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05 Jun 2010
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गांधी के रास्ते पर चलकर नहीं मिलेगी सफलता

                                   नक्सलियों के समर्थन से होंगे सपने साकार देश की आन, बान
 
Gappe bazi
Jun 05 2010 01:06 PM
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सत्ता से संपत्तिवान होने की बढ़ती भूख

 धन संपदा जुटाने में सभी दल षामिल लेकिन क्षेत्रीय दल सबसे आगेमार्क्सवादी पार्टी ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार्य किया है कि उसका नेतृत्व विलासी होता जा रहा है। नेतृत्व की विलासिता के प्रति बढ़ते आग्रह के कारण कैडर के साथ उसका संबंध औपचारिक भर रह गया
 
Gappe bazi
Jun 02 2010 01:04 PM
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नक्सली प्रभावित क्षेत्रों में विकास की चिंता

प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेष पर योजना आयोग में एक आपात बैठक हुई। तय हुआ कि सलाहकार समिति के अधिकारी नक्सलवाद से प्रभावित 33 क्षेत्रों में जाएंगे और लौटकर अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेंगे। उन रिपोर्टों पर आयोग की सदस्य सचिव सुभा पिल्लई की अध्याक्षता में
 
Gappe bazi
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मनमोहन सरकार से है जवाबदेही नदारद

भ्रष्टाचार महंगाई से लेकर माओवाद जैसी समस्याओं से निपटने में सरकार पूरी तरह असफलमओवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। माओवादियों ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में उसी स्थान पर कुछ सुरक्षा अधिकारियों समेत चालीस और लोगों की हत्या कर दी,
 
Gappe bazi
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ये कैसी सभ्यता और कैसा क्रिकेट

कहा जाता है कि क्रिकेट सभ्य लोगांे का खेल है। जेंटिलमेंस गेम। गुलाम इसे खेलते हैं और सभ्य लोग इसे देखते हैं। मेरा देश भी सभ्य हो गया है। चलो जो काम पढ़ाई-लिखाई न कर पाई, उसे क्रिकेट ने कर दिखाया। देशवासियों तुम्हें बधाई। इस समीकरण के अनुुसार आज भारत में
 
Gappe bazi
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माया की मया और क टौती प्रस्ताव

दुनिया के सबसे विशाल लोकतांत्रिक प्रणाली से परिपूर्ण भारत देश राजनीति और भ्रष्टाचार के अव्वल दर्जे से ओतप्रोत माना जाता है। सांसद, विधायक और देश के शीर्ष नेता राजनीति की आड़ में कब कौनसा खेल खेलें कुछ बयां नहीं किया जा सकता। राजनीतिक अखाड़े के एक जमीनी
 
Gappe bazi
Apr 30 2010 10:44 PM
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गरीबी का मापदंड तय करे सरकार

हमारे देश में सबसे ज्यादा संख्या गरीबों की है। इस समस्या से निजात पाने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारें अरबों-खरबों की जनहितैषी और जनकल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है, ताकि देश को गरीबी मुक्त बनाया जा सके। साथ ही आर्थिक परिस्थिति से जूझ रहे
 
Gappe bazi
Apr 23 2010 12:26 PM
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आंसू बहाने तक सीमित न हों हमारी संवेदनाएं

हमारे देष में महत्वपूर्ण और महत्वहीन बातों पर राजनीति का खेल कोई अनोखी बात नहीं है। वोट बैंक का दायरा व्यापक करने राजनैतिक दल और हमारी सरकारें देष व राश्ट्रहितों जैसी संवेदनषील मुद्दों पर राजनीति की आड़ मेंे अपना उल्लू सीधा करने से नहीं चूकते। विगत कुछ
 
Gappe bazi
Apr 16 2010 10:53 AM
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अफसोस जताना ही काफी नहीं

दंतेवाड़ा नरसंहार ने 76 जवानों की “ाहादत से पूरा देष हतप्रभ है। देष का saयद ही ऐसा कोई आम नागरिक और राजनेता बांकी रहा होगा जिसको घटना की जानकारी लगते ही saहीदों की saहादत को लेकर आंखें नम न हुईं हों और उन्होंने देष क अब तक के सबसे बड़े नक्सली हमले में
 
Gappe bazi
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महिला मधुशालाओं मं छलकेगा पैमाना

सरकार की राजस्व विस्तार करने की चाह और गलत आवकारी नीतियां आगामी समय में क्या गुल खिलाएंगी ओर अभी वर्तमान समय में इसके कितने दुषपरिणाम हमारे सामने हैं यह सर्वविदित है। मगर एक बात तो तय है कि केन्द्र में सत्ता का संचालन कर रही सरकारों ने देश को कुसंस्कारी
 
Gappe bazi
Apr 10 2010 12:27 PM
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ये इश्क नहीं आसां, बस इतना समझ लीजे

मुझे तो अब भी यकीन नहीं हो रहा यार कि मनीष ने पूजा के अलावा किसी और से शादी कर ली। आदमी इतना बदल कैसे जाता है? विष्णु के मुँह से यह वाक्य सुनकर अब तक चुपचाप बैठे नील ने कहा, हाँ यार, मनीष और पूजा को तो हम लोग दो जिस्म एक जान समझा करते थे। कॉलेज के दिनों
 
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वीरान होते गांव और सजते शहर

शहर मानव की सबसे जटिल संरचनाओं में से एक है। यह एक ऐसी यात्रा है, जिसका कोई अंत नहीं है। शहर में व्यवस्थाएं और अव्यवस्थाएं साथ-साथ चलती हैं। पिछले सप्ताह जारी संयुक्त राष्ट्र हैबिटाट की द्विवार्षिक रिपोर्ट में शहरों को आर्थिक विकास का इंजन बताया गया है,
 
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दैहिक शोषण का जबावदेह कौन ?

भारतीय राजनीति में महिला सशक्तिकरण का दौर दिन प्रतिदिन जोर पकड़ता जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों के दिग्गजों के विरोध के बावजूद महिला आरक्षण विधेयक न केवल चर्चा के विषय तक सीमित रहा है, बल्कि हर जगह महिलाओं में इसकी झलक भी दिखायी देने लगी हैं। समाज में
 
Gappe bazi
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एक ही पेड़ पर लगते हैं 72 किस्म के आम

भागलपुर [उदय चंद्र झा]। भागलपुर के सुल्तानगंज ब्लाक के महेशी गांव में स्थित है मधुवन नामक आम की अनूठी बगिया। आम की कई किस्मों का संगम। यह एक किसान का रचा ऐसा संसार है जिसने बागवानी के क्षेत्र में नई क्रांति ला दी है। सुल्तानगंज इलाके में इनकी प्रेरणा से
 
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जहां गुनगुनाते हैं पत्थर

हमारे लिए यह कुदरत का एक और करिश्मा है, लेकिन इस करिश्मे ने विज्ञान जगत को परेशान कर रखा है। यूं तो कहा जाता है कि पत्थरों की जुबान नहीं होती, लेकिन ये पत्थर ऐसे हैं जिनसे सुर निकलते हैं। अमेरिका के पेनसिल्वेनिया के जंगलों में एक इलाका ऐसे ही पत्थरों से
 
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सरकार का खामौश रवैया मानव तस्करी का कारण

जिस तरह देश के लिए विकलांगता, निशक्त्ता सबसे बड़ा अभिशाप साबित हो रहा है, ठीक उसी तरह मानव तस्करी भी देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। जिसपर रोक लगाने में केन्द्र और राज्य दोनों ही सरकारों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। पूरे प्रदेश के थानों में
 
Gappe bazi
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बच्चों के लिए हानिकार खाद्य पदार्थ

आदिकाल से ही मनुष्य विभिन्न प्रकार की बीमारियों तथा प्राकृतिक आपदाओं से जूझता चला आ रहा है। सभ्यता और संस्कृति की विकास यात्रा भी मुख्यत: बेहत्तर स्वास्थ्य पर ही निर्भर करती है। भारतीय शास्त्रों में भी कहा गया है कि धर्माथकाममोक्षानाम् अरोग्यम् च मूल
 
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नेताओं की नेतागिरी या गुंडागिरी

दुनिया के सबसे बड़े विशाल लोकतांत्रिक देश भारत में सदियों से यह परंपरा कायम रही है, कि सत्ता की ताकत दिखाने के लिए सफेदपोश नेताओं ने किसी भी हद को पार करने में कोई कसर बांकी नहीं छोड़ी है। लोकसभा और राज्यसभा को सांसदों और देश के के कद्दावर नेताओं ने
 
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सरकारों के लिए आम आदमी आज भी गाजर-मूली

चारों तरफ लाष ही लाष, अंतिम संस्कार के लिए श्मसान में भी जगह नहीं, हजारों लोग सोने के बाद कभी उठ भी नहीं पाये। यह खौफनाक मंजर भोपाल में आज से ठीक 25 साल पहले हुआ। लोगों को वह दिन आज भी जब याद आता है तो वे खामोष हो जाते हैं, आंखें डबडबा जाती है, लेकिन
 
Gappe bazi
Mar 04 2010 04:29 PM
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देष के लिए नासूर बने आतंकवादी

हमारे देष की सरकार जनसमुदाय की सुरक्षा को लेकर तभी फिक्रमंद होती है, जब हमारे देष में आतंकवादियों द्वारा किसी बड़ी विस्फोटक घटना को अंजाम देकर हजारों लोगों को मौत की नींद सुला दिया जाता है। बाकी समय सुरक्षा एजेंसियां मंत्रियों और नेताओं की सुरक्षा
 
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Mar 04 2010 03:51 PM
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ईमानदार, निष्ठावान छबि के धनी आकाश देवांगन

किसी ने सच ही कहा है कि अगर हौसले बुलंद हों तो किसी भी सफलता के मुकाम को हासिल करना कोई कठिन काम नहीं। आयकर विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर के पद तक के सफर को तय करने में आकाश देवांगन ने क्या कुछ परेशानियों का सामना नहीं किया, मगर कभी उन्होंने अपनी मंजिल
 
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Mar 04 2010 03:37 PM
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देष के लिए नासूर बने आतंकवादी

हमारे देष की सरकार जनसमुदाय की सुरक्षा को लेकर तभी फिक्रमंद होती है, जब हमारे देष में आतंकवादियों द्वारा किसी बड़ी विस्फोटक घटना को अंजाम देकर हजारों लोगों को मौत की नींद सुला दिया जाता है। बाकी समय सुरक्षा एजेंसियां मंत्रियों और नेताओं की सुरक्षा
 
Gappe bazi
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Feb 15 2010 12:26 PM
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खाने को दाना नहीं, बना दिए करोड़पति

राजधानी रायपुर से 40 किलोमीटर दूरी पर स्थित है खरोरा गांव। कहने को तो यहां लोगों केे घरों में खाने को एक दाना भी नहीं है, लेकिन एक सीए(चार्टर्ड एकांउटेंट) सुनील अग्रवाल ने यहां के लोगों के नाम से बैंक मैंनेजर और अधिकारियों के साथ मिलकर हर उस व्यक्ति को
 
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Feb 13 2010 09:41 PM
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उपदेष देना आसान और काम करना कठिन

योग गुरू बाबा रामदेव ने नेताओं के घरों को खंगालने का आदेष और प्रषासनिक अधिकारियों पर हुई कार्यवाहीे पर तो अपनी प्रतिक्रियाएं जाहिर कर दीं और जनता की खूब वाहवाही लूटी, लेकिन यह भी जगजाहिर है कि उनके पास कितनी दौलत का भंडार है, जिसे उन्होंने सार्वजनिक नहीं
 
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Feb 13 2010 05:13 PM
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षाला और मधुषाला का अनोखा संगम

छत्तीसगढ़ प्रदेष में सरकार की गलत नीतिओं और आबकारी विभाग की अनदेखी के कारण चैक-चैराहों और धार्मिक स्थलों के समीप तो पहले से ही मयखानों में जाम पर जाम छलकाते जाते रहे हैं और आस्था को कलंकित किया जाता रहा है। अब ऐसे स्थानों पर भी षराब पे्रमियों ने डांका
 
Gappe bazi
Feb 11 2010 07:16 PM
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भ्रष्टाचार में खाकी वर्दी अव्वल

कर्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका के बाद भ्रष्टाचार में सबसे अव्वल नंबर वर्दी धारियों का ही आता है। कहना गलत न होगा कि वर्दी तो इन्हें हत्या, लूट, वलात्कार, अपहरण, नकवजनी, षीलभंग जैसे संगीन अपराधों की रोकथाम और समाज की सुरक्षा में तैनाती के लिए दी जाती
 
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पत्रकारिता विष्विद्यालयों का कोई माई-बाप नहीं

छत्तीसगढ़ प्रदेष के गठन के साथ ही, प्रदेष के विकास और पत्रकारिता की धार को तेज करने के लिहाज से राज्य सरकार ने प्रदेष में 2005 में कुषाभाउ ठाकरे नामक पत्रकारिता विष्वविद्यालय की स्थापना तो कर दी, पर इस विष्वविद्यालयों की देखभाल के लिए सरकार ने कोई ऐसा
 
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सड़कों पर दौड़ती मौत

आयेदिन कहीं न कहीं किसी न किसी सड़क हादसे की दुर्घटनाओं में मौत की खबरें अखबारों में आम बात हो गई है। अधिकांषतः मौतें उन सुनसान और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर होती हैं, जहां आम जनों की तादात बहुतायत मात्रा में होती है। अखबार में भी उन्हें एक छोटे से काॅलम में
 
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बच्चों के साथ मानवीय व्यवहार जरूरी

संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राआं, विषेषकर छोटे बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार, मार-पीट और अनेक तरह की प्रताड़ना के मामले बड़े पैमाने पर सामने आ रहे हैं। अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ मानवाधिकार आयोग के समक्ष चार ऐसे मामले आए हैं, जो हमें यह सोचने पर विवष
 
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बीटी बैंगन का कहर, घोला कृषि में जहर

बंगाली भाषा में बैंगन को बेगुन कहा जाता है, जिसका एक और अर्थ बिना गुण का । यही वजह है कि जब से बाजार मंे बीटी बैंगन का जिक्र आया है, तब से लेकर लोग बैंगन को बेगुन कहने लगे हैं। वास्तव में बीटी बैंगन है क्या ? जिसको लेकर लोग इतने भयभीत हैं। बीटी बैंगन
 
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लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पाई

छत्तीसगढ़ प्रदेष की यह विडंबना ही है, एक ओर जहां नक्सलियों ने राजधानी की षांत व्यवस्था में कोहराम मचाने का बीड़ा उठाया है, तो दूसरी ओर बाहरी प्रदेषों से आकर राजधानी में लम्बे समय से डेरा डाल रखे लोगों ने यहां के सूने घरों में घुसकर चोरी, लूट, हत्या, अपहरण
 
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पुरात्ताविक स्थलों और स्मारकों का अस्तित्व खतरे में

छत्तीसगढ़ प्रदेष के संरक्षित पुरात्ताविक स्थलों के नाम पर सिर्फ खाना पुर्ति की जा रही है। चाहे वह कभी दक्षिण कौषल की राजधानी रहे सिरपुर की बात हो या फिर सरगुजा स्थित डीपाडीह की कल्चुरी काल की प्राचीन मुर्तियों की । सरकार द्वारा पुरात्ताविक स्थलों के विकास
 
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भूख से तड़पकर वो जब मुझे मिला.........?

सच ही कहा गया है कि पेट की भूख पर किसी का बस नहीं चलता है। जब इंसान भूखा होता तो वह भूल जाता है कि वह क्या अच्छा कर रहा है और क्या बुरा। मैं बस से उतरकर अपने पत्रकारिता विष्वविद्यालय की ओर दो कदम बढ़ाया ही था कि, आंखों से आंसूओं की धारा बहते मुझे बीस वर्ष
 
Gappe bazi
Jan 31 2010 08:02 AM
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वेवफाई के गहरे जख्म...................।

समय-समय की बात है, कोई इस खेल में कामयाब हो जाता है, तो कोई जिंदगी भर इन जख्मों को सीने से लगाए इस आस में जिंदगी गुजारने विवश हो जाता है कि फिर वह चाहकर भी उन यादों से बाहर नहीं निकल पाता जो उसे प्यार की बेवफाई के जख्मों से मिली हैं। एक दिन मैं होटल पर
 
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नगरीय निकाय चुनावों में राजनीतिक द्यमासान

राजधानी सहित पूरे प्रदेष में नगरीय निकाय चुनावों का डंका बोल रहा है। चुनावी सरगर्मी जोर-षोर से अपना जलवा बिखेर रही है और दिन-रात के षोरगुल ने लोगों का जीना हराम कर रखा है। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि जब नगरीय निकाय चुनावों की सरगर्मी के साथ ही पंचायत
 
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Dec 25 2009 02:26 PM
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संचार माध्यमों में भाषा की खिचड़ी

संचार मनुष्य की आवश्यकता तो है ही, एक व्यापक सामूहिक प्रक्रिया भी है। आदिकाल से ही मनुष्य अपने तम, मान्यताओं, अवधारणाओं को जनसमुदाय तक पहंचाने के लिए प्रयत्नशील रहा है। विकास की विभिन्न सीढ़ियों को पर कर मनुष्य इक्कीसवी सदी तक पहंच गया है और संचार के
 
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खोखले दावों में सफलता को छूता ग्रीन हंट

जब से केन्द्र और राज्य सरकार नक्सलियोें के खिलाफ संयुक्त कार्यवाही कर रहे हैं, तभी से सरकार और पुलिस के अलावा नेताओं के बीच इसे लेकर सामांजस्य नहीं है। सरकारों की संयुक्त कार्यवाही भी असफल दिख रही है। ऐसे में सुरक्षा वलों के लिए यह अभियान चुनौती ही नहीं
 
Gappe bazi
Dec 05 2009 08:32 PM
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क्यों न आतंकवादी बन जाऊं

पूरी दुनिया में करोड़ों की संख्या में आतंकवादी होंगे, जिन्होंने अपनी दहशतगर्दी से दुनिया में तहलका मचा रखा है। भारत, अमेरिका और पाकिस्तान सहित अन्य देशों में आतंकवादी अपनी कायराना हरकातों से सरकारों को नाकों चने चबाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इनके मंसूबों
 
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Dec 05 2009 08:20 PM
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चिकित्सालयों में डाक्टरों का गुंडाराज

भगवान के बाद जिंदगी बचाने का दूसरा धरती पर मरीजों के लिए भगवान डाॅक्टर ही होता है, जो मरीजों की हर दुख, तकलीफ का उपचार कर उन्हें नया जीवन देता है। मगर ये जानकर आपको हैरानी होगी कि जिन चिकित्सालयों को खोलकर डाक्टर मरीजों की जांन बचाते हैं, वह अगर अपने
 
Gappe bazi
Nov 18 2009 10:54 AM
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आस्था से खिलवाड़ करती सरकार

सामान्यतः ऐसा देखा-सुना जाता है, कि किसी भी नगर के सौन्दर्यकरण के लिए सरकार नगर की सड़कों का विस्तार, बिजली व्यवस्था, हरियाली और पार्कोंे के निर्माण पर ही ज्यादा जोर देती है। पर छत्तीसगढ़ प्रदेश में इसका दूसरा ही रूप देखने को मिल रहा है। यहां की वर्तमान
 
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