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हमारी आवाज़

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11 Jun 2010
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साहित्य की एक सरल भावुक समझ

प्रार्थना एक पवित्र अपेक्षा होती है.एक ऐसी निश्छल कामना जो उपजती तो अपनी असमर्थता से है लेकिन बहुत ताक़तवर होती है.जब भी बुराई हारी है वह वास्तव में प्रार्थना की जीत थी.मैं जब भी यह श्लोक गुनगुनाता हूँ-सर्वे भवन्तु सुखिन:/सर्वे सन्तु निरामया:/सर्वे
 
शशिभूषण
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विमलेंदु की कविता

विमलेंदु की कविताएँ मैंने पहली बार वसुधा में पढ़ी.तब से इनकी कविताएँ मुझे पसंद हैं.कुछ तो मुझे याद सी हो गई हैं.कविता में विमलेंदु का अपना निजी टोन है बिल्कुल उनकी सुंदर आवाज़ जैसा ही जो तुरंत आकर्षित कर लेता है.सहज किंतु गाढ़ी भाषा.संवेदनशील कहन और अपने
 
शशिभूषण
Jun 06 2010 08:37 AM
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अंतिम इच्छा

मैं चाहती हूँमरने के बाद मुझे दफ़ना दिया जाएमेरी कब्र बहुत गहरी होमैं उस जगह रहूँजो धरती अपनी बेटियों के लिए बचाकर रखती हैवहाँ जरूर बहुत ठंडक होगीमैं कल्पना करती हूँमेरी कब्र की पोली मिट्टी में बरगद जैसा कोई पेड़ उगेउसकी जडें मेरी छाती से होती हुई पाताल
 
शशिभूषण
May 16 2010 10:46 AM
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आज भी शिक्षा से ही उम्मीद है....

शिक्षा पर लोंगो की चिंताएँ अब केवल आयोजनी अवसरों पर ही सुनने में आती हैं.शिक्षा को लेकर कोई आंदोलन इतिहास की बात हो गईं.छात्र नेतृत्व भ्रष्ट राजनीतिज्ञों की ऐशगाह बना हुआ है.मुझे कहने में लिहाज़ नहीं कि भारतीय शिक्षा मर चुकी है.स्कूली शिक्षा हो या उच्च
 
शशिभूषण
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घोषणा पत्र

यह लेख अपनी पहली अवस्था में मोहल्ला लाइव में प्रकाशित हो चुका है.इतने दिनों में इसमें थोड़ा जोड़ा-घटाया है सो अपने यहाँ से भी साझा कर रहा हूँ-ब्लॉगरमुझे एम.ए.किए सात साल,शोध करते तीन साल और छोटी-मोटी नौकरी करते आठ साल हो गए.मैंने सब तरह के विचारों को
 
शशिभूषण
May 08 2010 07:20 AM
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पीपरताल

एक गाँव के तालाब की मेड़ पर घना,ऊँचा पीपल था.उसे पीपल का पेड़ इसलिए नहीं कह रहा हूँ कि पीपल पेड़ के अलावा भी बहुत कुछ होता है.यह मुझे किताबों ने नहीं पुरखों की चली आती हुई बातों ने सीख लेने को मजबूर किया..दादी कहतीं थीं ईश्वर को भी साँस लेने की ज़रूरत
 
शशिभूषण
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केवल मुझसे क्रांति नहीं होगी

मेरे मन ने मुझसे पूछा-इस देश में हर असफल युवा लगभग क्रांतिकारी है फिर भी क्रांति क्यों नहीं होती?मैने कहा-जैसे हर नागरिक क़रीब क़रीब धार्मिक है फिर भी रामराज्य नहीं आता.जैसे हर तीसरी दवाई नकली है फिर भी अस्पताल शमशान नहीं हो जाते.जैसे मुर्गों की जात खतम
 
शशिभूषण
Apr 24 2010 07:43 PM
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अनुश्री घोष की डायरी

यह डायरी अनुश्री घोष ने ग्यारहवीं में हुए असाइनमेंट के लिए लिखी थी.मुझे इसमें रचनात्मकता दिखी तो रख लिया था.आप इसमें परीक्षा,घर,बंधुत्व और स्कूल को बड़ी निर्दोष,ईमानदार नज़र से देख पाएँगे.अनुश्री आजकल बारहवीं में पढ़ती हैं.बांग्ला मातृभाषा है.प्राचार्य
 
शशिभूषण
टैग: बचपन
Apr 20 2010 11:12 PM
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स्कूल तो पढ़ने के लिए होता है

कल मैं आठवीं कक्षा में अरेंजमेंट के तहत पढ़ाने गया तो आपस में बहस कर रहे बच्चों ने घेर लिया.सर,एक डाउट है.पूछो.सर,प्रार्थना किस धर्म की सबसे अच्छी है?इस सवाल का सीधा जवाब देने की मेरी हिम्मत नहीं हुई.मैंने खुद को सम्हालते हुए सबको शांत करके
 
शशिभूषण
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किसकी आँख का पानी मर जाने से हरे भरे जंगलों में इंसानों की लाशें गिर रहीं हैं?

दंतेवाड़ा में 76 जवानों के मारे जाने का मुझे भी बहुत दुख है.इन्हें शहीद कहने में एतराज़ जतानेवालों से मुझे घोर असहमति है.लेकिन जो बिना किसी सुविधा,तनख्वाह के लगभग लांक्षित कमज़ोर लोग इसलिए इतने जवानों को मार डालते हैं कि अगर ऐसा नहीं किया तो खुद मारे
 
शशिभूषण
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मैं बिल्कुल आपके जैसा ही हूँ

एकदम शुरुआत मेंजब बचपन सपनों को आसान बनाता हैमैं महान आदमी बनना चाहता थाजिसके पीछे-पीछे सब चल न सकेंतो कम से कम अच्छा ज़रूर कहेंयह जानने के बाद कि कोशिश करके महान नहीं हुआ जाताइतिहास में भले लोंगों का यह हश्र देखकर किलोग अच्छा कहकर अपनी चाल चलते रहते
 
शशिभूषण
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सेब का लोहा:गीत चतुर्वेदी

गीत चतुर्वेदी की यह कविता मुझे प्रिय है.इससे एक याद भी जुड़ी हुई है.जिन दिनों मैं इंदौर में था एक दिन कथाकार सत्यनारायण पटेल ने कहा कि मैं गीत से मिलने आईआईएम जा रहा हूँ चलना हो तो चलो.मैंने कहा कि आप मुझे ले चलें यह बड़ी खुशी की बात होगी,चलिए.हम बाईक से
 
शशिभूषण
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शंभु गुप्त की कविता:उदाहरण

अच्छे कवि के लिए आलोचकीय विवेक संपन्न होना जितना आवश्यक है कवि का आलोचक हो जाना स्वयं के कवि-कर्म के लिए उतना ही बाधक है.ऐसा हम हिंदी के उन चोटी के आलोचकों को देखते हुए कह सकते हैं जो अपने शुरुआती दौर में कवि भी रहे.पर धीरे-धीरे उनका कविता लिखना छूट
 
शशिभूषण
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सपने की याद

यह कविता मैंने अपनी उदासी,अकेलेपन और बेचैनी में कई कई बार लिखी.अनेक साथियों से शेयर किया.फिर भी इसे सार्वजनिक करने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी.डर था कहीं गलत न समझ लिया जाऊँ.इससे पहले मुझे कविता लिखकर खुशी मिलती रही है.सर्जना का सुख.पहली बार यह कविता
 
शशिभूषण
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मैं मलयालम हूँ

मेरे घर से स्कूल तक का सफ़र काफ़ी छोटा है.कुल तीन मिनट का पैदल रास्ता.इस बीच बहुत से छात्र-छात्राएँ मिलते हैं.कई बार अपने स्कूल के विद्यार्थियों से भरी सड़क में उनके अभिवादनों का जवाब देते हुए ही स्कूल आ जाता है.कभी फोन पर उलझा रहूँ तो कितने अभिवादन
 
शशिभूषण
टैग: बचपन
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प्यार का शिल्प

आजकल प्यार बहुत बढ़ गया है.जिस दिल में झांको प्यार का उमड़ता हुआ सागर दिखाई देगा.इतना प्यार सभ्यता के किसी दौर में नहीं था.इस प्यार को दिन दुगुना रात चौगुना फैलाने में सूचना और एसएमएस क्रांति का बड़ा हाथ है.जिसे देखो वही प्यार कर रहा है.माँ से पैसे
 
शशिभूषण
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मेहतर

जबकि सभी यह अच्छी तरह समझ गए थे कि बौद्धों के बाद भारत में ज्ञान-विज्ञान में कोई तरक्की हुई न आगे किसी भाँति संभावना है.तब से लेकर पिछले दो हज़ार नौ तक का सब नकल है.सदा की तरह यहाँ सबकुछ उधार या आयातित ही रहा आएगा.क़रीब क़रीब सारे ऐसे ही अंग्रेज़ीदां
 
शशिभूषण
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अपने हिस्से की माफ़ी

मुझे पक्का याद था कि आज महिला दिवस है.इसे ही ध्यान में रखकर मैंने कल एक कविता की पोस्ट भी लगाई.पर जब आज स्कूल गया तो किसी ने मुझे शुभकामना नहीं दी.मैंने भी किसी से कुछ नहीं कहा.सब कुछ ऐसे रहा जैसे कोई सचमुच का ऐसा दिन भी हो सकता है जिसमें हँसी का साथ
 
शशिभूषण
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कोख

दो पुरुष मिलकर चलाएँगेगृहस्थी की गाड़ीअधिक क्षमता वाला कमाकर लाएगादूसरा चूल्हा-चौका चलाएगापुरुष परस्पर रक्षा का वचन देंगेरक्षा-बंधन परजतन से रखे जाएँगे स्त्री के जीवाष्मपुरातत्व विभागों मेंसहेजकर टाँगी जाएँगी उसकी तस्वीरेंदुनिया भर के संग्रहालयों
 
शशिभूषण
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आलोचना

एक आदमी ने रोटी पकाई.खाते-पीते मित्र को खाने पर बुलाया.ज़िद करके खाना खिलाया.वह अघाया मित्र दिन भर खाते रहने का आदी हो चला था.इसलिए इंकार न कर सका.अनमना खाता रहा.जिज्ञासु मेज़बान से रहा न गया तो उसने मेजबानी में आत्मीयता जोड़ते हुए पूछ लिया-.क्या रोटी
 
शशिभूषण
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शर्म

यह एक बड़ा सालाना आयोजन था.एक भूतपूर्व प्रसिद्ध उद्योगपति की याद में उन्हीं के नाम से स्थापित हिंदी का सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक सम्मान समारोह.इसमें कई विधाओं के लिए वार्षिक पुरस्कार दिए जानेवाले थे.हॉल खचाखच भरे होने की भी समुचित व्यवस्था की गई थी.बड़े-बड़े
 
शशिभूषण
Mar 03 2010 07:53 PM
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प्यार तुम्हारा रंगों का त्यौहार

एक रंग आसमान काअनेक रंग धरती केघुलते है भीतरआती है जब तुम्हारी यादएक रंग मिलन काअनेक रंग सपनों केपड़ते हैं ऊपरहोता है जब तुम्हारा साथएक रंग आँख काअनेक रंग आत्मा केरंगते हैं प्राणदेखता हूँ जब तुम्हारा रूपएक रंग कविता काअनेक रंग करुणा केरचते हैं होठकहता
 
शशिभूषण
Feb 28 2010 06:24 PM
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क्या एमएफ़ हुसैन बहादुरशाह जफ़र से ज़्यादा बदनसीब हैं?

दुनिया भर में मशहूर भारतीय चित्रकार एमएफ़ हुसैन ने भारत की नागरिकता छोड़ दी.उनके क़रीबी लोगों का कहना है कि हुसैन भारत से निकले हैं उनके भीतर से भारतीयता को नहीं निकाला जा सकता.इस पर कौन गर्व करेगा? निश्चितरूप से कुछ उत्साही,उद्धरणशील भारतीय जिन्हें भारत
 
शशिभूषण
Feb 27 2010 07:03 AM
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हम खरीदार न सही पर अपनी क़ीमत जानते हैं

ये मलयेश हैं. आप देख रहे हैं.जहाँ ये बैठे हुए हैं यह एक फुटपाथ है.स्पेंसर प्लॉजा के ठीक सामने.चेन्नई के इस शॉपिंग मॉल की गिनती दक्षिण एशिया के सबसे बड़े शॉपिंग मॉल में होती है.एक शाम जब मैंने मलयेश को पहली बार अचानक अपने ठीक सामने कटोरा फैलाते हुए देखा
 
शशिभूषण
Feb 26 2010 04:38 PM
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तलाश

कविता जड़िया ने पांचवी में पहली कविता लिखी.फिर दसवीं में म.प्र.के गोविंदगढ़ में आयोजित एक कविता रचना शिविर में हिस्सा लिया जिसमें भगवत रावत,बद्रीनारायण,डा.सत्यप्रकाश मिश्र.प्रो.कमला प्रसाद आदि मार्गदर्शक की भूमिका में थे.कविता की कविताएँ तब से रुक-रुककर
 
शशिभूषण
Feb 20 2010 11:01 PM
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क्रांति के सिपाही की जेब में प्रेम कविता

मेरे सब की धुरी हो तुममैं दूसरों की शिक़ायतें तुम्हीं से करना चाहता हूँदूसरों से मिले आशीर्वाद भी तुम्हें ही दे देना चाहता हूँतुम मुझे सबसे सुंदर इसलिए भी लगती होक्योंकि मेरे भीतर की सारी सुंदरता तुम्हारे लिए हैतुम्हें चूमने तुम्हारे गले लगने की मेरी
 
शशिभूषण
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एक रंग ठहरा हुआ

युवा कवि आशीष त्रिपाठी का कविता संग्रह एक रंग ठहरा हुआ के पन्नों को उलटते हुए जिस पहली बात ने मेरा ध्यान आकर्षित किया वह है इन कविताओं की शांत बनावट जिसमें कहीं कोई हड़बड़ी या अतिरिक्त आवेश नहीं है.इस प्रकार का शिल्प साधना और उसमें अपनी सारी भावात्मक
 
शशिभूषण
Feb 11 2010 04:58 PM
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जिन बच्चों की ज़िंदगी से पिता घट जाए उनकी खातिर दुआ है फ़िल्म पा

मैंने भी पा देख ली.अच्छी फ़िल्म है.बड़ी सरल और सादी कहानी है फ़िल्म की.फ़िल्म में ऐसा कुछ नहीं जो देखते हुए सोचते जाने से अलग हो.आगे क्या होगा के सारे अनुमान सच होते जाते हैं.फ़िल्म के बारे में काफ़ी पढ़ने में आ गया था पहले ही हो सकता है फ़िल्म इसलिए भी
 
शशिभूषण
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मित्रता

और एक युवक ने कहा:हमसे मित्रता के विषय में कुछ कहो.और उसने उत्तर दिया:तुम्हारा मित्र तुम्हारे अभावों की पूर्ति है.वह तुम्हारा खेत है,जिसमें तुम प्रेम का बीज बोते हो और कृतज्ञता के फल प्राप्त करते हो.वह तुम्हारा भोजन-गृह है और वही तुम्हारा
 
शशिभूषण
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इसे डायरी की तरह नहीं लिखा जा सका

सुबह जल्दी जाग गया थादिन भर किसी से बहस नहीं हुईपिता ने गालियाँ नहीं दीसहानुभूति नहीं दिखाई किसी नेन ही दोस्तों ने कोई काम करायाअपने ही छोटे-मोटे काम निपटा पायामसलनकपड़े धोनादाढ़ी बनानासाइकिल का टेढ़ा हैंडल सुधरवानादवाइयों की उधारी चुकानासिरदर्द कम
 
शशिभूषण
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अस्सी ने मुझे प्यार दिया,लिखने की छूट दी और माफ़ भी किया:काशीनाथ सिंह

(कहा जाता है कि कथा (कहानी,उपन्यास,संस्मरण जिसमें इसके सरोकार होते हैं) लोकतांत्रिक विधा हैं.लेकिन कम ही कथाकार हैं जिनकी रचनाओं में पात्रों का जनतंत्र दिखाई देता है.वे कथाकार जिनकी पहचान जनवादी लेखक होने की है भी उनकी सभी रचनाओं में लोकतांत्रिक मूल्य
 
शशिभूषण
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सैयद काशिफ़ रज़ा की कविता

एक मामूली नामवाला आदमीकुछ लोगों के नामयाद रखने के लिए रखे जाते हैंऔर बाक़ी के पुकारने के लिएमोहम्मद अकरम के बाप नेउसका नाम सिर्फ़ पुकारने के लिए रखा थाकुछ लोगों के नामवक़्त के साथ बड़े होने लगते हैंबाकी के और छोटेएक दिन अकरम को भी इक्कू बना दिया गयाउसकी
 
शशिभूषण
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शहीद दिवस

आज 30 जनवरी है.शहीद दिवस.महात्मा गांधी की पुण्यतिथि.आज के दिन इन्हें गोली मारी गई थी.यह पिछली सदी की सबसे बड़ी नियोजित हत्या थी.इस हत्या के पीछे अब तक चला आता हुआ विचार था.धार्मिक चरमपंथ की खाद में पलनेवाली सत्ताकामियों की सबसे क्रूर महत्वाकांक्षा.गांधी
 
शशिभूषण
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मेरी ज़िद

गाँव से रीवा आए हम सुनते ही थे कि कोई आशीष त्रिपाठी हैं.बड़े मेधावी हैं.बी.एस.सी के बाद हिन्दी में एम.ए. करने गए.एम.ए.किया ही नहीं यू जी सी के जे.आर.एफ़ भी हुए.नाटकों में खाली पी.एच.डी नहीं कर रहे बड़े शौक और सफलता के साथ रंगमंच से भी जुड़े़ रहे हैं.कवि
 
शशिभूषण
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भगवान ढोती पीठ

प्रगतिशील या अप्रगतिशील की बात थोड़ी देर के लिए छोड़ दें तो आज भी त्याग,सहयोग,समर्पण तथा बलिदान के उदाहरण ज्यादा धर्म में ही देखे जाते हैं.भूख सहना,कठिन यात्राएँ करना,पीड़ा भोगना धर्म में आम बात हैं.अगर लोग अपनी सुविधा का सबसे कम खयाल करते हैं,तकलीफ़ों
 
शशिभूषण
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दोस्ती

किताब सी तुम्हारी दोस्ती.पढ़कर इम्तहान देनान लिखकर ईनाम लेनाबस आदमी होते जानाज़मी-आसमां से भर जाना.ज़िल्द बदलने की चिंता न पन्ने उखड़ने का डरबस बरतना प्यार सेसंवरते जाना.काली स्याही मेंउजली भाषा सीसाथी किताब सीतुम्हारी दोस्ती.
 
शशिभूषण
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नाम

एक लड़की गाँव में उपले पाथती हुई लिखती है उस चरवाहे का नाम जो उसे सबसे सुंदर समझता है चोरी से दिए गोबर के बदले उससे कुछ नहीं चाहता. वह रात दिन उसके सपने देखती है घर लीपते हुए रोटी सेंकते हुए. उसके होठों में वही गुनगुनाता है उसकी आँखों में वही मुस्कुर
 
शशिभूषण
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एक बार पालतू हो जाने के बाद

कल शाम सड़क पर हाथी देखा. रास्ता चलते हाथी दिख जाए तो शुभ होता है मानते हैं लोग. मैंने ग़ौर से देखा हाथी को कल महावत की शाही बैठक हाथी की अधीन चाल. जड़ रहा था लात महावत हाथी की गर्दन पर प्रणाम कर रहे थे आते जाते लोग धीमे-धीमे हिलता हुआ जा रहा था हाथी. ब
 
शशिभूषण
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समझौता

दिवाकर पत्नी से दुखी रहनेवाले किंतु दांम्पत्य से संतुष्ट व्यक्ति हैं.एक ही बेटा है जो इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए हैदराबाद में रहता है. दिवाकर की तकलीफ़ है कि करुणा फ़ोन पर ही टिकी रहती है सारा समय.हालांकि तसल्ली की बात ये है कि वह अपने काम,ज़िम्मेंद
 
शशिभूषण
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पेड़ के पास

जब मुझे लगता है इस दुनिया में मेरा कोई नहीं कोई मुझे प्यार नहीं करता मुझे नहीं हराना किसी को महत्वाकांक्षाओं की दौड़ में मैं एक पेड़ के पास जाता हूँ. जब मैं संकल्प दोहराता हूँ मुझे किसी से कुछ नहीं चाहिए सिर्फ़ लौटाते रहनी हैं समय को अपनी साँसें जब द
 
शशिभूषण