..कुछ यादें रूमानी-सी..कुछ पलकें भीगी-सी..!"...
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'आज फिर..'

..."जुड़े हैं कांटें..जीवन में ऐसे..ना फांस निकलती है..ना लहू के कतरे..तुम तो..बस छुअन से..समा बाँध देते थे..मेरी कश्ती गहराई से..उबार दो..आज फिर..!"...
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'रंजिश का शामियाना..'

..."देहलीज़ से उठे नैन..ना जाने क्यूँ थे बेचैन..सफ़र की थकान थी..या..सपनों का आशियाना..साँसों की खलिश थी..या..रंजिश का शामियाना..क्या दरिया बाँध सकूँगा..कभी...क्या काज़ल मिटा सकूँगा..कभी..क्या माज़ी भुला सकूँगा..कभी..!"...
May 03 2010 04:02 PM
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' ए-महबूब..'

..."मौसम बचपन-सा खुशनुमा है आज..हँस के आँखों से बहे हैं आँसू आज..ना जाना ए-महबूब..इक पल को भी दूर..हो जाऊँगा..तेरी चाहत में मशहूर..!!"...
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'मैहर-ए-खुदा..'

..."करके लौटे हैं..इक सफ़र..पा सका ना..वो नज़र..कब होंगी पूरी..तलाश मेरी..कब होंगी दूर..तन्हाई मेरी..मशाल सबब..ईमां हौसला..सांच दमखम..मैहर-ए-खुदा..कर लूँगा..हासिल हर कूचा..!!"...
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' दरिया..'

..."बेवज़ह..चाहत के निशाँ उधेड़तें रहे..रूह को हर नफ्ज़..खंज़र भी हैरान हैं..अश्कों का दरिया देख..!"...
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'आँसू..'

..."सपना संजो रखा है..फ़क़त..कैसे तोड़ें..पाया है तुम्हें..अब..कैसे छोड़ें..हाल-ए-दिल ब्याँ..कैसे धडकनें मोड़ें..मेरी मय्यत पर..खैर..आँसू पुराने..कोई कैसे जोड़ें..!"...
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'कश्ती..'

..."खंज़र घोंप दो..सीने में आज..जलता हूँ..ऐसे भी..यादों के समंदर..जज़्बातों की कश्ती में..मेरे महबूब..!!"...
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'नाम..'

..."अजनबी मिले बेशुमार..सफ़र-ए-दरिया-ए-ज़िन्दगानी..चिरांगा हुए..रूह से रूबरू..बिखरी झोली में मसर्रत-ए-'प्रियंकाभिलाषी'..नज़राना-ए-अक़ीदत..सज़ा रखा है..आईने में..ए-हम-ज़लीस..देहलीज़-ए-कूचा..कसौटी-ए-शाम..नाक्शीन होगा..फ़क़त मेरा नाम..!"...*मसर्रत =