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बूंदे
लटों में उलझी बूंदेयूँ लगती है जैसेकाली रात नेउलझा लिए हैं खुद मेंढेर सारे सितारेऔर वो गिर रहे हैंटूट टूट करकधों से फिसलतीइधर उधर गुज़रतीगुदगुदी लगाती ये बूंदेबताती है पलों का मोलदो पल ठहरती हैंऔर बिखर जाती हैंपर ज़मीन पररंगत बिखेर जाती हैं
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Jun 14 2010 07:58 PM


Shuffle








