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14 Jun 2010
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बूंदे

लटों में उलझी बूंदेयूँ लगती है जैसेकाली रात नेउलझा लिए हैं खुद मेंढेर सारे सितारेऔर वो गिर रहे हैंटूट टूट करकधों से फिसलतीइधर उधर गुज़रतीगुदगुदी लगाती ये बूंदेबताती है पलों का मोलदो पल ठहरती हैंऔर बिखर जाती हैंपर ज़मीन पररंगत बिखेर जाती हैं
 
ranjana
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ममता का स्वाद

आग की लपटों के बीचगुब्बारे की तरह फूलती रोटियांऔर उस आंच की तपन सेलाल होता माँ का चेहरादोनों ही आग में तपकर निखरे हैंदोनों ही चूमने लायक हैक्योंकि रोटियों में स्वाद है माँ के प्यार काऔर माँ में स्वाद है उसकी ममता का
 
ranjana
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नर्म एहसास तुम्हारी हथेली का

नर्म एहसास तुम्हारी हथेली काहिस्सा हो जैसे जादू भरी पहेली काआज है मेरी नन्ही सी बेटी काकल यही होगा मेरी सबसे प्यारी सहेली का
 
ranjana
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तुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीच

तुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीचन जाने कितने ऐसे पल आयेजब भीड़ में होते हुए भीदिखे सिर्फ तुम हीसुना सिर्फ तुमकोतुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीचहमें याद रहा की लंच टाइम हो गयातुमने खाना खाया होगा या नहींखाना तुम्हे पसंद आया होगा या नहींतुम्हारी और
 
ranjana
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कागज़ को प्यार से सहलाकरखुशबुओं से नहलाकरसोचती हूँ लिखूकोई प्यार भरा गीतजिसमे तारों भरे आसमान तलेजुगनू टिमटिमाते होहवा के झोंके जहाँ बिना किसीखिड़की, दरवाज़े से टकराए हुए आते होंजहाँ एक दूसरे के सुख से बढ़करकोई चाह न होजहाँ अलग कर देने वालीकोई राह न होजहाँ
 
ranjana
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स्नेह का दीप जलाते वक़्तसोचा नहीं होगा उसनेकी केवल उन्ही दीपों कोजलने का अधिकारदिया है इस समाज नेजो जलते है मंदिरों में,घर की मुंडेर परया मृत्यु पश्चात सिराहने पर.इसीलिए छुपाती फिरी वोअपने स्नेह दीप कोलेकिन प्रेम का प्रकाशकब रुका है रोकने से?पर उसकी
 
ranjana
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I have got 5th position check this link http://kavita.hindyugm.com/2010/05/main-toote-bartan-ke-jaisi.html
 
ranjana
May 21 2010 02:35 AM
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उँगलियों और किबोर्ड

थकी हुई आँखों में भरी हुई है नीदपर कंप्यूटर के किबोर्डपर थिरकती उँगलियाँअभी भी बांधे हुए है उम्मीदकी शायद यहाँ से भेजे हुए इमेल्सवहां तक पहुँचकरकुछ करामात दिखायेंगेकहीं किस्मत, तो कहीं दिल केदरवाज़े खटखटाएंगेऔर फिर शायद भर जायेकिसी दिल का खाली कोनाया बदल
 
ranjana
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टूटी बिखरी किरचों को मै चिपकाती रहती हूँगीत अधूरा या हो पूरा गुनगुनाती रहती हूँरंग बिरंगे लम्हे सीकर चादर सी बुन ली हैबेरंगे लम्हों में उसे ओढ़कर सो जाती हूँ
 
ranjana
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एरोकेरिया का पेड़

एरोकेरिया का पेड़मेरे घर के आँगन में खड़ाआया था नन्हा साधीरे धीरे होता जा रहा था बड़ारोज़ कड़क धूप सहताऔर चुपचाप खड़ा रहताशाम को जब हम ऑफिस से आतेतो उसे देख कर लगताजैसे किसी मासूम कोदिनभर धूप में खड़े रहने कीसजा मिली होएक दिन पति को उसपर तरस आयाऔर उन्होंने
 
ranjana
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उदास धूप

पीले से पत्तों के नीचेछुपी हुई है छांव दुबक करधूप उदास अकेली उसकोढून्ढ रही है सुबक सुबक करबहुत दिनों से नहीं मिले वो छोरजहाँ दोनों मिलते थेआधे ठन्डे, आधे गर्म फर्श परकुछ लम्हे खिलते थेबहुत देर से देख रही थी हवाधूप के नैना गीलेउड़ा ले गयी एक झोंके मेंसारे
 
ranjana
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तारो की रौशनी में

कभी कभी तनाव से ऊब करनींद जब पल्लू छुड़ा कर भागती हैतो मै रोकती नहीं उसका रास्ताये सोच कर की शायदकहीं कोई मखमली सपने की सेज परकरता होगा उसका इंतज़ारऔर चुपचाप चुनने लगती हूँआसमान के सितारेक्योंकि दिन के उजालेकई बार आँखों को चौंधिया देते हैंऔर साफ़ दिखती हुई
 
ranjana
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ख़बरें

ख़बरों के चौराहों पर न जाने क्या क्या बिकता हैये है वो चूल्हा जिस पर हर रोज़ तमाशा सिकता हैघर के झगडे, ढोंगी नेता या हो धर्म के ठेकेदारजितने मिर्च मसाला उतना ही चलता इनका व्यापार
 
ranjana
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सपने

चटक, चुलबुले, चमकीले सेहरे गुलाबी और पीले सेरोज़ सजाती हूँ मै सपनेओस की बूंदों से गीले सेपर...आग उगलता सच का सूरजसपनो को पिघला देता हैसब सपनों सा सरल नहीं हैइस सच को दिखला देता है
 
ranjana
May 04 2010 02:00 PM
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अश्कों से धुले लम्हों को पोंछती रहती हूँकैसे जियूं ये रिश्ते बस सोचती रहती हूँफुरसत में कही कोई गम याद न आ जाये मसरूफियत में खुशियों को खोजती रहती हूँ
 
ranjana
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आज कर दी हद जो वो आये नहींउनके ये तेवर हमें भाये नहींमेरे आंसू देख कर शरमा गएबादलों ने मेघ बरसाए नहीं
 
ranjana
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दर्द

दर्द को जब भी दबाऊं तो छलक आता हैजख्म का ये मिजाज़ हमको नहीं भाता हैहम तो रखतें है छुपा कर कई परतों के तलेदाग दिल का न जाने कैसे उभर आता हैमैंने हर दर्द को हमदर्द की तरह पलासहा चुप रह के हर एक जख्म, हर एक छालाखिली दोपहर भी देती है अँधेरे मुझकोदिखता है
 
ranjana
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जिंदा हूँ या वहम है

हर रोज़ सोचते हैं बस आज का ही गम हैकबतक मिलेगा यूँ ही होगा कभी तो कम हैकई बार सोचती हूँ जिंदा हूँ या वहम हैजीना नहीं है बस ये सांसो पे एक सितम है
 
ranjana
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वो लम्हें चूम कर हौले से छुपा रखें हैंकी किसी की बुरी नज़र कहीं न पड़ जायेवो यूँ ही झांके शरारत से मेरी आँखों मेंऔर हम देखकर उनको शर्म से गड़ जाये
 
ranjana
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ऑफिस केवातानुकूलित कमरे में बैठ करखिडकियों के काले शीशों के बाहरदिखाई देते लोगपेड़, मकान, सड़क, मौसमदिखते है कितने सुन्दरलेकिन बिजली के चले जाने केकुछ पलों बाद हीमहसूस होने लगती हैदूर से दिखाई देतीसुन्दरता का सचपसीने से भीगते शरीरतपती हुई छतेंपिघलती
 
ranjana
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बड़े तूफ़ान देखे हैं

बड़े तूफ़ान देखे हैंअभी तक मैंने राहों मेंकही लालच, कही छलऔर कहीं नफरत निगाहों मेंख़ुशी की ओर जब भीमैंने अपनी बांह फैलाईसिमट आई न जानेसिसकियाँ कितनी पनाहों मेंवो जो ऊँगली उठाते रहते हैंगैरों पे अक्सर हीउन्ही के हाथ देखे हैंसने मैंने गुनाहों मेंकी अब तो
 
ranjana
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आँख की खिड़की जो खोलो मन का फाटक कर दो बंद

तुमने देखा बस वहीजो आँखों के आगे दिखाकाश देखा होता तुमनेमन के पीछे क्या छुपास्नेह में डूबे हुए मीठे से पलहमने जो सींचा था वो भीगा सा कलदर्द का और प्यार का हर एक लम्हाबन गया था गीत और मीठी ग़ज़लपर तुम्हे क्या तुम वही देखोजो तुमको है पसंदआँख की खिड़की जो
 
ranjana
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गलती जो की है उस खुदा ने....

सुनते हैगलती इंसानों से होती हैइसका मतलब खुदा, खुदा इसलिए हैक्योंकि वो गलती नहीं करतालेकिन मैंने खोज ली हैएक बड़ी सीजो की है उस खुदा ने....उसने फूलों को ऐसे संवाराकी हम देखते ही जान गए ये फूल हैउसने जानवरों को ऐसा बनाया कीहम दूर से ही जान जाते है ये
 
ranjana
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सही वक़्त पर सही प्रतिक्रिया

मैंने देखाघर से काफी दूरबहुत तेज़ चमक के साथमिट्टी में कुछ झिलमिलता सापर बादल के टुकड़ेजैसे ही सूरज को ढकतेसब शांत हो जाताऔर फिर बादल के हटते हीफिर वही ज़ोरदार चमकजैसे सूरज का कोई टुकड़ाटूट कर गिर गया हो ज़मीन मेंमुझसे रहा ही नहीं गयासोचा जाकर देखूंइस सूरज
 
ranjana
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चेहरे

थक गयी हूँ देखती हूँ रोज़कुछ झूठे से चेहरेलाख कोशिश करके भी दिखतेंवो रूठे से चेहरेचापलूसी का जिसे है ज्ञानउस चेहरे की कीमतजिसको बस है काम से ही कामवो टूटे से चेहरे
 
ranjana
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हर एक बुत के आगे झुकाते रहे सरवो दर हो हमारा, या किसी और का दरशहर कोई भी हो, किसी का भी हो घर क्या जाने खुदा मिल ही जाये कहीं पर
 
ranjana
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तुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीच

तुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीचन जाने कितने ऐसे पल आयेजब भीड़ में होते हुए भीदिखे सिर्फ तुम हीसुना सिर्फ तुमकोतुम्हारी और मेरी व्यस्तताओं के बीचहमें याद रहा की लंच टाइम हो गयातुमने खाना खाया होगा या नहींखाना तुम्हे पसंद आया होगा या नहींतुम्हारी और
 
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सुनते है वो रिश्ता अब टूटने वाला है!!!

फूल को मिटटी में डाल देने से...क्या वो पनप उठता है अपने आप?गीली लकड़ी ने...क्या आग पकड़ी है कभी?बारिश की बूंदों में भीगने का मज़ा...क्या छत के नीचे खड़े होकर लिया जा सकता है?बिना बंधन के रुकी है कोई रस्सी...किसी सिरे से किसी सिरे तक?तब क्यों रिश्ते की आंच को
 
ranjana
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दोस्त था मेरा सबसे प्यारा

उसकी छांव बड़ी अपनी थीस्नेहिल माँ की गोद के जैसी.कितनी कवितायेँ जन्मी थीजब जब उसकी छांव में बैठी.नयी कोपलें जब भी टूटीबड़े प्यार से पाली मैंनेसहलाकर , दुलराकर उनकोपन्नो बीच सजा ली मैंनेजब भी हवा चूमती उसकोशरमा कर झुक जाता आगेजब भी खेली छुआ छुआईउसके आगे
 
ranjana
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जाति धर्म के नाम पे झगडेकल भी थे और आज भी जिंदारोज़ नए पढ़ते हैं किस्सेऔर हो जाते है शर्मिंदा.कुछ लोगों का गोरख धंधासबको किये हुए है अँधाबीच सड़क पर लाकर इनकोपहनाओ फाँसी का फंदामेल जोल के मीठे पानी कोकरते ये खून से गन्दाकब समझेगे एक खुदा की हीऔलाद है हर
 
ranjana
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ममता की ममता

उसका नाम ममतामासूम सी सूरतएक सामाजिक संस्था से जुडीवो करती है सामाजिक सुधार की बातेंखाती है अक्सर बहुत सी कसमेंकरती है बहुत से वादेतारे ज़मीन पर फिल्म देख कर वो बहुत रोईबताया उसने वो पूरी रात न सोयीलेकिन गरीब रिक्शे वालों से वोएक दो रुपयों के लिए बहुत
 
ranjana
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जिंदगी राहों में कैसे मोड़ देती है?हिम्मतों की हर इमारत तोड़ देती है,अपने हो जाते हैं पल भर में पराये से...गैरों से गहरे से रिश्ते जोड़ देती है.
 
ranjana
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आसमान कुछ है उदास सा

आसमान कुछ है उदास साकुछ चुप चुप है आज चांदनीहर्फ़ बहुत धुंधले से दीखतेसुर खो बैठी आज रागिनीकोई बैठा है गुमसुम सारूठा है कुछ है उदास सादूर बहुत है पहुँच से मेरीफिर भी लगता बहुत पास साघुटनों पर अपना सर रखकरबैठा होगा कही अकेलाबाहर होगी भरी दुपहरीमन के अन्दर
 
ranjana
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आज है छुट्टी

आज है छुट्टी, मन करता है बिस्तर में ही पड़े रहोहो रिमोट टीवी का साथ में, एक जगह पर गड़े रहोकोई बढ़िया डिश खाने की, लाकर कोई सर्व करेछुट्टी बीते यूँ सुकून से, उस छुट्टी पर गर्व करेंअलसाये से पड़े रहे, कभी इस करवट कभी उस करवटआँखे बंद, खोल कर बैठे कल्पनाओं के
 
ranjana
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बड़े दिनों से न जानेकितना कुछ मन में छुपा हुआ थाथा कोई तूफ़ानन जाने कैसे अबतक रुका हुआ थाएक बहुत मज़बूत इमारतधीरे धीरे दरक रही थीआज मोम बन पिघल रही थीमन में जो भी कसक रही थीगहराई की सारी सीमाभरते भरते आज भरी थीमै जितनी मासूम थी दिल सेदुनिया उतनी सख्त कड़ी
 
ranjana
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दुःख

मन चिटका और बह निकला दुःखसात समुन्दर पार कहींआशाएं भी टूटी बिखरीआँखे भी भरपूर बहीक्यों मन भारी, क्यों मैं हारीप्रश्न न जाने कितने हैचहरे के पीछे चेहरे हैंसब नकली है जितने हैंबढती जाती मन की पीड़ागहरे होते जाते घावसच हर रोज अपाहिज होताझूठ के लम्बे होते पाँव
 
ranjana
Feb 25 2010 12:20 AM
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कुछ पल बैठो साथ हमारे

कुछ पल बैठो साथ हमारे...कुछ बोलो मुह खोलो तो,हर्फों को तो समझ लिया है...जज्बे को भी तौलो तो.दुनिया भर में घूम रहे हो...फैला करके कितने राग,कुछ पल को तो चैन से बैठो...कुछ पल मेरे हो लो तो.तीखे, कडुवे, खट्टे, खारे...बहुत जायके दुनिया में,आओ कह दो हौले से
 
ranjana
Feb 18 2010 09:04 PM
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धड़कने जब धडकनों से बोलती है

धड़कने जब धडकनों से बोलती है...जाने कितने राज़ दिल के खोलती है,थाम लेती हैं हथेली दूर से ही...बाँहों में बाहें फसा कर डोलती हैं.कितने भी कड़वे हो लम्हे जिंदगी के...तल्खियों में चाशनी सी घोलती हैं,बेपनाह चाहतों की बारिशों को...जब बहाती है कभी न तोलती है.
 
ranjana
Feb 12 2010 05:15 PM
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सूख गयी बारिश की बूंदे ...आँख मेरी क्यों अबतक नम है , हंसी मेरी ढकती है घूँघट ...जब चेहरा दिखलाता ग़म है .ऐसा नहीं मेरे है ज्यादा ...और बाकी सबके ग़म कम हैं ,हाँ हम हंसकर जी लेते हैं ...मान लिया हममे ये दम है .
 
ranjana
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गजलों के मौसम

गजलों के मौसम हमने भी देखे हैख्वाब गुलाबी से हमने भी देखे हैंपर मौसम तो मौसम है बदलेगा हीसावन और पतझड़ हमने भी देखे हैंजब ठंडी ठंडी सी लगती थी गर्मीजब चुभ जाती थी फूलों की भी नरमीचाँद झांक खिड़की से करता बेशर्मीवो रेशम से दिन हमने भी देखे हैंजब पाया क्या
 
ranjana