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'मिलकर जुदा हुए तो '
शायर क़तील शिफाई की एक ग़ज़ल-------------------------मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हमएक दूसरे की याद में रोया करेंगे हमआंसू छलक छलक के सताएंगे रात भरमोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हमजब दूरियों की आग दिलों को जलाएगीजिस्मों को चांदनी में भिगोया करेंगे हमगर
Jun 11 2010 06:19 AM


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