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खाकी में इंसान

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30 Jan 2010
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मैने आई.पी.एस. क्यों चुना…!

उनका ये कहना, ‘जनता की सेवा करो' सिर आँखों पर... किन्‍तु हमारा कहना , ‘पहले खुद की सेवा तो कर लो' और अच्‍छा है! उनका ये कहना, ‘समग्र क्रांति से समाज को बदल डालो' बहुत अच्‍छा है... किन्‍तु हमारा कहना, ‘परम्‍पराओं को बनाए रखो, लीक पर चलते जाओ, यथास्‍थिति
 
अशोक कुमार
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वोट न देने की सजा बलात्कार…???

लीक से हटकर इंसाफ की एक डगर उत्तर प्रदेश का शाहजहाँपुर जिला कई विशेषताओं के लिए जाना जाता है। एक ओर उत्तर में घने जंगलों से घिरा हुआ, अतीत में दलदल के रूप में प्रसिद्ध, तराई का क्षेत्र है, जिसे मेहनतकश सिख किसानों ने अपने खून-पसीने से सींच कर स्‍वर्ग बना
 
अशोक कुमार
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पंचों ने सुनाया राक्षसी फरमान…

  ‘‘जुम्‍मन शेख के मन में सरपंच का उच्‍च स्‍थान ग्रहण करते ही अपनी जिम्‍मेदारी का भाव पैदा हुआ । सोचा-मैं इस वक्‍त न्‍याय और धर्म के सर्वोच्‍च आसन पर बैठा हूँ । पंचों की जुबान से जो बात निकलती है-वह खुदा की तरफ से निकलती है । देवों की वाणी में मेरे
 
अशोक कुमार
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इन्सान बने रहना … इतना मुश्किल तो नहीं?!

एक बँधी हुई लीक और सामन्ती मर्यादा के गोल-गोल दायरे… इन्हीं पर चलते हैं लोग चलने की सीख देते हैं लोग!   किन्तु… बँधी हुई लीक को तोड़ना- सामन्ती मान-मर्यादाओं के दायरे से बाहर आना और एक इन्सान के नजरिए से सोचना…   मेरा कहना है- पुलिस की वर्दी
 
अशोक कुमार
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इलाहाबाद में ट्रेनिंग के शुरुआती अनुभव आँखें खोलने वाले थे…

चक्रव्यूह राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद मेरी पहली पोस्टिंग सहायक पुलिस अधीक्षक प्रशिक्षणाधीन के रूप में इलाहाबाद में हुई।   संगम नगरी इलाहाबाद को प्रयागराज के नाम से भी जाना जाता है। दो नदियों का संगम तो कई दूसरे
 
अशोक कुमार
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इलाहाबाद में तो कमाल हो गया…।

सीपी ने इलाहाबाद में मेरी किताब पर चर्चा के लिए जो इन्तजाम किया था उसका प्रभाव अगले दिन की अखबारी रिपोर्टो को देखकर  बखूबी किया जा सकता है। सी.पी. यानि चन्द्र प्रकाश, इलाहाबाद के डी.आई.जी. जो जिले के पुलिस प्रमुख हैं और मेरे मित्र है। हमारा बैच
 
अशोक कुमार
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खाकी में इंसान की चर्चा अखबारों में…

पुस्तक के प्रकाशन के बाद २३ नवम्बर को उत्तराखण्ड के मुख्य मन्त्री रमेश पोखरियाल निशंक ने देहरादून में इसका विमोचन किया। जिसकी खबरें सभी अखबारों ने प्रकाशित की। टाइम्स ऑफ़ इण्डिया के देहरादून प्लस संस्करण में २९ नवम्बर को अन्जली नौरियाल की समीक्षा प्रक
 
अशोक कुमार
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सराहिए ‘खाकी में इंसान’ को...

आज इलाहाबाद में मेरी पुस्तक ‘खाकी में इन्सान’ पर परिचर्चा का आयोजन हुआ। मेरे मित्र और बैचमेट चन्द्र प्रकाश जो इलाहाबाद के पुलिस उपमहानिरीक्षक हैं, की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में महात्मा गान्धी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति व
 
अशोक कुमार