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Ya Husain Ya Shah-E-Karbala

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16 Jun 2010
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ब्लैक होल क्या है?

कभी कभी साइंस की कुछ चीज़ें धर्म से इतना ज्यादा मिलती जुलती हैं की यही लगता है धर्म उन चीज़ों की खोज पहले ही कर चुका है, और उस समय के लोगों की बुद्धि के अनुसार उनका रूपांतरण करके प्रस्तुत कर चुका है. आइये धर्म में देखते हैं ब्लैक
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कैसे हुआ ब्रह्माण्ड का निर्माण?

 क्या ब्रह्माण्ड का निर्माण बिग बैंग द्वारा हुआ? या कोई और प्रक्रिया थी इस बारे में लेख यहाँ पढ़ें 
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कैसी होगी मौत के बाद की जिंदगी?

लेख यहाँ पढ़ें!जीशान जैदी  
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इस्लाम में मजदूर और मजदूरी की अहमियत

मजदूर दिवस ( १ मई ) पर विशेष लेख यहाँ पढ़ें 
May 01 2010 02:02 PM
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें : अंतिम भाग

 ब्रह्माण्ड के शुरूआती एलीमेन्ट्‌स एक दूसरे से एकदम अलग थे। उनमें पारस्परिक सूचना का कोई आदान प्रदान नहीं हो रहा था। शुरूआती अवस्था में अगर वह ज़रा भी मार्ग से भटकते तो वह विचलन आज विशाल परिवर्तन ले आता। उदाहरण के लिए आज कास्मिक
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Feb 15 2010 08:49 PM
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-33)

पृथ्वी सूर्य से एक संतुलित दूरी पर स्थित है। अगर यह सूर्य के पास होती तो ज्वारीय बलों (Tidal Forces) के कारण इसकी घूर्णन गति समाप्त हो जाती। परिणाम यह होता कि ग्रह के एक पृष्ठ पर हमेशा दिन की अवस्था होती जबकि दूसरे पर रात की अवस्था। फलस्वरूप दोनों
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-32)

सृष्टि के मैदान में खुदा की निशानियाँ गणितीय पथ पर विचार करने के पश्चात अब हम सृष्टि के मैदान में अल्लाह के वजूद की निशानियों की तलाश करेंगे। इसके लिए इस तरंह का अध्ययन करना होगा कि क्या सृष्टि का निर्माण, मानव और दूसरे प्राणियों की
Feb 12 2010 03:16 PM
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-31)

गणित का हर नियम, हर समीकरण का एक विस्तारित रूप (Generalization) होता है। यूक्लिड ने प्रारम्भ में जिस ज्यामिति की रचना की वह दो विमाओं (two dimensional) की ज्यामिति थी, जिसमें कोई रचना एक समतल पर की जाती थी। इस ज्यामिति को विस्तार दिया गया और फिर बनी
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-31)

गणित के किसी भी नियम या समीकरण के दर्शन वास्तविक रूप में कहीं न कहीं होते हैं। समान परिमाणों में पाज़िटिव व निगेटिव जुड़ने पर शून्य मिलता है। वास्तविक रूप में अगर किसी एटम में इलेक्ट्रान (जिन पर निगेटिव चार्ज होता है) और प्रोटॉन (जिन पर पाजिटिव
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-30)

उदाहरण के लिए डी ब्राग्ली की कण तरंग सम्बन्धी परिकल्पना प्रारम्भ में जटिल गणितीय समीकरणों द्वारा अस्तित्व में आयी। बाद में प्रायोगिक रूप से पुष्टि हुई कि प्रत्येक कण तरंग की तरंह व्यवहार करता है। ग्रह सम्बन्धी गणनाओं के दौरान प्लूटो ग्रह का
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-29)

इस दलील के बावजूद कुछ लोग ईश्वर को केवल काल्पनिक पात्र मान सकते हैं। इसके पीछे उनकी यह भी दलील हो सकती है कि मानव जीवन की उत्पत्ति पृथ्वी की किसी एक जगंह से हुई हो और फिर धीरे धीरे वह पूरी पृथ्वी पर फैल गये हों। चूंकि उसी एक स्थान पर
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-28)

वास्तव में उसका ज्ञान इतना सम्पूर्ण है कि सृष्टि रचने से पहले वह सृष्टि रचने के बारे में सब कुछ जानता था और सृष्टि में आगे क्या होने वाला है, कौन सी घटनाएं घटेंगी, कौन से प्राणी पैदा होंगे इन सब के बारे में उसे पूर्ण ज्ञान था। किस तरंह उसे भविष्य के बारे
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-27)

खुदा को कोई चीज़ ईजाद करने के लिए किसी चिंतन या कल्पना की ज़रूरत नहीं पड़ती। इससे पहले कि कोई चीज़ वजूद में आये, उसे इसका ज्ञान रहता है। ये बात भी कुछ अक्ल से परे हो जाती है क्योंकि मनुष्य अगर किसी चीज़ का निर्माण करता है तो पहले उसके बारे में सोचता है
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-26)

अल्लाह वह हस्ती है जिसके पास ज्ञान का असीमित भंडार है। उपरोक्त उदाहरणों में हम देख सकते हैं कि गति ज्ञान के व्युत्क्रमानुपाती होती है। जब ज्ञान बढ़ता है तो गति घटती है। चूंकि अल्लाह का ज्ञान अनन्त है इसलिए उसकी गति शून्य हो जायेगी। कुछ लोग यह कह
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-25)

खुदा को सृष्टि की रचनाओं में किसी भी तरंह की हरकत की जरूरत नहीं पड़ी। और न ही वह सृष्टि को चलाने के लिए गति करता है। वह बस इरादा करता है और किसी भी तरंह का कार्य अपने अंजाम को पहुंच जाता है। खुदा का यह गुण मस्तिष्क को विषम प्रतीत होता है क्योंकि छोटे से
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-24)

अल्लाह में अनगिनत गुण हैं। यह कुछ विषम सा कथन प्रतीत होता है। क्योंकि आप गुणों को गिनते जाईए। एक न एक समय आयेगा जब ये गुण समाप्त हो जायेंगे। लेकिन इसको साइंटिफिक तरीके से विचार करने के बाद ही कोई निष्कर्ष निकाला जा सकता है।अनन्त या इनफिनिटी की संकल्पना
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-23)

कुछ लोग यह एतराज़ कर सकते हैं कि दुनिया में बहुत जालिम लोग भी हुए हैं। चंगेज खान जैसे शासकों ने पूरा कत्लेआम मचा दिया था। आधुनिक युग में भी अमेरिका ने एटम बम की मदद से हिरोशिमा और नागासाकी जैसे शहर पूरी तरंह नष्ट कर दिये लेकिन
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-22)

शक्ति अर्थात ऊर्जा का एक रूप ऊष्मा है। तेज गर्मी में ताप की आँच खुले मैदानों से लेकर बन्द घरों में पहुंच जाती है। अगर बहुत ही गर्म मौसम है तो ए0सी0 जैसे उपकरण भी उस गर्मी में असमर्थ हो जाते हैं। अर्थात ऊर्जा के लिए सीमाओं का बंधन गौण होता है।
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-21)

उपरोक्त चिंतन से एक साइंटिफिक प्रश्न का भी उत्तर मिल सकता है। यकीनन आइंस्टीन ने द्रव्यमान-ऊर्जा संरक्षण का सिद्धान्त दिया। यानि यूनिवर्स के कुल द्रव्यमान और ऊर्जा का योग नियत है। लेकिन इस नियतांक का मान क्या है? इस बारे में यह सिद्धान्त मौन
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-20)

अल्लाह हमेशा से है और हमेशा रहेगा। प्रथम दृष्टि में यह कथन कुछ अटपटा लगता है। क्योंकि जब हम अपने आसपास दृष्टि दौड़ाते हैं तो हर चीज नश्वर नजर आती है। और उसकी उत्पत्ति का एक सिरा मिल जाता है। कोई प्राणी कभी न कभी पैदा अवश्य होता है और
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-19)

अल्लाह का कोई रूप या आकार नहीं है। वह निराकार है। वह किसी को दिखाई नहीं देता और न किसी को दिखाई देगा। यह बात गले से नहीं उतरती। क्योंकि कोई भी वस्तु जीवधारी या निर्जीव किसी न किसी रूप, आकार में हमें प्रभावित करता है। जो वस्तुएं नहीं भी दिखाई देतीं
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-18)

अगला तर्कसंगत न प्रतीत होने वाला गुण ये है कि वह अनन्त गुणों का स्वामी है। अक्ल से परे लगने वाली बात इसमें ये है कि गुण हम चाहे जितना गिन लें, कहीं न कहीं ये गिनती खत्म हो जायेगी। न्यायप्रियता, ज्ञान, शक्ति इत्यादि शुमार करते चले जाईए। आखिर में
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-17)

खुदा से सम्बंधित विवादास्पद गुण :विरोधाभासों के स्पष्टीकरण के बाद हम खुदा से सम्बंधित उन गुणों का अध्ययन करते हैं जो विवादास्पद माने जाते हैं। ऐसे गुण जो किसी मनुष्य की अक्ल में नहीं समा पाते और इस वजह से वह यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-16)

अगर हम यूनिवर्स में कहीं भी दृष्टि दौड़ाएं तो निगेटिव टाइम के दर्शन नहीं होते, और हो भी नहीं सकता। क्योंकि हम जिस वातावरण में रह रहे हैं वह टाइम का वातावरण है। जो भी गणनाएं करते हैं, जो भी अवलोकन करते हैं वह टाइम के सापेक्ष होता है। गैलेक्सीज की
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-15)

धर्मग्रंथों में स्पष्ट कथन मिलता है कि उसने सृष्टि में हर वस्तु की रचना की और उसे उसके टाइम के हवाले किया। यानि कोई प्राणी विशेष पैदा होगा लेकिन अपने वक्त पर। तारों का नोवा बनना और फिर सुपरनोवा बनना अपने वक्त पर होता है, जिसके हवाले यह घटना की
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-14)

उपरोक्त एतराज में भी मनुष्य की सीमित सोच का पता चलता है। क्योंकि हम आदी हो गये हैं अपनी बनायी कसौटी पर हर चीज को परखकर देखने के। हमने अपने आसपास देखा और पाया कि हर चीज का एक निगेटिव है। आग है तो साथ में पानी भी है। प्रेम के दर्शन होते हैं तो कहीं
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-13)

यहां एक प्रश्न और उठता है कि कब कोई आत्मा या रूह मनुष्य के रूप में जन्म लेती है और कब किसी अन्य प्राणी के रूप में? तो इसका जवाब ये है कि यह उस आत्मा की क्षमता पर निर्भर करता है कि वह मनुष्य रूप में जन्म लेने के काबिल है या मछली या अन्य किसी कमतर
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-12)

अब एक दूसरा सवाल पैदा होता है कि खुदा ने मनुष्य को दूसरे जानवरों से बुद्धिमान क्यों बनाया। जानवरों में भी कुछ ज्यादा बुद्धिमान होते हैं और कुछ कम। सरसरी तौर पर देखने पर अल्लाह का यह भेदभाव पूर्ण नजरिया समझ में नहीं आता। लेकिन अगर हम अपनी अक्ल की सीमा
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-11)

......इन्हीं कसौटियों के आधार पर हम इस प्रकार के एतराजों के जवाब दे सकते हैं। वास्तव में खुदा ने प्रत्येक बन्दे को कुछ सीमा तक आजाद बनाया है और कुछ सीमा में उसे कैद कर दिया है। किसी व्यक्ति की शक्ल सूरत, उसका अपाहिज होना या पूरी तरह ठीक ठाक
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-10)

खुदा के बारे में कांट्राडिक्शन के स्पष्टीकरण : साफ है कि खुदा के बारे में अध्ययन के समय जो कांट्राडिक्शन हमें दृष्टव्य होते हैं, उसमें भी उपरोक्त घटक जिम्मेदार हैं। यानि सीमित सोच, वैज्ञानिक नियमों की सीमा और वैज्ञानिक उपकरणों की सीमा। और
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-9)

किसी वृत्त के अन्तर्गत अनन्त बिन्दु आते हैं क्योंकि बिन्दु की कोई विमा नहीं होती। यह ठीक उसी तरह की बात है मानो कोई व्यक्ति किसी बर्तन को पानी से भरने के लिए खाली गिलास उसमें डाले स्पष्ट है कि बर्तन कभी नहीं भरेगा। अब यदि यह कहा जाये कि दो असमान साइज के
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-8)

बहुत से ऐसे उदाहरण मिल जायेंगे जिससे उपरोक्त बातें सत्य सिद्ध हो जाती हैं। पृथ्वी तल से कुछ ऊंचाई पर कोई वस्तु गिराने पर वह नीचे की तरफ आती है। लेकिन यह नियम केवल पृथ्वी पर लागू होता है। बाहरी अंतरिक्ष में कोई वस्तु नीचे फेंकने पर वह कभी नीचे नहीं आयेगी।
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-7)

कण्टराडिक्शन क्यों? : इस तरह हम देखते हैं कि तार्किक और प्रायोगिक दृष्टि से पूर्ण मानी जाने वाली साइंस और मैथेमैटिक्स विरोधाभासों  अछूती नहीं है। बहुत से ऐसे चौराहे पड़ते हैं जहां नियम एक दूसरे से टकरा जाते हैं और फिर नयी
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-6)

हालांकि ये बात सभी गतिशील वस्तुओं पर लागू होती है, लेकिन चूंकि इलेक्ट्रान की गति बहुत ज्यादा होती है और पोजीशन मापने की दूरियां बहुत ही छोटी यूनिट में होती हैं, इसलिए अनिश्चितता को अनदेखा नहीं किया जा सकता। तो फिर जब हम इलेक्ट्रान की गति
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Dec 31 2009 04:49 PM
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-5)

साइंस के कण्टरा डिक्शन  : इससे पहले कि हम खुदा के बारे में विरोधाभासों के जवाब ढूंढें, हमें एक और सवाल का जवाब ढूंढना होगा कि क्या वास्तव में साइंस के अन्दर कोई कण्टरा डिक्शन  नहीं है? क्या साइंस का हर सिद्धान्त तार्किक दृष्टि से
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-4)

खुदा के वजूद के कन्टरा डिक्शन  :  बात हो रही थी कन्टरा डिक्शन  की। जब हम खुदा या गॉड के अस्तित्व की बात करते हैं तो बहुत से कन्टरा डिक्शन  पैदा हो जाते हैं। जो खुदा के वजूद को नकारते हुए महसूस होते हैं। और नास्तिकों के ल
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-3)

लेकिन एक बड़ा दायरा ऐसा है जो हर मान्यता को विज्ञान के तर्कों और एक्सपेरीमेन्ट की कसौटी पर परखता है। और उन बातों को पूरी तरह नकार देता है जो उन तर्कों के विरुद्ध होती हैं। एक शब्द होता है  कांट्राडिक्शन  (contradiction)। जिसमें कोई कथन
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अल्लाह का वजूद - साइंस की दलीलें (पार्ट-2)

प्रस्तावना :  आस्तिक और नास्तिक। मानव दर्शन के दो पूरी तरह अलग अलग पहलू हैं। एक खुदा या गॉड पर यकीन रखता है। यह मानता है कि इस दुनिया को, आसमान को, सूरज को, चांद को और झिलमिलाते सितारों को बनाने वाली एक सुपर पावर मौजूद है। वही इनकी रफ्तार क
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Husain Deene Payambar

Awaz : Khursheed AsriKalam : Fakhri Visuals Edited by - Zeashan
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Bakhsha Alam So Shah Ne

Awaz : UnknownKalam : Meesum
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