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अवधी कै अरघान

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15 May 2010
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हिम के आँचर से ताँक-झाँक [ ब ] ,,,,,,,

पढ़ैयन का राम राम !!!' अवधी कै अरघान ' की महफ़िल मा आप सबकै स्वागत अहै ...................जे न पढ़े हुवैं अउर उनकै इच्छा हुवै तौ पिछला --- भाग [ अ ] , देखि सकत हैं .. आज भाग [ ब ] आप सबके सामने रखत अहन ...................    
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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हिम के आँचर से ताँक-झाँक [अ] ,,,,,,

                                          हिम के आँचर से ताँक-झाँक [अ] ,,,,,,पढ़ैयन का राम राम !!!' अवधी कै अरघान ' की महफ़िल मा आप सबकै स्वागत
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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आप सबका होली कै ढ़ेर- ढ़ेर सुभकामना ... होली खेलैं रघुबीरा अवध मा ...

                                                                      
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
टैग: awadhi
Feb 28 2010 04:58 PM
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रमई काका के जनम दिन पै यक कविता : '' धरती हमारि '' ...

पढ़ैयन का राम राम !!!' अवधी कै अरघान ' की महफ़िल मा आप सबकै स्वागत अहै ..आज रमई काका कै जनम दिन आय .. काका कै जनम २  फरौरी १९१५ मा भा रहा ..  अबहीं कुछ देरि पहिले काका जी के सुपुत्र सिरी अरुण त्रिवेदी जी से बात भै
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
टैग: awadhee
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खिचरी के तिउहार पै सबका सुभकामना ....... '' उत्सव प्रियाः खलु मनुष्याः'' ........

पढ़ैयन का राम राम !!!................... खिचरी के तिउहार  पै सबका सुभकामना ........................' अवधी कै अरघान ' की महफ़िल मा आप सबकै स्वागत अहै
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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कबिता : '' नौ दुइ ग्यारह हैं '' ..

पढ़ैयन का राम राम !!! ' अवधी कै अरघान ' की महफ़िल मा आप सबकै स्वागत अहै ..         इधर आप सब लोगन कै प्रोत्साहन हमरे लिखै का सार्थक बनावत अहै . जब लिखै का सुरु किहे  रहेन तौ हमैं सहज बिस्वास नाय हुवत रहा कि लोगन कै एतना
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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कौवा-बगुला संबाद , भाग- ५ : हिन्दी-बिरोध मा राग ' अंधेरिया ' कै भूमिका ..

पढ़ैयन का राम राम !!! आज के संबाद प्रस्तुति मा भारतीय राजनीति के सम्बेदनहीन अउर अवसरबादी चरित का रक्खै कै कोसिस करत  अहन . आपकै राय अपेक्षित अहै . केहू नेता कै नाव लियय कै झंझट नाय उठायन .परसंग लम्बा न हुवै के लिए .  संकेत से समझ मा आय जाये
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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रमई काका कै कबितन कै यक बानगी ..

पढ़ैयन का राम राम !!! आज कै प्रस्तुति रमई काका कै कबितन कै बानगी के रूप मा अहै  | काका जी कै जीवन-चरित और चित्र के लिए परयास  जारी अहै अउर जैसे ही सफलता मिले यक पोस्ट बनाइ के आप सबके सामने प्रस्तुत करब | ...............................
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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कौवा-बगुला संबाद , भाग- ४ : पैसा कै महिमा

पढ़ैयन का राम राम !!! [ भैया ! / आज तौ दिन है कौवा-बगुला संबाद कै .. आज कै बिसय है - ''पैसा कै महिमा'' .. यक कविता लिखे रहेन,यही परसंग के अनुकूल जानि के वहू का इन दुइ पच्छिन के माध्यम से कहुवाय दियत अहन .. ] [ पिछले अंक म --- कटा हुवा हरा पेड़ ल
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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रमई काका कै कबिता : यह छीछाल्यादरि द्याखौ तो ...

पढ़ैयन  का राम राम !!!      पहिले  हम माफी मागत अहन उन लोगन से जे कौवा-बगुला संबाद देखै की आसा से      आये होइहैं ... अब कारन बतावा चाहित अहन...हमसे कइव जने ई सिकाइत दर्ज किहिन     कि ल
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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रमई काका कै कबिता : यह छीछाल्यादरि द्याखौ तो ...

पढ़ैयन  का राम राम !!!     पाहिले हम माफी मागत अहन उन लोगन से जे कौवा-बगुला संबाद देखै की आसा से आये होइहैं ...       अब कारन बतावा चाहित अहन...हमसे कइव जने ई सिकाइत दर्ज किहिन कि लगातार संबाद चले  &n
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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अवधी कै अरघान

कौवा-बगुला संबाद , भाग- ३ : अकिल कै खजाना ... [पढ़ैयन का राम राम !!! आज कै भाग इंसानन की अकिल पै अहै ...] कौवा-बगुला संबाद , भाग- ३ : अकिल कै खजाना ... (दुइनिव टेक्टर-टाली के पीछे जात अहैं | टेक्टर गांव से पक्की सड़क   के बीच के कच्चे रस्ते का र
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
Nov 22 2009 07:49 PM
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कौवा-बगुला संबाद , भाग-२ : इंसानियत कै घटब अउर पेड़न कै कटब ...

राम राम भैया ! / संबाद कै सिलसिला (भाग - २ , के रूप मा ) आज '' इंसानियत कै घटब अउर पेड़न कै कटब ... '' के रूप मा आप सबन के सामने प्रस्तुत अहै | उम्मीद है आपका रुचे ... ]               कौवा-बगुला संबाद , भाग-२ :
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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कौवा-बगुला संबाद , भाग - १ : यक दुसरे से चीन्हि-पहिचानि अउर दोस्ती

पढ़ैयन का राम राम !!!   आज यहि संबाद कै पहिला भाग आप सबन के सामने रखत अहन | यहिमा दुइनिव पच्छिन(कौवा-बगुला) कै मुलाकात होये | पहिले हम अपनी तरफ से कुछ निबेदन कीन चाहत अही---   पढ़ैयन से निबेदन - यै दुइनिव पच्छी प्राथमिक रूप से कौवा अउर बगुल
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
Nov 08 2009 08:27 PM
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कौवा-बगुला संबाद : आगामी भागन कै भूमिका

राम राम भईया ! कभौ गद्य औ कभौ पद्य, साहित्य मा दुइनौ कै उपस्थिति हुवत है| वैसे तो संसकीरत मा पूरे साहित्य का काब्य कहा गा है | मुला आज के समय मा काब्य अउर गद्य मा विधागत अंतर साफ़ देखात है| मोर इरादा तौ इहै है कि दुइनौ विधन से आपन बात रखी| गद्य मा आप
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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अवधी हमारी..अवधी हमारी...

सबन का राम राम ! अत्तवार कै हाजिरी कुबूल कीन जाय | भासा-प्रेम पै यक कविता ...   ''जँह भिनसार हुवै चिरइन से ,   फूटै किरन-उछाह |   स्रम-संसकीरत-देव किसानै   पकड़ै खेती-राह |   मंदिर-मंदिर 'मानस' गूंजै,  महजिज करै अजान | &
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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टिकुई कढ़ाई

पढ़ैयन से कुछ सुरुआती बातन के तौर पै 'टिकुई कढ़ावत' अही. सभ्यता कै विकास कै करम मा कइउ पायदान पै इन्सान चलत आवा, चढ़त आवा. आजु हमसब जौने पायदान पै अहन वहिपै टेक्नालजी हमसफ़र बनी अहै. तौ फिर जरूरी अहै कि यहिके साथे हमसफरै केस बिउहार कीन जाय. यही दिसा
 
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी