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बचपन-शोभना 'शुभि'
बहुत दिन हुए कवितायें लिखते हुए. आज सोचा एक और लिखू पर न जाने कैसे दिमाग में एक बात आ गयी. या यूँ कहो कुछ यादें दिमाग पर छा गयी. जून का महीना, गर्मी ने है सुख छीना, याद आई गयी वो बचपन की गर्मी की छुट्टियाँ, नानीजी का घर, वो मस्ती. आज जब ये याद आया तब लगा
Jun 11 2010 12:08 AM


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