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साझा-संसार

http://saajha-sansaar.blogspot.com/
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08 May 2010
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ईश्वर के होने और न होने के बीच...

''नास्तिकता सहज है .स्वाभाविक है, प्राकृतिक है। आस्तिकता हम सिखाते हैं, जन्मजात कोई भी आस्तिक नहीं होता।'' आज सुबह सुबह जैसे मेल देखने केलिए मैं अपना मेलबॉक्स खोली, मित्र संजय ग्रोवर द्वारा ''नास्तिकों का एक ब्लॉग'' पर लिखे गए लेख में यह पढने को मिला|
 
जेन्नी शबनम
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हँसी ठिठोली...बड़ा मज़ा आया...

आज पहली अप्रैल है यानी कि ''मूर्ख दिवस''| यूँ तो सभी लोग आज के दिन अपने अपने तरीके से अपने मित्रों परिचितों को मूर्ख बनाने में लगे रहते हैं और ये मज़ाक का सिलसिला सारा दिन चलता है| हर फ़ोन, हर खाना या कोई कुछ भी कहता तो एक बार मन में ज़रूर होता कि कहीं
 
जेन्नी शबनम
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चहारदीवारियों में चोखेरबालियाँ

एक बार फिर महिला दिवस गुजरने को है ,अलग अलग तरह के आयोजनों से लोगों ने महिलाओं को बताया कि ये ख़ास दिन आपके लिए है |ये सच है कि सम्पूर्ण विश्व की महिलाओं के लिए यह एक खास दिन उनके अस्तित्व, अस्मिता, आज़ादी, अधिकार और आसमान के लिए संघर्ष का प्रतीक बन सकता
 
जेन्नी शबनम
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प्यार- मोहब्बत वगैरह,वगैरह

''वेलेंटाइन डे'' का नाम सुनते ही इसके विरोधियों के मन में मन में अशलीलता और प्रेमी-प्रेमिका की असहज छवि मन में उभरती है| प्रेम में अश्लीलता कब, कैसे और कहाँ से आ गई, इस पर कभी कोई नहीं सोचता है| प्रेम जीवन की शाश्वत्ता है, हर युग में इसे स्थान और सम्मान
 
जेन्नी शबनम
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गाँधी, गांधीवाद और गांधीगिरी

आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है ,गांधी जयंती पहले गुजर चुकी है। गाँधी प्रतिमाओं और उनकी तस्वीरों को पिछली जयंती के बाद धोने-पोंछने का यह पहला अवसर आया है। प्रत्येक वर्ष ऐसा ही होता है, जयंती और पुण्यतिथि के बीच की अवधि में गाँधीजी के साथ कोई नहीं होता
 
जेन्नी शबनम
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छोटी बात, जात और मैं...

लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार पर कुछ नेताओं द्वारा की गयी जातिसूचक टिप्पणी ने मुझे बहुत दुःख पहुँचाया| मेरा बीता हुआ कल किसी सिनेमा के फ्लैश बैक की तरह मेरी आँखों के सामने है| मुझे याद आता है जाड़े की दोपहरी का एक ठिठुरता सा वो दिन जब नर्म धूप खिली थी, घर की
 
जेन्नी शबनम
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राम जन्मभूमि : बाबरी मस्ज़िद

राम जन्मभूमि : बाबरी मस्ज़िद का विवाद शुरू हुए आज कई दशक बीत चुके हैं| पर बहुत कुछ ऐसा है जो मेरे ज़ेहन में आज भी जाग रहा है| १९७५ या १९७६ की बात होगी जब मैं पहली और आखिरी बार अयोध्या गई थी| यूँ तो उम्र और सोच के हिसाब से उन दिनों ये सब समझ नहीं था कि
 
जेन्नी शबनम
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मोहल्ला मुख्यमंत्री

हम भी बनेंगे मुख्यमंत्री ! अब हर राजनीतिज्ञ जब प्रधान मंत्री और मुख्य मंत्री बनना चाहता तो हम क्यों न बने ? कहावत है ''जिसकी लाठी उसकी भैंस'' ये बहुत हीं सार्थक कहावत है, आज के समयानुकूल| हर इंसान को नाम, शोहरत और पैसा चाहिए, जब कुछ ख़ास के पास है तो
 
जेन्नी शबनम
Dec 12 2009 07:30 AM