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04 Jun 2010
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रोज़नामा राष्ट्रीय सहारा अब एक नई मंज़िल की तरफ़...... अज़ीज़ बर्नी

2 जून यानी हम सब के अपने अख़बार रोज़नामा राष्ट्रीय सहारा की वर्षगांठ का दिन। देखते ही देखते कब 11 साल बीत गए, पता ही नहीं चला। वैसे तो उर्दू सहारा के प्रकाशन को लगभग 20 बरस पूरे होने को हैं मगर रोज़नामा राष्ट्रीय सहारा की शुरूआत 2 जून 1999 को हुई थी, जो
 
Aziz Burney
Jun 03 2010 02:03 PM
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अगर मौलाना नूरूल हुदा की जगह बाल ठाकरे होते तो....अज़ीज़ बर्नी

यह क्या हो गया हैं हमें? क्यों इतने बेहिस हो गए हैं हम? क्या नैतिकता और क़ानून के दायरे में रहकर भी हम हक़ और इन्साफ़ के लिए आवाज़ नहीं उठा सकते? क्यों हमें यह इंतिज़ार रहता है कि जब तक यह आग हमारी ड्योढ़ी तक नहीं पहुंचेगी तब तक हम मौन ही रहेंगे? क्या
 
Aziz Burney
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कुछ शेष नहीं शेष के बाद अज़ीज़ बर्नी

श्री शेष नारायण सिंह जी मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं, शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे, बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये... प्रिंट, रेडियो और टेलीविज़न में काम किया। इन्होंने 1920 से 1947 तक की महात्मा गांधी के जीवन के उस पहलू पर काम किया है, जिसमें वे
 
Aziz Burney
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क्या होता है फ़तवा, पहले यह जानो तो........

जावेद अख़्तर साहब एक प्रगतिशील शायर हैं और अब तो संसद सदस्य भी हैं। इसलिए वह किसी भी प्रश्न के जवाब में कुछ भी कह सकते हैं। पिछले दिनों जब वंदे मातृम पर बहस चल रही थी तो आपने फरमाया था कि मैं ही क्या मेरा पूरा परिवार वंदे मातृम गाता है, और अब उन्होंने
 
Aziz Burney
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अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद का जवाब शाह फैसल अज़ीज़ बर्नी

मंगल के दिन जब लिखने के लिए बैठा तो एक निजी कारण ने क़लम रोक दिया। हुआ यह कि मेरे कुछ साथियों के बीच संबंधों में कुछ तनाव सा महसूस किया जा रहा था। मेरी ज़िम्मेदारी थी कि इसको तुरंत समाप्त कराया जाए, इसलिए इस दिशा में मुझे कुछ पहल करनी पड़ी और जो समय लिखने
 
Aziz Burney
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چلو آج ایک نئی جدوجہد کا آغاز کریں!عزیز برنی

شاہ رُخ خان کی فلم ’’مائی نیم ازخان‘‘ ابھی تک نہیں دیکھی ہے میں نے۔ بڑی خواہش ہے اس فلم کو دیکھنے کی، مگر ایک ساتھ چارپانچ گھنٹے کا وقت نکالنا مشکل ہورہا ہے۔ فلم کی ریلیز سے قبل شاہ رُخ خان نے ممبئی میں اپنی رہائش گاہ ’’منت‘‘ پر کچھ مخصوص لوگوں کو دعوت
 
Aziz Burney
May 11 2010 12:07 PM
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चलो आज एक नए संघर्ष की शुरूआत करें। अज़ीज़ बर्नी

शाहरुख़ ख़ान की फ़िल्म ‘‘माई नेम इज़ ख़ान’’ अभी तक नहीं देखी है मैंने। बड़ी इच्छा है इस फ़िल्म को देखने की, परंतु एक साथ चार-पांच घंटे का समय निकालना कठिन हो रहा है। फ़िल्म की रिलीज़ से पूर्व शाहरुख़ ख़ान ने मुम्बई में अपने निवास स्थान ‘’मन्नत’’ पर कुछ विशेष लोगों
 
Aziz Burney
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कुछ कहती है राजा और विद्वान की कहानीअज़ीज़ बर्नी

कल किसी समाचारपत्र में एक कहानी पढ़ रहा था कि एक राजा के दरबार में विद्वान और राजा के बीच वार्तालाप जारी था। राजा ने पूछा कि मैं आपके ज्ञान, बुद्धि और योग्यता से अत्यंत प्रभावित हूं, लेकिन आप से एक प्रश्न करना चाहता हूं कि ज्ञान और चरित्र दोनों में से
 
Aziz Burney
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बटला हाउस केवल एक एंकाउंटर नहीं!अज़ीज़ बर्नी

गृह मंत्री पी॰ चिदम्बरम के ताज़ा बयान ने बटला हाउस एन्काउन्टर को एक बार फिर चर्चा का विषय बना दिया है और केवल चर्चा का विषय ही नहीं उनके विचारों ने हमें यह सोचने पर भी मजबूर कर दिया कि क्या अब उनकी नियत पर भरोसा किया जा सकता है। यही कारण है कि मैं इस घटना
 
Aziz Burney
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हम टूट गए इसलिए कि आत्मविश्वास टूट गयाअज़ीज़ बर्नी

बटला हाऊस पर लिखने का क्रम जारी रहेगा लेकिन जैसा कि मैंने अपने कल के लेख में निवेदन किया था कि आज का लेख हलधरमऊ, गोण्डा में आयोजित कान्फ्रेंस पर आधारित होगा, अतः प्रस्तुत है ज़िला गोण्डा में 2 मई को ‘‘मुसलमानों के पिछड़ेपन के कारण और उनका निवारण’’ विषय पर
 
Aziz Burney
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क्यों डरती है सरकार बटला हाऊस के सच से अज़ीज़ बर्नी

हक़ और इन्साफ की हत्या के अनुरूप है गृहमंत्री का यह फैसला। क्यों लोकतंत्र का गला घोंट देना चाहते हैं? पी॰ चिदम्बरम का यह कहना कि ‘न्यायिक जांच नहीं होगी।’’ क्या उनका यह फैसला एक विशेष समुदाय के लिए अन्याय सहन करो की घोषणा नहीं है?’ अगर उन्हें लगता है कि
 
Aziz Burney
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सिर्फ मेरी आंखों ने देखी ओबामा-मनमोहन की यह ख़ास मुलाक़ात अज़ीज़ बर्नी

इन्सानी दिमाग़ के उड़ान की ऊंचाई की कोई सीमा नहीं। वह कब क्या सोचने लगे, कल्पना करना कठिन है। इसी तरह ख्वाब की बात भी है जब आप गहरी नींद में डूबे हों तो आपकी आंखें कैसे-कैसे सपने सजा लें, इस पर भी आपका कोई ज़ोर नहीं। कभी-कभी ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हो जाता
 
Aziz Burney
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अमेरिका चाहता है, अब हेडली पर नहीं दाऊद इब्राहिम पर बात हो! अज़ीज़ बर्नी

इसे अपने मुंह मियाँ मिट्ठू बनने की कोशिश न समझी जाए तो आज यह बात कहने को जी चाहता है और वह यह कि अमेरिकी इरादों और भारत की सुरक्षा के बीच अगर कोई चीज़ लोहे की दीवार की तरह खड़ी है तो वह ‘रोज़नामा राष्ट्रीय सहारा’ है। मुझे गर्व है कि मैं इस ऐतिहासिक उर्दू
 
Aziz Burney
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आतंकवाद-सामाजिक न्याय के लिए-असंभव अज़ीज़ बर्नी

बहुत कठिन होता है भावनाओं पर नियंत्रण रखना, अगर बात कोई बहुत असाधारण हो, फिर भी अगर आप अपनी भावनाओं को मार कर स्वयं पर क़ाबू पा लें तो दिनचर्या में आए परिवर्तन से प्रभावित हुए बिना नहीं रहा जा सकता। कल की घटना इतनी ही बड़ी थी, जब हमारे जवानों पर
 
Aziz Burney
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यह कोई आन्दोलन है या सिर्फ और सिर्फ आतंकवाद अज़ीज़ बर्नी

’ नक्सलवादियों को हम आतंकवादी मानें या जिहादी, आज यह भी तय करने की आवश्यकता है, इसलिए कि जितना बड़ा आतंकवादी हमला नक्सलियों ने आज भारत की सेना पर किया, अगर किसी दुश्मन देश के हमले में भी हमारे इतने फौजी जवान मारे गए होते तो हम उस देश को तहस-नहस करने या कम
 
Aziz Burney
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26/11 का सच जानना है तो.......अज़ीज़ बर्नी

जब किसी मामले को ठंडे बस्ते में डालना हो तो उससे ध्यान हटा लीजिए, उस पर गुफ़्तुगू बंद कर दीजिए। अगर कोई चर्चा छेड़ भी दे तो बात बदल दीजिए। कुछ विशेष लोगों तक यह सन्देश पहुंचा दीजिए कि इस विषय पर बातचीत नापसंद है। इसलिए अधिक बात न करें, कोशिश कीजिए कि
 
Aziz Burney
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कांग्रेस मुझे पसंद है और अमिताभ बच्चन भीअज़ीज़ बर्नी

कांग्रेस पार्टी मुझे पसंद है, इसलिए कि यह देश की सबसे बड़ी और धर्मनिरपेक्ष पार्टी है, जो सबको साथ लेकर चलने का इरादा रखती है। अमिताभ बच्चन मुझे पसंद हैं, इसलिए कि अपनी कला के माध्यम से उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। अगर मैं एक
 
Aziz Burney
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ज्योति दिवस-एक अनुकरर्णीय प्रणाली

दो जन्मों की थ्योरी (Theory) बात कुछ अजीब सी लगती है, मगर जब अपने बारे में सोचता हूं तो कभी-कभी यह लगता है कि मुझे एक ही जीवन में दो बार जन्म लेने का अवसर मिला है। एक तो वह जब मैंने अपने घर परिवार में अपनी माँ के द्वारा जन्म किया और दूसरी बार जब ‘‘सहारा
 
Aziz Burney
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Terror War (9/11/26/11) vs Cyber War

(Cyber War) ही हो, इसलिए काग़ज़ और क़लम के साथ-साथ मैं इंटरनेट की दुनिया में भी चला आया हूं। आप सबके सहयोग का भरोसा जो है।
 
Aziz Burney
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आतंक की चिंगारी अब रूस में क्यों!

आज के दिन की ख़ास पहचान यह भी है कि अगर आप कोई मूर्खतापूर्ण हरकत करें या आपका कोई कार्य जानबूझ कर मूर्खतापूर्ण हो तब भी वह क्षमा के योग्य है, क्योंकि आज पहली अप्रैल है। नहीं, मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है कि मैं कोई मूर्खता की बात करूं। अपनी समझ से तो मैं
 
Aziz Burney
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न्याय के बिना लोकतंत्र की कल्पना ही क्या!अज़ीज़ बर्नी

मीडिया के संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री का उद्घाटन भाषणइससे पहले कि मैं अपनी बात शुरू करूं, मैं पिछले वर्ष 26 नवंबर को मुम्बई में हुए आतंकवादी हमले की पहली वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर चंद शब्द कहना चाहूंगा।यह दिन उन मासूम लोगों और हमारे जवानों को
 
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जो लहजा पाकिस्तान के लिए था, क्या अब अमेरिका के लिए भी होगा? अज़ीज़ बर्नी

निम्नलिखित भाषण हमारे देश के प्रधानमंत्री डा॰ मनमोहन सिंह ने मुम्बई पर हुए आतंकवादी हमलों के बाद 11 दिसम्बर 2008 को लोकसभा में चर्चा के दौरान दिया, जिसे आज हमने हूबहू पाठकों की सेवा में प्रस्तुत करने का साहस किया है।हम अपने प्रधानमंत्री से दोहरे मापदण्ड
 
Aziz Burney
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तक़रीर प्रधानमंत्री की, लेख वीर सांघवी का, विषय 26/11अज़ीज़ बर्नी

26 नवम्बर 2008 को मुम्बई के रास्ते भारत पर हुए आतंकवादी हमले की गंभीरता आज इस स्थान पर पहुंच चुकी है कि बाक़ी सभी सम्स्याएं छोटी नज़र आती हैं। आज मेरे लिए यह विषय इस हद तक रिसर्च का विषय है कि इसके सिवा कुछ और सूझता ही नहीं। मैं चाहता हूं कि आज इस संबंध
 
Aziz Burney
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भारत सरकार को नाराज़गी ज़ाहिर करनी चाहिएअज़ीज़ बर्नी

मैंने किसी टिप्पणी के बिना प्रकाशित किया था कल बी॰रमन साहब के लेख को और आज श्रीमति बरखा दत्त के लेख पर भी किसी टिप्पणी की आवश्यकता नहीं है, जो 20 मार्च शनिवार के दिन अंगे्रज़ी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित हुआ। इन लेखों का एक-एक शब्द चीख़-चीख़ कर
 
Aziz Burney
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अमरीका नहीं चाहता सच सामने आए-क्यों?अज़ीज़ बर्नी

पूर्व अतिरिक्त सचिव भारत सरकार नई दिल्ली (वर्तमान) डायरेक्टर इंस्टीट्यूट फार ट्रापिकल स्टडीज़ चैन्नई श्री बी रमन का 26 नवम्बर 2008 को मुम्बई के रास्ते हिंदुस्तान पर हुए आतंकवादी हमले से सम्बन्धित लेख इस समय आपके सामने है। कल अर्थात रविवार के दिन
 
Aziz Burney
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सच तो सामने आजाएगा, मगर क्या फिर भी....? अज़ीज़ बर्नी

(Indo-Asian News Service) की 24 दिसम्बर 2009 की रिपोर्ट। ध् क्या अब भी हिन्दू और मुसलमानों के बीच नफ़रत की दीवार खड़ी रहनी चाहिए? ध् क्या अब भी हमें असली आतंकवादियों को और उनके इरादों को नहीं समझना चाहिए? ध् क्या अब भी हमें हिन्दुस्तान को तबाह और बरबाद
 
Aziz Burney
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आतंकवादी ‘‘हेडली’’ किसका एजेंट, लशकर-ए-तयबा या एफ.बी.आई?

अगर कोई मेरी हत्या करना चाहता है तो वह मुझ पर गोली चलाए, चाकू से वार करे या बम से उड़ा दे, क्या फर्क़ पड़ता है। अगर मेरी जान चली जाती है तो हथियार कोई भी हो, बस इसी तरह अगर कोई मेरे देश की दुशमनी पर अमादा है तो वह अलक़ायदा हो, लश्कर-ए-तयबा, एफ बी आई या सी
 
Aziz Burney
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सच का आईना-पोस्टमार्टम रिपोर्टअज़ीज़ बर्नी

इस बार 100 वीं क़िस्त पूरी होने पर कोई आयोजन नहीं और 101वीं क़िस्त के लिए कोई नया शीर्षक भी नहीं। मुझे याद है कि ‘मुसलमानाने हिंद..... माज़ी, हाल और मुस्तक़बिल???’ फिर उसके बाद ‘दास्तान-ए-हिंद..... माज़ी, हाल और मुस्तक़बिल???’ की 100 क़िस्तें पूरी हो जाने के
 
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हमें तो बस अपना फ़र्ज़ याद रहता है! अज़ीज़ बर्नी

कुछ दाग़ थे मेरी क़ौम के दामन पर जिन्हें छुड़ाना बहुत ज़रूरी था। बात सिर्फ मुसलमानों की नहीं थी, बात मेरे देश भारत के हित व कल्याण की थी। लोकतांत्रिक मूल्यों की सुरक्षा की थी, साम्प्रदायिक सदभाव, एकता व भाईचारे की थी। इसलिए कि जिस नफरत की आग में हम पिछले 61
 
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हमें तो बस अपना फ़र्ज़ याद रहता है!

कुछ दाग़ थे मेरी क़ौम के दामन पर जिन्हें छुड़ाना बहुत ज़रूरी था। बात सिर्फ मुसलमानों की नहीं थी, बात मेरे देश भारत के हित व कल्याण की थी। लोकतांत्रिक मूल्यों की सुरक्षा की थी, साम्प्रदायिक सदभाव, एकता व भाईचारे की थी। इसलिए कि जिस नफरत की आग में हम पिछले 61
 
Aziz Burney
Mar 18 2010 12:27 PM
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पुरूष क्यों परेशान हैं ‘महिला आरक्षण बिल’ के सवाल पर!

महिला शासनाध्यक्ष और देशरानी ऐल्ज़ाबेथ ब्रिटेनरानी मर्गेट द्वितीय डेनमार्करानी बयाडीस फिनलैंडराष्ट्रपति मेक ऐलीरनी आयरलैंडडॉ0डेम सी पेयरलीट लावरनी गर्वनर जनरी सेंट लूसियाप्रधानमंत्री हेलेन क्लार्क न्यूजीलैंडराष्ट्रपति फारहा होबोतीन फिनलैंडराष्ट्रपति
 
Aziz Burney
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कामयाबी का फ़ार्मूला है इस कहानी में

अज़ीज़ बर्नीएक ज़माना था जब बच्चे प्रतिदिन रात होने का इंतिज़ार करते थे, इसलिए कि वह नींद की गोद में जाने से पहले अपनी नानी या दादी से कोई कहानी सुनना चाहते थे और यह दादी या नानियां भी हर दिन एक नई कहानी अपने मन में तैयार रखती थीं। कभी परियों की कहानी, कभी
 
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उठो कि आसमान की बुलंदियों पर अपना नाम लिखना है!

अज़ीज़ बर्नीकभी-कभी लिखते समय मैं इस बात का ख़याल नहीं रखता कि मेरा लेख साहित्यिक या पत्रकारिता के मूल्यों का किस हद तक पाबंद रहा है। भाषा व बयान के ऐतबार से भी यह कोई ऐसी तहरीर नहीं होती जिसे उल्लेखनीय कहा जा सके। बेश्तर ख़ामियाँ हो सकती हैं, इसलिए कि हर
 
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भूमिका आज लेख कल विषय ‘‘महिला आरक्षण बिल’’

अज़ीज़ बर्नी अभी तक मेरे क़िस्तवार लेख ‘‘आज़ाद भारत का इतिहास’’ की 95 क़िस्तें आपकी नज़र से गुज़र चुकी हैं, अर्थात् 100 के अंक तक पहुंचने के लिए अब केवल 5 और लेख दरकार हैं। इन्शाअल्लाह हफ़्ते भर में यह क़िस्तें भी पूरी हो जाएंगी। यूं तो लिखने का सिलसिला शुरू किए
 
Aziz Burney
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इन्हें स्वामी, संत या बाबा कहकर धर्म को बदनाम न करें

जमियत उलमा-ए-हिन्द की मेरठ कान्फ्ऱेंस में आज मौलाना अरशद मदनी साहब के ऐतिहासिक महत्व के भाषण को सुनने का अवसर मिला। इस भाषण का हर-हर शब्द याद रखे जाने के योग्य है, लेकिन आज का लेख इस विषय पर संभव नहीं है। 8 मार्च 2010 का दिन भारत के इतिहास में बेहद
 
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सरकार को क्यों तस्लीम (स्वीकार) ‘तस्लीमा’

8 मार्च को महिला दिवस है, अर्थात जिस दिन आप यह लेख पढ़ रहे होंगे उसके 3 दिन बाद। मुझे याद पड़ता है कि एक बार जब मैं महिला दिवस अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर बोल रहा था तो हॉल पूरी तरह भरा हुआ था और लगभग 90 प्रतिशत महिलाएं बुर्क़ों में थीं। स्टेज पर मेरे साथ
 
Aziz Burney