आजादी विचारों की's Image

आजादी विचारों की

http://khula-saand.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
24 Jan 2010
कुल प्रविष्टियां
10
पाठक भेजे
162
पसंद
0
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
16.20
पसंद करें
2
नापसंद करें

हाँ वो सपूत वीर सुभाषचंद्र बोस ही था,

गड़..ड़..ड़..ड़...ड़..ड़..ड़.. गर्जना घनघोर थी|तड़..ड़..ड़..ड़..ड़..ड़..ड़.. ताड़ना चहुँ और थी||आर पार तार तार शर्मसार चुनड़ी की कौर थी |तानाशाही, क्रूरपन, मलेछों की सिरमोर थी|| भारत माँ के आँचल में जब अनगिनत छेद थे |अंग्रेजों के प्रगाढ़ किल्ले जब पूरी
 
खुला सांड
पसंद करें
0
नापसंद करें

क्या फ़ालतू की बात करते हो!!!

(बुरे खयालात और अच्छे ख्यालात में जंग होने लगी तो कुछ टूटता फूटा लिख डाला)फुरसत नहीं मोहब्बत करने से | आप नफरत करने की बात करते हो||पाक ख़यालों की सोहबत से फुर्सत नहीं|द्वेष को आप आत्मसात करते हो||तोड़ने की कोशिश में हूँ मजहबी दायरे |आप दरो दीवार की बात
 
खुला सांड
पसंद करें
3
नापसंद करें

"टिप्पणियों के अभाव में" !!

मिलकर रहो क्या रखा है अलगाव में!!दिल की सुनो मत बहको किसी के दबाव में!!क्या हिन्दू, क्या मुस्लिम, सिक्ख ,इसाई क्या !!इंसानियत का नाता हो आत्मा के लगाव में!!प्रेम सोहार्द मिलते नहीं बाजार के भाव में !भावनाओं को मत मारो खुदगर्जी के चाव में !! जात पात घृणा
 
खुला सांड
टैग: unity
पसंद करें
3
नापसंद करें

इंसानी प्रेम में स्वार्थ है !!

प्रेम शब्द का इंसानों के लिए अलग अलग मतलब है| हर प्रेम में स्वार्थ है !माँ बाप अपने बच्चों को पाल पोसकर बड़ा करते हैं ये लालसा रहती है की बड़ा होकर सहारा बनेगा|बुढापे में सेवा करेगा! एक लड़की से लड़का या लड़के से लड़की इसलिए प्रेम करती है की बदले में वो
 
खुला सांड
टैग: प्रेम
पसंद करें
0
नापसंद करें

बाबाओं का मंगल ग्रह अभियान !!!

आज तड़के ४:३० बजे अमृत बेला में स्वामीश्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी के तत्वाधानमें बाबाओं की सभा रखी गई !सभी बड़े बड़े बाबाओं ने अपना बहुमूल्यसमय दिया|वरिष्ट बाबा बाबाश्री ताऊआनंद महाराजने गहरी चिंता प्रगट करते हुए कहा की अगरविनाशकारी अपनेविनाश
 
खुला सांड
पसंद करें
0
नापसंद करें

भारत में भारतीय ना मिला||

सांड खुला है खुला ही चरता है!भारतीयता का दम भरता है ||पर भारत में कोई भारतीय ना मिला|अपना बना सकूँ ऐसा कोई आत्मीय न मिला ||जिससे भी मिला मुझसे मेरा नाम पूछा |सब मेरे नाम से डरे मेरा पता मेरा धाम पूछा || मैं भारतीय हूँ मैंने सबको बताया |पर इतने से लोगों
 
खुला सांड
टैग: unity
Dec 22 2009 10:06 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

इंसानियत को नंगा किया ||

एक बार ऐसा हुआ था गुजरात में |दो सांड निकले थे एक बार रात में |ख़ामोशी जहां पसरी हुई पड़ी थी |क़त्ल की रात मुह बाए खड़ी थी||दोनों एक दुसरे से थे भयभीत |कौमी एकता की टूट चुकी थी प्रीत| |भयभीत दोनों, चल तो रहे थे एक साथ |पर चाहते हुए भी ना कर पा रहे थे बात
 
खुला सांड
पसंद करें
0
नापसंद करें

लेकिन मैं खुला हूँ !!!

भई कल घूमते घूमते एक शहर की भीड़ भाड़ में पहुँच गया | मैं अपनी सांडाई में फुला हुआ मदमस्त चाल चलता चला जा रहा था ! की अचानक कई सांड जैसी शक्ल वाले जिनावर सामने आखड़े हुए |बोले तू कोनसा सांड है ?? मैं बोला कोनसे सांड से क्या मतलब है दिख नहीं रहा क्या?एक
 
खुला सांड
टैग: विचार
पसंद करें
0
नापसंद करें

खुले सांड की हकीकत |

नमस्कार !! जैसा की नाम इंगित कर ही रहा है की "खुला सांड" कहाँ कहाँ जा सकता है !!! सो नाम को लेकर कोन्फुस मत होइए | भाई ये खुले सांड की नहीं, बात है विचारों को खोलने की बात है |एक खुले सांड की तरह कल्पना लोक के उन्मुक्त गगन में अपने विचारों को खुला छोड़
 
खुला सांड