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नयी प्रविष्टी लिखी
12 Jun 2010
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जीते रहो!!!

हे! सहोदर! तुम वही ना जो रहे उसी उदर में जिसमें कि मै  उसी पदार्थ से पोषित जिससे कि मै,  फिर क्यों नहीं कोमल भावनाएं तुम्हारी जैसे कि मेरी, फिर क्यों कठोर शब्द तेरे क्यों नहीं मेरे, क्यों मैं पल पल आहत तेरे बोलों से
 
वेदिका
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कौन बहार बिखेर गया...!

सूने से मन आंगन में मेरेये कौन रंगोली उकेर गया....पतझर तो था अभी-अभीफिर कौन बहार बिखेर गया...अपना तो नही था, झौंकाशायद माथे हाथ फेर गया....लौट आये वो लम्हा देखूंजो पहले कुछ देर गया ....वेदिका
 
वेदिका
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हे ! भारत भू के धन्य देव ...

भाल भभूत हे! भस्मीभूत हे! शिखर चन्द्र, हें! तपस तंद्र हे! बाम अंग में शैल सुता करुनानिधान, तू योगरताहे! हरे! पितु गणेश बालक हे! दुःख हर्ता तुम जग पालकहे! सिद्धयोग हे! महारथी हे! दानवीर हे! सती-पतिहे! विषपायी हे! अविनाशी वर देते अतुल, खुद वनवासी इतना ही
 
वेदिका
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कोई आया सा है ...

हुयी है दस्तक   दिलो- दिमाग में देख लूँ बाहर    कोई आया सा  है हर पहर   ये साथ कोई चल रहा  कौन है जैसे     मिरा साया सा है छूटने पीछे लगे         
 
वेदिका
Feb 11 2010 05:44 PM
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पल -पल -पल ये जीवन.....

पल -पल -पल ये जीवन कितना , समझौतों से भरा लगे है कभी लगे ये जीवन "दर्शन " कभी एक "मसखरा"  लगे    है  रेता - बेता - अंजर - बंजर, भूखा - प्यासा -अस्थि - पंजर  नदियाँ-नाले -झरने-ताले, थकन अगन जो प्यास बुझा
 
वेदिका
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विदाई के अवसर पर.....

मैया के रोये से नदिया बहत है बाबुल के रोये बेला ताल भैया के रोये मेरी छतिया फटत है भौजी के जियरा कठोर बुंदेलखंड में विवाह में विदाई के अवसर पर गाया जाने वाला मार्मिक लोकगीत के बोल .....
 
वेदिका
Feb 08 2010 12:30 AM
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शर्तें ...

नाज़ नखरे , अगर अखरे तुम चले जाना नहीं रोकेंगे तुमको हम मगर तुम संग ले जाना सभी बातें , सभी यादें कभी न रुख इधर करना वहीं जीना वहीं  मरना  अगर फिर भी लगे न मन कभी जो याद आये तो जो मेरा गम सताये
 
वेदिका
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"मौन "

कोलाहल  में बैठी   मौन ,बस निःशब्द लखे तस्वीर बंद हथेली किसे दिखाए ,जाने कौन लिखे तकदीर " क्या सच में ये मै ही हूँ " ,खुद से पूछ , बहाती नीर कोई पूछता चुप हो जाती ,नहीं   बताती  अपनी पीर कुछ पन्नों को गीत
 
Vedika
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Vedika

कि आये छोड़ सब हम, साथ तुम खड़े क्यों ना गये पीछे नहीं हम, तुम मगर बढ़े      क्यों ना मै तो हूँ साथ   बगल में भी   तुमने देखा था कि  मेरे वास्ते   फिर   जहाँ से लड़े क्यों ना ना बुलाया, ना कुछ
 
Vedika
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वाह वाह कीजिये

चोट जो लगे तो बस एक   आह कीजिये गर पसंद हो तो    वाह   वाह कीजिये हम तो लिखेंगे हमारा शौक ओ पेशा यही आप भी पढ़ने  की मगर    चाह कीजिये पहचान पुरानी, है आज समझने का दिन हम आ
 
Vedika
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धीरेन्द्र

बहुत कम लोग ऐसे होते है जिनके पांव पालने में दिखते है, श्री धीरेन्द्र सिंह  उन लोगों में से एक है | उनकी अभी हाल में आई हुयी  किताब जिसका लोगों को बेसब्री से इन्तेजार था, उसे पढ़  कर लोग उनके बारे में और भी बारीकी से जान सकेगें | छोटे से
 
Vedika
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Vedika

 
Vedika
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स्वाभिमान...!

जाऊं जहाँ जहाँ भीमेरा साथ जाये स्वाभिमानक्या कहाँ किस से कहूँ क्या,ये बताये स्वाभिमानये नहीं की गर्व केवलसंग दया के भाव भी होंकुछ समझ-दारी मिली होऐसे कुछ सुझाव भी होकिन्तु बोल वही बोलूंजिनमे छलके सत्य ज्ञानअगर हम अधिकार चाहेंयाद हों दायित्व भीन्याय,
 
Vedika
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स्वाभिमान...!

जाऊं जहाँ जहाँ भी मेरा साथ जाये स्वाभिमान क्या कहाँ किस से कहूँ क्या, ये बताये स्वाभिमान ये नहीं की गर्व केवल संग दया के भाव भी हों कुछ समझ-दारी मिली हो ऐसे कुछ सुझाव भी हो किन्तु बोल वही बोलूं जिनमे छलके सत्य ज्ञान अगर हम अधिकार चाहें याद हों दायित्व भी
 
Vedika
Nov 20 2009 03:34 PM
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अंतरतम में तुम.....!

अंतरतम में तुम ....!ज्वाला बन के जले लावा बन के गले अंतरतम में तुम.....!कुछ कहा अनकहाहमने तुमने सहा और जो शेष रहा सपन धूसर धुले अंतरतम में तुम.....!हुयी मूक मन वानीजो अब तक न निजानीन हमने हार मानीन तुमने जीत जानीकैसे मिलते गलेअंतरतम में तुम.....!वे मन के
 
Vedika
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Vedika: जाने हमने हाय इसका क्या बिगाड़ा......!

Vedika: जाने हमने हाय इसका क्या बिगाड़ा......!
 
Vedika
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जाने हमने हाय इसका क्या बिगाड़ा......!

बेहिसाब बारिशतिस पर निर्दयी जाड़ाजाने हमने हायइसका क्या बिगाड़ाइस कदर बरसा ये बादलभीग गयी रूह पूरीनिचुड़ गया रोम-रोमउठ गयी है यूँ फरुरीडरते कांपते ही बीतापिछला पूरा ही पखवाड़ादेखना एक दिन हीपूरा हमें डूब जाना हैकुछ नहीं जायेगा संगसब यहीं छूट जाना हैदे रहा
 
Vedika