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व्यंग्यलोक

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09 Jun 2010
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नुक्कड़ नाटक दास्तान-ए-गैसकांड का एंडरसन प्रसंग

जादूगर    -    लड़के! सात समुन्दर पार जाएगा ?जमूरा    -    पासपोर्ट नहीं है!जादूगर    -    फिकर नहीं!जमूरा    -    तो ठीक है उस्ताद,
 
प्रमोद ताम्बट
टैग: bhopal-genocide
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हरिभूमि में व्यंग्य - लेखन क्षमता का अदृभुत कमाल

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं लेकिन विकट प्रतिभाएँ गिनी-चुनी हैं। एक विकट प्रतिभा का अभी कुछ ही समय पहले आविर्भाव हुआ है। आई.पी.एल,. जिसका फुल-फार्म इंडियन पिसाई लीग, इंडियन पैसा लीग, इंडियन पापी लीग आदि-आदि किया जाकर अब भी
 
प्रमोद ताम्बट
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मालामाल करने की चिरौरियाँ

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//    वैसे तो हमारे खानदान में कभी किसी को कोई ईनाम-इकराम नहीं मिला, किसी की कोई लॉटरी नहीं लगी, किसी ने विरसे में हमारे लिए धनदौलत की कोई पोटली नहीं छोड़ी, मगर जबसे मैंने पत्राचार और ब्लॉगिंग के लिए इन्टरनेट का
 
प्रमोद ताम्बट
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ब्लॉगिंग में ठलुआते हुए एक साल

//प्रमोद ताम्बट// ब्लॉगिंग में ठलुआते हुए 15 मई को हमें एक साल पूरा हो गया। यू तो इसमें घुसने की जद्दोजहद हम 15 मई 2009 से भी पहले कई महीनों से कर रहे थे लेकिन कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं में इसके चर्चे सुन-सुनकर दिमाग पर एक
 
प्रमोद ताम्बट
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व्यंग्य-संतई का संभावनापूर्ण रास्ता

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//     इन दिनों झूर के संत बनने का मन कर रहा है। क्या मजे है संतों के! बड़े-बड़े वातानुकूलित आश्रम, बड़ी-बड़ी लक्झरी गाड़ियाँ, धन-दौलत, सुख-समृद्धि, आनंद-मंगल सभी कुछ! सबसे बड़ी बात दर्जनों भक्तिनों का प्रेम-भक्तिभाव,
 
प्रमोद ताम्बट
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माया के नोटों की माला की माया

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट // बहन मायावती ने नोटों की माला क्या पहनी भाइयों के पेट में दर्द होने लगा। इस देश में यहीं दिक्कत है, बहनें कुछ करें तो भाइयों को हज़म ही नहीं होता। तैतीस प्रतिशत् आरक्षण के मुद्दे पर हम देश भर में भाइयों का हड़बोंग देख ही चुके
 
प्रमोद ताम्बट
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क्रिकेट के भगवान का आविर्भाव

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//    बहुत सालों से हम भगवान की तलाश कर रहे थे, जो अब जाकर पूरी हो पाई है।  पिछले दिनों भगवान ने ग्वालियर के रूपसिंह स्टेडियम में डबल सेंचूरी ठोक कर अपने मौजूद होने का प्रमाण दे दिया।  सारा देश अपने भगवान
 
प्रमोद ताम्बट
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1 अप्रैल 2010, 0000 आवर्स से महँगाई खत्म

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//    31 मार्च 2010 समय 2400 आवर्स, कमाल ही हो गया। सरकार ने महँगाई बढ़ाने वाले तमाम बदमाशों को बुलाकर सीधे-सीधे कह दिया कि देखो अगर तुमने फौरन से पेश्तर हमारा हुक्म मानते हुए महँगाई खत्म नहीं की तो हर एक को चुन-चुनकर
 
प्रमोद ताम्बट
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अपहरण नारी मुक्ति आन्दोलन का

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट//अन्तराष्ट्रीय नारी मुक्ति आन्दोलन का प्रतीक-अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस आठ मार्च फिर आ गया। मेहनतकश, कामकाज़ी महिलाओं के इस ऐतिहासिक नारी मुक्ति आन्दोलन का बहुत पहले ही उन विदूषी नारियों द्वारा अपहरण किया जा चुका है जिनको खुद कभी कोई
 
प्रमोद ताम्बट
Mar 08 2010 05:20 PM
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टुन्न होकर गरियाने का पर्व

व्यंग्य-प्रमोद ताम्बटलो फिर चन्दा खाने का त्यौहार आ गया।जी हाँ, होली को हमने हमेशा सामूहिक रूप से चन्दा खाने के त्यौहार के रूप में ही देखा है। बचपन में मोहल्ले के सारे चन्दा खाऊ इकट्ठा होकर घर-घर जाकर खाने लायक चन्दा इकट्ठा करते और फिर बाकायदा बजट बनाकर
 
प्रमोद ताम्बट
Feb 28 2010 08:06 AM
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उल्लू के पट्ठों बी.टी. बैगन खाते हो या नहीं ?

व्यंग्य-प्रमोद ताम्बटमास्टर जी बेहद गुस्से में थे। देश भर में घूम-घूमकर सबको डाँटते फिर रहे थे- तुम्हारे बाप ने कभी खाया है बैगन! खाया हो तो जानो कि बी.टी. बैगन का स्वाद क्या होता है। पागल हो तुम सब के सब, दिमाग का इलाज कराओ अपने। मेरी! मेरी नीयत पर शक
 
प्रमोद ताम्बट
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मुम्बई का डॉन कौन

व्यंग्य-प्रमोद ताम्बटच्याइला! अपून एक-एक के कान के नीचे बजाएगा, कोई भंकस नहीं मँगता है। हिन्दी साइडर लोग को वार्निंग करके बोलता है कि इधर हँसने का तो मराठी में, रोने का तो मराठी में, गाना गाने का, खाना खाने का, सब मराठी में। कोई भी महाराष्ट्र के बाहेर का
 
प्रमोद ताम्बट
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क्रिकेट की मण्डी में कौन आएगा बिकने।

व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट अब जाकर मेरे सामने सब्ज़ियों-भाजियों का दयनीय पहलू उद्घाटित हुआ है। सब्ज़ी मण्डी की खुली नीलामबोली में दलाल आढ़तियों द्वारा जब कभी भटे-टमाटरों की बोली नहीं लगाई जाती तो उनके नाज़ुक दिलों पर क्या गुजरती होगी, मुझे अब समझ में आया है,
 
प्रमोद ताम्बट
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व्यंग्यलोक

व्यंग्य-प्रमोद ताम्बटएक बार मेरे मोबाइल का नेटवर्क किन्हीं दूसरे मोबाइलों के नेटवर्क से गुथ गया। जो चर्चा सुनाई दी वह हुबहू पेश है:-‘‘ऐ जी, सुनो जी, आज मेरी भी खिच गई !’’‘‘तुमसे कितनी बार कहा है कि ऊँची हिल की सैंडल मत पहना करो, सुनती ही नहीं हो!’’‘‘ऊँची
 
प्रमोद ताम्बट
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यह साम्राज्यवादी थपथपाहट

अभिव्यक्ति के 11 जनवरी के अंक में पढ़िए यह साम्राज्यवादी थपथपाहटव्यंग्य-प्रमोद ताम्बटअमरीकी राष्ट्रपति ओबामा ने हमारे प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को अपने परिवार का सदस्य बताया है। उनकी पत्नी ‘मिशेल’ और बच्चे एक ‘सरदारजी’ को अपने बीच में पाकर कैसा
 
प्रमोद ताम्बट
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उस सज्जन पुरुष को लंपट और औरतबाज मानने के लिए तैयार नहीं है चाहे कितनी भी "बिना बाप की औलादें" आकर उसे अपना नाज़ायज़ बाप घोषित करें।

// व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट //चाहे कोई हथेली पर अंगार रखकर कहे या पूरा का पूरा अग्नि में खड़ा होकर मुनादी करे कि एक वयोवृद्ध महामहीम आदमी ने राजभवन में अय्याषी कांड रचाकर राजभवन की मर्यादा की वाट लगा दी है, तब भी हम यह मानने के लिए तैयार नहीं है। क्या बात कर
 
प्रमोद ताम्बट
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रविवारीय नईदुनिया में व्यंग्य- पंखों की नेमत और उड़ने की कला

व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट// कुछ कीडे़ होते हैं, उड़ने की कला का सही इस्तेमाल ही नहीं जानते। यूँ उड़ते हैं मानों आँख पर पट्टी बाँध रखी हो। उड़ते हैं, यहाँ टकराते हैं, उड़ते हैं, वहाँ टकराते हैं। इस टकराया-टकराई में मुमकिन है अपना सिर या कि हाथ-पैर भी तुड़
 
प्रमोद ताम्बट
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आओ हम भी करें जलवायु परिवर्तन पर चिंता

व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट मालदीव वालों ने समुद्र की गहराई में और नेपाल वालों ने एवरेस्ट की चोटी पर बैठकर जलवायु परिवर्तन के बारे में सोच - विचार कर लिया , तो हम क्यों पीछे रहने वाले थे। देश का साम्प्रदायिक तापमान बढ़ाने में माहिर गुजरात के ‘ मुख्यमंत्री
 
प्रमोद ताम्बट
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आओ पब्लिक को सभ्य बनाने में जुट जाएँ

प्रमोद ताम्बट सुना हैं कि मजदूर-किसानों के साम्यवादी मुल्क चीन ने अपने आप को असभ्य दिखने से बचाने के लिए अपने नागरिकों के पाजामा पहनकर बाहर निकलने पर भृकुटियाँ वक्र कर लीं हैं। वे नहीं चाहते कि वहाँ होने वाले वर्ल्ड एक्सपों 2010 के दौरान चीनी जन सार्
 
प्रमोद ताम्बट
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कविता - हमारा सोचना चन्द लमहों में फिज़ूल हो गया - प्रमोद ताम्बट

सोचा था, रासायनिक युद्ध का यह परीक्षण उन्हें बहुत महंगा पडे़गा भोपाल, उठ खड़ा होगा और लडे़गा हमारा सोचना चन्द लमहों में फिजूल हो गया जब सारा शहर मुआवजा और अन्तरिम राहत में खो गया। सोचा था, मेहनतकशों के साथ साम्राज्यवाद का यह षड़यंत्र उन्हें बहुत महंगा
 
प्रमोद ताम्बट
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कविता - इस शहर का नाम भोपाल है....

इस शहर का नाम भोपाल है.... प्रमोद ताम्बट   भोपाल है भोपाल है इस शहर का नाम भोपाल है। सोई पड़ी थी नींद में गहरी दुनिया सारी क़ातिल गैस ने भोली-भाली जनता मारी, जनता मारी, जनता मारी किसने बिछाया जाल रे, भोपाल है भोपाल है इस शहर का नाम भोपाल है। इस भो
 
प्रमोद ताम्बट
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डेंगू परिवार जाली के उस पार

व्यंग्य - प्रमोद ताम्बट दूसरे प्रहर में अचानक मेरी नींद किसी के पुकारने की आवाज से खुली तो देखा कि खिड़की की मच्छर जाली पर एक मच्छर परिवार बदहवास सा मुझे पुकार रहा है-ताम्बट साहब, ओ ताम्बट साहब ! मैंने झल्लाते हुए पूछा - क्या है ! क्यों इतनी रात को नी
 
प्रमोद ताम्बट
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लोकतंत्र की बहती गंगा में लगा लो डुबकी

प्रमोद ताम्बट गुज़रा हुआ ज़माना होता तो आज़ादी आंदोलन की नैतिकता के खुमार में डूबी हुई राष्ट्रभक्त नेताओं की राष्ट्रभक्त पत्नियाँ मधु कोड़ा को जी भर कोसतीं, थू-थू करतीं, भर्त्सना-आलोचना और जो कुछ-कुछ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अन्तर्गत किया जा सकता था क
 
प्रमोद ताम्बट
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मीठे-मीठे लोगों की कड़वी दास्तान

व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट इन दिनों लोग बेहिसाब मीठे होने लग पड़े है। पैदाइश से ही गपा-गप मीठा खाना भारतीयों की वह छिछोरी आदत होती है, जिसे छोड़ने के लिए कहे जाने पर वे आगबबूला होकर किसी के भी प्राण ले सकते हैं। बात-बात में मिठाई खाने का बहाना ढूँढ निकालना
 
प्रमोद ताम्बट
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व्यंग्य- आओ पब्लिक को सभ्य बनाने में जुट जाएँ - प्रमोद ताम्बट

सुना हैं कि मजदूर-किसानों के साम्यवादी मुल्क चीन ने अपने आप को असभ्य दिखने से बचाने के लिए अपने नागरिकों के पाजामा पहनकर बाहर निकलने पर भृकुटियाँ वक्र कर लीं हैं। वे नहीं चाहते कि वहाँ होने वाले वर्ल्ड एक्सपों 2010 के दौरान चीनी जन सार्वजनिक जगहों पर
 
प्रमोद ताम्बट
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व्यंग्य

कृपया www.vyangya.blog.co.in पर मेरा ब्लॉग अवश्य देखें और मेरी व्यंग्य रचनाओं का आनंद लें। आलोचना/समालोचना एवं सुझाव सादर आमंत्रित हैं। प्रमोद ताम्बट 8A/15 नार्थ टी.टी.नगर भोपाल-462003 tambatin@gmail.com tambatin@yahoo.co.in
 
प्रमोद ताम्बट