Ismat Zaidi

Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

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28 May 2010
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दुआ

आज पहली बार एक नज़्म ले कर हाज़िर हुई हूं , तजुर्बा कितना कामयाब है ये आप के तब्सेरों पर मुन्हसिर(निर्भर) होगा ,शुक्रिया दुआ----------------मेरे मालिक ख़यालों को मेरेपाकीज़गी दे दे ,मेरे जज़्बों को शिद्दत दे ,मेरी फ़िकरों को वुस’अत दे,मेरे एह्सास उस के
 
इस्मत ज़ैदी
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..........है भी नहीं भी

ग़ज़ल के चंद अश’आर पेश ए ख़िदमत हैं ,मालूम नहीं आप सब की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे भी या नहीं,आप सब की सलाहों और इस्लाहों का इन्तेज़ार रहेगा ,शुक्रियाग़ज़ल -----------------------गर प्यार न हो तो, ये जहां है भी नहीं भीहोंगे न मकीं गर,तो मकां है भी
 
इस्मत ज़ैदी
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किस की ये पतवार है

एक ग़ज़ल पेशे ख़िदमत है ,आप के तब्सेरे मेरी मेहनत की कामयाबी का यक़ीन दिलाएंगे ,शुक्रियाग़ज़ल -____________हो यक़ीं मोहकम, बहुत दुशवार हैअब भी उस के हाथ में तलवार है,जो किसी के काम ही आए नहींहैफ़ ऐसी ज़िंदगी बेकार है,क़त्ल ओ ग़ारत ,ख़ौफ़ ओ दहशत के
 
इस्मत ज़ैदी
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सैलाब मेरी आँखों में..........

 सैलाब मेरी आँखों में........_____________________________आ गया कैसा ये सैलाब मेरी आँखों मेंसारे मंज़र हुए ग़रक़ाब मेरी आँखों मेंक्यों नहीं अब कोई उम्मीद की शमा’ रौशनक्यों मचलते नही अब ख़्वाब मेरी आँखों मेंमैं ने गर दे भी दिए सारे सवालों के जवाबफिर
 
इस्मत ज़ैदी
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ग़ज़ल

ग़ज़ल-_____________________चला भी जाऊं तो तुम इंतेज़ार मत करनाऔर अपनी आंख कभी अश्कबार मत करनाउलझ न जाए कहीं दोस्त आज़माइश मेंकि ख़्वाहिशें कभी तुम बेशुमार मत करनामैं जानता हूं कि तख़रीब है तेरी आदतहरे हैं खेत इन्हें रेगज़ार मत करनामेरी हलाल की रोज़ी
 
इस्मत ज़ैदी
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Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

              एक आत्मा की फ़रियाद _________________________________ ये कविता उस स्थिति को ध्यान में रख कर लिखी गई जब एक अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट ये तय कर देती है कि आने वाले जीवन को कन्या होने के नाते
 
इस्मत ज़ैदी
Mar 07 2010 09:16 AM
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अन्तर्मंथन

आप सभी सुधिजनों को रंगों के इस पर्व की बहुत बहुत शुभकामनाएं अंतर्मंथन ___________________________क्या सच होलिका दहन हुआ ?क्या क्रोधाग्नि का शमन हुआ ?या सच्चाई का दमन हुआ ?किसका मैला यूं कफ़न हुआ ?पर्वत ,धरती ,जल और गगनकितना सुंदर है मेरा
 
इस्मत ज़ैदी
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Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

"कहाँ खो गईं नन्ही किलकारियां "-___________________________________________________________________(ये ग़ज़ल २६/११ से मुतास्सिर हो कर कही गयी थी ,लेकिन आज फिर पुणे ब्लास्ट ने हमारे ज़ख्मों को ताज़ा कर दिया ) ग़ज़ल------------सरासीमगी सी  समंदर
 
इस्मत ज़ैदी
Feb 22 2010 12:04 AM
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Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

जहाँ आजकल हमारे देश में 'टाइम्स ऑफ़ इण्डिया 'द्वारा चलाई गयी मुहिम '' अमन की आशा '' के चर्चे हैं ,वहीँ आदरणीय ''सतीश सक्सेना जी '' ने भी  उम्मीदों की एक मशाल रौशन  की है ,ये रचना इसी मशाल में शामिल एक नन्ही सी लौ है .अगर किसी एक शख्स के
 
इस्मत ज़ैदी
Feb 05 2010 02:27 PM
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Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

                                          आप सभी को गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें  २६ जनवरी के अवसर पर एक कविता प्रस्तुत है ,यदि
 
इस्मत ज़ैदी
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Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

ग़ज़ल _____________________नगमा जो प्यार का था,मेरे दिल में रह गया दह्शत्गरी का शोर ही महफ़िल में रह गयाइक सिम्त खाई , दूसरी जानिब कुआँ अमीक़हिन्दोस्ताँ तो आज भी मुश्किल में रह गया है सच पे झूठ ,झूठ पे सच की कई परत मैं तो उलझ के बस हक़ो बातिल
 
इस्मत ज़ैदी
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Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

इस ग़ज़ल के साथ हाज़िर ए  ख़िदमत हूँ अगर आप लोगों को पसंद आई तो समझूँगी मेरी मेहनत कामयाब हो गयी ग़ज़ल__________________सुकूँ की ,प्यार की,दोनों जहाँ की बात करें क़वी इरादों की पीरो जवाँ की बात करें उलट दें आज बिसातें सभी सियासत
 
इस्मत ज़ैदी
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Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

ग़ज़ल ____________________ क्या कहूं कि क्या  बयां पहले हुआ कुछ यहाँ और कुछ वहां पहले हुआ मैं ने यकजहती की इक  कोशिश ही की मेरा साथी बदगुमां पहले हुआ थी सई जज़्बात पर क़ाबू रहे पर वो आँखों से रवां पहले हुआ दुश्मनों से क्या शिकायत हो अगर दोस्
 
इस्मत ज़ैदी
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Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

एक कविता वीरों के नाम ______________________________ आज संसद में बड़ी शान से जो बैठे हैं लेके चेहरों पे हंसी और चमक बैठे हैं आज वे भूल गए जबकि हुआ था हमला आज वे भूल गए कैसे बची जाँ उनकी आज वे भूल गए घुस गए होते उस दिन लेके हथियारों का अंबार अगर आतंकी
 
इस्मत ज़ैदी
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ghazal

ग़ज़ल -___________________________ दिल में बुग्ज़ छिपा रक्खा है  मुंह पर नामे   खुदा रक्खा  है  कोई ना समझा उस ने दिल में  कितना दर्द छिपा रक्खा है  मद्दे मुक़ाबिल इस आंधी के  रौशन एक दिया रक्खा है  भाईचारा ख
 
इस्मत ज़ैदी
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Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

एक ग़ज़ल पेशे ख़िदमत है ..................... ग़ज़ल -___________________ आज का तिफ़्ल ओ जवाँ ही और है ख्वाहिशों   की कहकशां ही और है उन लबों पर मुस्कराहट है तो क्या दिल में इक दर्दे नेहाँ ही और है बेच कर आया हूँ मैं अपना ज़मीर आज एहसासे ज़ियाँ ही और ह
 
इस्मत ज़ैदी
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ek ghazal

एक ग़ज़ल हाज़िरे ख़िदमत है | 'ग़ज़ल' मुनफ़रिद है वो ज़माने को बताया उसने क्या है हुब्बुलवतनी कर के दिखाया उसने वो ख़ुशी मिल गयी जिस का मुतमन्नी था दिल चंद रोते हुए बच्चों को हंसाया उसने दर्स ओ तदरीस ज़रूरी है तरक्क़ी के लिए जा के मजदूर के बच्चों को पढ़ाया
 
इस्मत ज़ैदी
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shraddhanjali

ये कविता उन वीरों को समर्पित जिन्होंने आतंकवाद के विरुद्ध लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दे   दी                श्रद्धांजलि दहशतगर्दी ख़त्म करूंगा , ऐसा था उसका सपना , बेरहमों
 
इस्मत ज़ैदी
Dec 05 2009 11:23 PM
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कविता

महिला आरक्षण _____________________________ वह नहीं चाहती आरक्षण वह नहीं चाहती संरक्षण इस दौर की नारी सबला है ये मत सोचो वह अबला है नारी में अक्षुण शक्ति है बुद्धि है उसमें युक्ति है वह राजनीति हो ,शिक्षा हो या धर्म के क्षेत्र की दीक्षा हो विज्ञानं हो
 
इस्मत ज़ैदी
Dec 05 2009 11:23 PM
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Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

वंदे मातरम _______________ धरती माँ ,तू सब की माँ है तूने ममता सब पे लुटाई कृपा दृष्टि की सबपे बराबर सब को इक आँचल में समेटा तूने न कोई अन्तर जाना इक तेरा भी जन्मदाता है नीली छतरी वाला ऊपर तेरे ये संस्कार भी शायद उसी इश्वर के कारण हैं वो भी करे न अन्
 
इस्मत ज़ैदी
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Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

एक डर ' कविता के बारे में मैं कुछ कहना या भूमिका बांधना नहीं चाहती आप सभी लोग ख़ुद ही समझदार हैं ,धन्यवाद
 
इस्मत ज़ैदी
Dec 05 2009 11:23 PM
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एक डर

कल तक थे जो भाई साथ करने लगे वे दो दो हाथ अम्न्पसंदी मानवता आज बन गई कायरता मारपीट है आगज़नी है राज्य राज्य के बीच ठनी है भाई भाई के रक्त का प्यासा छाने लगा कैसा ये कुहासा यूँ देखो कोई बात नहीं है बिना बात ही आग लगी है नेताओं को वोट की लालच सम्मुख आन
 
इस्मत ज़ैदी
Dec 05 2009 11:23 PM
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Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

अक्सर यहाँ वहां होने वाले दंगों के बाद लगी आग ने ये लिखने पर मजबूर किया मजबूरी इसलिए क्योंकि ऐसी ग़ज़लें खुशी में नहीं लिखी जातीं । आग ही आग है हर सिम्त बुझाओ लोगो जल रहे बस्ती में इन्सान बचाओ लोगो दुश्मनी खत्म हो और दोस्ती का हाथ बढे हो सके गर तो ये
 
इस्मत ज़ैदी
Dec 05 2009 11:23 PM
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dharti ki pukar

मैं , पावन धरती का बेटा, इसके आँचल में मैं खेला , अन्नपूर्ण है ये मेरी, नर्म बिछौना इस की गोदी. बापू को देखा करता था, भोर में उठ कर खेत को जाना, अम्मां k a खाना ले जाना , साथ बैठ कर भोजन खाना . गाँव की ऐसी स्वच्छ हवाएं , कुँए का पानी घिरी घटाएं, चारो
 
इस्मत ज़ैदी
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Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

दीपावली की शुभकामनाएं इन पंक्तियों के साथ मन में ज्ञान का दीप जलाकर , अंतर्मन से प्रश्न करें . हम ने कैसे कर्म किए हैं ? गर्व करें या शर्म करें? अंतर्मन ही न्यायधीश है, वो तो सच्ची बात कहेगा. इस दीवाली न्यायधीश की , बात सुनें और कर्म करें .
 
इस्मत ज़ैदी
Dec 05 2009 11:23 PM
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deepavali ki shubhkamnayen

दीपावली के नन्हे दिए सीख देते हैं तुम ख़ुद जलो पर आंच किसी और पर न आए सद्भावना के दीप में बाती h ओ प्यार की आतंकवाद जिन के उजालों से हार जाए
 
इस्मत ज़ैदी
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ग़ज़ल

टीवी पर दिखाई गई बाढ़ की तस्वीरों ने लिखवाई ये ग़ज़ल अब के कुछ ऐसे यहाँ टूट के बरसा पानी ले गया साथ में बस्ती भी ये बहता पानी मेरी आंखों के हर इक ख्वाब ने दम तोड़ दिया उन की ताबीर को दो लम्हा न ठहरा पानी चंद बूँदें भी नहीं प्यास बुझाने के लिए यूँ तो ताह
 
इस्मत ज़ैदी
Dec 05 2009 11:23 PM
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ghazal

ग़ज़ल ________________________ आजकल मुल्क में बिकते तो हैं अख़बार बहुत कुछ ख़ुशी देते हैं कुछ देते हैं आज़ार बहुत ये अलग बात है इक फूल न खिल पाया वहां यूँ तो उगने लगे सहरा में भी अश्जार बहुत उम्र भर देता रहा कुछ न किसी से माँगा इस ग़रीबी में भी वो शख्स
 
इस्मत ज़ैदी
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parivartan

mere naam ka talaffuz shefa hai ,aur main kajgaon(jaunpur) ki rahne wali hoon ,pahle jo ghalti ho gayi use mainne sudhaar liya hai.shafa jaunpuri aur shefa kajgaonvi ek hi hain.
 
इस्मत ज़ैदी
Nov 11 2009 09:27 PM