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10 Jun 2010
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बचपन-शोभना 'शुभि'

बहुत दिन हुए कवितायें लिखते हुए. आज सोचा एक और लिखू पर न जाने कैसे दिमाग में एक बात आ गयी. या यूँ कहो कुछ यादें दिमाग पर छा गयी. जून का महीना, गर्मी ने है सुख छीना, याद आई गयी वो बचपन की गर्मी की छुट्टियाँ, नानीजी का घर, वो मस्ती. आज जब ये याद आया तब लगा
 
Shobhna Choudhary
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गुफ्तगू -शोभना 'शुभि'

काफी दिनों से ख्याल मन दिमाग पर आहट दे कर मुड जाते हैकलम निकाल कर लिखना शुरू करती हूँ कि कुछ काम डायरी को फिर से अलमारी में सजवा देते हैंसोचती हूँ चाँद सितारों से बातें कर लूँथोडा रुक कर अपने दिल से भी कुछ गुफ्तगू कर लूँखुद के बारे में सोचने की कोशिश कर
 
Shobhna Choudhary
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जिंदगी का सच-शोभना 'शुभि'

अगर किसी को याद आये तो दो पल सोच लेनावरना इस मुसाफिर को ये सफ़र तो अकेले ही तय करना हैआते हैं यहाँ तब माँ का आँचल तो होता हैखुशियों को समेटे न जाने कितने लोगों की गोद का सहारा होता हैज़िन्दगी की राहों में कुछलोग साथ निभाते चलते हैकुछ खून के रिश्ते होते
 
Shobhna Choudhary
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तुकबंदी-शोभना 'शुभि'

आज सोचा थोड़ी तुकबंदी कर ली जाये, तो पढो मेरी तुकबंदी१. दुनिया बदल जाएगी पर न बदलेगा सवाल जवाब का सिलसिलाअगर ख़तम हो गया येतो रुक न जाएगीआने वाली नई दुनिया२. दुनिया चलती है जब हम चलते है दुनिया रूकती है जब हम रुकते हैहमारा है ही कुछ अंदाज़ ऐसा किजो हम
 
Shobhna Choudhary
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मैं कविता हूँ- शोभना 'शुभि'

मैं कविता हूँकभी दर्द को ओढ़े हुएकभी उल्लास को उकेरे हुएमन के भाव स्याही में डूब करमुझे निर्मित कर देते हैंकभी वीर रस का जोश कभी प्रेम के शब्द मेरे गहने बन मुझे चमका देते हैंकभी चेहरे परमुस्कान उड़ेल देती हूँकभी आंसुओं के समन्दर नयनों में उड़ेल देती हूँ मैं
 
Shobhna Choudhary
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अधूरी कविता- शोभना 'शुभि'

आज बैठे बैठे ऐसे ही कुछ पंक्तियाँ लिख दी आगे कुछ सुझा नहीं, बस ये चार पंक्ति लिख पाई कभी खुद से मुलाकात करनी हो तो तन्हाई में डूब कर देखो कभी खुद को सुकून देना हो तो खुद की परछाई से लड़कर देखोकभी खुद को ऊंचाई पर पाना हो तो सपनों को बुनना सीखोकभी
 
Shobhna Choudhary
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खामोशी-शोभना 'शुभि'

ख़ामोशी बोलती है....खामोशी गूंगी नहीं होतीकितनी भी खामोश दिख लेकितनी भी ओढ़ ले गंभीरता की बरसाती लेकिन उस बरसाती के नीचेइकट्ठे होते रहते हैं कई कोलाहलउबलते और बुझते रहते हैं कई हलाहल कई गहनतम आवेश कितनी बार तो कोशिश होती है इसे सच में
 
Shobhna Choudhary
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कुछ सवाल जवाब- शोभना

आजकल बिना घी की सुखी रोटी से ही काम चलाना पड़ता हैअरे गाडी को रोज मंहगा पेट्रोल जो पिलाना पड़ता हैआजकल बच्चे के जनम लेते ही माँ बाप को पढना चालू करना पड़ता है अरे बच्चे के दाखिले के लिए माँ बाप को भी interview से जो गुजरना पड़ता हैआजकल सिर्फ बातों
 
Shobhna Choudhary
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मेरे शब्दों का पिटारा-शोभना

बहुत दिनों से मेरे शब्दों का पिटारा बंद थाबहुत से कामों को निपटाने मेंलगा मेरा मन थाबहुत से ख्याल  दिल में आते थे पर मेरे हाथ कलम नहीं पकड़ पाते थे अक्सर मेरा दिमागमेरे दिल सेजीत जाया करता हैऔर फिर मेरेशब्दों का
 
Shobhna Choudhary
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आखिर मेरा घर कौनसा है-शोभना

धीरे धीरे सूरज डूब रहा है, अँधेरे को गले लगाने के लिए न जाने क्यों इतना बेताब है ये.......परिंदे भी घरों की तरफ उड़े चले जा रहे है.......घर हाँ अपने अपने घर......समन्दर के किनारे बैठे बैठे मुझे लग रहा है जैसे मेरा अस्तित्व भी डूबता चला जा रहा है....अपनी
 
Shobhna Choudhary
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ये है मेरा युवा कल्याण संतरालय-शोभना

अरे ये क्या इस चित्र को देख कर आप इतना चकित क्यों हो रहे है.........अब तक आपको पता तो चल ही गया होगा कि मुझे प्रधानसंतरी समीर जी के संतरियों में शामिल किया गया है........ये सुचना मुझे थोडा देर से मिली....अब हुआ ये कि इस देश के सबसे तेज़ पत्रकार खुशदीपजी
 
Shobhna Choudhary
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इस देश के लिए मेरा योगदान अधिक या आपका-शोभना

अभिनेताओं,क्रिकेटर.......अक्सर इनके बारे में सवाल उठाये जाते हैं कि आखिर क्यूँ हम इन लोगों के दीवाने है? आखिर ये लोग देश के लिए करते क्या है? तर्क दिया जाता है कि ये लोग पैसों के पीछे भागते है। जरा सच्चे दिल से बताना क्या मैं या आप भी इस दौड़ में शामिल
 
Shobhna Choudhary
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आपके प्यार ने दी सोचने की एक नयी दिशा-शोभना

आप सभी के प्यार ने मुझे सोचने की एक नयी दिशा दी। मैं ब्लॉग डर कर या घबराकर नहीं छोड़ रही थी। भाग दौड़ और दिखावे से दूर होगा ये ब्लॉग जगत ये सोच कर आई थी यहाँ। दिन भर की भाग दौड़ भरी जिंदगी के बीच सोचा ये एक ऐसी जगह है जहाँ आप अपनी बात लिख सकते हो और
 
Shobhna Choudhary
Feb 15 2010 06:20 PM
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ब्लॉग की दुनिया को मेरा आखरी सलाम-शोभना

कभी किताबों में पढ़ा था कि अगर किसी लाइन को छोटा बनाना हो तो उसको मिटाओ मत बल्कि उसके सामने एक बड़ी लाइन बना डालो। जीवन में भी आगे बढ़ो तो खुद को उठा कर न कि दुसरे को गिरा कर। क्यूंकि अगर किसी को नीचे गिराओगे तो कल को दूसरा आकर आपको गिरा देगा। ब्लॉग जगत
 
Shobhna Choudhary
Feb 13 2010 10:50 AM
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हाथों में चूड़ियाँ पहन लो ?????????

२१ वीं सदी....शिक्षा का स्तर काफी ऊपर उठ गया, पर अगर कुछ ऊपर नहीं उठा तो वो है लोगों का मानसिक स्तर.......अब आप कहेंगे कि ये मुझे क्या हुआ......कहीं मेरी मानसिक हालत तो बिगड़ नहीं गयी तभी न जाने क्या बकवास कर रही है।अब इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। सिर्फ
 
Shobhna Choudhary
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कुछ नहीं बहुत कुछ खो गया है........

कल रविवार को मैंने कुछ नहीं किया बस यूँ ही सोचती रही....काफी ख्याल आते रहे और जाते रहे...मैं इधर से उधर भटक रही हूँ, मेरा कुछ सामान खो गया है........गुम हुआ, धीरे धीरे मेरी आँखों के सामने से गायब हुआ और मैं देखती रही......मैं कुछ नहीं कर पा रही थी पता
 
Shobhna Choudhary
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कुछ पंक्तियाँ

१ कुछ पहेलियों को सुलझाती हूँ तो मैं खुद ही उलझ जाती हूँ दूसरों के सवालों का जवाब देती हूँ तो खुद ही एक प्रशन बन जाती हूँ २ मेरी हाथों की लकीरों को मैंने बदल डाला अपने वजूद को कायम रखने के लिए मैंने अपने आंसूओं पोंछ डालाफिर से जीने की चाह में मैंने फिर
 
Shobhna Choudhary
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कुछ आराम के पल

काफी दिनों तक मैं ब्लॉग की नहीं नहीं पूरी इन्टरनेट की दुनिया से दूर रही........ऐसा नहीं की अचानक मैंने संन्यास ले लिया बस यूँ ही दुसरे कामों में उलझ गयी......जोधपुर से काफी दूर जाना हुआ........काफी समय मिला सोचने के लिए वरना इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में
 
Shobhna Choudhary
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पुराना-नया.............

वो पुरानी यादें, वो पुरानी गलियांवो पुराने मंजर, वो पुराने लम्हे वो पुराने साये, वो पुराने ज़ज्बात वो पुरानी आस, वो पुरानी मंजिल आज छोड़ देंगे हम चले जायेंगे हम दूर कहीं जहाँ न होंगे वो पुराने दौर जहाँ होंगे बस सब नए वहां न होगी वो पुरानी तन्हाई बस साथ
 
Shobhna Choudhary
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क्या करूँ समय नहीं मिला..........

क्या करूँ समय ही नहीं मिल पाया , बहुत व्यस्त थी ............ इस प्रकार के जुमले अक्सर सुनने को मिल जाते हैं । दूसरों पर नहीं थोप रही हूँ , मैं भी यह बोलती हूँ ....... यदाकदा नहीं अक्सर ..... समय .............. एक बार २० वीं सदी में वापस जाने का मन कर
 
Shobhna Choudhary
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हम हल्ला क्यूँ मचा रहे हैं?

आजकल ब्लॉग जगत में कुछ मुद्दों को लेकर काफी हल्ला मचा हुआ है। लोग एक दुसरे पर छींटाकशी कर रहे हैं। हाँ मैं कोई बहुत बड़ी बुद्धिजीवी नहीं पर मेरी छोटी सी सोच यही कह रही है की क्यों.......आख़िर क्यों हम लड़ रहे हैं? कभी कोई लिख रहा है महिलाओं के रहेनसहन
 
Shobhna Choudhary
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मुट्ठी भर रेत

हँसतीं हुई, लडखडाती हुई , माँ की नज़रों से छिपकर घर से बाहर भागती हुई मैं दौड़ चली जाती थी खेतों में नए खेलों को तलाशती हुई रिमझिम, टिमटिम वो आशा वो नताशा मिट्टी में घरौंदें बनाया करते थे अपने उन घरौंदों में एक संसार बसाया करते थे गुड्डे गुड्डियों की
 
Shobhna Choudhary
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ये कुछ पंक्तियाँ मुझे अच्छी लगी

ये कुछ पंक्तियाँ है जिसको मैंने नही लिखा....... पता नही किसने लिखा है... मैं नही जानती.... मैंने इसको कहीं पढ़ा था ..... पर मैं चाहती हूँ कि आप इसे पढ़े.... To all the guys who read this…..please read fully and understand…………..To all the girls who rea
 
Shobhna Choudhary
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धोखे की दुनिया

वो झूठ की नीवं पर ताजमहल बनाना चाहता है वो धोखे में रखकर मुमताज पाना चाहता है प्यार का दिखावा कर साथ चलना चाहता है ताश के पत्तों का महल बनाना तो उसके लिए आसान है पर उसके वजूद को कायम रख पाना एक नामुनकिन काम है चमक तो सोने की भी फीकी पड़ जाती है फिर झू
 
Shobhna Choudhary
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परिंदे

कल ऐसे ही मैं खाली छत पर खड़ी हुई थी.... टहल रही थी...... पता नही जिंदगी की भाग दौड़ में हम चलते रहते है....... कितने ही हसीन पल हमारे पास से गुज़र जाते है और हम..... ऐसे ही आसमान पर नज़र चली गई.... उड़ते हुए परिंदों को देखा तो पता नही क्यों उनसे थोड़ी
 
Shobhna Choudhary
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मेरी मज़बूरी???????????

मैं हंसती हूँ ताकि कोई मेरे आंसू देख न सके मैं रहती हूँ भीड़ में ताकि मेरी तन्हाई कोई महसूस न कर सके मैं चलती रहती हूँ ताकि मेरे जीवन का ठहराव कोई जान न सके मैं बिताती हूँ समय शोरगुल में ताकि कोई मेरे टूटे दिल की आवाज़ सुन न सके मैं खिलखिलाती हूँ फूलो
 
Shobhna Choudhary
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लड़की!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

आज कल अखबारों में मैं पढ़ती हूँ की लड़किया नौकरियो के पास और शादी से दूर होती जा रही है..... दोष लड़कियों के सर पर डाला जा रहा है की लड़कियों की भावनाए ख़तम हो रही है..... वो सिर्फ़ पैसा कमाने की मशीन बन रही है..... परिवार उनके लिए कोई महत्व नहीं रखत
 
Shobhna Choudhary
Oct 30 2009 04:23 AM
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मैं बस अकेले ही चलना चाहती हूँ

मैं हँसना चाहती थी मैं कुछ लम्हों को अपनी यादो में शामिल करना चाहती थी मैं कुछ खुशियों को अपने दामन में संभाल कर रखना चाहती थी मैं वो नदिया की चंचल धारा थी जो बिना रुके हँसते गुनगुनाते बहती जा रही थी जिंदगी के गमों के सायों को धता बताती जा रही थी लोग
 
Shobhna Choudhary
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"एक नन्ही सी कली"

एक लड़की कितनी ही मुश्किलों का सामना अपनी जिंदगी में करती है...... न जाने उसे कितने ही बुरे दौरों से गुज़रना पड़ता है..... हाँ ये सही है कि लड़की की जिंदगी में लड़को से कई गुना मुश्किलें है..... मुश्किलों का सामना सब करते है कोई कम तो कोई अधिक.......
 
Shobhna Choudhary
Oct 30 2009 04:23 AM
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बेबसी..............

मैं उस नदी का बेबस किनारा हूँ जो दूसरे किनारे से मिलने के लिए कसमसाता हूं बिना मिले अपने साथी से मैं दरिया से छूट मैं सागर में कही खो जाता हूं मैं उस दिए की नाज़ुक सी बाती हूं जो दुसरो को रौशनी से भर देती हूं पर कुछ पल जलने के बाद उसी दिए से निकाल दी
 
Shobhna Choudhary
Oct 30 2009 04:23 AM
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## सपने##

ये सपने........... प्यारे से मीठे से मन को छू लेते से ये सपने कभी ले जाते है खुशियों के दामन मे स्वर्ग लोक के आनंद मे ये सपने कभी ले जाते है भयानक वीरानों मे खंडहरों के विशाल मैदानों मे ये सपने कभी दे जाते है एक प्यारा सा मीठा सा एहसास मन के वीरानो म
 
Shobhna Choudhary
Oct 30 2009 04:23 AM
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मेरा भारत !!!!!!!!!!!!!!!!!

आज अगर गांधीजी जिंदा होते तो वो आज के हालत के बारे मे क्या सोचते? आज बुझी दीपक की लौ और बढ गया अंधकार का रौब धीमी ज्योति, चली आंधी, अब वो कॉपि गाँधीजी की वाणी ये वो भारत नही जो मैंने खोजा था.............. ये वो भारत नही जो मैंने तराशा था.............
 
Shobhna Choudhary
Oct 30 2009 04:23 AM
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कुछ~~~~~~~

कुछ कहानियाँ अधूरी रह जाती है कुछ प्रेम की राहें बीच मे छूट जाती है कुछ ख्वाब बीच मे टूट जाते है कुछ कश्तियाँ किनारे पर आने से पहले ही डूब जाती कुछ साथी जिंदगी मे शामिल होने से पहले ही दूर चले जाते है कुछ सूरज की किरणों को धरती पर आने से पहले ही बादल
 
Shobhna Choudhary
Oct 30 2009 04:23 AM
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अकाल से आहत मेरा राजस्थान

अकाल से आहत मेरा राजस्थान......... रूठा भगवान, पड़ा अकाल, हुआ क्रन्दन, कमजोर हुआ इन्सान सूखी धरती, गायब हरियाली और गायब किसान के घर से धन खुशहाली खत्म अन्न, खाली बर्तन, भूखा बच्चा और रोये जच्चा तालाब खाली, बैल को न पानी, न हुई बुवाई तो क्या करे किसान
 
Shobhna Choudhary
Oct 30 2009 04:23 AM
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"मैं"

मैं वो ख्वाब हू जो कभी टूट नहीं सकता मैं वो सूरज हू जिसे कभी कोई बादल ढक नहीं सकता मै वो कश्ती हू जो कभी डूब नहीं सकती मैं वो धारा हू जो कभी रुक नहीं सकती मै वो माला हू जो कभी बिखर नहीं सकती मै वो चाँद हू जिसे कोई छू नहीं सकता मै वो उजाला हू जिसे कोई
 
Shobhna Choudhary
Oct 30 2009 04:23 AM
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देखा है............

मैंने दरख्तों पर सूखे पत्ते गिरने के बाद नई कलियों को फूटते हुए देखा है मैंने पतझड़ के बाद धरती को हरियाली की चादर ओढ़ते हुए देखा है मैंने अंधियारों के सायो को उजाले की किरण से टूटते हुए देखा है मैंने बर्बादी के मंजरों के बाद नए आशियानों को बसते हुए
 
Shobhna Choudhary
Oct 30 2009 04:23 AM