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कुछ बीते हुए पल

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नयी प्रविष्टी लिखी
12 May 2010
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नयी किरण-शोभना 'शुभि'

भाग-२  कल ही तो उसके बेटे बहु की १३ वी हुई थी. सब अपने घरों को लौट चुके थे. रह गयी वह, उसका पति अभिनव और पोता जिसने पाँच साल की उम्र में अपने माँ बाबूजी को खो दिया था. बार बार बिलखता वह मासूम माँ बाबूजी को पुकार पुकार कर सो गया. उसे क्या मालूम था कि
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नयी किरण- शोभना 'शुभि'

मैंने इस ब्लॉग पर कहानियां लिखना शुरू किया था. "मैं बेगुनाह हूँ" शीर्षक वाली कहानी से पहली कोशिश की पर इस कहानी को पूरा लिख नहीं पाई, अधूरी ही छोड़ दी अभी, बाद में पूरा करंगी. इस बीच एक दूसरी कहानी लिखना शुरू किया और पूरा लिख भी दिया. यही कहानी इस ब्लॉग
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कुछ बीते हुए पल

भाग-५ देव, धीर गंभीर प्रवृति का इंसान। धरती पर किताबों का साथ ही निभाने आए हैं ऐसा प्रतीत होता था। बेहद काबिल इंसान। सभी को लगता था जरूर कोई न कोई अविष्कार करेगें और आने वाली पीढियां "देव का सिधांत" नाम का कोई सिधांत किताबों में पढ़ेगें। कॉलेज में कि
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मैं बेगुनाह हूँ

भाग-४ स्नातक के बाद मेरी दूसरी पारी की शुरुआत। कुछ चेहरे पुराने ही थे........ कुछ नए शामिल हो गए। मेरा कोई पुराना दोस्त नहीं थे सब जा चुके थे। अब नए दोस्तों की टोली बन गई थी। लोग जिंदगी में आते हैं, कुछ पल साथ रहते हैं और फिर अपने रास्ते चल देते हैं,
Dec 07 2009 05:05 PM
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मैं बेगुनाह हूँ

भाग-३ पता ही नहीं चला कैसे १ साल गुज़र गया। ऐसा लग रहा था मानो समय बड़ी तेज़ी से भाग रहा था। समय...........वक्त.........कितना कुछ छुपा है इस शब्द में। लोग कहते हैं की इसका समय अच्छा चल रहा है, उसका समय बुरा चल रहा है लेकिन हम ये क्यों नही सोचते कि समय
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मैं बेगुनाह हूँ........

भ ाग - २ ऐसा नही की मैं पूरे २ साल परेशान रही लेकिन उन २ सालों में मैंने बहुत कुछ अनुभव किया और दूसरो की जिंदगी से सीखा भी । बहुत से शब्दों की गहराईओं को महसूस किया । सभी अनुभव बुरे नही थे , कुछ अच्छे भी थे ................ कविता बेटी , उठो तुम्हारा
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मैं बेगुनाह हूँ.........

भाग- १ मैं कविता ............ऊँचे ख्वाब, ऊँची उडान भरने का जज्बा, सफलता की बुलंदियों को अपनी मुट्ठी में कैद करने की चाह, सुमंद्र की अथाह जल राशि को अपने आँचल में भर लेने की कोशिश और आसमान को अपनी बाहों में समां लेने का पागलपन......... ये है मेरा परिच