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16 May 2010
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मैत्री पर एक टीप और विवाद जो नहीं था

वह कोई विवाद नहीं था. दो मित्रों पर सखा-भाव से की गईं टिप्पणियां थीं . वह भी उनके गुणों को पर्याप्त मान देते हुए. टिप्पणियां भी उन मित्रों पर जो न केवल पिछले कई वर्षों से ब्लॉग पर एक-दूसरे के लिखे को समुचित मान-सम्मान देते रहे वरन
 
chaupatswami
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यह किसकी तस्वीर है ?

यहां एक जाने-माने व्यक्तित्व की तस्वीर दी जा रही है । कृपया बताएं यह किसकी तस्वीर है :   परिचय के लिए प्रतीक्षा करें ।  
 
chaupatswami
Dec 29 2009 11:54 AM
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साहित्यानुरागी

चौपटस्वामी की चौपट कविता साहित्यानुरागी बाबा छाप या एक-सौ बीस डालकर देसी पत्ता चुभलाते-चबाते हुए – कचर-कचर पीक इतै-उतै थूकते बगराते हुए – पचर-पचर चेलों की जमात से लगातार बोलते-बतियाते हुए – कचर-पचर वे सुन रहे हैं कवि की कविता अंगुली
 
chaupatswami
Dec 29 2009 11:54 AM
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जोकर

निलय उपाध्याय की एक कविता जोकर सबसे पहले किसे जलील करते हैं जोकर ? खुद को । उसके बाद किसे जलील करते हैं ? समाजियों और नर्तकों को । और उसके बाद ? उसके बाद बहुत आक्रामक हो जाती है जोकर मुद्रा वे हंसते हुए उतार लेते हैं देवताओं के कपड़े । जो जानते हैं अश
 
chaupatswami
Dec 29 2009 11:54 AM
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तीन कुत्ते

तीन कुत्ते धूप खाते हुए बातें करते जाते थे । पहले कुत्ते ने मानो स्वप्न देखते हुए कहा, “वास्तव में यह बड़े आनन्द की बात है कि हम इस ‘श्वानयुग’ में पैदा हुए हैं। भला, सोचो तो सही,कितनी सहूलियत से हम लोग जल,थल और आकाश की यात्रा करते है
 
chaupatswami
Dec 29 2009 11:54 AM
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भविष्य के परिवार बकलम टॉफ़लर – 3

भविष्य के समाचार पत्रों में युवा विवाहित युगलों को संबोधित ऐसे विज्ञापन देखने को मिलेंगे : ‘ मातृत्व और पितृत्व के बोझ से क्यों दबें ? हमें अपने शिशु को उत्तरदायी और सफल वयस्क के रूप में बड़ा करने का अवसर दें । प्रथम श्रेणी के व्यावसायिक-परिवार
 
chaupatswami
Dec 29 2009 11:54 AM
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आपोन काजे अचोल होले चोलबे ना, भाई चोलबे ना …

यह एक स्वतःस्फूर्त महारैली थी . और तदुपरांत एक ऐतिहासिक जनसमावेश . कोलकाता की भाषा में कहें तो ‘महामिछिल‘ . यूं तो कोलकाता को ‘मिछिल‘ के — जुलूसों के — शहर के रूप में जाना जाता है . और सबके लिए अपना ‘मिछिल
 
chaupatswami
Dec 29 2009 11:54 AM
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कवि की आंखें

कवि की बेधक आंखें सात परदों के भीतर का सच देख सकती हैं . कवि की जुबान पर बसती है सच्चाई . कवि के भीतर झंकृत होता है जन-गण का मन . झलकता है लोक का आलोक और उसके दुख का धूसर रंग . उसकी वाणी कहती है धरती की पीड़ा,बेजुबानों के दुख – गूंगी हो चुकी [..
 
chaupatswami
Dec 29 2009 11:54 AM
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भविष्य के परिवार बकलम टॉफ़लर – 2

तीव्र सामाजिक परिवर्तन तथा वैज्ञानिक क्रांति को डांवांडोल करनेवाला सुपर-इण्डस्ट्रियल व्यक्ति परिवार के नए रूपों को अपनाने पर विचार करेगा तथा विविधरंगी पारिवारिक व्यवस्थाओं को आजमाएगा । इसका श्रीगणेश वे वर्तमान व्यवस्था से छेड़छाड़ द्वारा करेंगे। …
 
chaupatswami
Dec 29 2009 11:54 AM
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भविष्य के परिवार बकलम टॉफ़लर – 1

नवीनता का ज्वार अपने समूचे वेग से विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों से कारखानों और कार्यालयों तक, बाजार और जन-संचार माध्यमों से हमारे सामाजिक सम्बंधों तक, समुदाय से घरों तक आ पहुंचा है । हमारी निजी जिन्दगी में अपनी गहरी पैठ बनाते हुए यह परिवार नामक
 
chaupatswami
Dec 29 2009 11:54 AM
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दो सभ्यताओं का दुलारा बेटा

वे एक सांस्कृतिक प्रकाश-स्तम्भ थे……जिन्होंने अरबी साहित्य को विश्व मानचित्र पर प्रतिष्ठित किया . प्रबोधन और सहिष्णुता के मूल्य को अपने लेखन के माध्यम से रूपायित किया . नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले अरबी लेखक नज़ीब महफ़ूज़ मिस्र(इजिप्ट) की रा
 
chaupatswami
Dec 29 2009 11:54 AM
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हाथ-रिक्शा के लिए एक विदागीत

कोलकाता से हाथ-रिक्शा हटाने की अधिसूचना — कोलकाता हैकनी कैरिज बिल — जारी हो गई है . वे दौडते,घंटी बजाते रिक्शेवाले अब इतिहास की वस्तु हो जाएंगे . इतिहास में रुचि रखने वाले लोग बताते हैं
 
chaupatswami