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05 Jun 2010
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हम इंसान या जानवर !

आज टी.वी देखते वक़्त एक चैनल पर आ कर हाथ रुक गए , उस चैनल पर कुछ ऐसा आ रहा था , जिसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया , जो की इस ब्लॉग का शीर्षक है की कहीं हम जानवरों से बदतर तो नहीं हो गए ? लेकिन फिर मुझे लगा की ऐसा कहकर मैं जानवरों की बेइजती तो नहीं कर रहा
 
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Jun 06 2010 03:15 AM
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हिन्दू , इस्लाम , और इसाई धर्मों की कमियां

आज काफी दिन बाद मैं कुछ ब्लोग्स पढ़ रहा था , मुझे ये देख कर आश्चर्य होता है , की लोग किस तरह उन चीजों को मान रहे , जिसका एक आदमी के जीवन से कोई लेना देना नहीं है , हर बार तरह इस बार भी  मेरा हमला विभिन्न धर्मों , जातियों और विचारों पर
 
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लोकतान्त्रिक गुंडागर्दी

आज कल शिवसेना और शाहरुख़ खान के बीच की लड़ाई हर जगह छाई हुई है , कई लोग खुश  हैं , कई लोग दुखी हैं , दरसल हमारा सौभाग्य है की हम लोकतंत्र है , तभी चाहे वो रिक्शेवाले का बेटा ,बेटी हो , चाहे वो राजा रानी का बेटा सभी एक हैं , सभी को सामान रूप से आगे
 
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आम आदमी बनाम ताकतवर

कभी कभी आम आदमी के बारे सोचता हूँ , इन दो शब्दों को ध्यान से देखिये इनमे आपको मजबूरी नजर नहीं आती " आम आदमी " क्या है ये आम आदमी! सोचिये ? नहीं समझ में आ रहा, मैं बताता हूँ , दरसल आम आदमी हर वो आदमी है , जो जीना चाहता है , इसके लिए वो प्रयास करता , मेहनत
 
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मैं आम आदमी हूँ आओ मुझे मारो

मैं आम आदमी हूँ , मैं किसी पार्टी का दिया हुआ नाम नहीं हूँ , मैं तब  से हूँ जब से दुनिया बनी , मैं गवाह हूँ दुनिया के बनने , उसके आगे बढ़ने और उसके अभी तक के सफ़र का ,और मैं गवाह रहूँगा तब भी जब ये दुनिया ख़तम हो रही होगी , मैं तब भी था जब रामायण
 
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टैग: दर्द
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हाय ये गरीबी

हम सब २१ वी  सदी के भारत में हैं , ये भारत  एक तरफ तो हमे एक गर्व महसूस करता है , दूसरी तरफ ये सवाल भी खड़ा करता है , क्या हम उस मुकाम तक पहुच पाएं हैं की हम ग्रवान्वित हो सकें , मैं उन लोगों की बात कर रहा हूँ , जिनके बारें में बात तो सभी कर रहे
 
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कांग्रेस एक सेकुलर पार्टी नहीं है

बहुत दिनों से एक शब्द जो मेरे दिल के काफी करीब है " सेकुलर " के बारे में कुछ लिखना चाह रहा था , दरसल मैं  ये बात पूरे विश्वास और दृढ़ता से कह रहा हूँ की भारत देश में लगभग सभी सांप्रदायिक हैं , अब जो लोग सीना ठोक कर अपने आप को सेकुलर कहते नज़र आते हैं
 
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बचपन

एक छोटे बच्चे के बारे में सोचिये , अच्छा अपने बचपन के बारे में सोचिये , बचपन में आप क्या बनाना कहते थे , सुपर मैनही -मैन , हनुमान जी , बस आँख बंद करते थे और उड़ जाते थे अपनी ही दुनिया में . अपने माँ , बाप , बहन , भाई सबके दुखों को दूर कर देते थे , जो घर
 
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एक बच्ची की अद्दभुत कहानी और हमारे लिए कुछ.

आज कुछ सोचते सोचते अचानक एक कहानी याद आ गयी तो मैंने सोचा की चलो इसे अपने देश वासियों के साथ बाटूँ .दरसल ये कहानी है एक नौ साल की एक अमेरिकन लड़की की जो पोलियो ग्रस्त थी , अपने साथियों को स्कूल में दौड़ प्रतियोगिता में भाग लेते देखा तो अपने स्कूल के
 
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खेल और भारत

काफी दिनों से कुछ लिख नहीं पाया था , आज वक़्त मिला तो समझ नहीं आ रहा था की क्या लिखूं , फिर एक  महानुभाव के ब्लॉग को पढ़ा तो समझ में आ गया की क्या लिखना है , जब मैं उनके ब्लॉग को पढ़ रहा था तो मुझे लगा की आवाज इनकी नहीं पूरे हिंदुस्तान की है , और फिर
 
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सेकुलर सब्द का अर्थ ये मीडिया वाले और ये राजनीतिज्ञ क्या जाने ?

मैं सेकुलर हूँ , मैं ये जानता हूँ , मुझे इसकी परिभाषा भी मालूम है , पर मुझे शक होता है की क्या इन मीडिया , और  इन राजनीतिक पार्टियों को ये मालूम है , मुझे तो ऐसा नहीं लगता , और उनका ये सेकुलर बहुत ही खतरनाक है , कई बार महसूस होता है की ये मीडिया
 
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हिन्दू धरम और जाति नमक जहर

हिन्दू  धरम  और जातियों  का एक दूसरे से चोली और का दामन नाता है ,ये एक दूसरे से इस ढंग से जुड़े हुए हैं की अगर कुछ भी अलग होने के कोशिश करेगा तो किसी न किसी का नंगा पन  तो सामने आएगा ही  , चलिए मैं  आपको हिन्दू धरम में जा
 
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धरम और जाति के ताबूत पर कील हम जैसे युवा गाड़ेंगे .

आज फिर मन किया थोडा जहर उगलें अरे डरिये  नहीं, अरे ये जहर उनके लिए है जो  अपने आप को कुछ ख़ास समझते हैं , एक भाई जान है मेरे घर के पास ही रहतें हैं पढ़े लिखे हुए हैं , इंजिनियर हैं अच्छी जगह काम करतें हैं कुछ हाँ में हाँ मिलाने वाले लोग भी ह
 
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लोकतंत्र बनता गुंडा तंत्र

गांधी जी  , सुभाष   चन्द्र  बोस , भगत सिंह जी जब हमारी आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे , तब उन्होंने सोचा भी नहीं था , की आज से पच्चास - साठ साल बाद उनके देश की ये हालत हो जाएगी की उनके बेटे -बेटी उनके नाम का इस तरह मजाक उड़ायेंगे . आज वो हो
 
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aaj vo din phir yaad aaya .

आज जब मैं टेलीविज़न  देख रहा था , चैनल बदलते बलदते अचानक एक चैनल पे हाथ रुक  गए , उस पर पिछले  साल हुए मुबई आतंकवादी घटना पर एक छोटी फिल्म दिखा रहे थे , किस तरह उस मौत के तूफ़ान में भी लोग ऐसे साहस से काम कर रहे थे की मौत भी ठहर कर ये&nb
 
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चलो एक नया धरम बनाते हैं

काफी दिन से कुछ लिखा नहीं था खुजली हो रही थी सोचा कुछ लिख दूं , चलिए क्योंकि ये ब्लॉग समाज , उसकी धर्मिक एवं जातीय मान्यताओं के बारे में मेरी सोच के लिए है , तो लीजिये  बंदा हाजिर है कुछ अनसुलझे पहलू लेकर .मैं मनाता हूँ  की ये पूरी दुनिया स
 
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नक्सलवाद और गरीब जनता

आज कल नक्सलियों  का आतंक मीडिया और पूरे देश में छाया हुआ है , सभी के दिलो दिमाग में ये है की कब इस गृहयुद्ध का अंत होगा , मैं नक्सलियों की विचारधारा को नहीं जानता, हाँ ये जरूर जानता हूँ की ये गरीबों और आर्थिक शक्तियों के किलाफ़ उनका आन्दोलन है ,
 
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धरम ,जाति गई तेल लेने .

जब एक बच्चा पैदा होता है , तो उसे नही मालूम होता की वो किस धर्म , जाति का है , उसकी प्यारी सी मुस्कान हमे इश्वर कें बारे में सोचने पर मजबूर कर देती है , की इतना आदर्श निर्माण तो उस शक्ति का ही कोई कर सकता है , जब सभ्यताओं का निर्माण हो रहा था , तब कु
 
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सही ग़लत को जानें .

आज काफ़ी दिन बाद मन किया की चलो कुछ ब्लॉग पढ़ें , उन्हें पढ़कर मुझे पूरा यकीं हो गया की कलयुग इस वक्त सबसे जायदा प्रभावी है , क्योंकि सभी तरफ़ से उस दुनिया के विनाश की कोशिशें जारी हैं जो उनके रहनें की जगह है , सब कहतें की हम दुनिया बचायेंगे ,क्यूंकि
 
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बस बहुत हुआ

अब बस बहुत हुआ , मैं अब और नही सहूँगा , मैं और जूठ का भागीदार नही बनूँगा ,अब मैं बोलूँगा ,जरूरत पड़ी तो हथियार उठाऊँगा , मैं उन्हें मारूंगा जो इस देश को , इस विश्व को गन्दा कर रहे हैं । अब सहा नही जाता , नक्सालिस्म , रास्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का हिंदुत
 
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पप्पू पास हो गया !

अरे पप्पू पास हो गया ! हाँ भाई पापू पास हो गया , मैं रोया , सारा देश रोया ,हमे अपने भारतीये होने पर बड़ा गर्व हो रहा था की आख़िर इतनी सालों की मक्कारी के बाद आखिर पप्पू पास हो गया ,अरे पप्पू कहाँ पास हुआ ? अरे पप्पू पास हुआ ओलंपिक्स में ,जहाँ आखिर हम
 
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Oct 18 2009 09:34 PM
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रोष

आज मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है , पता नही की यही गुस्सा मेरे जैसे युवाओं में यही गुस्सा है की नही ? पर मुझे ये कोई बताये की ये किसने कहा की "पढोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब खेलोगे कूदोगे बनोगे ख़राब " ये किस कुत्ते कमीने ने बोला था , अगर वो आज जिन्दा होता तो
 
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Oct 18 2009 09:34 PM
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उलझन

आज कल कहीं मन नही लगता , बस यूँ ही घूमता रहता है , यही सोचता रहता है की क्या सपने सच होते हैं , "मेरे सपने " । बचपन में देखे बिना किसी रोक टोक के सपने , वो उड़ने की ख्वाहिश , उछल कर आसमा को चूम लेने की ख्वाहिश , बादलों के बीच घर बनाने की तमन्ना , जब
 
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प्रश्न और उत्तर

मैं बहुत अच्छी हिन्दी नही जानता , इसलिए कोई मुहावरा , व्यंग या कोई कविता से अपनी बात नही कह सकता , मेरा ग्यान भी काफ़ी कम है हमारे कथित बुद्धिजीवी वर्ग से , तो शायद मैं उनकी बातों का जवाब भी न ही दे पाऊँ , पर मेरे पास भी कई सवाल हैं , शायद वो जवाब दे
 
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Oct 18 2009 09:34 PM
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दर्द

आज मेरा मन रो रहा है , चिल्ला रहा है ,माँओं, बहनों के लिए, पत्नियों के लिए, बापों के लिए जिन्होंने अपना बेटा ,भाई , पति खोया , जिन माँओं बहनों , पत्नियों ,बेटियों का बलात्कार हुआ उनके लिए , क्योंकि हम सौभाग्य से वहां नही थे हम नही समझ सकते की उन पर क
 
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क्रांति

हम ही समाज बनाते हैं और समाज देशों का भविष्य तय करते हैं , हम बहुत आसानी से अपनी गलती दूसरो को मसलन "सरकार " की गलती है कहकर टाल देते हैं , चलिए मैं आपको आत्मदर्शन कराता हूँ , शुरुआत मैं धरम से करता हूँ चलिए बताइए धरम चीज क्या है , हिंदू ,मुस्लिम इसा
 
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Oct 18 2009 09:34 PM
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गुलामी

अब मुझे गुलाम नही रहना , अरे तुम गुलाम कहाँ हो ? हाँ मैं गुलाम हूँ , अगर मैं अपने ही धरती पर अपने ही लोगों के खिलाफ नही बोल सकता तो मैं गुलाम हूँ , मैं अगर अपनी जाति या धरम से बाहर जाकर विवाह नही कर सकता तो मैं गुलाम हूँ , मैं उन रुढिवादी रीति रिवाजो
 
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