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उठो! जागो!

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15 Jun 2010
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वासना और प्रेम में अंतर : आर्ट ऑफ़ लिविंग के अनुसार

प्रेम में एक वस्तु भी जीवन्त हो उठती है। पत्थर और वृक्ष तुमसे बातें करते हैं, चाँद, सूरज और समस्त सृष्टि सजीव और दिव्य हो जाती है। वासना में एक सजीव प्राणी भी केवल वस्तु बन कर रह जाता है। वासना तनाव लाती है, प्रेम विश्वास लाता है। वासना में कपट और छल है,
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शिक्षान्तर का अलिखित संविधान जिन पर आधारित हैं

शिक्षान्तरः एक जीवन आन्दोलन सरकार, बाजार एवं मीडिया जैसी व्यवस्थाओं से हमारी कोई माँग नहीं है। हम किसी व्यक्तिवादी सोच का अनुकरण नहीं करते। हम सबके साथ खुले रुप से विचार बाँटने एवं संवाद को तैयार है। हमारा कोई प्रतिद्धन्द्धी नहीं है। हम किसी प्रकार की
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Jun 12 2010 10:04 AM
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जीवन ऊर्जा का क्रिड़ा स्थल: तनाव न पाले

हमारा जीवन ऊर्जा की बहती नदी समान है। हमारी सारी क्रियाएं, सोच व भावों का आधार ऊर्जा है। मनुष्य इन ऊर्जाओं का जोड़ है। जीवन ऊर्जाओं का खेल है।सफलता असफलता बहुत महत्वपूर्ण नहीं है। यह हमारी सोच पर निर्भर है। अन्यथा सब ऊर्जा का अभिव्यक्तिकरण है। इसलिए यहाँ
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ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की कृति अदम्य साहस

‘‘किस रुप में याद रखे जाने की आपकी आकांक्षा है? आपको अपने को विकसित करना होगा और जीवन को एक आकार देना होगा। अपनी आकांक्षा को, अपने सपने को, एक पृष्ठ पर शब्दबद्ध कीजिए। यह मानव इतिहास का एक बहुत महत्वपूर्ण पृष्ठ हो सकता है। राष्ट्र के इतिहास में एक नया
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मनीष जैन (शिक्षान्तर) : मेरे स्कूल में सिखाये गये 10 झूठ

10. पश्चिमी विज्ञान व तकनीकीकरण ही हमारी सब समस्याओं का हल कर सकती है। 9. बड़े बम व बड़ी सेना से ही हमारी सुरक्षा हो सकती है एवं उन्हीं के द्वारा हमें पूर्ण शान्ति मिल सकती है। 8. प्रतिस्पर्धा व निजी स्वार्थ से ही मेरी क्षमता का विकास हो सकता है। मुझे
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चित्र बनाना कैसे सीखे?

करके देखिये, कितना आनन्द है! चित्र बनाना एक कला है। जीवन में चित्र बनाने का बहुत महत्व है। चित्रांकन से हमारी समझ व अनुभव बढ़ते है। चित्र बनाना स्वयं को गढ़ना है। चित्र बनाना सिखने हेतु निम्न प्रयोग सहायक है। ऽ अपनी आंखों को 3-4 मिनिट के लिए बंद कीजिए।
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शिक्षान्तर आंदोलन का परिचय

शिक्षान्तर आंदोलन की शुरुआत उन सभी संस्थाओं एवं ताकतों को गहराई से समझकर चुनौती देने के लिए हुई जो कि मानसिक नियंत्रण कर इन्सान को गुलाम बनाती हैं। यह एक दुःखद विषय है कि आज फैक्ट्री स्कूलिंग स्वाभाविक रुप से सीखने, अभिव्यक्त करने एवं सृजन करने की
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शिक्षा एवं विकास की धारणाओं को चुनौैती देते हावर्ड स्नातक मनीष जैन से मुलाकात

श्री मनीष जैन, संस्थापक शिक्षान्तर आन्दोलन से मिलने पर गत माह बहुत सी बातें स्पष्ट हुई। हमारी शिक्षा एवं विकास सम्बन्धी हमारी अवधारणाएं सही नहीं है। तभी तथाकथित रुप से सफल व्यक्ति भी व्यथित है। बढ़ता असंतोष व अराजक व्यवस्था के मूल में हमारी शिक्षा एवं
May 18 2010 05:35 PM
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लिखने का महत्व

नेपोलियन बोनापार्ट ने एक बार कहा कि दुनिया में दो ही ताकतें हैं,एक तलवार की है और दूसरी कलम की ताकत है। तलवार शक्ति की प्रतीक है एवं कलम रचनात्मकता की प्रतीक है। एक ताकत है डराने की, रुलाने की, तोड़ने की व दूसरी रचना की ताकत है,प्रेम की, हंसाने की एवं
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माइकल जैकसन व बिरजू महाराज में अन्तर

पश्चिमी व पूर्वी नृत्य शैली में मूलभूत अन्तर है। भारतीय संगीत व नृत्य जीवन को आनन्दित करता है। भारतीय नृत्य जीवन में खुशी पैदा करते है। शास्त्रीय नृत्य जीवन में नये आयाम खोलते है। अन्तर्मन की प्रज्ञा को विकसित करते है। यह हमें जीवन से जोड़ती है।जबकि
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May 11 2010 06:40 PM
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बाॅडी लैंग्वेज पर एलन पीज की विश्व प्रसिद्ध कृति

पुस्तक समीक्षा हाव-भाव से कैसे समझें दूसरों के मन की बातें ‘‘बाॅडी लैंग्वेज’’ एलन पीज की देह भाषा पर मौलिक रचना है। देह भाषा पर यह सबसे चर्चित कृति है। शब्दों से अधिक हम शारीरिक हाव भाव एवं मुद्राओं के द्वारा कहते है, जिसे अशाब्दिक संप्रेषण कहते है।
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जीवन एक अनुपम उपहार है

मेरे लिए और आपके लिए यह जीवन एक महान् उपहार है। एक कोशिका जिससे आपको जीवन मिलता है, यह सृष्टि का चमत्कार है। कोख जिसमें मानवता की आत्मा पोषित होती है, वह हमसे किराया नहीं लेती है। हमें अकुत प्रश्रय, पोषण एवं ऊर्जा भूमि, सागर, आकाश, सूर्य बेदाम देते है।
May 01 2010 02:44 PM
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अपने ब्लॉग का संपादन कैसे करे? भाग- 2

ख. भाषा/ व्याकरण अनुसार वाक्य विन्यास-रसदार व पठनीय हो, काव्यमय हो। वाक्यों के लयबद्ध होने से पाठक गुदगुदाता है। उसे वाक्य सहज लगता है जो सही की दिशा देता है। इससे पाठक की स्मृति भी बढ़ जाती है। बहुत उपदेशात्मक, आदर्शवादी बाते बोर करती है। लम्बे-लम्बे
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अपने ब्लॉग का संपादन कैसे करे?

स्वयं सम्पादन करें। अलग-अलग समय पर इस तरह कम से कम तीन या चार बार चेंक करें । सात बार लिखने के पूर्व लेखन में जादू नहीं आता है। क. विषय वस्तु अनुसार लेखन में क्रमबद्धता बहुत आवश्यक है। लेखन में धारा प्रवाह होना चाहिए। उसमें एकरुपता होनी चाहिए। सभी वाक्य
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मेरा परिचयः मेंै सफलता प्राप्ति की तकनीकों पर लिखने के लिए खास करके सक्षम कैसे हूँ?

उदयपुर से 90 किलोमीटर दूर शक्तावतों का गूड़ा में गाय और भैसों के बीच पैदा हुआ। अपने पिता की आंठवीें सन्तान, जन्म के समय परिवार की आय 50 रुपया प्रतिमाह । 14 वर्ष की उम्र में पिता द्वारा पिटाई करने पर घर से चड्डी बनियान में घर से भागा हुआ हूँ, आत्म हत्या
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विज्ञानं की नज़र सें क्या पुनर्जन्म होता है?

पुनर्जन्म आज एक धार्मिक सिद्धान्त मात्र नहीं है। इस पर विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों एवं परामनोवैज्ञानिक शोध संस्थानों में ठोस कार्य हुआ है। वर्तमान में यह अंधविश्वास नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्य के रुप में स्वीकारा जा चुका है। पुनरागमन को प्रमाणित करने
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निर्णय करने की विधि

सर्वप्रथम निर्णय के विषय एवं उसकी विषय वस्तु को समझना अनिवार्य है। इस हेतु निर्णय के विषय को लिपिबद्ध करना उचित रहता है। लिपिबद्ध के उपक्रम में विषय स्पष्ट हो जाता है। इससे हमारा ध्यान केन्द्रित होता हैं। निर्णय के विषय को लिखने के बाद उसके सभी विकल्पों
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सफलता प्राप्ति में निर्णय क्षमता का महत्व

निर्णय क्षमता पर बहुत कुछ निर्भर है। हमारा समग्र जीवन निर्णयों पर आधारित है। आज हम जो कुछ भी हैं वह अपने निर्णय करने की योग्यता के परिणामस्वरुप ही हैं। हमारी उन्नति और अवनति हमारे द्वारा लिए गए निर्णयों पर ही निर्भर हैं। व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक,
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‘पद्मपुरा’ में प्रेतादि बाधा-निवारणः वैज्ञानिक रहस्य

स्व-सम्मोहन की दशा में रोगी अपनी दबी हुई कामनाओं और कुण्ठाओं को व्यक्त करता है। इस प्रकार वासनाओं केा वह जितना-जितना उघाड़ता जाता है, उतना-उतना वह स्वस्थ होता जाता है। मनोरोगियों के लिए पद्मपुरा एक मानसिक चिकित्सालय है। जैनधर्म का अतिशय क्षेत्र पद्मपुरा
Apr 04 2010 11:49 AM
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महान् लेखक बनने की कंुजी और मोपासां

प्रसिद्ध फ्रासीसी साहित्यकार मोपासां ;डंनचंेेंदजद्धबचपन से ही लेखक बनने की जिद करने लगा था। तब उसकी समझदार मां अपने परिचित प्रसिद्ध लेखक फ्लोएर्बेट ;थ्संनइमतजद्ध के पास ले गई एवं उनको बताया कि मेरा बेटा लेखक बनना चाहता है। अतः वह आपसे लेखक बनने के सूत्र
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श्रेष्ठ उपहार कौनसा है?

उपहार एक साधन है जिसके द्वारा आप अपने प्यार को व्यक्त करते है। इस हेतु अधिक धन नहीं, भावनाएं, दिल, मन व समय चाहिए। तोहफे की कोई कीमत नहीं होती है, यदि वह मन से दिया गया है। मतलब से तोहफे देना तो रिश्वत है। अर्थात तोहफे में उसकी पीछे देने की भावना का
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अवचेतन मन की शक्ति: एक व्यक्ति साइकिल क्यों नहीं सीख पाता?

मैं अपने बहनोई का वास्तविक उदाहरण देता हूँ। मेरे बहनोई श्री सोहनलाल जी जैन उदयपुर में 1957मे इन्टरमिडिएट में पढ़ रहे थे।एक बार वे साइकिल की सवारी करना सीख रहे थे। साईकिल चलाना सिखने के दौरान् वे गिर गये। उनके टखने में चोट आ गई। उन्होंने दुर्घटना की
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धन्यवाद केैसे देना कि वह उन तक पहुँचे? भाग-दो

धन्यवाद देने की विधि धन्यवाद तत्काल देना चाहिए। कृत्य एवं आभार ज्ञापन के बीच दूरी नहीं होनी चाहिए।एक तुरन्त कहा गया धन्यवाद एक सप्ताह देरी से भेजे गये दो पन्नों के पत्र से अधिक प्रभावशाली होता है। समय पर दिये गये धन्यवाद की कद्र होती है। धन्यवाद कुछ इस
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धन्यवाद केैसे देना कि वह उन तक पहुँचे?

कृतज्ञता का महत्व धन्यवाद देना कृतज्ञता ज्ञापन है। कृतज्ञता प्रकट करना विनम्रता व मानवता है। यह बहुत बड़ी नैतिकता है। कृतज्ञता व्यक्त करने से हम बदलते है, हमें खुशी मिलती है।दूसरे का ऐहसान मानते है। यह दूसरे के योगदान को स्वीकारना है। इससे सम्बन्ध मजबूत
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प्राथमिकताओं को कैसे तय करना?

आज का आदमी भाग रहा है। सदैव जल्दबाजी में है, उसके पास रुककर विचार करने का समय नहीं है। यदि वह भागता रहा तो प्राथमिकताओं का निर्धारण नहीं कर सकता है। लक्ष्य के अभाव में जीवन व्यर्थ है। लक्ष्य को पूरा करने के लिए हमें प्राथमिकता तय करनी पड़ती है। यदि आप
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14 वर्षीय लड़की जाँन आॅफ आर्क ने अवचेतन मन को विकसित कर द्वारा फौज का नेतृत्व किया

हमारी भूतपूर्व प्रधानमंत्री इदिंरा गाँधी की रोल माॅडल जाँन आॅफ आर्क थी। वह अपने कठिन समय में इसी से प्रेरणा प्राप्त करती थी। फ्रँास का ब्रिटेन से एक सौ वर्षाें से युद्ध चल रहा था। दोनों देशों का जन-जीवन तबाह हो चुका था। ऐसे में एक साधारण किसान की अनपढ़
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ब्लोगिंग पर “नई दुनिया” में आलोक मेहता का छपा व्यंग्य

नई दुनिया में ब्लोग पर कपड़ा फाड होली पर प्रकाशित आलोक मेहता का व्यंग बहुत महत्वपूर्ण है। वैसे यह ‘‘बुरा न मानो होली है ’’के तहत छपा है। यह कुछ हद तक कड़वा सच बताता है, कुछ इसमें होली का रंग भी है।यह हिन्दी ब्लागिंग पर एक तरह का कटाक्ष है।यह हमें अपना
Mar 05 2010 07:31 PM
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होली की प्रांसगिकता और शुभकामनाएँ

आज से हजारो वर्ष पूर्व इन त्यौहारों की संरचना की गई थी। आज के समय में इनका औचित्य समझना जरुरी है। अपने त्यौहारों को खुली आँख से देखना आवश्यक है। मनुष्य उत्सव धर्मा है। वह सदैव आनन्द और मस्ती में पसन्द करता है। होली भी आनन्द दायक त्यौहार है। हिरण्यकश्यप्
Mar 02 2010 05:25 PM
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भाग्य की भूमिका सफलता-प्राप्ति में

सफलता कुछ गिने-चुने लोगों की बपौती नहीं है। आप भी, कोई भी, बिना धन और विशेष सम्बन्धों के भी इच्छित सफलता प्राप्त कर सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को सफलता की प्राप्ति का अधिकार है और उसे प्राप्त करने की स्वाभाविक या प्रकृति-प्रदत्त शक्ति भी उसमें निहित है।
Feb 26 2010 08:29 PM
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यह ब्लाॅग आपके लिए क्या कर सकता है?

‘‘उठो जागो’’ एक प्रेरक ब्लाॅग है।यह पढ़ने पर आपको प्रेरित करता है। यह बहुत से उदारहणों द्वारा आपको प्रेरणा देता है। इससे आपको उत्साह एवं ऊर्जा मिलेगी। अपने को बदलने की प्रविधियों को ज्ञान होगा। यह ब्लाॅग आपकी आत्म छवि को बदलेगा। इस हेतु आपको अपनी धारणाएँ
Feb 23 2010 05:01 PM
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आपका मस्तिष्क दुनिया का सबसे बड़ा सुपर कम्प्यूटर

विश्व के सबसे बड़े सुपर कम्प्यूटर का मालिक अमेरिका नहीं है। विश्व के सबसे बड़े सुपर कम्प्यूटर के मालिक आप हैं। यह आपके बालों के ठीक नीचे है। फिर भी हमारी हालत दयनीय क्यों है ? क्योंकि इस सुपर कम्प्यूटर को आॅपरेट करना हमको नहीं आता है, और यह यंत्र हमें
Feb 19 2010 05:15 PM
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सफलता प्राप्ति में साधनों की भूमिका

मैं सोचता हूँ, साधनों की कमी का होना मार्ग की एक-मात्र बाधा नहीं हो सकती । सफलता कुछ गिने-चुने लोगों की बपौती नहीं है। आप भी, कोई भी, बिना धन और विशेष सम्बन्धों के भी इच्छित सफलता प्राप्त कर सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को इच्छित सफलता की प्राप्ति का
Feb 17 2010 04:05 PM
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एक सफल और असफल व्यक्ति में क्या अन्तर है ?

एक सफल और असफल व्यक्ति में सिर्फ मामूली अन्तर होता है। हम सब आदतों के शिकार होते हैं। सफल व्यक्ति सजगता से अपना विश्लेषण करते हुए नई आदतें डालता है।जबकि असफल व्यक्ति बेहोशी में पुराने ढर्रे पर चलता रहता हैं। दूसरा, सफल व्यक्ति जाने-अनजाने सफलता प्राप्ति
Feb 15 2010 07:29 AM
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सदैव सत्य नहीं जीतता है?अच्छे आदमी को क्यों कठिनाइयाँ आती हैं?

सच्चे व्यक्ति क्यों जीवन में कई बार असफल होते हैं? इस प्रश्न का उत्तर मैं सीधा नहीं देना चाहता। इसकी बजाय महाभारत में भीष्म पितामह का कुरुक्षेत्र में घायल होने का कारण बताना चाहता हूँ। भीष्म ने अपनी प्रतिज्ञा के भावार्थ पर जोर देने की बजाय शब्दों पर जोर
Feb 10 2010 05:13 PM
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ब्लोगिंग में सफलता का महामन्त्रः सत्यं शीवं सुन्दरं

साहित्य में सफलता प्राप्ति का जो मन्त्र है वही ब्लोगिंग में सफलता पाने का मन्त्र है।साहित्य समाज का दर्पण है। मात्र सत्य से ही साहित्य नहीं रचा जा सकता है।केवल सही बात करने से ही समझ में नहीं आती है। सत्य को प्रतिष्ठित करने के लिए उसको सुन्दर व ग्राह्य
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ब्लोगिंग क्या है?

ब्लोगिंग साहित्य, पत्रकारिता व निजी डायरी का मिश्रित रुप ह,ै थोड़ा भेल पुरी सा एवं बारह मसालों की चाट है। इसमें कभी साहित्य होता है, कभी इसमें पत्रकारिता है तो कभी निजी डायरी जैसा है। जब ब्लंाग में कविता, कहानी, गजले, संस्मरण, जीवनी है तो यह साहित्य है।
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सफलता हेतु कार्य अधुरे न छोड़े, कार्य पूरा करें

आधे-अधुरे कार्य आपके व्यक्तित्व के अधुरेपन को दर्शाते है। सफलता हेतु हाथ में लिया काम पूरा करें, वे आपको पूरा बनाते है। हमारा लक्ष्य अस्तित्व की योजना को पूरा साकार करना होना चाहिए। कार्य को बीच में छोड़ देना पहले की मेहनत को बेकार करता है। मैं जब आठवीं
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सफलता का मंत्र : प्रबल इच्छा से बिलगेट्स बनते है

प्रबल इच्छा क्या है ? प्रबल इच्छा का तात्पर्य उस दृढ़ निश्चय से है जो हमें किसी लक्ष्यप्राप्ति के लिए करता होता है। यह लक्ष्य शक्ति, ओहदा, धन या ऐसी ही अन्य कोई वस्तु हो सकती है। कुछ बड़ा पाने या करने के लिये महत्त्वाकांक्षा अनिवार्य है। जीवन में कुछ
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प्रबल इच्छा: सफलता का प्रारम्भिक सोपान

प्रबल इच्छा की सफलता प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका जल को वाष्प में परिवर्तित करने के लिये उसे 1000 सेन्टीग्रेड तक गरम करने पर ही परिणाम मिलता है। जल 1000 सेन्टीग्रेड पर ही उबलता है और तब वाष्प में परिवर्तित होता है। आवश्यक डिग्री तक गर्म नहीं करने पर
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आत्मविश्वास बढ़ाने हेतु याद रखें:हम सब में कुछ खास बात हैं

हम सब में कुछ खास बात है। आप सबमें किसी न किसी रूप मंे कोई न कोई विशेषता है।दूसरों से अच्छाई है।हम अद्वितीय है, अनुपम है, खास है। यह दुर्भाग्य की बात है कि हम अपनी खास बात को स्पष्ट रूप से नही जानते है। हम अपने को वक्त नही देते है। स्वयं की अनदेखी करते