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पॉलिटिक्स पंजाब

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06 Jan 2010
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कैद का लुत्फ

फिल्म देखने का अंदाज भी कितना बदल गया है। माल्स में बने सिनेमा हाल को देखकर यही अंदाजा नहीं होता कि हम फिल्म देखने आए हैं कि मॉल। एक ही इमारत में चार चार सिल्वर स्क्रीन। शानदार हॉल। कोई बालकनी नहीं कोई बाक्स नहीं । वातानुकूलित हाल में आरामदायक कुर्सियों
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लखनऊ वाले अंकल

च्कंवल कहां है?ज् पहली बार मेरे घर आए,मेरे कॉलेज के समय सहपाठी रहे रहमान ने पूछा तो , मैंने कहा च्लखनऊ वालों के यहां गया है, वे वापस भोपाल जाने की सोच रहे हैं उनके बेटे उसके दोस्त हैं उन्हीं से मिलने गया है।ज् च्लखनऊ वाले? ये क्या नाम हुआ?Ó 'नाम? क्य
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रोजी-रोटी

रजिंदर और मेरी जिंदगी में काफी समानता है। हम दोनों के परिवार रोजी-रोटी के लिए अपने-अपने पैतृक शहरों को छोडक़र पराए लोगों के बीच चले गए। मेरे परिवार ने जहां सत्तर के दशक में अपनी जन्मभूमि धूरी को छोडक़र कानपुर को अपनी कर्मभूमि बनाया तो वहीं रजिंदर के पि
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..अब उसे स्पेलिंग नहीं भूलते!

अब उसे स्पेलिंग नहीं भूलते! चटाक ..! तमाचे की आवाज इतनी ज्यादा थी कि हॉल में अखबार पढ़ते हुए मेरा ध्यान बैडरूम की ओर गया। यह तमाचा मेरे बेटे जसकंवल की गाल पर उसकी मम्मी की ओर से पड़ा था जो उनके पास बैठा पढ़ रहा था। 'क्या हुआ,Ó मैंने जानना चाहा। 'कितन
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पपी क्यों नहीं पाल

पापा, हम एक पपी (पिल्ला) क्यों नहीं पाल लेते।Ó मेरे छह साल के बेटे जसकंवल ने कल मुझसे यह सवाल किया। वह अपने घर की खिडक़ी से बाहर पड़ोस के दो छोटी बच्चियों को अपने कुत्ते टाइगर के साथ खेलते देख रहा था। 'नहीं बेटा हम किराये के मकान में रहते हैं, जब अपना
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रेड लाइट

रेड लाइट 'देख बहन 3100 से एक पैसा कम नहीं लूंगी, देना है तो दो नहीं तो मैं खाली चलीÓ 'नहीं.. इतने पैसे तो मेरे पास नहीं हैं, ये पांच सौ रख ले, मैं तुम्हें खुशी से दे रही हूं।Ó 'पांच सौ, ये भी रहने दो, हम अपना रेट नहीं खराब करतीं। Ó कांता किन्नर का टक
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मां, तुम्हें कैसे माफ कर दूं

तीन पन्नों का पत्र हाथ में लिए बीमार रश्मी की आंखों से अविरल आंसुओं की धारा बह रही थी। बहती भी क्यों न आखिर 22 साल बाद उसकी बेटी ने उसे खत लिखा था। यह बात अलग है कि खत के जरिए उसने ऐसा तमाचा रश्मी की आत्मा पर मारा था कि उसे अंदर तक झकझोर दिया। वास्तव
Nov 11 2009 07:12 PM
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जनता कॉलोनी

जनता कॉलोनी जनता कॉलोनी आज फिर अखबारों की सुर्खियों में थी। वजह भी खास थी। भारी मुशक्कत के बाद आखिर जिला प्रशासन 11 एकड़ जमीन पर 35 वर्ष से कब्जा किए बैठे झोंपड़पट्टी वालों को हटाने में कामयाब रहा। अब यहां मल्टीनैशनल कम्पनी मल्टीप्लेक्स या मॉल बनाएगी
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पॉलिटिक्स पंजाब

हम पिकनिक मनाने नहीं आए? क्या हम यहां पिकनिक मनाने आए हैं , लगभग चीखते हुए पसीने से तर किसान शिंगारा सिंह ने कहा। उसकी आवाज इतनी जोरदार थी कि अंग्रेजी अखबार की 22-23 साल की पत्रकार कामिनी के पसीने छूट गए। हड़बड़ाती हुई वह पीछे हटी, नहीं .. मेरा मतलब
Nov 11 2009 07:12 PM
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किट्टी पार्टी

बसंती को मतली हो रही थी। शाइना आंटी समझ गईं थी कि उसे फिर से गर्भ ठहर गया है। पूछने पर बसंती ने उन्हें बताया कि चौथा महीना चल रहा है। आंटी सतर्क हो गईं। सतर्क भी क्यों न हों। यह बसंती का छठा गर्भ था लेकिन हर बार बच्चा चौथे से छठे महीने के बीच में होक
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बालिग

बालिग लुधियाना बम विस्फोट के दूसरे दिन ही जब अखबार में इस प्रकार की पूर्व घटनाओं पर मेरी नजर गई तो 18 साल पहले जगराओं के पास रेल यात्रियों को अंधाधुंध गोलियों से भूनने की घटना में मेरे दिमाग में फिर से तरोताजा हो गई, इन मरने वाले यात्रियों में हमारा
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वीकली ऑफ

वीकली ऑफ आज वीकली ऑफ के दिन खूब मजे करने के इरादे से सुबह उठते ही रवि ने किरण से दो तीन बढिय़ा चीजें बनाने को कहा और बताया कि उसके दो दोस्त अपनी बीवियों के साथ हमारे यहां लंच पर आ रहे हैं। इससे पहले की किरण रवि से पूछ पाती कि नाश्ते में आज वह क्या बना
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पॉलिटिक्स पंजाब

डॉ मनमोहन सिंह कभी भी संकीरण राजनीती में नही पड़े / इसके बावजूद उनको विश्वास मत मैं अकाली सांसदों द्वारा वोट न दिया जन दुर्भाग्यपुँरण हैबात केवल अकाली सांसदों की नही बल्कि हर उस संसद की है जो विश्वास मत के खिलाफ मतदान कर रहा है \ डॉ सिंघ की इमानदारी,
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बादल साहिब मनमोहन को वोट क्यों नहीं

मुख्य मंत्री परकाश सिंह बादल अपनी सरकार बचाने के लिए सिर्फ़ मनमोहन के खिलाफ वोट देने पर उतारू हैं उनको देश हित या आम लोगों का कोई ख्याल नहीं है , आख़िर ऐसा क्यों है बादल साहिब का कहना है कि कांग्रेस श्री अकाल तखत साहिब पर हमला करने वाली पार्टी है जबक
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retire, do not tire

Retire, but do not tirePunjab rural education is in doldrums.No teacher is ready to work in schools.These are some of the phrases that people concerned for education often say.Whereas on the other hand, the government teachers have their own notions,