ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
04 May 2010
कुल प्रविष्टियां
8
पाठक भेजे
88
पसंद
0
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
11.00
पसंद करें
1
नापसंद करें

हिंदुस्तानी रंगमंच को अपनी अक्षय ऊर्जा से निरंतर समृद्ध करने वाले श्री हबीब तनबीर

01 सितंबर सन 1923 को रायपुर, मध्यप्रदेश (अब छ्त्तीसगढ) में जन्में| वे अपने पिता श्री हाफ़िज़ मोहम्मद हयात खान के दूसरे बेटे हैं जो पेशावर (अब पाकिस्तान) से आकर रायपुर में बस गए थे| उनकी मां रायपुर में ही जन्मी, पली और बडी हुई| नाना, मामा सब रायपुर की ज़मीन स
 
kalhansdharmendra.blogspot.com
पसंद करें
0
नापसंद करें

संघर्ष का अकेला नायक – ‘अलेक्सांद्र सोल्झनित्सिन’

संपूर्ण मनुष्यता के स्वरुप बदल डालने का स्वप्न देखने वाली लेकिन उससे कहीं ज्यादा जटिल यथार्थों से मुठभेड में कई नये विद्रूपों की शिकार होने वाली ‘रुसी क्रांति’ के आस-पास (11 दिसंबर 1918 को) किज्लोवोस्क (RSFSR), अब रूस, में पैदा हुये - अलेक्सांद्र
 
kalhansdharmendra.blogspot.com
पसंद करें
0
नापसंद करें

माई नेम इज़ खान

भारतीय हिंदी सिनेमा में शाहरूख खान वो शख्सियत हैं जो बिना किसी प्रकार के विवाद के भी अपनी फिल्मों को अपने और कहानी के दम पर हिट करवा सकतें हैं। मसलन, उनकी ज्यादातर फिल्में जिस तरह से बिना किसी विवाद के आई हैं और दर्शकों पर गानों के माध्यम से भी प्रभाव
 
kalhansdharmendra.blogspot.com
पसंद करें
0
नापसंद करें

‘मीडिया और स्त्री’ [संदर्भ - ‘12/24 करोलबाग’ धारावाहिक (ZEE TV)]

‘मीडिया और स्त्री’ [संदर्भ - ‘12/24 करोलबाग’ धारावाहिक (ZEE TV)] ‘12/24 करोलबाग’ ZEE TV का एक बेहद लोकप्रिय नायिकावादी धारावाहिक है। इस धारावाहिक के कथानक का आधार करोलबाग में रहने वाला एक मध्यवर्गीय परिवार है जिसे ‘सेठी परिवार’ के नाम से जाना जाता है। इस
 
kalhansdharmendra.blogspot.com
पसंद करें
0
नापसंद करें

"busy with bakwas"

नारायणदत्त तिवारी का साक्षात्कार से बीच में इस तरह उठ कर जाना उन्हें और शक के घेरे में लाता है। आखिर वे कोई आम आदमी नहीं बल्कि हमारे देश के बडे और सम्मानित नेता हैं और अभी कुछ दिन पहले तक वह एक बडे संवैधानिक पद की शोभा बढा रहे थे। तो ऐसी हालत में उनकी ये
 
kalhansdharmendra.blogspot.com
Mar 04 2010 10:28 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

‘सूचना के अधिकार का कानून’

सूचना के अधिकार का कानून’ आजादी के बाद के मिले अनेक अधिकारों में निश्चय ही एक बडा अधिकार है। लेकिन आये दिन इसके क्रियान्वयन को लेकर जिस तरह की खबरें पढने-देखने को मिल रही हैं, वे गंभीर चिंता का विषय हैं। मन मसोसता है कि आज भी हम ‘मध्यकालीन’ क्यों बने
 
kalhansdharmendra.blogspot.com
Dec 12 2009 08:39 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

"हिन्दी की दासता का दिवस"

हिन्दी दिवस के रूप में 14 सितंबर करीब है। हिन्दी दिवस पर व्यथा और संताप व्यक्त करते हुए पंडित श्री विद्यानिवास मिश्र लिखते हैं– “काश! 14 सितंबर न आता और हमें हिन्दी दिवस के नाटक देखने-सुनने की घटना झेलनी नहीं पडती।” वास्तविकता यही है कि यह हिन्दी दिव
 
kalhansdharmendra.blogspot.com