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15 Jun 2010
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Why Suicide? शहरोज भाई की पुकार और आज का दिन..rohit

जी मैं आता है कि......कभी कभी मन सच में व्यथित हो जाता है। लगता है कि सब कुछ छोड़ कर भाग जाएं। क्या करें। कुछ लिखने का मन नहीं करता। परेशानियां चारों तरफ से घेर लेती हैं। लगता है जैसे कुछ करने को जोश खत्म हो गया। मेडिकल के अनुसार हर आदमी के साथ कुछ एक
 
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रोटी की जंग..Indian Media समाज भी भ्रम में जीता है....6..Rohit

ताली एक हाथ से नहीं बजती (आखरी कड़ी..फिलहाल)रोटी की जंग आखिर कहां पहुंच गई?चलो यार बहुत हो गई मीडिया की तरफदारी। सवाल बहुत उठा दिए। समाज की नाक में दम काफी कर दिया(खामख्याली ही सही)। आप भी बोर हो गए होंगे। लेकिन हो गए तो क्या करूं। होते रहें। ये अलग
 
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क्षितिज पर सवाल....indian media.समाज भ्रम में जीता है...5 ..rohit...

ताली एक हाथ से नहीं बजतीजवाब की तलाश में भटकते सवाल..क्या करें इनकाफिर से नक्सलियों ने देश को एक गहरा घाव दे दिया है। झारग्राम में जो हुआ,  .वो अब नक्सलियों के लिए वाटरलू साबित होगा या नहीं अभी कहना जल्दीबाजी होगी। देश की राजनीति इस बात को कहने की
 
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indian Media...समाज भी भ्रम में जीता है...4 ..रोहित..rohit

ताली एक हाथ से नहीं बजती दंत्तेवाड़ा का मास्टर माइंड पकड़ा गया। निःसंदेह एक बड़ी कामयाबी है। नक्सवादी लकमा की गिरफ्तारी की वजह थी सीआरपीएफ का खोया हुआ वायरलेस सेट। जिस के सहारे उसे दंत्तेवाड़ा में सीआरपीएफ की मोर्चाबंदी का पता चल जाता था। बताया जा
 
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indian media..मीडिया ही दोषी नहीं, समाज भी भ्रम में जीता है..rohit

ताली एक हाथ से नहीं बजतीआज दंत्तेवाड़ा का मास्टर माइंड पकड़ा गया। निःसंदेह एक बड़ी कामयाबी है। नक्सवादी लकमा की गिरफ्तारी की वजह थी सीआरपीएफ का खोया हुआ वायरलेस सेट। जिस के सहारे उसे दंत्तेवाड़ा में सीआरपीएफ की मोर्चाबंदी का पता चल जाता था। बताया जा रहा
 
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मीडिया ही दोषी नहीं, समाज भी भ्रम में जीता है...3... रोहित

ताली एक हाथ से नहीं बजतीआजादी के बाद नैतिकता में चौतरफा गिरावटइसमें कोई शक नहीं कि जो वर्ग नैतिकता के मापदंड बनाका है,,..,.उसी पर ज्यादा जिम्मेदारी होती है। पर आज आजादी के साठ साल हो गए हैं। समाज में, ,,,, ,,,.देश में हर स्तर पर गिरावट आई है। ऐसे में
 
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Indian Media..मीडिया ही दोषी नहीं, समाज भी भ्रम में जीता है..2...रोहित

ताली एक हाथ से नहीं बजतीआज सच बोलना गुनाह हो गया है। आप कमजोर हैं तो आप पर वार होता है। आप सबल हैं तो आप को कोई कुछ नहीं कह सकता। यही हालत सारे देश में है। प्रशासन के हर विभाग में है। लोग पत्रकारों से सिर्फ ईमानदारी की अपेक्षा रखते हैं। पर जब
 
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इतना भी न इतराओ ....

इतना भी न इतराओ...कई नदियों को हमने बहते देखा हैखेत खलिहानों को मिटते देखा हैकई साहिल को बनते-बिगड़ते देखा हैमेरे दोस्त यह ठीक है किनदियां जब चलती है अल्हड़ होती हैकई मोड़ पर इठलाती बल खाती हैंसफर में इसके नये निशां बनते हैंदोस्त  हमने
 
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Indian Media...मी़डिया ही दोषी नहीं, समाज भ्रम में जीता है..1.रोहित

एक हाथ से ताली नहीं बजतीलगता है आजकल मीडिया को लता़ड़ने का फैशन हो चला है..हर कोई मीडिया को नसीहत देता दिखता है...लगातार मी़डिया पर आरोप लगते हैं कि वो समाज से दूर होता जा रहा है...हाल ही में एक नई नसीहत दी गई..अखबारों में जाबांज सिपाहियों के शव के
 
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सरेराह चलते-चलते ... रोहित.....

कभी किसी के लिए किसी नाज़ुक लम्हों में आपके दिल में सॉफ्ट कार्नर पैदा हो जाता है...लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाती....फिर भी उसकी कसक सालों बाद भी बनी रहती है....क्यों मालूम नहीं...इसका अहसास दो दिन पहले हुआ मेट्रो में....उसे लिखने की कोशिश
 
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Hindi Blog की दुनिया में पलायन...ब्लॉगर होने के गुण....रोहित..

कुपया पूरा पढ़ें....और अपनी राय दें...ब्लॉग में आजकल कई लोग ब्लॉग लिखना छोड़ने की बात करते हैं.  फिर उसके बाद शुरु होता मान मन्नौवल का दौर....कि भैया जी मान जाओ...न जाओ सईयां छुड़ा कर बइयां, हम रो पडे़गे..टाइप से...इसलिए मैं इस पर पोस्ट लिखना
 
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आज एक अप्रैल है....रोहित

आज से देश के सभी बच्चों को पढ़ने का अधिकार मिल गया है....निजी स्कूल में 25 फीसदी बच्चे गरीबों के होंगें....एक औऱ अच्छा कदम, (या स्वप्न), (एक नया सीन आंखों में जिसपर फिर कभी) देश का नया वित्त वर्ष आज से चालू ....(लोगो का दैनिक बजट बिगड़ा हो तो
 
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....................कुछ करेंगे हम ?..........रोहित....

आखिर कब तक ????मैं दरअसल सिर्फ चंद पंकि्तयां लिखने आया था, ,....पर कैप्टन सौरभ कालिया पर लिखी खुशदीप जी की पोस्ट ने कई बातें याद करा दी हैं....कंधार कांड की बरसी पर दिसंबर में पोस्ट लिखनी शुरु की थी, पर उसे अब तक पूरा नहीं कर पाया औऱ न ही जितना लिखा था
 
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दाढ़ी पुराण....आई एम वैरी सॉरी सर.....

आज कई दिन बाद एक जूनियर मिली....मिलते ही मुस्कुराई, अदा से लहराई....गुलाब की पंखुड़ी से होंठ खुले....अनार दाने सी दंतपंक्ति नजर आईं....फिर खनकती आवाज में इंगिलश में सवाल दागा.... हाउ आर यू सर.... मोहक अवाज को सुन.....हम दोस्तों के बीच इतराते...उनकी अदा
 
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TIGER 1411??..BIG CAT...1411 ?? 1000 बाघ भी शायद ही हैं...

""""खुदा की कसम मज़ा आ गया मुझे मार के बेशरम खा गया..""""""१९७९ में फिल्म मिस्टर नटवरलाल में यह गाना अमिताभ बच्चन ने गाया था बच्चों को कहानी सूनाते हुए..यह गाना अब बाघ गा रहा है.....पर किसी को कहानी सुनाते हुए नहीं...क्योंकि अब खुद उसके ही किस्सों
 
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मैं लाल चौक हूं..........रोहित

आज की पोस्ट दरअसल पुरानी पोस्ट है . जो पिछले महीने सात जनुअरी को लिखी थी डायरी के पन्ने मैं .. जब कश्मीर का लाल चौक दहला था कई दिन की शांति के बाद..उस दिन पोस्ट नहीं कर सका था..आज उसे ही पोस्ट कर रहा हूँ.. मैं लाल चौक हूँ आज फिर गोलियों से बिधा, राहत की
 
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बीमार क्यों हूं.

२ दिन से तबियत नासाज़ है .. न कहीं आना न कहीं जाना.... सच में क्या मुसीबत है ... घर में पड़े रहना और बुखार में ... लगता है जैसे किसी ने रवानगी रोक दी हो, बिस्तर में पड़े रहना किसी सजा से कम नहीं होता, सरे काम बंद और बिस्तर के हवाले..उस
 
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गाँधी ...साथ चले या पीछे

२ दिन पहले गाँधीजी की पुण्यतिथि थी....मुझे मुन्नाभाई याद आ गया...जिसे गाँधी ने कहा लोगो से कह दो मेरे बुत तोड़ दें ..रखना है तो मुझे दिल में रखें....पर लगता है दिल में रखने से काम कब तक चलेगा...दिल से निकाल कर गाँधी को यथार्थ में बदलें....बेहतर यह नहीं की
 
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कुछ कहती सी रूक जाती हो

दोस्तों इस बार एक पुरानी कविता आपके सामने है ..लाइनें बिना बदले ...जैसी पहली बार लिखी थी.....बदलना सही नहीं समझा.....हो सकता है तारतम्य न हो लाइनों में ...मगर भाव जैसे थे मेरे ख्याल में, वैसे ही आपके सामने हैं...जब जब तुम्हारा ख़त पड़ता हूँ ख़त की चंद
 
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जीए तेरे लिए....

चंद पंक्तिया जाने कहाँ से निकली...और कलम के रास्ते पन्नों पर उतर गई...और आज कीबोर्ड के सहारे ब्लॉग पर..... मेरे दिल के टूटने की कसक उन्होंने सुनी नहीं हँसतें हुए मेरे लबो को देख वो चहकती रहीं और मैं मुस्कराहट मैं ही दर्द पीता रहा.... दर्द भले मेरा कभ
 
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कोई लड़की हो तो बताना दोस्तों

अकेले है हम, तो दुसरो को क्यों है गम....? किसी शायर ने क्या खूब कहा है " जिंदगी जिंदादिली का नाम है, मुर्दा दिल क्या ख़ाक जिया करते है".... यह एक शेर जिंदगी को ज़ीने का फलसफा बताने की लिए काफी है....आप सोच रहे होंगे की में यह शेर क्यो पड़ रहा हूँ ...तो
 
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चलिए श्री गणेश करते है.....

दोस्तों कैसे है आप......आखिर मेनें भी ब्लॉग की दुनिया में श्री गणेश करने का फ़ैसला कर ही लिया.....लंबे इंतज़ार के बाद ...आखिरकार ब्लॉग की दुनिया में आ ही गया हूँ ....कभी न कभी तो श्री गणेश करना ही होता है.... तो चलिए आज से ही सही....हर बार सोचता ही रह
 
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